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Published / 2022-03-21 15:02:06
देश में मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या 76.5 करोड़ पहुंची

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या पिछले पांच साल में दोगुना से अधिक होकर 76.5 करोड़ पर पहुंच गई। नोकिया की तरफ से मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 4जी डेटा ट्रैफिक 6.5 गुना बढ़ गया। नोकिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और भारत प्रमुख संजय मलिक ने वार्षिक नोकिया एमबीआईटी रिपोर्ट का विवरण साझा करते कहा कि देश की कुल डेटा खपत में 4जी इंटरनेट सेवाओं का हिस्सा 99 प्रतिशत है। 5जी इंटरनेट के कुछ समय बाद आने पर इसमें अगले कुछ वर्षों तक वृद्धि जारी रहने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2021 तक मोबाइल डेटा उपयोग की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई। उन्होंने बताया, इस दौरान उपयोगकर्ताओं द्वारा हर महीने इस्तेमाल किया जाने वाला औसत डेटा तीन गुना बढ़कर 17 जीबी प्रति माह हो गया है। पिछले पांच सालों में मोबाइल ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या 2.2 गुना बढ़ गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नयी पीढ़ी के युवा अब प्रतिदिन लगभग आठ घंटे समय ऑनलाइन बिता रहे हैं।

Published / 2022-03-19 15:22:02
गूगल और फोन पे को टक्कर देने को टाटा ग्रुप जल्द लॉन्च करेगा UPI ऐप

एबीएन सेंट्रल डेस्क। टाटा ग्रुप बहुत जल्द अपना यूपीआई ऐप लॉन्च करने वाला है। फोन पे और गूगल पे की तरह टाटा ग्रुप के यूपीआई को भी आसानी से मोबाइल से इस्तेमाल किया जा सकेगा। टाटा ग्रुप ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। बहुत जल्द इसका आधिकारिक ऐलान हो सकता है। माना जा रहा है कि टाटा ग्रुप की इस तैयारी और लॉन्चिंग से फोन पे, गूगल पे, अमेजॉन पे और पेटीएम को कड़ी टक्कर मिल सकती है। टाटा की इस तैयारी के बारे में कई मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया या NPCI से क्लीरेंस मिलने के इंतजार में है। एनपीसीआई से क्लीरेंस मिलते ही टाटा ग्रुप थर्ड पार्टी पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर यूपीआई की सेवा शुरू कर देगा। इकोनॉमिक टाइम्स ने सबसे पहले इसकी रिपोर्ट जाहिर की है। यूपीआई ऐप लॉन्च करने का जिम्मा टाटा डिजिटल के पास है जो कंपनी का डिजिटल कॉमर्स यूनिट है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा डिजिटल यूपीआई ऐप चलाने के लिए आईसीआईसीआई समेत अन्य प्राइवेट बैंकों के साथ संपर्क में है। इन बैंकों की मदद से टाटा ग्रुप यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को बाजार में लॉन्च करेगा। टाटा ग्रुप इसके अलावा एक और बड़ी पहल पर काम कर रहा है। एक अप्रैल को टाटा नियू लॉन्च होने वाला है जिसे सुपर ऐप का नाम दिया जा रहा है। इस ऐप के जरिये टाटा ग्रुप देर से ही सही, लेकिन अब ई-कॉमर्स के क्षेत्र में बड़ा धमाका करने की तैयारी में है। टाटा नियू के बाद यूपीआई ऐप को भी लाया जाएगा ताकि ग्राहक को सामान की खरीदारी के साथ ही पेमेंट करने में भी आसानी हो। टाटा ग्रुप का सुपर ऐप नियू मार्केट में कई बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला करेगा जिनमें अमेजॉन और फ्लिपकार्ट के साथ ही स्विगी और ब्लिंकिट के नाम हैं।

Published / 2022-03-19 15:09:46
ईरान से मिला तेल-गैस सप्लाई का ऑफर स्थिर रखेगा पेट्रोल-डीजल की कीमत!

एबीएन बिजनेस डेस्क। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। ईरान ने भारत को ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद और तेल एवं गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार फिर से शुरू करने की पेशकश की है। भारत में ईरान के राजदूत अली चेगेनी ने यह पेशकश करते हुए कहा कि अगर दोनों देश रुपया-रियाल व्यापार फिर से शुरू करते हैं, तो द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ईरान कभी भारत का दूसरा सबसे बड़ा ऑयल सप्लायर था लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद नई दिल्ली को वहां से आयात रोकना पड़ा था। एमवीआईआरडीसी विश्व व्यापार केंद्र ने यहां जारी एक बयान में चेगेनी के हवाले से कहा, ईरान तेल और गैस के निर्यात के लिए रुपया-रियाल व्यापार शुरू करके भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा, रुपया-रियाल व्यापार तंत्र दोनों देशों की कंपनियों को एक दूसरे के साथ सीधे सौदा करने और तीसरे पक्ष की मध्यस्थता लागत से बचने में मदद कर सकता है। गौरतलब है कि नई दिल्ली और तेहरान के बीच व्यापार निपटान के लिए एक विनिमय तंत्र था, जिसमें भारतीय तेल आयातक एक स्थानीय ईरानी बैंक को रुपए में भुगतान कर रहे थे और इस धन का उपयोग करते हुए तेहरान, भारत से आयात कर रहा था। इससे ईरान भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया था लेकिन ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इसमें काफी गिरावट आई। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल और जनवरी के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दो अरब डॉलर से भी कम रहा। ईरानी राजदूत ने साथ ही कहा कि उनका देश ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन के लिए वैकल्पिक रास्ते खोजने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

Published / 2022-03-19 03:39:56
वैध तरीके से ऊर्जा खरीदारी का राजनीतिकरण दुखद

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत के वैध तरीके से ऊर्जा खरीदने का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और जो देश तेल के मामले में आत्मनिर्भर हैं या जो स्वयं रूस से तेल आयात करते हैं वे प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत नहीं कर सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को यह कहा। भारत की इस रुख को लेकर आलोचना की गई है कि उसने रूस से रियायती दर पर कच्चा तेल खरीदने के लिए रास्ते खुले रखे हैं। इसके बाद उक्त टिप्पणी आई है। सूत्रों ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारत की चुनौतियां बढ़ा दी है। इससे स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धी दर पर तेल प्राप्त करने को लेकर दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि रूस बहुत कम मात्रा में भारत को कच्चे तेल का निर्यात करता है, जो देश की जरूरत का एक फीसदी से भी कम है। सूत्रों ने कहा कि आयात के लिए सरकारों के बीच कोई समझौता भी नहीं है। सूत्रों ने बताया, भारत प्रतिस्पर्धी ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करते रहेगा। हम सभी उत्पादकों के ऐसे प्रस्तावों का स्वागत करते हैं। भारतीय व्यापारी भी सर्वोत्तम विकल्प तलाशने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में काम करते हैं। रूस ने यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिमी पाबंदियों की वजह से भारत को रियायती दर पर कच्चा तेल बेचने की पेशकश की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने रूस से रियायती दर पर तेल खरीदने की संभावना से बृहस्पतिवार को इनकार नहीं किया और कहा कि वह बड़ा तेल आयातक होने की वजह से हमेशा सभी संभावनाओं पर विचार करता है। मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, भारत अपनी जरूरत का अधिकतर तेल आयात करता है, उसकी जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। इसलिए हम वैश्विक बाजार में सभी संभावनाओं का दोहन करते रहते हैं, क्योंकि इस परिस्थिति में हमें अपने तेल की जरूरतों के लिए आयात का सामना कर पड़ रहा है। बागची ने कहा कि रूस, भारत को तेल की आपूर्ति करने वाला प्रमुख आपूर्तिकर्ता नहीं रहा है। उन्होंने कहा, मैं रेखांकित करना चाहता हूं कि कई देश कर रहे हैं, खासतौर पर यूरोप में और इस समय मैं इसे उसपर छोड़ता हूं। बागची से जब पूछा गया कि यह खरीददारी रुपये-रूबल समझौते के आधार पर हो सकती है तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस पेशकश की विस्तृत जानकारी नहीं है।

Published / 2022-03-18 03:36:00
यूक्रेन संकट डालेगा भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि यूक्रेन पर रूस के हमले का दुनिया पर होने वाले आर्थिक असर का नकारात्मक प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जबकि चीन पर तत्काल इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा। आईएमएफ के संचार विभाग के निदेशक गेरी राइस ने यहां संवाददाताओं से कहा, युद्ध के वैश्विक आर्थिक प्रभाव का विभिन्न माध्यमों से भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है...। राइस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम में तेजी का व्यापार पर प्रतिकूल पड़ेगा। साथ ही इसका वृहत-आर्थिक प्रभाव भी होगा। इससे मुद्रास्फीति और चालू खाते का घाटा बढ़ेगा। राइस ने कहा, लेकिन चालू खाते पर प्रभाव संभावित रूप से उन वस्तुओं की कीमतों में अनुकूल बदलाव से कम हो सकता है जो भारत निर्यात करता है। इसमें गेहूं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध का अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीनी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से भारत की निर्यात मांग पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। जबकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से भारत के आयात की मात्रा और कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मुद्राकोष के अनुसार, भारत के लिये परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ने का जोखिम है। वहीं दूसरी तरफ आईएमएफ ने कहा कि युद्ध का चीन पर तत्कालिक प्रभाव कम होगा। राइस ने कहा, चीन पर यूक्रेन संकट का तत्काल प्रभाव अपेक्षाकृत कम होने की संभावना है। तेल की ऊंची कीमत आगे चलकर घरेलू खपत और निवेश को प्रभावित कर सकती है, लेकिन मूल्य सीमा प्रभाव को सीमित करेगी।

Published / 2022-03-16 13:51:14
कीमत बढ़ने के खौफ का असर : चुनाव बाद मार्च में लोगों ने जमकर खरीदा पेट्रोल-डीजल

एबीएन बिजनेस डेस्क। विधानसभा चुनाव के बाद वाहन ईंधन के दाम बढ़ने की अटकलों के कारण मार्च माह के पहले 15 दिन देश में पेट्रोल, डीजल की बिक्री महामारी-पूर्व के स्तर को पार कर गई है। दाम बढ़ने की आशंका से उपभोक्ताओं और डीलर गाड़ियों के टैंक पूरी तरह भरवा रहे हैं। उद्योग से प्राप्त आरंभिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत बाजार पर नियंत्रण रखने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की पेट्रोल की बिक्री एक से 15 मार्च के बीच 12.3 लाख टन रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 18 प्रतिशत और 2019 की तुलना में 24.4 प्रतिशत अधिक है। वहीं डीजल की सालाना आधार पर बिक्री 23.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 35.3 लाख टन और 2019 के मुकाबले 17.3 फीसदी अधिक रही। आंकड़ों के मुताबिक, 1-15 मार्च 2020 के दौरान हुई बिक्री के मुकाबले इस वर्ष पेट्रोल 24.3 फीसदी अधिक और डीजल 33.5 फीसदी अधिक बिका। वहीं, पिछले महीने के मुकाबले पेट्रोल की बिक्री 18.8 प्रतिशत अधिक और डीजल की 32.8 फीसदी अधिक रही। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा था कि कुछ इस तरह की टिप्पणियां आई हैं कि लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से पहले अपनी गाड़ियों के टैंक पूरी तरह भरवाने चाहिए। इसी के बाद ईंधन की बिक्री में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नवंबर, 2021 से पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं। इस दौरान कच्चे तेल का दाम 81 डॉलर से 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा है। इसके बावजूद 132 दिन से वाहन ईंधन के दाम नहीं बढ़े हैं।

Published / 2022-03-14 18:04:36
फरवरी में 6.07% रही खुदरा महंगाई दर

एबीएन बिजनेस डेस्क। खुदरा महंगाई फरवरी में 6.07 फीसदी के साथ आठ महीने की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। यह लगातार दूसरे महीने आरबीआई के स्तर से ऊपर रही है। सोमवार को जारी आधिकारिक डेटा में दिखता है कि इसके पीछे मुख्य वजह खाने की चीजों की कीमतों में इजाफा होना है। कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स आधारित खुदरा महंगाई फरवरी 2021 में 5.03 फीसदी और इस साल जनवरी में 6.01 फीसदी रही थी। इससे पहले जून 2021 में यह 6.26 फीसदी के ऊंचे स्तर पर रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक को सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सीपीआई महंगाई 4 फीसदी पर बनी रहे, जिसमें दोनों तरफ 2 फीसदी का मार्जिन रखा गया है। इससे पहले दिन में सरकार द्वारा जारी होलसेल प्राइस इंडैक्स आधारित महंगाई के फरवरी डेटा में दिखा है कि यह दर बढ़कर 13.11 फीसदी पर पहुंच गई है। इसके पीछे उसने वजह कच्चे तेल और खाने की चीजों के अलावा आइटम की कीमतों में इजाफा बताया है। हालांकि, खाने की चीजों की कीमत में कमी आई है। खाने की चीजों की महंगाई बढ़ी : राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी सीपीआई डेटा के मुताबिक, खाने की चीजों में कीमतों में बढ़ोतरी फरवरी में 5.89 फीसदी रही है, जो पिछले महीने के 5.43 फीसदी से ज्यादा है।।खाने की चीजों में, अनाज में महंगाई बढ़कर 3.95 फीसदी पर पहुंच गई। जबकि, मांस और मछली में महंगाई 7.54 फीसदी पर रही है। जबकि, अंडों में महंगाई की दर महीने के दौरान 4.15 फीसदी पर रही है। इसके अलावा सब्जियों की महंगाई 6.13 फीसदी पर रही है। जबकि, मसालों की महंगाई बढ़कर 6.09 फीसदी पर पहुंच गई। फलों में महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 2.26 फीसदी पर स्थिर रही है। तेल और ऊर्जा में महंगाई जनवरी के 9.32 फीसदी से घटकर 8.73 फीसदी हो गई है। CPI आधारित महंगाई क्या है : आपको बता दें कि जब हम महंगाई दर की बात करते हैं, तो यहां हम कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स (CPI) पर आधारित महंगाई की बात कर रहे हैं। सीपीआई सामान और सेवाओं की खुदरा कीमतों में बदलाव को ट्रैक करती है, जिन्हें परिवार अपने रोजाना के इस्तेमाल के लिए खरीदते हैं। महंगाई को मापने के लिए, हम अनुमान लगाते हैं कि पिछले साल की समान अवधि के दौरान सीपीआई में कितने फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई अर्थव्यवस्था में कीमतों में स्थिरता रखने के लिए इस आंकड़े पर नजर रखता है। सीपीआई में एक विशेष कमोडिटी के लिए रिटेल कीमतों को देखा जाता है।।इन्हें ग्रामीण, शहरी और पूरे भारत के स्तर पर देखा जाता है। एक समयावधि के अंदर प्राइस इंडैक्स में बदलाव को सीपीआई आधारित महंगाई या खुदरा महंगाई कहा जाता है।

Published / 2022-03-13 16:07:36
रुपया-रूबल में व्यापार को मिली मंजूरी!

एबीएन डेस्क (श्रेया नंदी-निकुंज ओहरी)। केंद्र सरकार शुरुआती चरण में कृषि, फार्मा और ऊर्जा जैसे उन क्षेत्रों में भारत और रूस के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार की अनुमति दे सकती है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने सामूहिक रूप से प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। मामले के जानकार लोगों ने कहा कि रक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों में इस तरह की व्यापार सुविधा के लिए काफी विचार-विमर्श की जरूरत होगी क्योंकि ऐसा होने से पश्चिमी देशों में संकेत जाएगा कि भारत प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर रहा है। इन क्षेत्रों के कारोबार के लिए रणनीतिक निर्णय लेने की जरूरत होगी। एक जानकार शख्स ने कहा, अगर ऊर्जा, फार्मा और कृषि से इतर क्षेत्रों में स्थानीय मुद्रा से व्यापार की अनुमति देते हैं तो लगेगा कि हम प्रतिबंधों को नहीं मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक निर्णय है। व्यापार एक पहलू है लेकिन यह भी अहम है कि हम यूरोप और अमेरिका को किस तरह का संदेश देते हैं। कृषि, फार्मा और ऊर्जा क्षेत्रों में रुपया-रूबल में व्यापार को लागू करना भी आसान है। उक्त शख्स ने कहा, अन्य क्षेत्रों के लिए हमें इस पर विचार करना होगा कि हम प्रतिबंधों को मानते हैं या नहीं। ऐसे में यह कठिन निर्णय होगा। उन्होंने कहा कि रक्षा उपकरण और दोहरे उपयोग वाले सामान के व्यापार के बारे में व्यापक विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक भी यूको बैंक जैसे बैंकों के साथ चर्चा कर रहा है। ईरान पर प्रतिबंध के समय यूको बैंक के जरिये ही इस देश के साथ लेनदेन किया गया था और भारतीय स्टेट बैंक भुगतान की सुविधा के लिए तीसरे पक्ष को नियुक्त करने की संभावना तलाश रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक रूबल के मूल्य में लगातार आ रही गिरावट को ध्यान में रखते हुए विनिमय दर तय करने पर निर्णय ले सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा रूस के कई बैंकों को स्विफ्ट से बाहर कर देने के बाद निर्यातक को भुगतान संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा पार लेनदेन स्विफ्ट प्रणाली के जरिये ही किया जाता है। निर्यातकों ने सरकार को अपनी चिंता बताई है और रुपया-रूबल व्यापार व्यवस्था शुरू करने का आग्रह किया है। इससे रूस के आयातकों को रूबल में भुगतान की अनुमति होगी और भारतीय निर्यातक रुपये में भुगतान कर सकेंगे। रूस के सरकारी बैंक सबरबैंक और वीटीबी का भारत में परिचालन है और लेनदेन में मध्यस्थता के लिए उससे गठजोड़ किया जा सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि भारत ने रूस पर तटस्थ रुख बनाए रखा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हालांकि दोनों देशों के बीच कोई भी लेन-देन विनियम दर पर होगा।

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