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बढ़ती मुद्रास्फीति का असर, विश्व बैंक ने भारत का आर्थिक विकास अनुमान घटाकर 7.5 फीसदी किया
Published / 2022-06-08 07:42:34
बढ़ती मुद्रास्फीति का असर, विश्व बैंक ने भारत का आर्थिक विकास अनुमान घटाकर 7.5 फीसदी किया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व बैंक ने मंगलवार को बढ़ती मुद्रास्फीति, सप्लाई चेन में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के आर्थिक विकास के अनुमान को घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया। यह दूसरी बार है जब विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में भारत के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद के विकास के अनुमान को संशोधित किया है। अप्रैल में इसने पूर्वानुमान को 8.7 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया था और अब यह 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स के अपने नवीनतम अंक में विश्व बैंक ने कहा कि भारत में वित्त वर्ष 2022/23 में विकास दर 7.5 प्रतिशत तक होने का अनुमान है। बढ़ती मुद्रास्फीति, सप्लाई चेन में व्यवधान और महामारी से सेवाओं की खपत में उछाल इसके कारण हैं। ईंधन से लेकर सब्जियों और खाद्य तेल के दाम बढ़ने का असर : इसमें कहा गया है कि विकास को निजी क्षेत्र और सरकार द्वारा किए गए निश्चित निवेश से भी समर्थन मिलेगा, जिसने व्यावसायिक माहौल में सुधार के लिए प्रोत्साहन और सुधार पेश किए हैं। बैंक ने कहा कि यह पूर्वानुमान जनवरी के अनुमान से विकास के 1.2 प्रतिशत अंक की गिरावट को दर्शाता है। ईंधन से लेकर सब्जियों और खाना पकाने के तेल तक सभी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने थोक मूल्य-आधारित मुद्रास्फीति को अप्रैल में 15.08 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर धकेल दिया और खुदरा मुद्रास्फीति लगभग आठ साल के उच्च स्तर 7.79 प्रतिशत पर पहुंच गई। उच्च मुद्रास्फीति ने रिजर्व बैंक को पिछले महीने बेंचमार्क ब्याज दर को 40 आधार अंक बढ़ाकर 4.40 प्रतिशत करने के लिए एक अनिर्धारित बैठक आयोजित करने पर मजबूर कर दिया। अन्य एजेंसियों ने भी घटाया भारत का आर्थिक विकास अनुमान : विश्व बैंक से पहले वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत के आर्थिक विकास के अनुमान को घटा दिया था। पिछले महीने मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने उच्च मुद्रास्फीति का हवाला देते हुए कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए जीडीपी अनुमान को 9.1 प्रतिशत से घटाकर 8.8 प्रतिशत कर दिया। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी 2022-23 के लिए भारत के विकास अनुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया था। मार्च में फिच ने भारत के विकास के अनुमान को 10.3 प्रतिशत से घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया था, जबकि आईएमएफ ने अनुमान को 9 प्रतिशत से घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया था। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत आंकी है, जबकि अप्रैल में आरबीआई ने रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अस्थिर कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच पूर्वानुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया।

क्यों औंधे मुंह गिर रहा भारतीय शेयर बाजार? जानें आगे की संभावनाएं...
Published / 2022-06-07 13:34:45
क्यों औंधे मुंह गिर रहा भारतीय शेयर बाजार? जानें आगे की संभावनाएं...

एबीएन बिजनेस डेस्क। नई शेयर बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। मंगलवार 7 जून को भी बाजार में अच्छी-खासी गिरावट आई। मॉर्गन स्टेनली के मैनेजिंग डायरेक्टर रिदम देसाई बाजार ने बाजार में आई हालिया गिरावट के पीछे कुछ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण गिनाए हैं। देसाई का कहना है कि बढ़ती महंगाई बाजार के लिए घातक है। मनीकंट्रोल डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में रिदम देसाई ने कहा कि शॉर्ट टर्म में शेयर बाजार एक दायरे में घूमता नजर आएगा। लेकिन, आगे इसमें और गिरावट आ सकती है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका में मंदी की आहट से निवेशक सहमे हुए हैं। ये दोनों ही कारण फिलहाल शेयर बाजार को गिराने में योगदान दे रहे हैं। रेपो रेट बढ़ाने का हुआ नकारात्मक असर : देसाई ने कहा कि मई में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अचानक रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का शेयर बाजार पर नकारात्मक असर हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से निवेशकों में यह संदेश गया कि महंगाई का डर ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अगर वित्त वर्ष 2023 में महंगाई ऊंचे स्तर पर रही तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। मॉर्गन स्टेनली के एमडी ने कहा कि पाम आॅयल और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी मार्केट में मंदी की आशंकाएं भारतीय शेयर बाजार को डरा रही हैं। हालांकि, इस समय भारत पहले की तुलना में कीमतों के उछाल का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है। इन सेक्टर में दिख रही अच्छी संभावना : रिदम देसाई का मानना है कि वित्त वर्ष 2022 में 35 फीसदी एढर ग्रोथ के बाद वित्त वर्ष 2023 में अब एढर में मध्यम स्तर के ग्रोथ की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस समय बैंक, आॅटो और रियल एस्टेट स्टॉक अच्छे नजर आ रहे हैं। इनके अलावा ट्रैवल, लेजर, मीडिया और आॅटो एंसिलिरी स्टॉक भी देसाई की नजर में पॉजिटिव हैं। देसाई का कहना है कि सीमेंट सेक्टर अगले 2-3 साल के दौरान अंडरपरफॉर्म करता नजर आ सकता है। फिलहाल ये अच्छा आकार लेता नजर आ रहा है। भविष्य में उत्पादन स्तर में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा इन कंपनियों को बढ़ती मांग से भी फायदा होगा। फर्टिलाइजर की कीमतें बिगाड़ेगी खेल : रिदम देसाई का कहना है कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहता तो इससे फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ सकती हैं। युद्ध समाप्?त न हुआ तो भारत को फर्टिलाइजर सब्सिडी पर अगले साल भी भारी खर्च करना होगा। भारत के लिए फर्टिलाइजर की कीमतों में बढ़ोतरी को सहना काफी मुश्किल होगा। अगर देश में उर्वरकों की कीमत बढ़ेगी तो खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे। इससे महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी और अंतत: इसका असर ग्रोथ में गिरावट के रूप में सामने आएगा।

साइरस मिस्त्री को झटका देकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठेके में रतन टाटा ने मारी बाजी
Published / 2022-06-03 13:19:20
साइरस मिस्त्री को झटका देकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ठेके में रतन टाटा ने मारी बाजी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने का ठेका टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स को मिला है। इसके लिए लार्सन एंड टुब्रो और साइरस मिस्त्री का शापूरजी पलौंजी ग्रुप भी होड़ में था लेकिन टाटा ग्रुप की इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स ने बाजी मार ली। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इस काम के लिए टाटा प्रोजेक्ट्स को चुना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 25 नंवबर को जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आधारशिला रखी थी। इस प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनाया जा रहा है। ज्यूरिख एयरपोर्ट इसके पहले चरण में 5,700 करोड़ रुपए निवेश कर रही है। इस एयरपोर्ट के 2024 में शुरू होने की उम्मीद है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और टाटा प्रोजेक्ट्स के जॉइंट स्टेटमेंट में यह जानकारी दी गई है। इसके मुताबिक टाटा प्रोजेक्ट्स नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर टर्मिनल, रनवे, एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड, युटिलिटीज, लैंडसाइट फैसिलिटीज और दूसरी इमारतों का निर्माण करेगी। टाटा प्रोजेक्ट्स को देश में कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने का अनुभव है। इनमें संसद की नई इमारत, मुंबई में ट्रांस-हार्बर लिंक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कई सेक्शन और कई शहरों के मेट्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में भारतीय संस्कृति और स्विटरलैंड की टेक्नोलॉजी का संगम देखने को मिलेगा। देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण पूरा होने के बाद यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण पूरा होने के बाद इसके आठ रनवे से सालाना 1.2 करोड़ यात्री उड़ान भर सकेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 36 महीनों में पूरा किया जाना है। जेवर में बनने वाला एयरपोर्ट वास्तव में एविएशन हब की तरह काम करेगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 3500 एकड़ में बनाया जाना है। पहले चरण में 1327 हेक्टेयर जमीन को विकसित किया जा रहा है। यह एयरपोर्ट से 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि यह नोएडा-फरीदाबाद और गाजियाबाद से 40 किलोमीटर दूर स्थित है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर बनने वाला नोएडा एयरपोर्ट करीब 20,000 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है।

मार्च तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में 4.1% की ग्रोथ, 8.7% रही आर्थिक विकास दर
Published / 2022-05-31 17:16:36
मार्च तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में 4.1% की ग्रोथ, 8.7% रही आर्थिक विकास दर

एबीएन बिजनेस डेस्क। मार्च तिमाही के जीडीपी (GDP) आंकड़े जारी हो गए हैं। चौथी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में 4.1 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है। जिसकी वजह से पिछले पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 8.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। जानकार पहले ही अनुमान लगा रहे थे कि दिसंबर तिमाही की रिकवरी पर मार्च तिमाही के दौरान बढ़ती महंगाई (Inflation) और ओमीक्रॉन को लेकर डर का असर पड़ेगा। हालांकि आज आए मार्च तिमाही के आंकड़े कई संस्थानों के अनुमानों से बेहतर रहे हैं। अधिकांश जानकारों के अनुमान 4 प्रतिशत या उससे नीचे के थे। चौथी तिमाही की ग्रोथ इससे पिछली तिमाही के मुकाबले सुस्त रही है। दिसंबर तिमाही में विकास दर 5.4 प्रतिशत थी। हालांकि पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले ग्रोथ के आंकड़े बेहतर रहे हैं। जब 2020-21 की चौथी तिमाही में जीडीपी 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष में 8.7 प्रतिशत की ग्रोथ के मुकाबले 2020-21 में अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत की दर से घटी थी, इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का असर था। एनएसओ ने अपने दूसरे अनुमान में 2021-22 के दौरान 8.9 प्रतिशत की ग्रोथ की बात कही थी। हालांकि 2022 की शुरुआत में ओमीक्रॉन के असर की वजह से कारोबारी गतिविधियों पर कुछ असर देखने को मिला जिससे अंतिम आंकड़े अनुमानों से कम रहे।

जल्दी करें... सीएनजी वाहन हुआ सस्ता, दो साल तक रजिस्ट्रेशन फीस और टैक्स में भी छूट
Published / 2022-05-28 14:40:22
जल्दी करें... सीएनजी वाहन हुआ सस्ता, दो साल तक रजिस्ट्रेशन फीस और टैक्स में भी छूट

एबीएन बिजनेस डेस्क। पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने एलान किया है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया या चार पहिया वाहन खरीदारों को अब मोटर वाहन के लिए रजिस्ट्रेशन फीस (पंजीकरण शुल्क) और अन्य टैक्स नहीं देना होगा। जो लोग सीएनजी वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी राज्य में इसी तरह की छूट दी जाएगी। राज्य सरकार ने शुक्रवार को इस फैसले की घोषणा की। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि, इलेक्ट्रिक वाहन या सीएनजी का विकल्प चुनने वाले नई कार या दोपहिया खरीदारों को पंजीकरण शुल्क और अन्य करों का भुगतान करने की जरूरत नहीं है। यह फैसला इस साल 1 अप्रैल से प्रभावी है। यह आॅफर 31 मार्च 2024 तक वैध रहेगा। यदि किसी ने पिछले दो महीनों में ऐसा वाहन खरीदा है तो वह पंजीकरण शुल्क और अन्य दिए गए टैक्स को वापस मांगने का दावा नहीं कर सकता है। हालांकि, राज्य सरकार 1 अप्रैल, 2022 से 31 मार्च, 2024 के बीच कर का भुगतान किए गए दिनों की सटीक संख्या के लिए टैक्स वैधता के विस्तार के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन की पेशकश करेगी। यह फैसला इस साल के बजट में किए गए राज्य सरकार के वादे को पूरा करता है। राज्य सरकार द्वारा 25 मई को जारी आदेश में कहा गया है, "बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में निवेश को प्रोत्साहित करने और कार्बन फुटप्रिंट में कमी को प्रोत्साहित करने और पेट्रोल/डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए किसी प्रकार की वित्तीय राहत या छूट देना आवश्यक महसूस किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार कोलकाता के पास हिंदुस्तान मोटर प्लांट में सुधार करने की योजना बना रही है, जो कभी भारत की लोकप्रिय कार एंबेसडर बनाती थी। हिंदुस्तान मोटर्स ने इलेक्ट्रिक कारों को विकसित करने के लिए प्यूजो के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। पहली ईवी अब से लगभग दो वर्षों में भारतीय सड़कों पर उतर सकती है। हिंदुस्तान मोटर्स को दशकों के संचालन के बाद 2021 के शुरुआत में पश्चिम बंगाल के उत्तरपारा में अपना कारखाना बंद करना पड़ा था। यहां एंबेसडर कार 1957 से बनाई जाती थी। लेकिन हाल के वर्षों में मॉडल की मांग में आई कमी और बढ़ते कर्ज जैसी समस्याओं की वजह से प्लांट को बंद करना पड़ा।

टेस्ला कारों की भारत में होगी बिक्री, तभी होगा एंट्री पर विचार : ऐलन मस्क
Published / 2022-05-28 14:39:55
टेस्ला कारों की भारत में होगी बिक्री, तभी होगा एंट्री पर विचार : ऐलन मस्क

एबीएन बिजनेस डेस्क। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी टेस्ला के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऐलन मस्क ने कहा है कि टेस्ला को भारत में अपनी कारों की बिक्री की अनुमति मिलने के बाद ही स्थानीय स्तर पर इसके विनिर्माण के बारे में कोई फैसला किया जाएगा। मस्क ने भारत में टेस्ला का विनिर्माण संयंत्र लगाने की संभावना के बारे में ट्विटर पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि टेस्ला किसी भी ऐसी जगह पर अपना विनिर्माण संयंत्र नहीं लगाएगी जहां उसे पहले अपनी कारों की बिक्री एवं सर्विस की अनुमति नहीं दी गई हो। मस्क का यह बयान इस लिहाज से अहम है कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने टेस्ला को भारत में ही बनी कारों की बिक्री की मंजूरी देने की बात कही थी। गडकरी ने अप्रैल में कहा था कि अगर टेस्ला भारत में अपनी इलेक्ट्रिक कारों के उत्पादन के लिए तैयार है तो वह यहां पर बिक्री कर सकती है। दरअसल भारत विदेश में बनी कारों के आयात पर भारी शुल्क लगाता है जिसकी वजह से उनकी कीमत काफी बढ़ जाती है। टेस्ला ने इस आयात शुल्क में कटौती की मांग रखी थी। मस्क ने पिछले साल अगस्त में कहा था कि टेस्ला भारत में अपने वाहनों को बेचना चाहती है लेकिन यहां पर बहुत ज्यादा आयात शुल्क लगता है। मस्क ने कहा था कि अगर टेस्ला को भारतीय बाजार में कामयाबी मिलती है तो वह भारत में इसका विनिर्माण संयंत्र लगाने के बारे में सोच सकते हैं। फिलहाल भारत विदेश में बनी 40,000 डॉलर से अधिक मूल्य वाली कारों के आयात पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है।

2,000 रुपये के नोटों की अब नहीं होगी सप्लाई : रिजर्व बैंक
Published / 2022-05-27 13:13:57
2,000 रुपये के नोटों की अब नहीं होगी सप्लाई : रिजर्व बैंक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दो हजार रुपये के बैंक नोट की संख्या में पिछले कुछ साल से गिरावट का सिलसिला जारी है। इस साल मार्च अंत तक चलन वाले कुल नोट में इनकी हिस्सेदारी घटकर 214 करोड़ या 1.6 प्रतिशत रह गई। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा गया है। इस साल मार्च तक सभी मूल्यवर्ग के नोटों की कुल संख्या 13,053 करोड़ थी। इससे एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 12,437 करोड़ था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2020 के अंत में चलन में शामिल 2000 रुपये के मूल्यवर्ग वाले नोटों की संख्या 274 करोड़ थी। यह आंकड़ा चलन में कुल करेंसी नोटों की संख्या का 2.4 प्रतिशत था। इसके बाद मार्च 2021 तक चलन में शामिल 2000 के नोटों की संख्या घटकर 245 करोड़ या दो प्रतिशत रह गई। पिछले वित्त वर्ष के अंत में यह आंकड़ा 214 करोड़ या 1.6 प्रतिशत तक रह गया। उपरोक्त आंकड़े मात्रा के लिहाज से हैं। यदि मूल्य के संदर्भ में बात करें तो मार्च 2020 में 2000 रुपये के नोट का कुल मूल्य, सभी मूल्यवर्ग के नोटों के कुल मूल्य का 22.6 प्रतिशत था। मार्च 2021 में यह आंकड़ा घटकर 17.3 प्रतिशत और मार्च 2022 में 13.8 प्रतिशत रह गया। रिपोर्ट के अनुसार इस साल मार्च के अंत में 500 रुपये के नोटों की संख्या बढ़कर 4,554.68 करोड़ हो गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 3,867.90 करोड़ थी। मात्रा के लिहाज से चलन में सबसे अधिक 500 रुपये के नोट (34.9 प्रतिशत) थे। इसके बाद 21.3 प्रतिशत के साथ 10 रुपये के नोटों का स्थान रहा। रिपोर्ट के अनुसार सभी मूल्य वर्ग में चलन वाली मुद्रा का कुल मूल्य इस साल मार्च में बढ़कर 31.05 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया जो मार्च 2021 में 28.27 लाख करोड़ रुपये था।

महंगाई का डबल डोज : इस साल भी 12% तक महंगे होंगे सभी कंपनियों के प्री-पेड प्लान
Published / 2022-05-24 07:20:50
महंगाई का डबल डोज : इस साल भी 12% तक महंगे होंगे सभी कंपनियों के प्री-पेड प्लान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 2016 से पहले देश में कई सारी टेलीकॉम कंपनियां थीं, बावजूद उसके कंपनियों के प्लान सस्ते नहीं थे। 2016 में जियो के आने के बाद एक क्रांति हुई और अचानक से फ्री डाटा प्लान, फ्री कॉलिंग की बाढ़ आ गई। जियो की देखा-देखी एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भी ग्राहकों को फ्री सेवाएं दीं, लेकिन अब फ्री का मार्केट खत्म हो रहा है। हर साल टेलीकॉम कंपनियां अपने प्लान महंगे कर रही हैं जिससे उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सभी कंपनियों के प्री-पेड प्लान पहले जैसे महंगे हो जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक जियो, एयरटेल और वोडाफोन जैसी निजी कंपनियां इस साल दीवाली तक अपने प्री-पेड प्लान 10% से 12% तक महंगे कर सकती हैं यानी यदि किसी प्लान की कीमत 100 रुपये है तो उसकी कीमत 110 से 112 रुपये हो सकती है। कहा जा रहा है कि टैरिफ प्लान महंगे होने से टेलीकॉम कंपनियों को फायदा होगा और उनका एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर (ARPU) 10% तक बढ़ जाएगा। इस बढ़ोतरी के बाद Airtel, Jio और Vi के ARPU क्रमशः 200 रुपये, 185 रुपये और 135 रुपये हो जाएंगे। Jio चार दिन के लिए फ्री में दे रहा इन ग्राहकों को डाटा Jio ने असम के अपने ग्राहकों को चार दिनों के लिए फ्री डाटा और मैसेज के साथ रोज 1.5 जीबी डाटा देने का एलान किया है। बता दें कि असम में बारिश के बाद आई भारी बाढ़ के बाद जियो ने यह फैसला लिया है। असम में दीमा हसाओ, कार्बी आंगलोंग ईस्ट, कार्बी आंगलोंग वेस्ट, होजई और कछार सहित कई जिलों में रहने वाले लोगों को रिलायंस जियो की ओर से एक कॉम्प्लिमेंट्री प्लान मिलेगा जिसमें चार दिनों के लिए अनलिमिटेड कॉलिंग की सुविधा मिलेगी।

उत्पाद शुल्क कटौती से राज्यों के हिस्से पर असर नहीं : निर्मला सीतारमण
Published / 2022-05-23 12:55:20
उत्पाद शुल्क कटौती से राज्यों के हिस्से पर असर नहीं : निर्मला सीतारमण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि वाहन ईंधन पर उत्पाद शुल्क कटौती से केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी प्रभावित होगी। सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल में आठ रुपए और डीजल में छह रुपए की कटौती इन ईंधनों पर लगाए जाने वाले सड़क एवं अवसंरचना उपकर में की गई है जिसके संग्रह को राज्यों के साथ कभी साझा नहीं किया जाता। ऐसे में विपक्ष का यह आरोप सही नहीं है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा था कि सरकार ने शनिवार शाम को उत्पाद शुल्क में कटौती की जो घोषणा की है उससे केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी। हालांकि, बाद में रविवार को चिदंबरम ने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि करों में कटौती का भार अकेले केंद्र सरकार ही वहन करेगी। वित्त मंत्री ने ट्वीट करके समझाया : निर्मला सीतारमण ने ट्विटर पर लिखा कि वह पेट्रोल-डीजल पर लगाए जाने वाले करों के बारे में उपयोगी जानकारी साझा कर रही हैं जो सभी के लिए लाभदायक होगी। उन्होंने कहा, मूल उत्पाद शुल्क (बीईडी), विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी), सड़क एवं अवसंरचना उपकर (आरआईसी) और कृषि एवं अवसंरचना विकास कर (एआईडीसी) को मिलाकर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क होता है। मूल उत्पाद शुल्क राज्यों के साथ साझा किया जाता है जबकि एसएईडी, आरआईसी और एआईडीसी को साझा नहीं किया जाता। वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल पर आठ रुपए प्रति लीटर और डीजल पर छह रुपए प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क कटौती पूरी तरह से आरआईसी में की गई है। नवंबर, 2021 में जब पेट्रोल पर पांच रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर घटाए गए थे तब भी कटौती आरआईसी में ही की गई थी। केंद्र-राज्य कर साझेदारी की व्यवस्था के तहत केद्र जो कर संग्रह करता है उनमें से 41 प्रतिशत राज्यों के पास जाता है। हालांकि, इनमें उपकर के जरिए लेवी के रूप में जुटाया गया कर शामिल नहीं होता। पेट्रोल और डीजल पर लगाया जाने वाला ज्यादातर कर उपकर होता है। शनिवार की कटौती से पहले पेट्रोल पर केंद्रीय कर 27.90 रुपए प्रति लीटर था, मूल उत्पाद शुल्क सिर्फ 1.40 रुपए प्रति लीटर था। इसी तरह डीजल पर 21.80 रुपए का कुल केंद्रीय कर था और मूल उत्पाद शुल्क सिर्फ 1.80 रुपए था। प्रति लीटर पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 11 रुपए और डीजल पर आठ रुपये था। पेट्रोल पर एआईडीसी 2.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर चार रुपए प्रति लीटर था। पेट्रोल पर 13 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क आरआईसी के रूप में लगाया गया था और डीजल पर आठ रुपए प्रति लीटर इस तरह का शुल्क लगाया गया था। शनिवार की उत्पाद शुल्क कटौती इसी में की गई है। पेट्रोल पर सिर्फ 1.40 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 1.80 रुपए प्रति लीटर का बीईडी संग्रह राज्यों के साथ साझा किया जाता है। सीतारमण ने कहा, मूल उत्पाद शुल्क जिसे राज्यों के साथ साझा किया जाता है उसे छुआ भी नहीं गया है। अत: कर में दो बार की गई कटौती (पहली कटौती नवंबर में और दूसरी शनिवार को) का भार केंद्र उठाएगा। उन्होंने बताया कि कल जो कर कटौती की गई उसका केंद्र पर 1,00,000 करोड़ रुपए का भार पड़ेगा। नवंबर, 2021 में जो कर कटौती की गई थी उसका केंद्र पर भार 1,20,000 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष पड़ा है। केंद्र के राजस्व पर कुल 2,20,000 करोड़ रुपए का असर पड़ेगा।

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