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Published / 2022-03-30 17:35:28
फ्री कैटेगरी में अरहर और उड़द दाल को रखेगी सरकार!

एबीएन बिजनेस डेस्क। घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्र सरकार ने मार्च 2023 तक अरहर दाल और उड़द दाल के आयात को मुक्त श्रेणी में रखने का फैसला किया है। मुक्त श्रेणी में डाले जाने का मतलब है कि इन दालों के आयात पर कोई पाबंदी नहीं होगी। सरकार ने बयान जारी कर कहा है, घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने के सक्रिय कदम के तहत केंद्र ने 31 मार्च, 2023 तक अरहर और उड़द के आयात को मुक्त श्रेणी के तहत रखने के निर्णय को अधिसूचित किया। सरकार के अनुसार, इस नीतिगत उपाय को संबधित विभागों और संगठनों द्वारा सुविधाजनक उपायों और इसके कार्यान्वयन की बारीकी से निगरानी के साथ सहयोग दिया गया है। आयात नीति व्यवस्था संबंधी अटकलों पर विराम : इस फैसले ने अगले वित्त वर्ष में तुअर और उड़द के लिए आयात नीति व्यवस्था से जुड़ी अटकलों पर विराम लगा दिया है। यह नीति एक स्थिर व्यवस्था का भी संकेत देती है। इस नीति से सभी अंशधारकों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इस उपाय से देश में दालों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए इनका निर्बाध आयात सुनिश्चित किया जा सकेगा। गौरतलब कि इन दालों की उपलब्धता में बढ़ोतरी से इनके दाम घटेंगे और इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को पहुंचेगा। पिछले वर्ष भी मुक्त श्रेणी में थी ये दालें : दरअसल, केंद्र सरकार ने 15 मई, 2021 से तहत अरहर, उड़द और मूंग के आयात को मुक्त श्रेणी में डाल दिया था, जो 31 अक्टूबर, 2021 तक वैध था। बाद में मूंग दाल को इस श्रेणी से निकाल दिया गया और अरहर व उड़द के आयात के संबंध में मुक्त व्यवस्था को 31 मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया।

Published / 2022-03-29 17:27:08
रुचि सोया के शेयरों में चार दिन की गिरावट के बाद 16% का उछाल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रुचि सोया इंडस्ट्रीज के शेयरों में मंगलवार को करीब 16 प्रतिशत का उछाल आया। इससे पिछले चार कारोबारी सत्रों में कंपनी के शेयर नीचे आए थे। बीएसई में कंपनी का शेयर 15.94 प्रतिशत के लाभ से 944.95 रुपये पर पहुंच गया। दिन में कारोबार के दौरान एक समय यह 19.99 प्रतिशत की बढ़त के साथ 978.05 रुपये पर पहुंचा था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी का शेयर 15.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 938 रुपये पर बंद हुआ। पिछले चार दिन में कंपनी का शेयर 10.73 प्रतिशत टूटा था। कंपनी का 4,300 करोड़ रुपये का अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) सोमवार को बंद हुआ था। कंपनी की शेयर बिक्री पर कुछ अवांछित संदेशों के प्रसार के बाद भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बैंक अधिकारियों से कहा है कि वे एफपीओ के लिए आवेदन करने वाले निवेशकों को अपनी बोलियों को वापस लेने का विकल्प उपलब्ध कराएं। रुचि सोया के एफपीओ को 3.60 गुना अभिदान मिला था।

Published / 2022-03-28 17:41:04
भारत के बाद चीन बन सकता है रूस से कच्चा तेल का खरीदार

एबीएन सेंट्रल डेस्क। उद्योग के जानकारों का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद मार्च से भारत के लिए रूसी तेल वितरण में वृद्धि हुई है और भारत मास्को से और भी सस्ता तेल खरीदने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि चीन जो पहले से ही रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है को भारी छूट पर रूस से अधिक तेल खरीदने की उम्मीद है। इसका मतलब कच्चे तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। भारत और चीन जैसे प्रमुख तेल आयातक देश कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जूझ रहे हैं, जो पिछले साल से बढ़ी हैं। केप्लर के प्रमुख तेल विश्लेषक मैट स्मिथ ने कहा, हम मानते हैं कि चीन और भारत रूस से और ज्यादा कच्चा तेल खरीदने के लिए कदम उठाएगा। यह प्रमुख विश्व शक्तियों और कंपनियों के बयानबाजी से बिल्कुल विपरीत होगा जो रूस से तेल खरीदना छोड़ रहे हैं। यूक्रेन पर रूस के अकारण और अनुचित युद्ध के परिणामस्वरूप, यूएस, यूके और यूरोपीय संघ ने रूस पर ऊर्जा प्रतिबंध लगाए हैं। विश्लेषकों ने कहा कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वह अतिरिक्त कच्चे तेल के साथ बेचने में असमर्थ है।

Published / 2022-03-27 15:30:44
30 देशों को गेहूं निर्यात की संभावना तलाश रहा भारत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस और यूक्रेन से गेहूं आयात करने वाले दुनिया के 30 देशों में भारत गेहूं निर्यात करने की संभावना तलाश रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। इनमें से करीब 10 से 15 देश पहले ही रूस और यूक्रेन के साथ भारत से भी गेहूं का आयात कर रहे हैं लेकिन रूस और यूक्रेन की तुलना में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है। इसके अलावा 10 से 15 देश ऐसे हैं जो रूस और यूक्रेन से ही कई दशक से गेहूं का आयात कर रहे हैं। भारत इन देशों को गेहूं निर्यात कर रूस और यूक्रेन की जगह लेना चाहता है। इसके लिए भारत सरकार से सरकार के बीच करार के जरिये या निजी व्यापारिक माध्यमों से निर्यात बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। इन देशों में मिस्र, सीरिया, मोरक्को, तुर्की, अजरबैजान, सूडान, इटली, यमन, ग्रीस और पूर्वी अफ्रीका के सभी देश शामिल हैं, जो यदा-कदा भारत से गेहूं खरीदते हैं। एपीडा के चेयरमैन डॉ मधैया अंगामुत्तू ने कहा, हमारा मकसद मौजूदा संकट के लिए ही इस तरह की व्यवस्था करना नहीं है बल्कि हम इन बाजारों में अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं के दीर्घकालिक और भरोसमंद आपूर्तिकर्ता बनना चाहते हैं, जहां अभी रूस और यूक्रेन का एक तरह से वर्चस्व है। हम अल्पावधि के लाभ को नहीं देख रहे हैं बल्कि इस अवसर का इस्तेमाल कर दुनिया के प्रमुख गेहूं आयातक देशों के साथ मजबूत और दीर्घकालिक रिश्ता कायम करना चाहते हैं। दुनिया के अग्रणी गेहूं आयातक देशों में मिस्र, इंडोनेशिया, तुर्की, चीन, नाइजीरिया, इटली, अलजीरिया, फिलीपींस, जापान, मोरक्को, ब्राजील आदि शामिल हैं। इनमें से बांग्लादेश, इंडोनेशिया, फिलीपींस, नाइजीरिया और जापान में ही भारत का गेहूं जाता है। ऐसे में भारत के पास निर्यात का विस्तार करने की व्यापक संभावना है क्योंकि प्रमुख निर्यातक देश रूस और यूक्रेन युद्घ की वजह अभी कुछ महीनों तक दोनों देशों से दूर रह सकते हैं। सूत्रों के अनुसार इन 30 देशों में गेहूं निर्यात करने का निर्णय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में अग्रणी गेहूं निर्यातकों के साथ अन्य संबंधित मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल थे। प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस बैठक में मौजूद थे। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023 में करीब 1.1 से 1.2 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा है, जो वित्त वर्ष 2022 की तुलना में 70 से 72 लाख टन अधिक है। हालांकि कुछ व्यापारियों का कहना है कि 1 से 1.1 करोड़ टन निर्यात का लक्ष्य वाजिब हो सकता है क्योंकि मॉनसून के दौरान निर्यात धीमा पड़ जाएगा।

Published / 2022-03-26 17:26:24
अनुमान : इस साल चीनी निर्यात 7% बढ़कर 75 लाख टन होगा

एबीएन बिजनेस डेस्क। सितंबर को समाप्त होने वाले चीनी विपणन वर्ष 2021-22 में भारत का चीनी निर्यात 7 प्रतिशत बढ़कर 75 लाख टन होने का अनुमान है। सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों की राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2021-22 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी निर्यात 75 लाख टन होने की उम्मीद है, जबकि पिछले वर्ष यह निर्यात 70 लाख टन का हुआ था। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के परिणामस्वरूप, पिछले पांच वर्षों में देश से चीनी के निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने हाल ही में कहा कि वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी की मांग बढ़ने और उच्च उत्पादन के कारण इस साल अक्टूबर 2021 और फरवरी के बीच चीनी निर्यात दो गुना बढ़कर 47 लाख टन हो गया है। इस्मा के मुताबिक, अब तक लगभग 64-65 लाख टन चीनी निर्यात का अनुबंध किया गया है। इसमें से चालू चीनी सत्र में फरवरी 2022 के अंत तक भारत से लगभग 47 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में लगभग 17.75 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था। इस्मा का अनुमान है कि चीनी उद्योग को वर्ष 2021-22 के विपणन वर्ष में रिकॉर्ड 75 लाख टन चीनी का निर्यात करने में सफल होना चाहिए। इस्मा ने चीनी की घरेलू खपत 272 लाख टन और उत्पादन 333 लाख टन रहने का अनुमान लगाया है।

Published / 2022-03-26 12:40:39
आर्थिक सुधार : 400 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल करने की ओर अग्रसर है भारत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में महामारी के बाद हुए आर्थिक सुधार ने भारत को 400 अरब डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने में मदद की है। किसी वित्तीय वर्ष में निर्यात का इतना बड़ा लक्ष्य भारत ने पहली बार हासिल किया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जुटाए गए प्राथमिक आंकड़ों के मुताबिक भारत ने 1 अप्रैल, 2021 से 21 मार्च, 2022 तक अमेरिका को 73 अरब डॉलर के सामानों का निर्यात किया जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 47 फीसदी अधिक है। कुल निर्यातों की तुलना में अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात की हिस्सेदारी 18.2 फीसदी है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के साथ साथ सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य भी है। सोमवार को सरकार ने कहा था कि भारत ने निर्धारित समय से पहले ही 400 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात लक्ष्य को हासिल कर लिया। यह पिछले वित्त वर्ष में हुए निर्यात से 37 फीसदी अधिक है। सरकार 31 मार्च तक 410 अरब डॉलर के निर्यात तक पहुंचने को लेकर आश्वस्त है। इसकी वजह यह है कि भारत रोजाना मोटे तौर पर 1.3 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात कर रहा है। हालांकि, चीन में कोविड-19 की ताजा लहर आने से उत्पन्न बाधाओं के कारण इस पड़ोसी देश को किए जाने वाले निर्यात में अपेक्षाकृत धीमी गति से वृद्घि हुई है। चीन में कई जगहों पर लॉकडाउन तक लगाया गया है। वित्त वर्ष के पहले 11 महीने में चीन को किया जाना वाला निर्यात केवल 7 फीसदी बढ़ा और इसका मूल्य 19.8 अरब डॉलर था। यह चीन को साल भर में 22 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात लक्ष्य का 90 फीसदी है। लक्ष्य इस महीने के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। निर्यातकों को इस बात का भय है कि इस साल चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा। कोविड-19 से उत्पन्न बाधाओं के बाद पश्चिमी बाजारों में सुधार के अलावा उच्च निर्यात के लिए अन्य कारक भी जिम्मेदार हैं जिसमें पिछले साल से जिंस कीमतों में आई तेजी के साथ साथ घरेलू मुद्रा में मामूली गिरावट शामिल है। जहां तक जिंसों की बात है तो वित्त वर्ष 2022 में निर्यात वृद्धि इंजीनियरिंग सामानों, पेट्रोलियम उत्पादों, कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों तथा कपड़ों के दम पर हासिल हुई है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने जिन आंकड़ों का अवलोकन किया है उसके मुताबिक भारत ने 1 अप्रैल, 2021 से 21 मार्च, 2022 तक 107.8 अरब डॉलर मूल्य के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात किया जो कि सालाना आधार पर 46.5 फीसदी अधिक है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात का पूरे वर्ष के लिए रखा गया लक्ष्य भी हासिल हो गया और सामानों के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी एक चौथाई से अधिक रही। इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात के लिए शीर्ष पांच गंतव्य अमेरिका, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, इटली और जर्मनी है। कुल निर्यातों में 15 फीसदी की हिस्सेदारी वाले पेट्रोलियम उत्पाद लक्ष्य के 110 फीसदी पर पहुंच गए। 21 मार्च तक 59.6 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का निर्यात किया गया जो कि सालाना आधार पर 141 फीसदी अधिक है। आंकड़ों से पता चलता है कि कार्बनिक और अकार्बनिक रसायन, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद, सूती धागा/कपड़े/तैयार सामान, हथकरघा उत्पाद, कोयला और अन्य अयस्क, इंजीनियरिंग सामान और प्लास्टिक तथा लिनोलियम ऐसे जिंस रहे जिनका निर्यात 21 मार्च तक लक्ष्य से अधिक हुआ। आधिकारिक बयान के मुताबिक, इंजीनियरिंग सामानों, परिधान और वस्त्रों आदि के निर्यात से संकेत मिलते हैं कि भारत प्राथमिक जिंसो का बड़ा निर्यातक है, यह भ्रम धीरे धीरे दूर हो रहा है।

Published / 2022-03-25 17:43:20
एक महीने में RIL ने दिया 14% रिटर्न, जानें ताजा हाल...

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में पिछले एक महीने में 14 फीसदी तेजी आई है। इस दौरान बेंचमार्क सेंसेक्स में मात्र तीन फीसदी तेजी आई है। रिलायंस का शेयर अपने ऑल टाइम हाई की तरफ बढ़ रहा है। इस शेयर का ऑल टाइम हाई 2750 रुपए है और अभी यह इससे पांच फीसदी दूर है। रिलायंस का शेयर बीएसई पर दोपहर बाद 12.30 बजे 0.77% तेजी के साथ 2597.80 रुपए पर ट्रेड कर रहा था जबकि इस दौरान सेंसेक्स 275.54 यानी 0.48% की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। टेक्निकली इस शेयर ने 2250 रुपए पर स्टॉन्ग बेस बनाया है। शॉर्ट टर्म में यह 2,700 से 2,750 रुपए तक जा सकता है जबकि लॉन्ग टर्म में 3,000 रुपए का आंकड़ा छू सकता है। रिलायंस अभी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी है। क्यों बढ़ रहा है शेयर : जानकारों का कहना है कि रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी के कारण कंपनी के शेयरों में तेजी दिख रही है। तेल और गैस की कीमत में तेजी से कंपनी का सिंगापुर ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) ऑल टाइम हाई पर है। इतना ही नहीं कंपनी का टेलिकॉम बिजनस भी जियोपॉलिटकल तनाव और महंगाई में तेजी से बेअसर रहा है। साथ ही कंपनी रिटेल बिजनस में भी अपनी संभावनाएं बढ़ा रही हैं। कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी बिजनस को लगातार बढ़ा रही है और इसके लिए उसने कई कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है। रिलायंस रिटेल वेंचर्स ने हाल में Purple Panda Fashions Pvt. Ltd में 89 फीसदी हिस्सेदारी 950 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके पास महिलाओं के इनरवियर और लॉन्ज वियर ब्रांड Clovia का मालिकाना हक है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रिलायंस का पेट्रोकेमिकल बिजनस में फायदा मिलेगा। कंपनी के एवरेज रेवेन्यू पर यूजर में भी तेजी की उम्मीद है जो रिलायंस के शेयरों के लिए अच्छी खबर है।

Published / 2022-03-24 14:43:36
एयरटेल ने 5जी पर इमर्सिव वीडियो एंटरटेनमेंट के रोमांचक भविष्य का किया प्रदर्शन

टीम एबीएन, रांची। भारत की प्रमुख कम्युनिकेशन सर्विस प्रोवाइडर, भारती एयरटेल (एयरटेल) ने आज वीडियो मनोरंजन के भविष्य को बदलने और उपयोगकर्ता अनुभव को अगले स्तर तक ले जाने का काम किया है। पलक झपकते ही मिलने वाली 5जी की उच्च गति क्षमताओं का प्रदर्शन किया। अपने हाई स्पीड 5G टेस्ट नेटवर्क पर अत्याधुनिक इमर्सिव वीडियो तकनीकों का उपयोग करते हुए, एयरटेल ने 1983 क्रिकेट विश्व कप के दौरान जिम्बाब्वे के खिलाफ कपिल देव की प्रसिद्ध 175 नॉट आउट पारी को स्टेडियम के अनुभव के साथ रिक्रिएट किया। 4K मोड में विशेष रूप से तैयार किए गए 175 रिप्लेड वीडियो के माध्यम से मैच के महत्वपूर्ण क्षणों को जीवंत किया गया। अब तक 1983 क्रिकेट वर्ल्ड के दौरान इस दिन टीवी टेकनीशियनों की हड़ताल की वजह से कपिल देव की इस महान पारी का कोई वीडियो फुटेज उपलब्ध नहीं था। भारत की पहली 5G संचालित होलोग्राम बातचीत में कपिल देव के साथ संवाद ने इस सत्र को और भी रोमांचक बना दिया। इस दौरान महान क्रिकेटर कपिल देव एयरटेल 5जी पावर्ड वर्चुअल अवतार के माध्यम से वास्तविक समय में प्रशंसकों के साथ बातचीत करने और उन्हें अपनी पारी के महत्वपूर्ण क्षणों के बारे में बताने के लिए भी मंच पर दिखाई दिए। भारती एयरटेल के सीटीओ रणदीप सेखों ने कहा, 5जी की गीगाबिट स्पीड और मिलीसेकंड लेटेंसी हमारे मनोरंजन का उपभोग करने के तरीके को बदल देगी। आज के प्रदर्शन के साथ, हमने केवल 5G की अनंत संभावनाओं और डिजिटल दुनिया में अत्यधिक व्यक्तिगत इमर्सिव अनुभवों की सतह को उजागर किया है। 5G आधारित होलोग्राम के साथ, हम वर्चुअल अवतारों को किसी भी स्थान पर ले जाने में सक्षम होंगे। यह बैठकों और सम्मेलनों, लाइव समाचारों और अन्य कई मामलों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। एयरटेल इस उभरती डिजिटल दुनिया में 5जी के लिए पूरी तरह से तैयार है और भारत के लिए नए और अभिनव प्रयोग तैयार कर रहा है जो प्रक्रिया में है। हम इस अवसर पर दूरसंचार विभाग को धन्यवाद देते हैं कि उसने हमें ट्रायल स्पेक्ट्रम दिया, ताकि ऐसे प्रयोगों के माध्यम से हमारी तकनीक का मूल्यांकन किया जा सके। अपने अनुभव के बारे में बताते हुए, कपिल देव ने कहा- मैं 5G तकनीक की शक्ति और क्षमता से चकित हूं और अपने डिजिटल अवतार को अपने प्रशंसकों के साथ बातचीत करते हुए देख अपने को वास्तव में उस जगह पर मौजूद महसूस कर रहा था। इस शानदार प्रयास और मेरे करियर की सबसे महत्वपूर्ण पारियों में से एक को जीवंत करने के लिए एयरटेल को धन्यवाद। एयरटेल भारत में 5जी की अगुवाई कर रही है। इस वर्ष की शुरुआत में एयरटेल ने लाइव 4जी नेटवर्क पर भारत के पहले 5जी अनुभव का प्रदर्शन किया। भारत के पहले ग्रामीण 5G परीक्षण के साथ-साथ 5G पर पहले क्लाउड गेमिंग अनुभव का भी प्रदर्शन किया गया। 5GforBusiness के हिस्से के रूप में, Airtel ने 5G आधारित समाधानों का परीक्षण करने के लिए अग्रणी वैश्विक और ब्रांडों के साथ साझेदारी की है।

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