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Published / 2026-02-20 20:54:00
मजबूती से कारोबार करता दिखा शेयर मार्केट

500 अंक उछला सेंसेक्स, निफ्टी 25,600 के पार, मेटल-बैंकिंग शेयरों में खरीदारी 

टीम एबीएन, रांची। 20 फरवरी को घरेलू शेयर बाजार मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स करीब 586.13 अंकों की तेजी के साथ 83,084.27 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 193.40 अंक चढ़कर 25,647.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। आज के सत्र में मेटल और सरकारी बैंकों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिल रही है, जबकि आईटी सेक्टर दबाव में है। 

निफ्टी के अहम लेवल 

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी हाल ही में 2026 के शुरुआती निचले स्तरों तक फिसल चुका है। ऐसे में मौजूदा स्तर बेहद अहम माने जा रहे हैं। 
सपोर्ट: 25,300 

रेजिस्टेंस: 25,600-25,700 (50-डे मूविंग एवरेज के आसपास) 

मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के अनुसार, यदि निफ्टी 25,500 के ऊपर टिकता है तो यह तेजी 25,650 तक बढ़ सकती है। यह स्तर फिबोनाची रिट्रेसमेंट जोन के आसपास है और इंडेक्स के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

Published / 2026-02-19 18:40:10
अचानक औंधे मुंह गिरा शेयर मार्केट

अचानक क्रैश हुआ शेयर बाजार

 इन कारणों से औंधे मुंह गिरा मार्केट

एबीएन बिजनेस डेस्क। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मजबूत शुरुआत के बाद अचानक बिकवाली हावी हो गई और बाजार के प्रमुख सूचकांक बुरी तरह फिसल गए। 

कारोबार के दौरान BSE Sensex 1448 अंकों से ज्यादा टूट कर 83,000 के अहम स्तर के नीचे आ गया। वहीं, निफ्टी में 421 अंक की गिरावट आई। कोराबर बंद होने पर सेंसेक्स 1236.11 अंक लुढ़क कर 82,498.14 के स्तर पर बंद हुआ। Nifty 365.00 अंक गिरकर 25,454.35 के लेवल पर आ गया।

गिरावट के तीन बड़े कारण

1. मुनाफा वसूली का दबाव

पिछले तीन सत्रों से बाजार में जारी तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।

2. IT शेयरों में विदेशी बिकवाली

आईटी सेक्टर पर एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर बना हुआ है। NSDL के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने इस महीने के शुरुआती 15 दिनों में आईटी शेयरों में 10,956 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। उनकी होल्डिंग में करीब 16% की गिरावट दर्ज की गई।

3. US-Iran तनाव और कच्चे तेल में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखा। Brent Crude में 1% से ज्यादा की तेजी आई और कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। तेल की बढ़ती कीमतें आयातक देशों जैसे भारत के लिए चिंता का विषय हैं।

Published / 2026-02-16 21:10:08
एआई के डर से सिर्फ 8 दिन में 6 लाख करोड़ डूबे

अब टीसीएस-इंफोसिस समेत बड़ी आईटी कंपनियों ने बदली रणनीति 

एबीएन बिजनेस डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर बढ़ती आशंकाओं का असर सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शेयर बाजार पर भी इसका सीधा प्रभाव दिख रहा है। पिछले आठ कारोबारी दिनों में आईटी स्टॉक्स में भारी बिकवाली के चलते करीब 6 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू घट चुकी है। एनआईएफटी आईटी इंडेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गयी है, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। 

आईटी कंपनियों पर जबरदस्त असर बाजार में डर इस बात का है कि एआई आधारित टूल्स एप्लिकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसी पारंपरिक आईटी सर्विसेज को काफी हद तक आॅटोमेट कर सकते हैं। इससे कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल और मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है। 

हालांकि, प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियां लगातार यह भरोसा दिला रही हैं कि एआई उनकी सेवाओं को खत्म नहीं करेगा, बल्कि उन्हें और सक्षम बनायेगा। ब्रोकरेज फर्म जेपी मोर्गन चेज का मानना है कि एआई नए अवसर भी पैदा करेगा और आईटी कंपनियां इस बदलाव से लाभ उठा सकती हैं। वहीं एचएसबीसी (रिसर्च रिपोर्ट के संदर्भ में) का कहना है कि एआई मौजूदा बिजनेस मॉडल के भीतर ही काम करेगा, जहां आईटी सर्विस प्रदाताओं की भूमिका बनी रहेगी। 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? 

विशेषज्ञों का तर्क है कि बड़े संगठनों में एआई किसी मैजिक बॉक्स की तरह अकेले काम नहीं कर सकता। उसे डेटा सिस्टम, आॅडिट चेक्स, साइबर सुरक्षा और रिस्क कंट्रोल जैसे मजबूत ढांचे की जरूरत होती है, जिसमें आईटी वेंडर्स और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म की अहम भूमिका रहती है। हालांकि, मुनाफे को लेकर आशंका बनी हुई है। 

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विस का अनुमान है कि अगले तीन से चार वर्षों में एआई के व्यापक उपयोग से आईटी सेक्टर के रेवेन्यू में 9 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। कुल मिलाकर, एआई को लेकर बाजार में डर और अवसर दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। अल्पकाल में अनिश्चितता बनी रह सकती है, लेकिन दीर्घकाल में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आईटी कंपनियां इस तकनीकी बदलाव को कितनी तेजी और रणनीतिक तरीके से अपनाती हैं। 

कंपनियों ने बदली रणनीति 

देश की प्रमुख आईटी कंपनियां अब एआई को लेकर सैद्धांतिक चर्चा से आगे बढ़कर व्यावहारिक बदलाव कर रही हैं। वे अपने आॅपरेशंस में एआई कोडिंग असिस्टेंट, आटोमेशन टूल्स और एआई एजेंट्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके और डिलीवरी टाइम कम किया जा सके। एक्वेरियस कैपिटल के संदीप गोगिया के अनुसार, आईटी कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को एआई टूल्स के साथ काम करने की व्यवस्थित ट्रेनिंग दे रही हैं। 

वर्कफोर्स को एआई-आधारित कोडिंग, आॅटोमेशन प्लेटफॉर्म और इंटेलिजेंट एजेंट्स के उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे बदलती टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को ढाल सकें। इसी रणनीति के तहत टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (टीसीएस) ने एआई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। 

कंपनी ने 1 गीगावॉट क्षमता वाले डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया है और अब तक साढ़े तीन लाख से अधिक कर्मचारियों को एआई से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया है। यह रुझान दर्शाता है कि आईटी कंपनियां एआई को खतरे के रूप में नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देख रही हैं। फोकस नौकरियों को खत्म करने के बजाय स्किल अपग्रेडेशन और नयी तकनीकों के साथ तालमेल बैठाने पर है, ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनायी जा सके।

Published / 2026-02-16 21:07:39
क्या सचमुच भारत में 1 लाख से भी नीचे आयेगा सोना!

रिकॉर्ड स्तर से 24,500 टूटा गोल्ड, एक्सपर्ट्स बोले- अभी तो बस शुरुआत है... 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय सरार्फा बाजार में सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट का सिलसिला जारी है। जनवरी 2026 में 1,80,779 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छूने वाला सोना अब अपने ऊंचे स्तर से लगभग 13.50% (24,500) फिसल चुका है। सोमवार को एमसीएक्स पर सोना 0.61% की गिरावट के साथ 1,54,937 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट महज एक शुरुआत हो सकती है।  

रूस का यू-टर्न और डॉलर की वापसी 

सोने में आई इस अचानक गिरावट की सबसे बड़ी वजह रूस का अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) के प्रति बदलता रुख माना जा रहा है।  

डी-डॉलराइजेशन को झटका 

लंबे समय से डॉलर के खिलाफ अभियान चलाने वाला रूस अब अमेरिका के साथ फिर से डॉलर में व्यापार की संभावनाएं तलाश रहा है।  

ब्रिक्स की रणनीति 

ब्रिक्स देशों ने डॉलर को चुनौती देने के लिए गोल्ड बेस्ड ट्रेड का सपना देखा था। रूस की डॉलर में संभावित वापसी इस लक्ष्य को कमजोर कर रही है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग घट गयी है।  

ब्रिक्स और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का असर  

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में आयी उछाल कृत्रिम मांग के कारण थी।  

आक्रामक खरीदारी 

2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्वर्ण खरीद का 50% हिस्सा ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने खरीदा।  

ट्रंप फैक्टर 

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद टैरिफ के डर से दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने सोने का स्टॉक जमा करना शुरू किया, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया।   

भविष्यवाणी: क्या 1 लाख से नीचे आयेगा सोना?  

पीएसीई 360 के अमित गोयल जैसे विशेषज्ञों ने सोने को लेकर मंदी के संकेत दिये हैं। उनका मानना है कि सबसे पहले डिजिटल या पेपर गोल्ड में बिकवाली होगी, जिसका असर भौतिक सोने पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $3,000 प्रति औंस तक गिर सकता है। 

वहीं भारत में कीमतें 1,00,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर से भी नीचे जा सकती हैं। बाजार में आने वाली किसी भी छोटी तेजी को एक्सपर्ट डेड कैट बाउंस कह रहे हैं, यानी एक अस्थायी उछाल जो बड़ी गिरावट का संकेत है।

Published / 2026-02-12 18:33:30
जबरदस्त तेजी के बाद चांदी में ऐतिहासिक गिरावट

रिकॉर्ड तेजी के बाद ऐतिहासिक गिरावट, चांदी की कीमतों पर अब क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? 

एबीएन बिजनेस डेस्क। पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमतों ने निवेशकों को जबरदस्त रोलरकोस्टर राइड दी है। नये साल की शुरुआत में जहां चांदी ने रिकॉर्ड ऊंचाई छूकर शानदार रिटर्न दिया, वहीं जनवरी के आखिर में आयी ऐतिहासिक गिरावट ने बाजार को हिला दिया। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है- क्या चांदी फिर तेजी पकड़ेगी या उतार-चढ़ाव जारी रहेगा? 

रिकॉर्ड तेजी से अचानक गिरावट तक 

2026 की शुरुआत में चांदी की कीमतें एक औंस (31.10 ग्राम) पर 121 डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गयी थीं। मुद्रास्फीति की चिंता, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की मांग ने कीमतों को मजबूती दी। 

कॉमेक्स एक्सचेंज पर ट्रेडिंग वॉल्यूम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा और सिल्वर ईटीएफ में भारी निवेश देखने को मिला, लेकिन 30 जनवरी 2026 को बाजार ने बड़ा झटका दिया। जब एक ही दिन में कीमतों में 30% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गयी। फरवरी की शुरुआत में चांदी करीब 88 डॉलर प्रति औंस पर आ गयी।

गिरावट के पीछे क्या रहे कारण? 

इस गिरावट के पीछे औद्योगिक मांग या आपूर्ति नहीं, बल्कि राजनीतिक और मौद्रिक संकेतों की बड़ी भूमिका रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नेतृत्व को लेकर आयी खबरों से डॉलर मजबूत हुआ और ट्रेजरी यील्ड बढ़ी। निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा लौटते ही कीमती धातुओं से पैसा निकलना शुरू हुआ। वायदा बाजार में पोजीशन कटने और मार्जिन कॉल से बिकवाली और तेज हो गयी। 

मांग बनी मजबूत लेकिन अस्थिरता ज्यादा 

डॉलर मजबूत होने से वैश्विक खरीदारों के लिए चांदी महंगी हो गई, जिससे कीमतों पर दबाव आया। हालांकि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री से जुड़ी भौतिक मांग में बड़ी गिरावट नहीं आयी। चांदी की दोहरी भूमिका—सुरक्षित निवेश और औद्योगिक धातु—इसे सोने से ज्यादा अस्थिर बनाती है। 

क्या 200 डॉलर तक पहुंच सकती है कीमत? 

विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 में चांदी का 200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचना बेहद कठिन माना जा रहा है, हालांकि असंभव नहीं। इसके लिए महंगाई में तेज उछाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर संकट, आपूर्ति में बड़ी बाधा या खुदरा निवेशकों की भारी सट्टेबाजी जैसे कई बड़े कारक एक साथ होने जरूरी होंगे। सामान्य परिस्थितियों में एक किलो चांदी की कीमत 3-4 लाख रुपये के दायरे में रहने का अनुमान है, जबकि बेहद चरम हालात में यह 5 लाख रुपए के पार जा सकती है।

एसएलवी में निवेश—मौका या जोखिम?

आईशेयर सिल्वर ट्रस्ट (एसएलवी) जैसे सिल्वर ईटीएफ के जरिए निवेशकों ने 2026 में अच्छा रिटर्न कमाया है और यह पोर्टफोलियो विविधता के लिए उपयोगी रहा है लेकिन यह पूरी तरह कीमतों पर निर्भर होता है और आय नहीं देता। इसलिए अचानक गिरावट में नुकसान का जोखिम भी उतना ही बड़ा होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चांदी में निवेश करते समय समय, रणनीति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

Published / 2026-02-03 18:14:42
जानें शेयर मार्केट के रॉकेट रफ्तार के क्या हैं पांच कारण...

इन 5 कारणों से रॉकेट बना शेयर बाजार, सेंसेक्स 2072 अंक उछला 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के ऐलान के बाद मंगलवार, 3 फरवरी को भारतीय शेयर बाजारों में पिछले 5 सालों की सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 2,500 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि निफ्टी एक बार फिर 25,850 के स्तर के पार पहुंच गया। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ घटाने की घोषणा से निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। बाजार खुलते ही चौतरफा खरीदारी शुरू हो गयी। सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करते दिखे। बैंकिंग, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स और फाइनेंशियल शेयरों में खास तौर पर मजबूत खरीदारी रही। 

मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 3.5 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार करते नजर आये। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2072.67 अंक या 2.54 फीसदी की तेजी के साथ 83,739.13 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 639.15 अंक या 2.55 फीसदी उछलकर 25,727.55 के स्तर पर बंद हुआ।  

शेयर बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण 

1. भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील 

बाजार में तेजी का सबसे बड़ा कारण भारत-अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद घोषणा की कि भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। इससे टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। टेक्सटाइल सेक्टर की कम से कम 6 कंपनियों के शेयरों में 20 फीसदी का अपर सर्किट लगा। 

2. प्रतिद्वंदी देशों के मुकाबले भारत को बढ़त 

ट्रेड डील के बाद भारत को एक्सपोर्ट के मोर्चे पर प्रतिद्वंदी देशों पर बढ़त मिलती दिख रही है। भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लागू होगा, जबकि बांग्लादेश, श्रीलंका, ताइवान और वियतनाम पर 20 फीसदी और पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड व फिलीपींस पर 19 फीसदी टैरिफ रहेगा। इससे अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद जतायी जा रही है। 

3. रुपये और बॉन्ड मार्केट से सपोर्ट 

ट्रेड डील के ऐलान के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 1 फीसदी से ज्यादा मजबूत होकर 90.40 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं 10 साल की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 5 बेसिस प्वाइंट गिरकर 6.72 फीसदी पर आ गयी, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ। 

4. मजबूत वैश्विक संकेत 

एशियाई बाजारों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। साउथ कोरिया का कोस्पी 5 फीसदी उछला, जबकि जापान का निक्केई 225, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भी मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे। अमेरिकी बाजारों में सोमवार को आयी तेजी ने भी भारतीय बाजार को सपोर्ट दिया। 

5. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.51 फीसदी गिरकर 65.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल के सस्ते होने से महंगाई पर दबाव कम होने और ट्रेड बैलेंस में सुधार की उम्मीद बनी, जिसे शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

Published / 2026-02-02 21:20:37
शेयर मार्केट में लौटी तेजी

शेयर बाजार की जोरदार वापसी, सेंसेक्स-निफ्टी उछले, इन 4 कारणों से लौटी तेजी 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार, 2 फरवरी को शुरुआती गिरावट के बाद जोरदार रिकवरी देखने को मिली। बजट के बाद रविवार को आयी तेज बिकवाली के बाद निवेशक आज निचले स्तरों पर वैल्यू बाइंग करते नजर आये। 

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, बजट के लॉन्ग-टर्म संकेत और रुपये की मजबूती ने भी बाजार की धारणा को सहारा दिया। बीएसई सेंसेक्स 943.52 अंक यानी 1.17% की तेजी के साथ 81,666.46 के स्तर पर आ गया। एनएसई निफ्टी 262.95 अंक या 1.06% चढ़कर 25,088.40 पर बंद हुआ। 

बाजार में रिकवरी के पीछे 4 बड़े कारण 

1. वैल्यू बाइंग से लौटी खरीदारी 

पिछले कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने आकर्षक वैल्यूएशन पर चुनिंदा शेयरों में खरीदारी की। 1 फरवरी को बजट के दिन बाजार ने प्रतिशत के लिहाज से छह साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की थी। शुरूआती घबराहट कम होने के बाद निवेशकों ने मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में एंट्री ली, जिससे बाजार को सपोर्ट मिला। 

2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 4.14% टूटकर 66.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए राहत मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव कम होता है। इसी उम्मीद ने शेयर बाजार को मजबूती दी। 

3. बजट के लॉन्ग-टर्म संकेतों से बढ़ा भरोसा 

बजट 2026-27 को लेकर शुरुआती नकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अब निवेशक इसके दीर्घकालिक फायदों पर फोकस कर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, ग्लोबल डेटा सेंटर के लिए टैक्स इंसेंटिव, एग्रीकल्चर और टूरिज्म सेक्टर को समर्थन जैसे उपायों ने सेंटीमेंट सुधारा है। 53.5 लाख करोड़ रुपये के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के संकेतों को बाजार ने सकारात्मक रूप से लिया। 

4. रुपये की मजबूती से मिला अतिरिक्त सहारा 

सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 37 पैसे मजबूत होकर 91.56 पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपए को सपोर्ट मिला। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक बजट ने रुपये को सीधी राहत भले न दी हो लेकिन निवेशकों का भरोसा जरूर बढ़ाया है। हालांकि सरकार की 17.2 लाख करोड़ रुपए की उधारी योजना बाजार के लिए आगे चिंता का विषय बनी रह सकती है।

Published / 2026-02-02 21:19:20
चांदी में अबतक शिखर से 46% की गिरावट

चांदी में 50 साल की सबसे बड़ी गिरावट, क्या 2 लाख के नीचे आयेगा भाव? निवेशकों में घबराहट 

एबीएन बिजनेस डेस्क। 29 जनवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसी) पर चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का लाइफटाइम हाई बनाया था लेकिन महज 4 दिन से भी कम समय में कीमतें बुरी तरह धराशायी हो गयींं। सोमवार तक चांदी अपने शिखर से करीब 46 फीसदी टूट चुकी है, जो बीते 50 साल की सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है। 

इस गिरावट ने साल 1980 के ऐतिहासिक क्रैश को भी पीछे छोड़ दिया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी को अपने पीक से 70% गिरने में करीब 5 महीने लगे थे। मौजूदा हालात में चांदी कुछ ही दिनों में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज कर चुकी है, जो उस दौर में भी नहीं देखी गयी थी। 

70-80 घंटों में करीब 2 लाख रुपये टूटे दाम 

अगर रुपए के हिसाब से देखें तो चांदी ने 70-80 घंटों में करीब 1.94 लाख रुपये की गिरावट दर्ज की है। 4.20 लाख के उच्च स्तर से फिसलकर यह 2.25 लाख रुपये तक आ गयी यानी औसतन हर घंटे करीब 2,400 रुपये की गिरावट दर्ज हुई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। 

मौजूदा हालात क्या कहते हैं? 

सोमवार को एमसी पर चांदी 32,342 रुपये टूटकर 2,35,339 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। सुबह चांदी 2,67,501 रुपये पर खुली थी, जबकि रविवार की स्पेशल ट्रेडिंग में यह 2,65,652 रुपये पर बंद हुई थी। 

क्या 2 लाख से नीचे जायेगी चांदी? 

जानकारों के मुताबिक, अगर आने वाले सत्र में 25,000 रुपये तक की और गिरावट आती है, तो चांदी 2 लाख रुपये से नीचे फिसल सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेडिंग के दौरान 50% तक की गिरावट भी देखी जा सकती है, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट होगी। 

गिरावट की बड़ी वजहें क्या हैं? 

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, चांदी में गिरावट की सबसे बड़ी वजह गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का तेज बढ़ना है, जो फिलहाल 61 के पार पहुंच चुका है और इसके 70 तक जाने की आशंका है। इसके अलावा फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेत न देना, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल तनाव में कमी भी कीमतों पर दबाव बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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