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Published / 2022-04-11 14:14:14
रूस-यूक्रेन जंग का साइड इफेक्ट : दुनियाभर की अर्थव्यवस्था चरमरायी, यूक्रेन की जीडीपी 45% तक गिरेगी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन-रूस युद्ध की वजह से यूक्रेन की अर्थव्यवस्था में इस साल अनुमानित रूप से 45.1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। गिरावट का वॉल्यूम युद्ध की अवधि और तीव्रता पर निर्भर करेगा। यह बात वर्ल्ड बैंक के हाल ही में जारी लेटेस्ट आर्थिक अपडेट में कही गई है। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध और रूस पर प्रतिबंध दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं। यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र में उभरते बाजार और विकासशील देशों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि रूस के हमले ने यूक्रेन में व्यवसायों को बंद होने, निर्यात को घटाने और उत्पादक क्षमता को नष्ट करने के लिए मजबूर किया है। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से प्रभावित, रूस की अर्थव्यवस्था पहले ही एक गहरी मंदी की चपेट में आ गई है। 2022 में इसके उत्पादन में 11.2 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है। 30.7% गिर सकती है पूर्वी यूरोप क्षेत्र की जीडीपी : वर्ल्ड बैंक के पूर्वी यूरोप क्षेत्र, जिसमें यूक्रेन, बेलारूस और मोल्दोवा शामिल हैं, इस साल युद्ध के झटके और व्यापार में व्यवधान के कारण जीडीपी में 30.7 प्रतिशत की गिरावट देख सकते हैं। यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इस साल 4.1 प्रतिशत गिरने का अनुमान है। युद्ध के पूर्व इसमें 3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान था। युद्ध से उत्पन्न मानवीय संकट भयावह : यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र के लिए वर्ल्ड बैंक वाइस प्रेसिडेंट अन्ना बजरडे ने कहा, युद्ध से उत्पन्न मानवीय संकट की भयावहता चौंका देने वाली है। रूसी हमला यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका दे रहा है और इसने इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है। यूक्रेन को तुरंत बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता की आवश्यकता है क्योंकि यह अपनी अर्थव्यवस्था को जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार यूक्रेनी नागरिकों का समर्थन करने के लिए संघर्षरत है जो पीड़ित हैं और एक बेहद मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे हैं। यूरोप और मध्य एशिया के लिए वर्ल्ड बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, यूक्रेन युद्ध और महामारी ने एक बार फिर दिखाया है कि संकट व्यापक आर्थिक क्षति का कारण बन सकते हैं और प्रति व्यक्ति आय और विकास लाभ के वर्षों को पीछे छोड़ सकते हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने भी कड़ी चुनौती : वर्ल्ड बैंक की ओर से कहा गया कि युद्ध ने एक तेज वैश्विक मंदी, बढ़ती मुद्रास्फीति व कर्ज, और गरीबी के स्तर में वृद्धि की बढ़ती चिंताओं में और इजाफा कर दिया है। युद्ध, यूरोप और मध्य एशिया की उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के सामने भी कड़ी चुनौती पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो पहले से ही इस साल महामारी के प्रभावों से आर्थिक मंदी की ओर बढ़ रहा था। रूस और यूक्रेन के अलावा, बेलारूस, मोल्दोवा और ताजिकिस्तान के भी इस साल मंदी की चपेट में आने का अनुमान है। युद्ध की वजह से और यूरो क्षेत्र, कमोडिटी, ट्रेड में उम्मीद से कम ग्रोथ और फाइनेंसिंग झटकों के कारण सभी अर्थव्यवस्थाओं में विकास अनुमानों को घटाया गया है।

Published / 2022-04-08 07:37:58
रिजर्व बैंक ने जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटाया, लगातार 11वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नए वित्त वर्ष 2022-23 की पहली बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी अभी भी रेपो रेट चार फीसदी ही रहेगा। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट को 3.35 फीसदी रखा गया है। गौरतलब है कि ये लगातार 11वीं बार है, जबकि आरबीआई ने रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गौरतलब है कि आरबीआई ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव किया था। आरबीआई गवर्नर ने बताए नतीजे : तीन दिवसीय आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी बैठक के नतीजों की घोषणा आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों की सहमति से इस बार भी रेपो दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि सप्लाई चेन को लेकर ग्लोबल मार्केट दबाव में है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 7.2 फीसदी किया जा रहा है। पहले यह अनुमान 7.8 फीसदी जताया गया था। दास बोले- हमारे सामने दोहरी चुनौती : आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ग्रोथ अनुमान 16.2 फीसदी, दूसरी तिमाही में 6.2 फीसदी और तीसरी तिमाही में 4.1 फीसदी, जबकि चौथी तिमाही में चार फीसदी रखा गया है। इसके साथ ही कच्चे तेल का अनुमान 100 डॉलर प्रति बैरल रखा गया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बड़ी चिंता का विषय है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष में महंगाई का औसत अनुमान 5.7 फीसदी जताते हुए कहा कि देश में महंगाई बढ़ रही है और ग्रोथ रेट कम हो रहा है। ऐसे में हमारे सामने दोहरी चुनौती है।

Published / 2022-04-07 07:31:00
दिल्ली : दूसरे दिन 2.50 रुपये प्रति किलो महंगी हुई CNG

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन सीएनजी की कीमतें बढ़ाई गईं। सीएनजी के दाम में 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई है जिसके साथ मार्च से अब तक दाम कुल 12.50 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) में सीएनजी की कीमत 66.61 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 69.11 रुपये प्रति किलो हो गई है। आईजीएल राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी और पाइप से रसोई गैस (पीएनजी) की खुदरा बिक्री करती है। बुधवार को भी सीएनजी की कीमत में 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी। पाइप से रसोई गैस (पीएनजी) की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत 41.61 रुपये प्रति इकाई है। मार्च के बाद से दिल्ली में सीएनजी के दामों में 12.48 प्रति किलो की वृद्धि की गई है। महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) ने मुंबई में संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) की कीमत सात रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 67 रुपये प्रति किलो कर दी, जबकि गुजरात गैस ने दरों में 6.50 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी कर इसे 76.98 रुपये कर दिया। मूल्यवर्धित कर (वैट) जैसे स्थानीय करों की वजह से कीमतें शहर-दर-शहर अलग अलग होती हैं। सरकार ने एक अप्रैल से प्राकृतिक गैस की कीमतों को दोगुना से अधिक कर 6.1 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (प्रति इकाई) कर दिया है। इसके बाद सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में वृद्धि हुई है। सीएनजी की कीमतों में यह वृद्धि पिछले 16 दिन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी और रसोई गैस एलपीजी की दरों में 50 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि के बाद हुई है।

Published / 2022-04-06 17:40:59
एलआईसी में अब और बिक्री नहीं...

एबीएन डेस्क (निकुंज ओहरी)। केंद्र भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयर बाजारों में सूचीबद्घ होने के कम से कम दो साल बाद तक इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी शायद कम नहीं करेगा। माना जा रहा है कि हिस्सेदारी घटाने से इस बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में हिस्सा ले रहे निवेशकों के प्रतिफल पर असर पड़ सकता है। निवेश की इच्छा रखने वाले कई पक्षों ने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की जरूरत पूरी करने के लिए इस बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की केंद्र सरकार की योजना के बारे में पूछा था। सरकार ने इस बारे में अपना रुख रोडशो के दौरान उन्हें बता दिया। केंद्र ने कहा कि वह कम से कम दो साल तक एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी घटाने के बारे में नहीं सोचेगा ताकि कंपनी के शेयरों में गिरावट नहीं आए। निवेशकों को बताया गया कि बीमा कंपनी के पास अगले दो साल के लिए पर्याप्त पूंजी है। एक अधिकारी ने बताया कि निवेश की इच्छा रखने वालों ने रोडशो के दौरान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों का हवाला देकर चिंता जताई थी। सेबी के मुताबिक सभी कंपनियों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों पर खरा उतरना पड़ेगा। निवेशकों को चिंता थी कि सरकार पहले पांच साल तक हर साल एलआईसी में 5 फीसदी शेयर बेच देगी। उन्होंने बताया कि एलआईसी अधिनियम में किए गए संशोधनों के मुताबिक सूचीबद्घ होने के बाद पांच साल तक सरकार को इस बीमा कंपनी में कम से कम 75 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखनी पड़ेगी। अधिकारी ने कहा, कानून में साफ कहा गया है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी 75 फीसदी से कम नहीं कर सकती। साथ ही केंद्र अपनी हिस्सेदारी उस सीमा के ऊपर रख सकता है। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह एलआईसी में बार-बार शेयर नहीं बेचेगी और बैंकों समेत सार्वजनिक उपक्रमों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता सीमा पूरी करने की शर्त से विशेष छूट दी गई है। अधिकारी ने बताया कि एलआईसी के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की शर्त से छूट मांगी जाएगी क्योंकि सरकार ने सूचीबद्धता के पांच साल बाद तक इसमें अपनी हिस्सेदारी 75 फीसदी से नीचे नहीं ले जाने का फैसला किया है। निर्गम के बाद 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक आकार वाली कंपनियों को पांच साल तक कम से कम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता रखनी ही होती है। अधिकारी ने बताया कि सरकार ने रोडशो के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि वह अगले साल अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम या ओएफएस नहीं लाएगी क्योंकि इससे शेयर का भाव गिर सकता है। यह बात एलआईसी के आईपीओ में दिलचस्पी दिखाने वालों से कही गई ताकि वे इस पर दांव लगाने से पीछे नहीं हट जाएं। केंद्र एलआईसी के आईपीओ में शेयरों का आवंटन बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है ताकि यह सेबी के सूचीबद्घता के निर्देशों पर खरा उतरे। बाजार नियामक ने बीमाकर्ता के अद्यतन निर्गम दस्तावेज को मंजूरी दे दी है, जिससे देश के इस सबसे बड़े आईपीओ के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।

Published / 2022-04-06 09:51:17
महंगाई का डबल अटैक : आज फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, CNG भी महंगी

एबीएन बिजनेस डेस्क। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बुधवार को एक बार फिर 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। इस बढ़ोतरी के बाद 16 दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम में 10 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा चुकी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 104.61 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 105.41 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.87 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 96.67 रुपए प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा मुंबई में अब पेट्रोल की कीमत 120.51 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 104.77 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं आज एक बार फिर सीएनजी के दामों में भी ढ़ाई रुपए की बढ़ोतरी की गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में देशभर में वृद्धि की गई है, लेकिन इनके दाम स्थानीय कर के आधार पर अलग-अलग राज्यों में भिन्न हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब 137 दिन तक स्थिर रहने के बाद 22 मार्च को बढ़ाई गई थीं। तब से 14वीं बार कीमतों में वृद्धि की गई है। बीतो दो सप्ताह में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल 10 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।

Published / 2022-04-04 17:16:28
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने ट्विटर में खरीदी 9.2% हिस्सेदारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अपने ट्वीट के लिए चर्चा में रहने वाले टेस्ला के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क ने सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर की 9.2 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली है। सोमवार को जारी एक नियामकीय सूचना के अनुसार, मस्क ने ट्विटर के लगभग 7.35 करोड़ शेयर खरीदे हैं। मस्क की ट्विटर में इस हिस्सेदारी को निष्क्रिय निवेश माना जा रहा है। इसका मतलब है कि वह दीर्घावधि के लिए निवेशक बने रहना चाहते हैं। सोशल मीडिया कंपनी में यह हिस्सेदारी खरीदने के साथ सोमवार को ट्विटर का शेयर 25 प्रतिशत से अधिक उछल गया। वहीं टेस्ला के शेयर में भी मामूली वृद्धि हुई। उल्लेखनीय है कि मस्क ने पिछले महीने स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने को लेकर ट्वीट करते हुए ट्विटर पर स्वतंत्र संवाद करने की क्षमता पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था, स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखना एक कार्यशील लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। क्या आप मानते हैं कि ट्विटर इस सिद्धांत का सख्ती से पालन करता है? एक अन्य ट्वीट में मस्क ने कहा था कि वह एक नया सोशल मीडिया मंच बनाने के लिए गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

Published / 2022-04-03 13:24:44
पारा चढ़ते ही एसी उद्योग का भाव गर्म, बिक्री में 10% से अधिक की वृद्धि

एबीएन डेस्क। एयर कंडीशनर (एसी) कंपनियों को उम्मीद है कि पारा चढ़ने के साथ ही मांग बढ़ने से इस वर्ष उनकी बिक्री में दहाई अंक यानी 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी। हालांकि, उनका कहना है कि घरेलू एयर कंडीशनर के दाम करीब पांच फीसदी बढ़ सकते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने हाल में कहा था कि इस वर्ष अप्रैल और मई माह में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इससे उत्साहित एसी विनिर्माताओं वोल्टास, हिताची, एलजी, पैनासॉनिक और गोदरेज अप्लायंसेज का मानना है कि इस बार मांग बढ़ेगी। इससे पहले दो साल कोविड-19 के कारण बाजार में व्यवधान उत्पन्न हो गया था। कुछ कंपनियों का कहना है कि इस मौसम में एसी की अधिक मांग होने के कारण एसी और ठंडक प्रदान करने वाले अन्य उत्पादों की कमी हो सकती है। कलपुर्जों, धातुओं विशेषकर तांबा और एल्युमिनियम की बढ़ती कीमतें और कच्चे तेल के बढ़ते दाम के असर को कम करने के लिए उद्योग ने पिछली तिमाही में मूल्यवृद्धि की थी। टाटा समूह की कंपनी वोल्टास के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रदीप बक्शी ने कहा, 2021-22 के दौरान उद्योग को दामों में दहाई अंकों की बढ़ोतरी का कई बार सामना करना पड़ा। हालांकि, हमने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि ग्राहक इन गर्मियों में ठंडक प्रदान करने वाले उत्पाद खरीदने से पीछे न हटें। इसलिए हमने कई तरह के ऑफर और ईएमआई विकल्प दिए हैं। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण विनिर्माता संघ (सीईएएमए) ने उम्मीद जताई कि गर्मियों के इस मौसम की साल की कुल बिक्री में हिस्सेदारी 35 से 40 फीसदी हो सकती है। सीईएएमए के अध्यक्ष एरिक ब्रेगेंजा ने कहा, बीते कुछ वर्षों से कीमतें अस्थिर रही हैं। महामारी से हालात और भी बदतर हो गए। बीते 18 महीनों में उपभोक्ता उपकरण क्षेत्र में कीमतें 15 फीसदी तक बढ़ीं। जिंस तथा कच्चे माल के दाम बढ़ने से उद्योग लगातार दबाव में है। उन्होंने कहा, मूल्यवृद्धि उपभोक्ताओं को तुरंत प्रभावित नहीं करेगी, क्योंकि मार्च-अप्रैल, 2022 तक का उत्पादन पहले से तय है। मई से कीमतें बढ़ सकती हैं। जॉनसन के नियंत्रण वाली हिताची एयर कंडीशनिंग इंडिया का कहना है कि घर से काम की संस्कृति उद्योग में वृद्धि की कारक है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरमीत सिंह ने कहा, जिंसों और अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण हमें अप्रैल तक दाम तीन से चार फीसदी बढ़ाने होंगे। पिछले साल तक तीन स्टार वाले इन्वर्टर स्प्लिट एसी की कीमत 33,500 रुपए थी जो अब 36,500 से 37,000 रुपए हो गई है। गोदरेज अप्लायंसेज के कारोबार प्रमुख और कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी ने कहा, बीती दो गर्मियां लॉकडाउन के कारण प्रभावित रहीं और कई उपभोक्ताओं ने खरीद टाल दी। हालांकि, कई कंपनियों द्वारा घर से काम करने की संस्कृति अपनाई गई है, तापमान भी लगातार बढ़ रहा है जिससे मूल्यवृद्धि के बावजूद मांग बढ़ेगी। पैनासॉनिक इंडिया के कारोबार प्रमुख (एयर कंडीशनर समूह) गौरव साह ने कहा, इन गर्मियों में एसी उद्योग में दहाई अंक में वृद्धि की उम्मीद है। ब्रेगेंजा ने कहा कि भारत का आवासीय एसी बाजार 70 से 75 लाख इकाई का होने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में 15 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं।

Published / 2022-04-02 07:16:25
पेट्रोल-डीजल : कीमतों में "आज भी हुआ 80-80 पैसे का विकास"

एबीएन सेंट्रल डेस्क। तेल कंपनियों ने आज शनिवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा किया गया है। इससे पहले शुक्रवार को राहत दी गई थी और कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था लेकिन आज पेट्रोल और डीजल के रेट में 80-80 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में पेट्रोल 80 पैसे महंगा हुआ है वहीं, डीजल की कीमतों में भी 80 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में, एक लीटर पेट्रोल की कीमत अब 102.61 रुपए और डीजल की कीमत 93.87 रुपए हो गई। जानें महानगरों के रेट्स : मुंबई में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 85 पैसे की बढ़ोतरी की गई है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें प्रति लीटर क्रमशः 117.57 रुपए और 101.79 रुपए हो गई हैं। जबकि चेन्नई में पेट्रोल की कीमत में 76 पैसे की वृद्धि हुई है और अब यह 108.21 रुपए प्रति लीटर और डीजल 98.28 रुपए प्रति लीटर पर बेचा जा रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 84 पैसे बढ़े हैं और डीजल 80 पैसे बढ़े हैं। इसके बाद यहां एक लीटर पेट्रोल 112.19 और डीजल 97.02 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। जानें अन्य शहरों के रेट्स : बेंगलुरु में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 108.14 रुपए और एक लीटर डीजल की कीमत 92.05 रुपए है। इस बीच, भोपाल में एक लीटर पेट्रोल 115.09 रुपए और एक लीटर डीजल 98.28 रुपए पर बिक रहा है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक लीटर पेट्रोल 119.85 रुपए और डीजल 102.48 रुपए लीटर बिक रहा है। रांची में एक लीटर पेट्रोल 105.85 और डीजल 99.09 रुपए पर पहुंच गया। लखनऊ में एक पेट्रोल और डीजल क्रमश: 102.45 और 94.02 रुपए लीटर मिल रहा है।

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