एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करने के बाद खुशी व राहत की सांस लेते हुए नाबालिग पीड़िता की मां ने कहा कि इस आदेश से न्याय में उनका भरोसा बहाल हुआ है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल मार्च में दिए गए फैसले में कहा था कि नाबालिग पीड़िता के वक्ष पकड़ने व सलवार का नाड़ा खोलने को बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता और यह सिर्फ बलात्कार की तैयारी थी। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तत्काल पीड़िता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण और आपराधिक दंड विधान के स्थापित सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ करार देते हुए खारिज कर दिया। साथ ही, शीर्ष अदालत ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से लगे बलात्कार के प्रयास के आरोप को भी बहाल कर दिया।
पीड़िता, जो घटना के समय सिर्फ 11 वर्ष की थी, की मां ने कहा, इस फैसले से मेरा यह विश्वास बहाल हुआ है कि कानून बच्चों व पीड़ितों की सुरक्षा कर सकता है। मुझे उम्मीद है कि अब किसी बच्चे को अपने साथ हुए अत्याचार का विश्वास दिलाने के लिए ठोकर नहीं खानी पड़ेगी और इस फैसले से उन बहुत सारे बच्चों को मदद मिलेगी जो आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेआरसी तब उनके साथ खड़ा हुआ जब उन्हें लग रहा था कि वे असहाय हैं और कोई उनकी आवाज नहीं सुनेगा। उनके समर्थन से हम न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने की हिम्मत जुटा पाए।
नवंबर 2021 में उत्तर प्रदेश के कासंगज में दो युवक 11 साल की नाबालिग बच्ची को जबरन घसीट कर एक पुलिया के नीचे ले गए और उसके कपड़े उतारने की कोशिश की। बच्ची की चीख पुकार सुन उधर से गुजर रहे दो राहगीर वहां पहुंचे जिसके बाद दोनों आरोपी मौके से भाग निकले। इस मामले में मार्च 2025 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, यह कृत्य सिर्फ बलात्कार की तैयारी है और यह स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि यह बलात्कार का प्रयास या बलात्कार है। इस फैसले के नतीजे में आरोपों की गंभीरता काफी कम हो गई।
बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता की ओर से शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इस तरह के मामलों में और अधिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश तय करने का अनुरोध भी किया गया।
हाई कोर्ट के आदेशों को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल को निर्देश दिया कि वह यौन शोषण के संवेदनशील पीड़ितों से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों व न्यायिक प्रक्रियाओं में संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से एक समग्र व व्यापक दिशानिर्देश तय करने के लिए एक समिति गठित करे। कमेटी से तीन महीने में यह रिपोर्ट तैयार करने व सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का अनुरोध किया गया है।
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की ओर से पीड़िता की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एच. एस. फूलका ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा, यह बच्चों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक दूरगामी फैसला है। यह एक स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायिक विवेचना में पीड़ितों के खिलाफ किसी भी तरह के भेदभाव या पूर्वाग्रह की कोई जगह नहीं है। इस फैसले के लिए हम खंडपीठ के आभारी हैं।” शीर्ष अदालत ने दिशानिर्देश तय करने में नेटवर्क से सुझाव भी मांगे हैं।
इसी बीच, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, यह फैसला यौन हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय, गरिमा और संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के हमारे लंबे और दृढ़ संघर्ष का नतीजा है। हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं जिसने न्यायिक तंत्र में भरोसा बहाल किया है और इस विश्वास को मजबूत किया है कि बच्चों एवं कमजोर व संवेदनशील पृष्ठभूमि के लोगों के खिलाफ अपराधों को गंभीरता और अपेक्षित संवेदनशीलता के साथ देखा जाएगा।
टीम एबीएन, रांची। महाशिवरात्रि को लेकर राजधानी रांची की ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। भव्य शिव बारात और मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रांची ट्रैफिक पुलिस ने यह बदलाव किया है। शहर की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए रविवार को सुबह पांच बजे से रात दस बजे तक बड़े और भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
ट्रैफिक जाम से बचने के लिए दूसरे जिलों से आने वाले भारी वाहनों की शहर में नो एंट्री रहेगी। पिस्का मोड़, बूटी मोड़ और हजारीबाग रोड में भारी मालवाहक वाहन, सिटी राइड बस और ट्रकों का प्रवेश वर्जित रहेगा। इन वाहनों को शहर के बाहर रिंग रोड के माध्यम से अपने गंतव्य की ओर भेजा जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाये जाने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों पर बुलडोजर चल रहा था। झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट द्वारा दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों पर बुलडोजर चल रहा था। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई।
इस संबंध में रौनक़ कुमार सरिता देवी एवं अन्य की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर कर दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पूरे मामले में हेहल सीओ को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
टीम एबीएन, रांची। हाईकोर्ट ने रातु रोड स्थित मधुकम इलाके में दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट द्वारा दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाये जाने से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जिनके घरों पर बुलडोजर चल रहा था। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।
इस संबंध में रौनक़ कुमार, सरिता देवी एवं अन्य की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर कर दखल दिहानी की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पूरे मामले में हेहल सीओ को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
टीम एबीएन, रांची। खादगढ़ा बस स्टैंड पर लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं में पुलिस ने एक संदिग्ध आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लोअर बाजार थाने की पुलिस ने अर्जुन भोक्ता नामक आरोपी को पकड़ा, जिसके कब्जे से माचिस का डिब्बा और लाइटर बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में आरोपी पर जानबूझकर आग लगाने का शक है।
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि 1 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 2:30 बजे खादगढ़ा बस स्टैंड पर खड़ी छह बसों में अचानक आग लग गयी थी, जिसमें सभी बसें जलकर खाक हो गयी। इस घटना की जांच जारी थी, उसी दौरान 2 फरवरी को बस टर्मिनल के सामने खड़ी सीटी बस (जेएच 01 एएफ 6969) में फिर आग लग गयी। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग बुझा ली गयी।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल में एक संदिग्ध व्यक्ति का हाथ फुटेज में कैद हुआ। फुटेज में देखा गया कि बस में आग लगने से ठीक पहले वह व्यक्ति हाथ में कपड़ा लिये बस में घुसा और बाहर निकलते ही आग भड़क उठी। पुलिस ने आगे जांच की तो 1 फरवरी की घटना वाली पहली जलकर खाक हुई बस के पांच मिनट पहले भी यही व्यक्ति उसी बस के पास से गुजरता नजर आया।
इन सुरागों के आधार पर लोअर बाजार थाने में 3 फरवरी को कांड संख्या 31/2026 धारा 326(जी)/327(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया। विशेष टीम ने छापेमारी कर आरोपी को उसके घर से दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपी अर्जुन भोक्ता है, जो रांची के सिकिदरी का रहने वाला है। गिरफ्तार आरोपी के पास से एक माचिस का डिब्बा और एक लाइटर भी बरामद किया गया है।
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि आरोपी को जिस समय पकड़ा गया वह अत्यधिक नशे में था या तो उसने शराब का नशा किया था या फिर डेंड्रॉइट का। सिटी एसपी के अनुसार, इस मामले में दर्जनों लोगों से पूछताछ की गयी है। लेकिन अंत में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पीएफ से जुड़े टैक्स नियमों को आसान और सरल बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया है। मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि ये बदलाव कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद होंगे, क्योंकि अब नियम एक जैसे और समझने में आसान हो जायेंगे।
पहले इनकम टैक्स के नियम और कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 में काफी फर्क था। खासकर प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स के लिए टैक्स छूट की पात्रता, निवेश के तरीके और एम्प्लॉयर के योगदान की सीमा अलग-अलग थी। इस वजह से कंपनियों और कर्मचारियों को काफी उलझन होती थी और कई बार अनावश्यक कानूनी झंझट भी बढ़ जाते थे।
बजट में अब नियम ये हैं कि इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की स्केड्यूल क के तहत मान्यता पाने वाले प्रोविडेंट फंड्स को केवल तभी मान्यता मिलेगी जब उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट हासिल कर ली हो। धारा 17 के तहत कंपनियां मासिक ईपीएफ रिटर्न फाइल करने और कर्मचारियों के खातों को मेंटेन करने से छूट मांग सकती हैं। इसका मतलब है कि अब टैक्स छूट और कानूनी छूट एक ही आधार पर मिलेगी, जिससे दोहरी व्यवस्था खत्म हो जायेगी।
पहले इनकम टैक्स के नियमों में पीएफ फंड्स के निवेश का तरीका अलग था और सरकारी सिक्योरिटीज में 50% की सख्त सीमा लगी थी। अब ये सीमा हटा दी गई है। आगे निवेश के नियम पूरी तरह ईपीएफओ के फ्रेमवर्क और उससे जुड़े नियमों के हिसाब से होंगे। इससे पीएफ फंड्स को ज्यादा लचीलापन मिलेगा और वे बेहतर रिटर्न के लिए सही जगह निवेश कर सकेंगे।
अब एम्प्लॉयर का पीएफ में योगदान सालाना 7.5 लाख रुपये तक सीमित रहेगा। इस सीमा तक का योगदान टैक्स-फ्री होगा, लेकिन इससे ज्यादा होने पर अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगेगा और उसे परक्विजिट माना जायेगा। पहले योगदान पर कुछ प्रतिशत वाली सीमाएं और एम्प्लॉयी-एम्प्लॉयर के बराबर योगदान की शर्तें थीं, जो अब हटा दी गई हैं।
ईपीएफओ ने कहा है कि बजट के इन बदलावों से पीएफ से जुड़े नियम अब पूरी तरह कानून के अनुसार हो गये हैं। इससे कर्मचारियों, कंपनियों और ट्रस्ट्स को राहत मिलेगी और झंझट कम होंगे। यह कदम रिटायरमेंट सेविंग्स को मजबूत और आसान बनाने के लिए बहुत अहम है।
टीम एबीएन, रांची। रांची की सड़कों पर मोडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न के जरिए लोगों को परेशान करने वालों पर रांची पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों से जब्त किये गये सैकड़ों मोडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न को प्रशासन ने रोड रोलर चलाकर नष्ट कर दिया।
बीते कुछ दिनों से रांची पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ट्रैफिक जागरूकता अभियान के तहत ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही थी, जिनमें प्रेशर हॉर्न और मोडिफाइड साइलेंसर लगाये गये थे। कार्रवाई के दौरान जब्त किये गये इन उपकरणों को शुक्रवार को सार्वजनिक रूप से नष्ट किया गया, ताकि नियम तोड़ने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शौक और स्टाइल के नाम पर वाहन चालकों द्वारा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी की जा रही थी, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
खासकर तेज और कर्कश आवाज वाले साइलेंसर और हॉर्न से शहर का माहौल प्रभावित हो रहा था। ग्रामीण एसपी प्रवीन पुष्कर ने बताया कि मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगाना मोटर वाहन अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ऐसे उपकरणों से अत्यधिक डेसीबल की आवाज निकलती है, जो न केवल परेशान करने वाली होती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है।
पुष्कर ने लोगों से अपील की कि वे इस तरह के साइलेंसर और हॉर्न का इस्तेमाल न करें, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी। वहीं, रांची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में खासकर युवा वर्ग द्वारा प्रेशर हॉर्न और मोडिफाइड साइलेंसर का अधिक इस्तेमाल किया जा रहा था। यह न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सड़क पर चलने वाले आम लोगों को भी काफी दिक्कत होती है।
इसी को लेकर लगातार अभियान चलाया गया, जिसमें सैकड़ों साइलेंसर और हॉर्न जब्त किये गये। ट्रैफिक एसपी ने बताया कि आज डेमोंस्ट्रेशन के तौर पर इन सभी जब्त सामानों को नष्ट किया गया, ताकि यह साफ संदेश दिया जा सके कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।
टीम एबीएन, रांची। रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड पर स्थित कोयल नदी रेलवे पुल संख्या 115 में आयी तकनीकी खामी के बाद इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन फिलहाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पुल के पिलर संख्या चार और पांच में दरार पाये जाने के बाद सुरक्षा कारणों से यह फैसला लिया गया।
मंगलवार को दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार मिश्र ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के साथ पुल का स्थलीय निरीक्षण किया। महाप्रबंधक विशेष निरीक्षण यान (स्पीक कोच) से लोहरदगा पहुंचे और कोयल नदी पुल पर करीब दो घंटे तक स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले पिलर संख्या पांच की मरम्मत को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके बाद पिलर संख्या छह और सात को भी दुरुस्त किया जायेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार 15 फरवरी तक सॉइल टेस्टिंग का कार्य पूरा कर लिया जायेगा, ताकि मरम्मत कार्य में किसी तरह की तकनीकी कमी न रह जाये।
रेलवे का लक्ष्य है कि मार्च के अंतिम सप्ताह तक सीमित रूप में ट्रेनों का परिचालन फिर से शुरू कर दिया जाये, जबकि पुल की संपूर्ण मरम्मत और मजबूती का कार्य मई 2026 तक पूरा किया जायेगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्था की घोषणा की है।
लोहरदगा स्टेशन से करीब सात किलोमीटर दूर इरगांव हॉल्ट तक मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन किया जायेगा। वहीं लोहरदगा से इरगांव तक यात्रियों के लिए बस सेवा उपलब्ध करायी जायेगी। इसके साथ ही लोहरदगा से टोरी के लिए कनेक्टिंग ट्रेन की व्यवस्था भी की जायेगी।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रांची से लोहरदगा के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन फिलहाल मार्च तक सस्पेंड रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मरम्मत कार्य के दौरान किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाया जायेगा।
पुल की मरम्मत के लिए तीन से चार तकनीकी टीमें 24 घंटे लगातार काम करेंगी। साथ ही भविष्य में कोयल नदी पर नये पुल के निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
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