टीम एबीएन, रांची। भारतीय जिम्नास्टिक्स महासंघ द्वारा जारी दिशा-निदेर्शों तथा नेशनल कॉम्पिटिशन पाथवे (एनसीपी)-2026 के अंतर्गत झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन, रांची द्वारा राज्य स्तरीय अनिवार्य जजेज कोर्स (स्टेट लेवल कम्पल्सरी जजेज कोर्स) का आयोजन जुलाई 2026 के द्वितीय सप्ताह में रांची में किया जायेगा।
यह कोर्स पुरुष कलात्मक जिम्नास्टिक्स (एमएजी) एवं महिला कलात्मक जिम्नास्टिक्स (डब्ल्यूएजी) के ग्रेड-4 से ग्रेड-7 तक के जजों, प्रशिक्षकों तथा तकनीकी अधिकारियों के लिए आयोजित किया जा रहा है। कोर्स का मुख्य उद्देश्य राज्य में तकनीकी अधिकारियों की दक्षता एवं क्षमता का विकास करना तथा एनसीपी-2026 के अनुरूप प्रतियोगिताओं के सफल संचालन हेतु प्रशिक्षित एवं योग्य जजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कोर्स का संचालन भारतीय जिम्नास्टिक्स महासंघ द्वारा नामित तकनीकी विशेषज्ञों एवं फैकल्टी सदस्यों के मार्गदर्शन में किया जायेगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नवीनतम तकनीकी नियमों, जजिंग प्रक्रियाओं तथा प्रतियोगिता संचालन से संबंधित आवश्यक जानकारियों से अवगत कराया जायेगा। कोर्स में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रतिभागी से 1,000 (एक हजार रुपये मात्र) का पंजीकरण शुल्क लिया जायेगा।
इस शुल्क के अंतर्गत प्रतिभागियों को कोर्स सामग्री, स्टेशनरी तथा स्मृति-स्वरूप टी-शर्ट उपलब्ध करायी जायेगी। झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन ने राज्य के सभी जिला जिम्नास्टिक्स संघों से अनुरोध किया है कि वे इस कोर्स हेतु कम-से-कम दो पात्र प्रतिभागियों का नामांकन सुनिश्चित करें।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिभागियों को अपने यात्रा, आवास एवं भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। वहीं, कोर्स के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन द्वारा उपलब्ध करायी जायेंगी।
कोर्स की विस्तृत तिथि, कार्यक्रम, पंजीकरण प्रक्रिया तथा अन्य आवश्यक दिशा-निर्देश शीघ्र ही जारी किये जायेंगे। झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन ने राज्य के सभी जिम्नास्टिक्स प्रशिक्षकों, जजों एवं तकनीकी अधिकारियों से इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा अपनी तकनीकी योग्यता को अद्यतन करने का आग्रह किया है। उक्त जानकारी झारखंड जिम्नास्टिक्स एसोसिएशन के सचिव तूलिका श्रीवास्तव ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने राज्य में चिकित्सा शिक्षा एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से रिम्स, रांची में स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) तथा सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में व्यापक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने रिम्स निदेशक को पत्र भेजकर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।
पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा संचालित एक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में यूजी, पीजी एवं सुपर स्पेशियलिटी सीटों की वृद्धि के लिए प्रति अतिरिक्त सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जा रही है। इस योजना में कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार तथा 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा।
विभाग ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पहले ही महात्मा गांधी मेमोरियल चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, जमशेदपुर में यूजी सीटों को 150 से बढ़ाकर 250 तथा पीजी सीटों को 49 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसी प्रकार शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, धनबाद में यूजी सीटों को 100 से बढ़ाकर 250 तथा पीजी सीटों को 19 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को भी भारत सरकार द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है।
इसी क्रम में अब रिम्स, रांची के लिए भी महत्वाकांक्षी विस्तार योजना तैयार की जा रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यूजी सीटों की संख्या 180 से बढ़ाकर 250, पीजी सीटों की संख्या 176 से बढ़ाकर 275 तथा सुपर स्पेशियलिटी सीटों की संख्या 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए रिम्स प्रशासन को आवश्यक अधोसंरचना, भवन, उपकरण एवं अन्य संसाधनों का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासी परिषद की स्वीकृति के बाद राज्य सरकार को भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रस्ताव को भारत सरकार को अग्रसारित किया जा सके।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सीटों की वृद्धि के लिए पुराने भवनों के जीर्णोद्धार, जर्जर एवं अनुपयोगी भवनों को ध्वस्त कर नये भवनों का निर्माण तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त अधोसंरचना विकसित करने के प्रस्ताव भी शामिल किये जा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के अंतर्गत छात्रावास निर्माण को लेकर भी नई रणनीति अपनाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने सिद्धांतत: निर्णय लिया है कि छात्रावासों का निर्माण प्रत्यक्ष सरकारी व्यय के बजाय पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर कराया जाए।
इसके लिए भारत सरकार के वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) से अनुदान प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इससे राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा तथा छात्रावासों के संचालन, रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
पत्र में रिम्स परिसर में पहले से निर्मित छात्रावासों के उन्नयन, रखरखाव तथा भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन कर नये छात्रावासों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा गया है। इस प्रस्ताव को शासी परिषद के एजेंडे में शामिल कर अनुमोदन प्राप्त करने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।
इस पहल के सफल क्रियान्वयन से रिम्स न केवल पूर्वी भारत के प्रमुख चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, बल्कि झारखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने तथा राज्य के विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
एबीएन कैरिया डेस्क (रांची)। रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई बंद कर केवल विश्वविद्यालय के विभागों में संचालित करने की खबर ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के बीच गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने कहा कि समाचारों के अनुसार विश्वविद्यालय से संबद्ध अनेक महाविद्यालयों में पीजी की सीटों का आवंटन शून्य कर दिया गया है तथा अब स्नातकोत्तर अध्ययन केवल विश्वविद्यालय परिसर के विभागों में संचालित किए जाने की तैयारी है।
यह निर्णय झारखंड की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों की अनदेखी करता प्रतीत होता है। झारखंड का एक बड़ा भाग ग्रामीण, आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित है, जहां से हजारों विद्यार्थी वर्षों से अपने निकटवर्ती महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करते रहे हैं। यदि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए केवल रांची या विश्वविद्यालय मुख्यालयों पर निर्भर होना पड़ेगा, तो आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत कठिन हो जाएगा।
वर्तमान समय में झारखंड उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पहले से अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। सकल नामांकन अनुपात, आधारभूत संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता तथा उच्च शिक्षा तक पहुंच जैसे मुद्दों पर राज्य को अभी लंबी दूरी तय करनी है। ऐसी स्थिति में महाविद्यालयों से पीजी शिक्षा समाप्त करना उच्च शिक्षा के विस्तार के बजाय उसके संकुचन की दिशा में उठाया गया कदम प्रतीत होता है।
यह समझ से परे है कि जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति उच्च शिक्षा के विस्तार, पहुंच और समावेशिता की बात करती है, तब विद्यार्थियों को उनके स्थानीय महाविद्यालयों से वंचित करने वाली व्यवस्था क्यों लागू की जा रही है। इससे छात्राओं, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तथा दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं पर सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अनेक विद्यार्थी अतिरिक्त आवास, परिवहन एवं अन्य खर्च वहन करने में सक्षम नहीं होंगे, जिसके कारण ड्रॉपआउट दर में वृद्धि की आशंका है।
झारखंड की परिस्थितियों को महानगरों या विकसित राज्यों के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। यहां की भौगोलिक विषमताएं, परिवहन की सीमाएं तथा सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताएं अलग हैं। एसी कमरों में बैठकर बनायी गयी नीतियां तब तक सफल नहीं हो सकतीं, जब तक वे जमीनी हकीकतों को ध्यान में न रखें। उच्च शिक्षा किसी प्रयोगशाला का विषय नहीं है, जहां विद्यार्थियों के भविष्य को दांव पर लगाकर लगातार नये प्रयोग किये जायें।
हम रांची विश्वविद्यालय, झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा संबंधित नीति-निर्माताओं से आग्रह करते हैं कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करें। विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ महाविद्यालयों में संचालित पीजी पाठ्यक्रमों को भी जारी रखा जाये, ताकि शिक्षा का विकेंद्रीकरण, समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
उच्च शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों तक पहुंच होनी चाहिए, न कि विद्यार्थियों के लिए शिक्षा तक पहुंचना कठिन बनाना। झारखंड के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय की व्यापक समीक्षा समय की मांग है। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष ऋतुराज शाहदेव ने दी।
एबीएन कैरियर डेस्क। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू छात्र संघ) की ओर से एक प्रतिनिधि मंडल ने मारवाड़ी कॉलेज में संचालित बीसीए पाठ्यक्रम को बंद करने के निर्णय/ प्रस्ताव की ओर आकृष्ट डीएसडब्ल्यू को कराया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मारवाड़ी कॉलेज में बीसीए पाठ्यक्रम वर्षों से संचालित है तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ इस पाठ्यक्रम के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी एवं कंप्यूटर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आजसू छात्र संघ इस निर्णय का जोरदार विरोध करता है।
वर्तमान समय में आईटी एवं कंप्यूटर शिक्षा की मांग निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में बीसीए जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक पाठ्यक्रम को बंद करना छात्रों के हितों के विरुद्ध होगा। इससे हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर सीमित हो जायेगा।
आजसू आग्रह करती है कि मारवाड़ी कॉलेज में बीसीए पाठ्यक्रम को बंद करने संबंधी किसी भी निर्णय को तत्काल निरस्त किया जाए तथा आगामी सत्रों में नियमित रूप से नामांकन एवं पठन-पाठन सुनिश्चित किया जाए। यदि छात्रों के हितों की अनदेखी कर इस निर्णय को लागू किया जाता है तो आजसू छात्र संघ छात्रहित में लोकतांत्रिक आंदोलन एवं व्यापक विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश सचिव सौरभ शर्मा, राजेश सिंह, सक्षम झा, अब्दुल खान एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश सचिव सक्षम झा ने दी।
एबीएन कैरियर डेस्क। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित माध्यमिक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा के उर्दू विषय का अंतिम परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों में असंतोष और नाराजगी का माहौल है। परीक्षार्थियों का आरोप है कि उर्दू विषय के कई विवादित प्रश्नों पर दर्ज करायी गयी आपत्तियों और प्रस्तुत किए गए प्रमाणों पर उचित विचार किये बिना ही आयोग ने परिणाम प्रकाशित कर दिया।
अभ्यर्थियों के अनुसार, प्रश्न पत्र के प्रश्न संख्या 01, 10, 15, 18, 28, 39, 41, 64, 75, 93, 94, 99, 109, 122, 123, 139 और 144 में गंभीर त्रुटियां थीं। उनका कहना है कि कुछ प्रश्नों में गलत विकल्प को सही उत्तर के रूप में स्वीकार किया गया, कुछ प्रश्नों के सभी विकल्प त्रुटिपूर्ण थे, जबकि कई प्रश्न अस्पष्ट अथवा अधूरे थे।
इस संबंध में अभ्यर्थियों ने विषय विशेषज्ञों की पुस्तकों और प्रमाणिक संदर्भ सामग्री के आधार पर आयोग के समक्ष आपत्तियां दर्ज कराते हुए उत्तर-कुंजी में संशोधन की मांग की थी।
परीक्षार्थियों का आरोप है कि आयोग ने इन 17 प्रश्नों को लेकर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी नहीं किया और न ही उत्तर-कुंजी में अपेक्षित सुधार किया। इसके बावजूद अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया, जिससे कई उम्मीदवारों के चयन और मेरिट सूची पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जतायी जा रही है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि विवादित प्रश्नों को रद्द कर सभी परीक्षार्थियों को अंक दिये जाते अथवा सही उत्तरों को स्वीकार किया जाता, तो परिणाम में महत्वपूर्ण बदलाव संभव था। उन्होंने आयोग से विवादित प्रश्नों की पुन: समीक्षा, संशोधित उत्तर-कुंजी जारी करने तथा परिणाम पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
मामले को लेकर अभ्यर्थियों में रोष बढ़ता जा रहा है। कई उम्मीदवारों ने चेतावनी दी है कि यदि आयोग द्वारा जल्द उचित कदम नहीं उठाया गया, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। वहीं, इस विवाद के बाद आयोग की परीक्षा प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
एबीएन कैरियर डेस्क। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक मुं स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों से रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति करने और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने एएनएम और जीएनएम के खाली पदों पर तत्काल बहाली प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पेशलिस्ट डॉक्टरों और अन्य चिकित्सकों की नियुक्ति भी जल्द पूरी करने को कहा।
बैठक में एम्बुलेंस सेवा को लेकर मिल रही शिकायतों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं से जुड़ी परेशानियों की खबरें लगातार सामने आ रही है। उन्होंने ओला और उबर की तर्ज पर राज्यभर में एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की योजना तैयार करने को कहा। इसके लिए एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रस्ताव देने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने राज्य के रेफरल सिस्टम का आॅडिट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न निदेशालयों के पुनर्गठन की योजना भी तैयार करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य जरूरतें अलग-अलग हैं।
इसलिए दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कार्य योजनाएं तैयार की जाये। अस्पतालों की साफ-सफाई और रख-रखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। बैठक में पूरे राज्य में 4 से 5 दिन के नेत्र जांच शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया।
मुख्यमंत्री ने रांची सदर अस्पताल में स्थापित सेंट्रल रेडियोलॉजी हब की सराहना करते हुए कहा कि इससे राज्य के सभी जिलों को जोड़ा गया है। आभा कार्ड को लेकर राज्यव्यापी अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अभियान चलाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में नयी मेडिकल तकनीकों का अध्ययन कर भविष्य की योजना तैयार करने को कहा। साथ ही मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजना के तहत सदर अस्पतालों को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। बैठक में मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी सीटें बढ़ाने, ब्लड सेपरेशन यूनिट स्थापित करने, ब्लड बैंक की लाइसेंस प्रक्रिया में तेजी लाने और ब्लड डोनेशन को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिये गेय।
इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों का आॅडिट कराने, पुराने सदर अस्पतालों में एयर कूलिंग व्यवस्था विकसित करने, मेडिकल कॉलेजों में रिहैब और थेरेपी सेंटर शुरू करने तथा निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का काम समय पर पूरा कराने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने अबुआ दवाखाना योजना को भी जल्द शुरू करने की दिशा में तेजी लाने का निर्देश दिया।
टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रतिनिधिमंडल ने रांची विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया से मुलाकात कर स्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों में नामांकन प्रक्रिया अविलंब प्रारंभ करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम प्रकाशित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा में नामांकन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा उनमें असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ज्ञापन के माध्यम से आजसू ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोपरि रखते हुए स्नातक पाठ्यक्रमों की नामांकन प्रक्रिया जल्द से जल्द प्रारंभ की जाए, ताकि छात्र-छात्राएं समय पर अपनी पढ़ाई शुरू कर सकें। साथ ही नामांकन संबंधी सभी आवश्यक दिशा-निर्देश एवं कार्यक्रम भी शीघ्र जारी करने की मांग की गयी।
कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और नामांकन प्रक्रिया को लेकर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। आजसू ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर संगठन निरंतर सक्रिय है और विद्यार्थियों के अधिकारों एवं उनकी शैक्षणिक समस्याओं के समाधान के लिए संघर्षरत रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा, प्रदेश सचिव रोशन नायक, राजेश सिंह, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, सौरभ यादव, अब्दुल खान, राहुल, यश सोनी, पंकज, अभित कुमार, हिमांशु सिंह, शुरदीप, अमित, निशांत इत्यादि उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रदेश अध्यक्ष अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के ओम वर्मा ने दी।
टीम एबीएन, रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए वर्षों से लागू 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त करने के निर्णय पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
यह निर्णय झारखंड के प्रतिभाशाली एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों विद्यार्थियों के हितों के प्रतिकूल है। आजसू का मानना है कि बीआईटी मेसरा झारखंड की धरती पर स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसकी स्थापना और विकास में राज्य की भूमि, संसाधनों एवं जनता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
ऐसे में राज्य के विद्यार्थियों को मिलने वाले अवसरों में कटौती किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि होम स्टेट कोटा के माध्यम से झारखंड के छात्रों, विशेषकर ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता रहा है। इस व्यवस्था को समाप्त करने से राज्य के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा तथा उनके उच्च शिक्षा के अवसर प्रभावित होंगे।
आजसू की बीआईटी मेसरा में झारखंड के छात्रों के लिए पूर्व की भांति 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा तत्काल बहाल किया जाए। राज्य सरकार इस विषय में संस्थान प्रबंधन से अविलंब वार्ता कर झारखंडी छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
राज्य के विद्यार्थियों के लिए आरक्षण एवं विशेष अवसरों की व्यवस्था को किसी भी परिस्थिति में कमजोर न किया जाए। प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि यदि झारखंड के छात्रों के हित में पूर्ववत व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो आजसू छात्र-युवा हितों की रक्षा के लिए चरणबद्ध आंदोलन चलाने को बाध्य होगी।
आंदोलन के तहत ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन, छात्र सम्मेलन तथा आवश्यकतानुसार व्यापक जनआंदोलन आयोजित किए जाएंगे। झारखंड के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उक्त जानकारी अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने दी।
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