एबीएन बिजनेस डेस्क। महंगाई से जूझ रही जनता के लिए केंद्र सरकार ने राहत भरा फैसला लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को पेट्रोल, डीजल से केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी का ऐलान किया है। जिसके बाद पेट्रोल, डीजल के दामों में काफी कमी आ जाएगी। केंद्र ने रसोई गैस सिलेंडर पर भी 200 रुपये की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर की कमी कर रहे हैं। जिसके बाद पेट्रोल की कीमत 9.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 7 रुपये प्रति लीटर कम हो जाएगी। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि ई-प्लास्टिक उत्पादों के लिए कच्चे माल और बिचौलियों पर सीमा शुल्क भी कम कर रहे हैं, जहां हमारी आयात निर्भरता अधिक है। स्टील के कुछ कच्चे माल पर आयात शुल्क कम किया जाएगा। कुछ इस्पात उत्पादों पर निर्यात शुल्क लगाया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हम प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 9 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रति गैस सिलेंडर (12 सिलेंडर तक) 200 रुपये की सब्सिडी देंगे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सीमेंट की उपलब्धता में सुधार के लिए और सीमेंट की लागत को कम करने के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स के माध्यम से उपाय किए जा रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में महंगाई का दौर लगातार जारी है। एक बार फिर सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी की गई है। सीएनजी (CNG) के दामों में 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की गई है। बता दें, 6 दिन के अंदर दूसरी बार सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। बढ़े हुए दाम के बाद राजधानी दिल्ली में सीएनजी के नए दाम 75.61 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। वहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी के रेट 78.17 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। दिल्ली से सटे गुरुग्राम में भी सीएनजी के दामों में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। वहां पर इसका रेट 83.94 रुपये किलो हो गया है। सीएनजी (CNG) के बढ़े हुए दामों का असर टैक्सी और कैब सर्विस पर काफी देखने को मिल रहा है। जब से सीएनजी के दामों ने आसमान छूना शुरू किया है, ओला-उबर की राइड भी काफी महंगी हो गई है। आलम ये है कि कुछ दिन पहले तक टैक्सी ड्राइवर हड़ताल पर थे या तो सीएनजी दामों को कम करने की अपील की जा रही थी या फिर उनका रेट बढ़ाने की मांग थी। अब एक बार फिर जब सीएनजी के दाम बढ़े हैं, इसका सीधा असर टैक्सी और दूसरी कैब सर्विस वाली गाड़ियों पर पड़ने वाला है। वैसे सीएनजी के अलावा पेट्रोल-डीजल के दाम भी काफी बढ़ चुके हैं। राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 105.41 रुपये और डीजल 96.67 रुपये चल रही है। इसी तरह आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 120.51 रुपये और डीजल 104.77 रुपये है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक लीटर पेट्रोल 115.12 रुपये और डीजल 99.83 रुपये में बिक रहा है। वहीं, चेन्नई की बात करें तो यहां पेट्रोल की कीमत 110.85 रुपये और डीजल 100.94 रुपये पर बनी हुई है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। महंगाई की तगड़ी मार झेल रही देश की आम जनता के लिए राहत भरी खबर है। दरअसल, आने वाले समय में खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसकी वजह यह है कि इंडोनेशिया ने बीते दिनों लगाया पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। इस संबंध में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया ने 23 मई से पाम ऑयल पर लगे प्रतिबंध को हटाने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को देश के कारोबारी नेताओं ने राष्ट्रपति से निर्यात प्रतिबंधों को हटाने की मांग की थी, जिसके बाद ये बड़ा फैसला लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यात पर बैन के बाद से देश में स्टॉक फुल हो चुका है, अगर प्रतिबंध जारी रहे तो इस क्षेत्र को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यहां बता दें कि पाम ऑयल के सबसे बड़े उत्पादक देश इंडोनेशिया की सरकार ने बीते 28 अप्रैल को पाम ऑयल के निर्यात पर बैन लगा दिया था। छह मिलियन टन स्टोरेज क्षमता : रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया में बंदरगाहों सहित लगभग छह मिलियन टन स्टोरेज क्षमता है। वहीं प्रतिबंध के बाद घरेलू स्टॉक मई की शुरुआत में ही लगभग 5.8 मिलियन टन तक पहुंच गया। इंडोनेशिया पाम ऑयल एसोसिएशन (GAPKI) के गुरुवार को जारी आंकड़ों को देखें तो मार्च के अंत में, घरेलू स्टॉक फरवरी के 5.05 मिलियन टन से बढ़कर 5.68 मिलियन टन हो गया था। फिर निर्यात बैन होने के बाद स्टॉक लगभग फुल हो चुका है। सालाना पाम तेल उत्पादन का केवल 35% ही उपयोग करता : गौरतलब है कि इंडोनेशिया आमतौर पर घरेलू स्तर पर अपने वार्षिक पाम तेल उत्पादन का केवल 35 फीसदी ही उपयोग करता है। इसका उपयोग ज्यादातर भोजन और ईंधन के लिए किया जाता है। वहीं भारत की पाम ऑयल को लेकर इंडोनेशिया पर अधिक निर्भरता है, ऐसे में निर्यात पर प्रतिबंध हटने से देश में राहत मिल सकती है। यहां बता दें कि भारत अपनी जरूरत का 70 फीसदी पाम ऑयल इंडोनेशिया से ही आयात करता है। जबकि 30 फीसदी का आयात मलेशिया से होता है। वित्त वर्ष 2020-21 में भारत ने 83.1 लाख टन पाम ऑयल का आयात किया था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा समूह की कंपनी टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड तगड़ी शॉपिंग की तैयारी में है। दरअसल, टाटा कंज्यूमर पांच ब्रांड को खरीदने के लिए चर्चा कर रही है। इसके जरिए कंपनी कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा कि कंपनी Tetley चाय और Eight O’Clock कॉफी बेचती है और अब कई कंपनियों के साथ गंभीरता से जुड़ने पर विचार कर रही है। हालांकि, डिसूजा ने उन ब्रांड की जानकारी नहीं दी, जिसे खरीदने की योजना पर काम हो रहा है। आपको बता दें कि टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का गठन 2020 में हुआ था। इसने बोतलबंद पानी की कंपनी NourishCo Beverages और अनाज ब्रांड Soulfull जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदकर अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के नए कदम से समूह को मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल के अलावा वैश्विक दिग्गज यूनिलीवर के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में रिलायंस दर्जनों छोटे किराना और नॉन-फूड ब्रांड्स का अधिग्रहण कर सकती है। रिलायंस का लक्ष्य 6.5 अरब डॉलर कंज्यूमर गुड्स के कारोबार का है। टाटा के विस्तार की नई योजना ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर गंभीर मुद्रास्फीति की वजह से कंपनियों की मुश्किलें बढ़ी हैं। यूक्रेन में युद्ध, राष्ट्रीय कृषि-वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध और सप्लाई चेन में दिक्कतों की वजह से इनपुट लागत बढ़ी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक की चिंताओं के बीच थोक महंगाई ने तीन दशक के रिकॉर्ड स्तर को छू लिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक थोक महंगाई अप्रैल में बढ़कर 15.08 फीसदी हो गई, जो मार्च में 14.55 फीसदी थी। आपको बता दें कि अप्रैल 2021 से लगातार थोक महंगाई दहाई अंक में बनी हुई है। अप्रैल में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 8.35 फीसदी रही, जो मार्च में 8.06 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की मुद्रास्फीति एक महीने पहले के 34.52% से बढ़कर 38.66 फीसदी हो गई। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति मार्च के 10.71 फीसदी से बढ़कर अप्रैल में 10.85 फीसदी हो गई।वहीं, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की मुद्रास्फीति अप्रैल में 69.07 प्रतिशत थी। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के मुताबिक खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर आठ साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा, अप्रैल 2022 में मुद्रास्फीति की ऊंची दर मुख्य रूप से खनिज तेलों, मूल धातुओं, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस, खाद्य वस्तुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों, रसायनों और रासायनिक उत्पादों आदि की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुई। बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक की ओर से तरह-तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। बीते दिनों केंद्रीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.40 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 4.40 फीसदी हो गई है। आरबीआई के इस कदम से होम-कार लोन की ब्याज दर बढ़ने लगी हैं। वहीं, आरबीआई ने कैश रिजर्व रेशियो को भी बढ़ाने का ऐलान किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी के शेयर मंगलवार को एनएसई पर 8.11 प्रतिशत गिरकर सूचीबद्ध हुए। एनएसई पर शेयर 949 रुपए के निर्गम मूल्य के मुकाबले 872 रुपए प्रति शेयर के भाव पर सूचीबद्ध हुए। बीएसई पर एलआईसी के शेयर 8.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 867.20 रुपए पर सूचीबद्ध हुए। सरकार को 20,557 करोड़ रुपए के इस आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए घरेलू निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। सरकार ने एलआईसी के शेयरों का निर्गम मूल्य 949 रुपये प्रति शेयर तय किया है। हालांकि, एलआईसी के पॉलिसीधारकों और खुदरा निवेशकों को क्रमश: 889 रुपए और 904 रुपए प्रति शेयर के भाव पर शेयर मिले। नौ मई को बंद हुआ था आईपीओ : एलआईसी का आईपीओ नौ मई को बंद हुआ था और 12 मई को बोली लगाने वालों को इसके शेयर आवंटित किए गए। सरकार ने आईपीओ के जरिये एलआईसी के 22.13 करोड़ से अधिक शेयर यानी 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की पेशकश की है। इसके लिए कीमत का दायरा 902-949 रुपये प्रति शेयर रखा गया था। एलआईसी के आईपीओ को करीब तीन गुना अभिदान मिला था। इसमें घरेलू निवेशकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जबकि विदेशी निवेशकों की प्रतिक्रिया ठंडी रही। यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेलवे ने मार्च 2020 से दो वर्षों में वरिष्ठ नागरिक यात्रियों से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है, जब कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत के बाद वरिष्ठ नागरिकों को टिकट पर दी जाने वाली रियायत निलंबित कर दी गई थी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब से यह जानकारी मिली। मध्य प्रदेश के चंद्रशेखर गौर द्वारा दायर आरटीआई के सवाल के जवाब में रेलवे ने कहा कि 20 मार्च, 2020 और 31 मार्च, 2022 के बीच रेलवे ने 7.31 करोड़ वरिष्ठ नागरिक यात्रियों को रियायतें नहीं दीं। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के 4.46 करोड़ पुरुष, 58 से अधिक आयु की 2.84 करोड़ महिलाएं और 8,310 ट्रांसजेंडर लोग शामिल हैं। आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार, इस अवधि के दौरान वरिष्ठ नागरिक यात्रियों से प्राप्त कुल राजस्व 3,464 करोड़ रुपये है, जिसमें रियायत के निलंबन के कारण अर्जित अतिरिक्त 1,500 करोड़ रुपये शामिल हैं। वरिष्ठ नागरिकों से कुल राजस्व में लिंगवार राजस्व पर आरटीआई के उत्तर में कहा गया है कि पुरुष यात्रियों से 2,082 करोड़ रुपये, महिला यात्रियों से 1,381 करोड़ रुपये और ट्रांसजेंडर से 45.58 लाख रुपये राजस्व मिले। महिला वरिष्ठ नागरिक यात्री 50 प्रतिशत रियायत के लिए पात्र होते हैं, जबकि पुरुष और ट्रांसजेंडर सभी वर्गों में 40 प्रतिशत छूट का लाभ उठा सकते हैं। एक महिला के लिए रियायत का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 58 है, जबकि एक पुरुष के लिए यह 60 वर्ष है। देश के कोरोनावायरस महामारी की चपेट में आने के बाद मार्च 2020 से जिन रियायतों को रोक दिया गया था, वे आज तक निलंबित हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि उन्हें बरकरार नहीं रखा जा सकता है। वर्ष 2020 में और 2021 में कुछ समय तक ट्रेन सेवाएं निलंबित रहीं, लेकिन अब सेवाओं के सामान्य होते ही रियायतों की मांग उठने लगी है। पिछले दो दशकों में रेलवे की रियायतें बहुत चर्चा का विषय रही हैं, जिसमें कई समितियों ने उन्हें वापस लेने की सिफारिश की है। इसका नतीजा यह हुआ कि जुलाई 2016 में रेलवे ने बुजुर्गों के लिए रियायत को वैकल्पिक बना दिया। विभिन्न प्रकार के यात्रियों को दी जाने वाली लगभग 53 प्रकार की रियायतों के कारण रेलवे पर हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ता है। वरिष्ठ नागरिक रियायत रेलवे द्वारा दी गई कुल छूट का लगभग 80 प्रतिशत है। इससे पहले रेलवे ने लोगों को अपने वरिष्ठ नागरिक रियायतों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की थी, लेकिन यह सफल नहीं हुआ। दरअसल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक यात्रियों की गिव इट अप योजना की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 4.41 करोड़ वरिष्ठ नागरिक यात्रियों में से 7.53 लाख (1.7 फीसदी) ने 50 फीसदी रियायत छोड़ने का विकल्प चुना और 10.9 लाख (2.47 फीसदी) ने 100 फीसदी रियायत छोड़ दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। टेस्ला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एलन मस्क ने सोमवार को संकेत दिए कि वह माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर के अधिग्रहण के लिए 44 अरब डॉलर से कम राशि का भुगतान करना चाहेंगे। मस्क ने पिछले महीने साइट की खरीदारी के लिए 44 अरब डॉलर की पेशकेश की थी। ब्लूमबर्ग न्यूज की एक खबर के मुताबिक, मियामी में आयोजित एक टेक सम्मेलन में मस्क ने कहा कि ट्विटर के अधिग्रहण के संबंध में एक कम कीमत वाला व्यवहार्य समझौता संभव है। वेबसाइट ने एक ट्विटर यूजर द्वारा प्रसारित सम्मेलन के लाइव वीडियो के आधार पर यह रिपोर्ट प्रकाशित की है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इन समिट में मस्क ने अनुमान जताया कि ट्विटर पर मौजूद 22.9 करोड़ अकाउंट में से कम से कम 20 फीसदी अकाउंट स्पैम बोट द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। स्पैम बोट इंटरनेट पर मौजूद उन स्वचालित सॉफ्टवेयर को कहते हैं, जो उपयोगकर्ताओं को बड़ी संख्या में स्पैम संदेश भेजते हैं या फिर ऑनलाइन मंचों पर बड़ी तादाद में स्पैम संदेश पोस्ट करते हैं। स्पैम संदेश का स्रोत इन्हें प्राप्त करने वाले लोगों को भी मालूम नहीं होता है। मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब उन्होंने ट्विटर के CEO पराग अग्रवाल के उन ट्वीट को लेकर उन पर निशाना साधा है, जिनमें कहा गया कि ट्विटर स्पैम बोट से निपटने की कवायद में जुटा है और साइट पर मौजूद पांच फीसदी से भी कम अकाउंट फर्जी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने घरेलू स्तर पर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के तहत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। आधिकारिक अधिसूचना से यह जानकारी मिली है। हालांकि, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा कि इस अधिसूचना की तारीख या उससे पहले जिस खेप के लिए अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (LOC) जारी किए गए हैं, उसके निर्यात की अनुमति होगी। डीजीएफटी ने कहा कि गेहूं की निर्यात नीति पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है...। उसने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए और उनकी सरकारों के अनुरोध के आधार पर दी गई अनुमति के आधार पर गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी। एक अलग अधिसूचना में डीजीएफटी ने प्याज के बीज के लिए निर्यात शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की। डीजीएफटी ने कहा कि प्याज के बीज की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से सीमित श्रेणी के तहत रखा जाता है। पहले प्याज के बीज का निर्यात प्रतिबंधित था।
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