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Published / 2022-01-22 18:13:55
रिलायंस जियो इस साल ला सकती है IPO, 100 अरब डॉलर वैल्यूएशन की उम्मीद

एबीएन बिजनेस डेस्क। मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलांयस जियो इस साल IPO ला सकती है। इसका वैल्यूएशन 7.40 लाख करोड़ यानी 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इसकी लिस्टिंग के बाद यह ग्रुप में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरी सबसे बड़ी कंपनी होगी। CLSA ने उम्मीद जताई : विदेशी ब्रोकरेज हाउस CLSA ने इस तरह की उम्मीद जताई है कि इस साल में यह कंपनी लिस्ट हो सकती है। जियो में 2020 में 13 निवेशकों को करीबन 33% हिस्सेदारी बेची जा चुकी है। इसमें से 10% के करीब फेसबुक को और 8% के करीब गूगल को हिस्सेदारी बेची गई थी। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इसके पास अक्टूबर 2021 में 42 करोड़ से ज्यादा ग्राहक थे। 2020 में जियो की बिकी थी हिस्सेदारी : रिलायंस ने साल 2020 में जियो में हिस्सेदारी बेचकर 1.52 लाख करोड़ रुपए हासिल किया था। गूगल और फेसबुक ने मिलकर 77,311 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इन्हें इसके बदले 18% हिस्सेदारी मिली थी। रिटेल में इसने 10% से ज्यादा हिस्सेदारी बेचकर 47 हजार करोड़ रुपए जुटाए थे। CLSA ने कहा कि हमारा मानना है कि रिलायंस जियो IPO अलग से लिस्ट हो सकती है। इसका वैल्यूएशन 99 अरब डॉलर का हो सकता है। 43 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो सकते हैं : जियो के जनवरी अंत तक 43 करोड़ से ज्यादा ग्राहक होने की उम्मीद है जबकि दूसरी सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल के पास 32 करोड़ ग्राहक हैं। हालांकि प्रति ग्राहक कमाई में एयरटेल आगे है। यह हर ग्राहक से 157 रुपए कमाती है जबकि जियो 144 रुपए कमाती है। वैसे कीमतें बढ़ने से सभी कंपनियों की प्रति ग्राहक कमाई बढ़ने की उम्मीद है। तीनों कंपनियों ने बढ़ाया दाम : हाल में एयरटेल सहित तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने कीमतो में जमकर बढ़ोत्तरी की है। पहले वोडाफोन ने कीमत बढ़ाई, फिर एयरटेल ने और अंत में जियो ने बढ़ाई। 2021 में जियो के पास करीबन 39% बाजार हिस्सेदारी थी। रिलायंस जियो ने जियो फोन नेक्स्ट को लॉन्च किया था। एंटरप्राइज वैल्यूएशन 5.16 लाख करोड़ : रिलायंस ने साल 2020 में जब जियो में हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाई तो उस समय इसका एंटरप्राइज वैल्यूएशन 5.16 लाख करोड़ रुपए था। जबकि मार्केट वैल्यूएशन 4.91 लाख करोड़ रुपए था। उस आधार पर जियो के एक शेयर की कीमत 885 रुपए के करीब आ रही थी। जियो में इस समय प्रमोटर की हिस्सेदारी करीबन 67% है। कंपनी IPO में 17% तक हिस्सेदारी बेच सकती है : इस आधार पर अगर देखा जाए तो कंपनी IPO में 17% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर्स के पास 50% हिस्सेदारी है। ऐसे में अगर जियो में कंपनी 17% हिस्सा बेचती है तो उसके पास 50% हिस्सा रहेगा। इस 17% के लिए जियो को 85 हजार करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि बाजार की स्थितियों और आगे चलकर ज्यादा वैल्यूएशन पर बेचने की रणनीति के तहत कंपनी कम हिस्सा भी में बेच सकती है।

Published / 2022-01-19 13:18:30
2021 में भारत में लैम्बॉर्गिनी की लग्जरी कारों की बिक्री 86% बढ़ी

नयी दिल्ली। इटली की सुपर लग्जरी वाहन विनिर्माता आॅटोमोबिली लैम्बॉर्गिनी की 2021 के दौरान भारत में बिक्री 86 प्रतिशत बढ़कर 69 इकाई पर पहुंच गई। कंपनी का यह अब तक का बिक्री का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। लैम्बॉर्गिनी ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2020 में उसने भारत में 37 वाहनों की बिक्री की थी। कंपनी की कारों की कीमत 3.16 करोड़ रुपये से शुरू होती है। कंपनी ने इससे पहले वर्ष 2019 में अपनी सबसे अधिक 52 इकाइयों की बिक्री की थी। वैश्विक स्तर पर भी कंपनी ने पिछले वर्ष दुनियाभर में 8,405 वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी। कंपनी ने कहा कि लक्षित और निगरानी वाली विकास रणनीति के कारण 2020 के मुकाबले उसकी बिक्री में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

Published / 2022-01-19 06:22:08
रिलायंस ने 983 करोड़ से एडवर्ब में खरीदी 54% हिस्सेदारी

एबीएन डेस्क। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस रिटेल ने घरेलू रोबोटिक्स कंपनी एडवर्ब में 13.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 983 करोड़ रुपए) में 54 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। एडवर्ब टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और सीईओ संगीत कुमार ने बताया कि कंपनी स्वतंत्र रूप से काम करना जारी रखेगी और रिलायंस से मिली धनराशि का इस्तेमाल विदेश में कारोबार के विस्तार तथा नोएडा में एक बड़ा रोबोट विनिर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए किया जाएगा। कंपनी के पास पहले ही नोएडा में एक विनिर्माण संयंत्र है, जहां हर साल लगभग 10,000 रोबोट बनाए जाते हैं। कुमार ने कहा, इस निवेश के साथ रिलायंस के पास एडवर्ब में लगभग 54 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वे कंपनी में सबसे बड़े शेयरधारक बन गए हैं। रिलायंस पहले ही हमारे सम्मानित ग्राहकों में से एक था, जिसके साथ मिलकर हमने उनके किराना व्यवसाय जियो मार्ट के लिए उच्च क्षमता वाले स्वचालित गोदामों का निर्माण किया था। सहूलियत और भरोसा, जैसे कारक पहले से मौजूद थे, जिसके कारण यह जुड़ाव हुआ। उन्होंने कहा कि रिलायंस रिटेल के साथ रणनीतिक साझेदारी से हमें नई ऊर्जा पहलों के जरिए 5जी, बैटरी प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, हम एक लाभदायक कंपनी हैं। हम इस धनराशि का इस्तेमाल विदेश में विस्तार करने और विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना में करेंगे। कुमार ने कहा, इस समय हमारी आय का 80 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है लेकिन अगले 4-5 वर्षों में भारत और विदेश व्यापार के बीच 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। हमारी आय में सॉफ्टवेयर की कुल हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है, जिसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान है। एडवर्ब की स्थापना 2016 में हुई थी और उसे चालू वित्त वर्ष के दौरान 400 करोड़ रुपए की आय की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

Published / 2022-01-19 04:04:39
झटका : टाटा मोटर्स बढायेगी कारों की कीमत!

एबीएन डेस्क। टाटा मोटर्स ने मंगलवार को कहा कि वह अपने यात्री वाहनों की कीमतों में 19 जनवरी से औसतन 0.9 प्रतिशत की वृद्धि करेगी, ताकि लागत में हुई बढ़ोतरी की आंशिक रूप से भरपाई की जा सके। मुंबई स्थित वाहन विनिर्माता घरेलू बाजार में टियागो, पंच और हैरियर जैसे विभिन्न मॉडल बेचती है। टाटा मोटर्स ने एक बयान में कहा कि 19 जनवरी 2022 से विभिन्न मॉडलों की कीमत औसतन 0.9 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही कंपनी ने ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर एक विशिष्ट संस्करण की कीमत में 10,000 रुपए तक की कटौती की है। टाटा मोटर्स ने कहा, कंपनी बढ़ी हुई लागत के एक महत्वपूर्ण हिस्से को खुद समायोजित कर रही है, लेकिन कुल लागत में तेज बढ़ोतरी ने उसे न्यूनतम मूल्य वृद्धि के जरिए कुछ भार ग्राहकों पर डालने को मजबूर किया। टाटा मोटर्स ने कहा कि 18 जनवरी 2022 को या उससे पहले बुक की गई कारों पर कीमतों में बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा। इससे पहले मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने पिछले हफ्ते अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 4.3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, प्लास्टिक और कीमती धातुओं के महंगा होने के कारण उन्हें कीमतों में बढ़ोतरी के लिए मजबूर होना पड़ा है।

Published / 2022-01-15 13:53:35
झटका : मारुति सुजुकी ने 4.3% तक बढ़ायी कारों की कीमत

एबीएन डेस्क। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने अपने विभिन्न मॉडलों के दाम 4.3 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि उत्पादन लागत में हुई वृद्धि के बोझ को आंशिक रूप से कम करने के लिए उसे यह कदम उठाना पड़ा है। कंपनी ने अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में 0.1 से 4.3 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि दिल्ली शोरूम में विभिन्न मॉडलों की भारित औसत कीमत में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नए कीमतें आज से प्रभावी हो गई हैं। मारुति आल्टो से लेकर एस-क्रॉस मॉडल बेचती है। इनकी कीमत 3.15 लाख रुपए से 12.56 लाख रुपए है। पिछले साल मारुति ने अपनी कारों के दाम तीन बार बढ़ाए थे। पिछले साल जनवरी में मारुति ने कीमतों में 1.4 प्रतिशत, अप्रैल में 1.6 प्रतिशत और सितंबर में 1.9 प्रतिशत यानी कुल मिलाकर 4.9 प्रतिशत की वृद्धि की थी। कंपनी ने पिछले महीने कहा था कि आवश्यक जिंसों मसलन इस्पात, एल्युमीनियम, प्लास्टिक और बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान आए उछाल की वजह से उसे अपने वाहनों के दाम बढ़ाने पडेंगे।

Published / 2022-01-12 01:59:53
महामारी के बीच डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही दुनिया, तकनीक से किफायती होगा कारोबार : सत्या नडेला

एबीएन डेस्क। माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सत्या नडेला ने कहा कि महामारी के बीच दुनिया डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। विभिन्न स्तरों पर तकनीकी को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। बदल रहे इस दौर में तकनीकी की मदद से न सिर्फ कारोबार किफायती हो जाएगा बल्कि उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। माइक्रोसॉफ्ट फ्यूचर रेडी इंवेट में नडेला ने मंगलवार को कहा कि महामारी के बीच वैश्विक स्तर पर संगठन डिजिटल परिवर्तन के दौर में हैं। हाइब्रिड वर्क, हाइपरकनेक्टेड व्यवसाय और मल्टी-क्लाउड वातावरण जैसे रुझानों के लिए एक ऐसे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत है, जिसकी कोई सीमा न हो। हालांकि, इस तंत्र में विभिन्न पक्षों के बीच तत्काल भरोसा कायम करने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी एक ऐसी ताकत है, जिसकी मदद से किसी अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ रही महंगाई को भी कम किया जा सकता है। छोटे या बड़े व्यवसाय तकनीकी के इस्तेमाल से अपनी उत्पादकता बढ़ाने के साथ उत्पादों और सेवाओं को किफायती बना सकते हैं। संगठनों को इस बदलाव को अपनाने में मदद करना माइक्रोसॉफ्ट जैसी तकनीकी कंपनियों के लिए जोरदार अवसर और एक बड़ी जिम्मेदारी है। मेटावर्स है अगला पड़ाव, डिजिटल अवतार में होगा आमना-सामना : नडेला ने कहा कि मेटावर्स माइक्रोसॉफ्ट का अगला अहम पड़ाव है, जहां लोग वर्चुअल वर्ल्ड से आगे डिजिटल अवतार में पहुंच सकते हैं। इसके जरिए आप और मैं एक मीटिंग कर सकते हैं, जहां हम सभी फिजिकली उपस्थित हुए बिना भी मौजूद होते हैं। कंपनी सावधानी से इस दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हम डिजिटल प्रतिनिधित्व तैयार करने के बारे में बात कर रहे हैं। मेटावर्स के जरिये हमारे पास ऐसा करने और मानवता को साथ लाने का मौका है। इस पर जोर ऐसे समय में दिया जा रहा है, जब फेसबुक ने खुद को मेटा में रिब्रांड किया है। वह मेटावर्स के विकास के लिए 10 अरब डॉलर खर्च कर रही है। नडेला ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट भी मेटावर्स तक पहुंचने के लिए उपभोक्ताओं और व्यवसाय दोनों की क्षमता विकसित करने में जुटी है।

Published / 2022-01-12 01:45:40
व्यवसाय के लिए वृद्धि से पहले फिट होना जरूरी: एन चंद्रशेखरन

एबीएन डेस्क। मैराथन दौड़ में अक्सर शिरकत करने वाले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि किसी के लिए भी वृद्धि के लिए पहले फिट होना जरूरी है। चंद्रशेखरन ने फिट नहीं रहने को आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करने का सबक बताते हुए कहा कि टाटा समूह अपने मुख्य व्यवसाय को मजबूत करते हुए अपनी कंपनियों को स्थिरता और डिजिटलीकरण के लिहाज से नए भविष्य की ओर ले जा रहा है। मैराथन दौड़ में अक्सर शिरकत करने वाले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि किसी के लिए भी वृद्धि के लिए पहले फिट होना जरूरी है। चंद्रशेखरन ने फिट नहीं रहने को आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करने का सबक बताते हुए कहा कि टाटा समूह अपने मुख्य व्यवसाय को मजबूत करते हुए अपनी कंपनियों को स्थिरता और डिजिटलीकरण के लिहाज से नए भविष्य की ओर ले जा रहा है।

Published / 2022-01-10 17:37:41
गुड न्यूज : इस साल भी रहेगी पीएसयू के आईपीओ की बहार

एबीएन बिजनेस डेस्क। सरकारी फर्मों का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 2018-19 में भी बड़ी संख्या में जारी रहने की उम्मीद है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक सबसे पहले रेल कंपनियों आरआईटीईएस और आईआरएफसी लिमिटेड के आईपीओ मई तक आम लोगों के लिए आ सकते हैं। इसके अलावा दो और रेल पीएसयू आईआरसीओएन और आरवीएनएल के आईपीओ भी बाद में इसी साल आने वाले हैं। बहरहाल, आईआरसीटीसी का आईपीओ लाने की योजना अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। न तो रेल मंत्रालय और न ही निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग इसे सार्वजनिक करने के पक्ष में है। 2018-19 का संयुक्त विनिवेश लक्ष्य 800 अरब रुपये है। इस वित्त वर्ष में आने वाले अन्य आईपीओ में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स, गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स के आईपीओ शामिल हैं। इनके अलावा 3 जनरल इंश्योरेंस पीएसटी का विलय कर एकल इकाई बनाई जोगी और उसके बाद उसे सूचीबद्ध कराए जाने की योजना है। इनमें नैशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस शामिल हैं। दो शिपबिल्डरों का आईपीओ आगामी वित्त वर्ष की पहली छमाही में आने की उम्मीद है। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों के मुताबिक आरआईटीईएस और आईआरएफसी की सूचीबद्धता मई के आखिर के पहले तक होगी और पहले आरआईटीईएस को सूचीबद्ध कराया जाएगा। आरआईटीईएस के आईपीओ में 12 प्रतिशत केंद्र की हिस्सेदारी हो सकती है जबकि आईआरएफसी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी कम की जाएगी। आरवीएनएल में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की योजना बनाई गई है। इसके पहले आईआरएफसी की सूचीबद्धता को लेकर संदेह था। इसकी वजह अलग कर देनदारी का मसला था। बहरहाल, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने अब कंपनी को 63.92 अरब रुपये संचित विलंबित कर देयता से मुक्त कर दिया है, जिसे कंपनी के नेटवर्थ में जोड़ा जाएगा। आईआरसीटीसी के आईपीओ की योजना को ठंडे बस्ते मेंं डाले जाने की कई वजहें हैं। आईआरसीटीसी का आईपीओ न लाए जाने की वजहों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, कंपनी की आमदनी का बड़ा स्रोत टिकट की बुकिंग पर सेवा शुल्क व अन्य सेवाएं हैं। सरकार ने सेवा शुल्क वापस ले लिया है। ऐसे में निवेशकों की इसमें दिलचस्पी रहने की उम्मीद कम है। नोटबंदी की घोषणा के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने डिजिटल लेन-देन को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कदमों की घोषणा की थी। इसमें से आईआरसीटीसी द्वारा लिया जाने वाला सेवा शुल्क खत्म करना शामिल था। इस कदम से आईआरसीटीसी का 500 करोड़ रुपये राजस्व खत्म हो गया। उम्मीद की जा रही थी कि वित्त मंत्रालय इस घाटे की भरपाई करेगा, लेकिन सिर्फ 800 करोड़ रुपये दिए गए। एसबीआई कैपिटल मार्केट, आईडीबीआई कैपिटल मार्केट ऐंड सिक्योरिटी, इलारा सिक्योरिटीज इंडिया और आईडीएफसी बैंक आरआईटीईएस के सलाहकार हैं, जबकि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एसबीआई कैप्स, आईडीएफसी और एचएसबीसी आईआरएफसी के बोली प्रबंधक हैं। 2017-18 में कंपनियों के रिकॉर्ड 7 आईपीओ आए। इससे 240 अरब रुपये से ज्यादा एकत्र हुए, जो साल भर के पुनरीक्षित विनिवेश लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये का एक चौथाई है। इन कंपनियों में न्यू इंडिया एश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉर्प, एचएएल, भारत डायनॉमिक्स, कोचीन शिपयॉर्ड और हुडको शामिल हैं।

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