राज काज

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Published / 2022-03-09 15:17:10
सरकारी दूरसंचार फर्मों की परिसंपत्तियां फिर होंगी नीलाम

एबीएन डेस्क (निकुंज ओहरी)। केंद्र जल्द ही भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और एमटीएनएल की परिसंपत्तियों की फिर से नीलामी शुरू करेगा। सरकार बिक्री की उन कुछ शर्तों को हटाने या नरम बनाने पर फैसला लेने जा रही है, जिनकी वजह से पहले प्रयास में बोलियां नहीं मिल पाई थीं। निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने अपने नए ई-बोली पोर्टल के जरिये बिक्री के लिए बीएसएनएल और एमटीएनएल की छह परिसंपत्तियां चिह्नित की थीं, लेकिन यह नीलामी निवेशकों को बहुत ज्यादा नहीं लुभा पाई। इस पोर्टल को सरकारी कंपनी एमएसटीसी ने परिसंपत्ति मुद्रीकरण के लिए विकसित किया था। दीपम ने सरकार द्वारा नियुक्त परिसंपत्ति सलाहकारों को समाधान के लिए बोली के मापदंडों में दिक्कतें चिह्नित करने को कहा था। एक अधिकारी ने कहा कि इन परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए कुछ शर्तों को नरम बनाया जाएगा। दीपम सचिव की अगुआई वाला अंतर-मंत्रालय समूह इन दो सरकारी दूरसंचार कंपनियों की और परिसंपत्तियां चिह्नित कर उन्हें मंजूरी देगा। इन परिसंपत्तियों को कर्ज घटाकर इन कंपनियों को उबारने की रणनीति के तहत इस सप्ताह ही बिक्री के लिए रखा जाएगा। इन दो दूरसंचार कंपनियों की छह परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण भी 2019 के आखिर में केंद्र द्वारा घोषित पुनरुद्धार पैकेज का हिस्सा था। दूरसंचार विभाग इन छह परिसंपत्तियों की बिक्री से 3,000 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद कर रहा था। इनमें बीएसएनएल के चार भूखंड और मुंबई में एमटीएनएल की भूमि एवं आवासीय फ्लैट शामिल हैं। ये परिसंपत्तियां पहले दीपम के परिसंपत्ति मुद्रीकरण पोर्टल पर दिखाई गई थीं। इनमें बीएसएनएल की हैदराबाद में करीब 400 करोड़ रुपये की भूमि, राजपुरा में करीब 70 करोड़ रुपये की भूमि, भावनगर में 41 करोड़ रुपये की 5 एकड़ भूमि और कोलकाता में 161 करोड़ रुपये मूल्य की 11 एकड़ भूमि शामिल है। एमटीएनएल की मुंबई में 1.36 एकड़ की परिसंपत्ति का मूल्य 270 करोड़ रुपये और 20 आवासीय फ्लैटों की कीमत करीब 20 करोड़ रुपये है। इन्हें भी नीलामी के लिए रखा गया, लेकिन कुछ आवासीय फ्लैटों में भी खरीदारों ने रुचि दिखाई। हैदराबाद में बीएसएनएल की 11 एकड़ भूमि की खातिर बोली लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये का नेटवर्थ जरूरी था। बीएसएनएल की राजपुरा में 20 एकड़ जमीन के लिए खरीदारों का नेटवर्थ 17 करोड़ रुपये होना जरूरी था। गुजरात और कोलकाता की जमीन के इच्छुक खरीदारों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ क्रमश: 10.25 करोड़ रुपये और 40.25 करोड़ रुपये आवश्यक था। पहला प्रयास असफल रहने के बाद सरकार की तरफ से नियुक्त सलाहकारों को नियम एवं शर्तों में वे बदलाव निर्धारित करने को कहा गया, जिनमें रियायत दी जानी थी। इसे सरकार के साथ साझा कर दिया गया है। बीएसएनएल और एमटीएनएल की छह परिसंपत्तियों की बिक्री के लिए सरकार की सलाहकारों में सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड, जेएलएल प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स (इंडिया), कुशमैन ऐंड वेकफील्ड और नाइटफ्रैंक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इसके अलावा इन दो सरकारी दूरसंचार कंपनियों की और परिसंपत्तियां भी मुद्रीकरण के लिए चिह्नित की गई हैं, जिससे इन्हें कर्ज का भुगतान करने, बॉन्ड अदायगी, नेटवर्क को सुधारने, विस्तार और परिचालन कोष की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी। यह बिक्री दीपम अपने मुद्रीकरण पोर्टल के जरिये कर रहा था क्योंकि विभाग को 100 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को मदद देने के लिए कहा गया था।

Published / 2022-03-09 13:21:44
बढ़ता पलामू... अगले माह से 25,000 किसानों से लेकर पलामू में ही प्रोसेसिंग

टीम एबीएन, पलामू। प्रमंडल में तरक्की इबारत लिखने के लिए नया कदम उठाया गया है। पलामू में मिल्क प्रोसिंस प्लांट तकरीबन तैयार है, इसकी टेस्टिंग के बाद अब पलामू में ही दूध की प्रोसेसिंग हो सकेगी। इसके लिए 60 से अधिक दूध कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं, जिसके जरिये करीब 25 हजार किसानों से दूध इकट्ठा होगा। इससे इन किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकेगी। प्रोसेसिंग प्लांट में टेस्टिंग के बाद जल्द ही यहां पाश्चुरित किया गया दूध राज्य भर के बाजारों में दिखने लगेगा। इसके जरिये पलामू के पिछड़े और सुदूरवर्ती इलाकों में बदलाव आने की संभावना है। बता दें कि पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर के गणके के इलाके में करोड़ो की लागत से मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट लगाया गया है। आधुनिक मशीनों से लैस इस प्रोसेसिंग प्लांट का ट्रायल पूरा हो चुका है। ट्रायल के दौरान सारी मशीन सही से काम कर रहीं थीं। अब इसके उत्पादों के गुणवत्ता की जांच की जाएगी। प्रोसेसिंग प्लांट के चालू हो जाने से इलाके के किसानों के साथ-साथ सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा और उनकी आमदनी बढ़ेगी। मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए पूरे जिले में 62 दूध संग्रह केंद्र स्थापित किए गए हैं। दूध संग्रह केंद्रों से जिले के 230 गांव के किसान जुड़े हुए हैं। दूध की गुणवत्ता जांच के लिए 46 संग्रह केंद्रों पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। फिलहाल पलामू में संग्रहित दूध को प्रोसेसिंग के लिए लातेहार और रांची के इलाके में पाया जाता है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साइट इंचार्ज प्रदीप नायक ने बताया कि ये मशीनें काफी आधुनिक हैं। प्रतिदिन 20 से 22 हजार लीटर मिल्क को प्रोसेस किया जाएगा। इस प्रोसेसिंग प्लांट से सीधे तौर पर इलाके के किसानों को फायदा होने वाला है। इससे पहले झारखंड के देवघर, सारठ, साहिबगंज, कोडरमा और रांची में प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा चुका है। राज्य में दूध की आवश्यकता को पूरा करेगा यह प्लांट : पलामू का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट राज्य में दूध की जरूरतों को पूरा करेगा। प्रमंडलीय आयुक्त जटाशंकर चौधरी ने बताया कि प्रमंडल में सैकड़ों किसान हैं, जो पशुपालन से जुड़े हुए हैं। उनके उत्पादों की बिक्री सही से नहीं हो पाती है। पलामू में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के शुरू होने से यहां के किसानों को काफी फायदा होगा। प्रमंडलीय आयुक्त जटाशंकर चौधरी ने किसानों से दूध उत्पादन को बढ़ावा देने की अपील की है। आयुक्त ने उम्मीद जताई है कि अगले एक महीने में प्लांट पूरी तरह से काम करना शुरू कर देगा।

Published / 2022-03-08 17:46:48
महिलाओं के सहारे राज्य की तस्वीर बदलना चाहती है सरकार : हेमंत

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय महिलाओं के आगे बढ़ने का बेहतर वक्त है और हर माध्यम से महिलाओं को प्रोत्साहन देना सरकार की प्राथमिकताओं में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग से मंगलवार को यहां मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सरकार हर महिला के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को संकल्पित है। मेरा मानना है कि महिलाओं को समान अधिकार मिलना चाहिए। हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन झारखण्ड के परिपेक्ष्य में बात करें तो कई क्षेत्रों में महिलाओं को आगे लाने और उन्हें अपने साथ लेकर चलने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है। क्योंकि महिलाएं आधी जिम्मेवारी की हिस्सेदार होती हैं। आज के भौतिकवादी युग में बदलाव हुए हैं। आज कहीं ना कहीं रोशनी उन इलाकों तक भी पहुंच रही है, जहां महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने का प्रयास किया गया है और यह क्रम लगातार जारी है। उनके पारंपरिक सांस्कृतिक व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इन सब विषयों को उन तक हमें पहुंचाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त करने का कार्य हो रहा है, जिस तरह महिलाएं बढ़ना चाहती हैं। वैसी कार्य योजना बन रही है। जो अपने पैरों पर खड़ा होने की इच्छुक हैं। सरकार उन्हें हर संभव सहयोग देने को तैयार है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उत्पीड़न को लेकर बातें आती हैं। आज भी ऐसी सोच विद्यमान है, जिसे समाप्त करने का दायित्व हम सबका है तभी हम समान नजरों से देख महिलाओं को साथ लेकर बढ़ सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की जरूरत है उन तक हमें पहुंचना होगा। सोरेन ने कहा कि आज के दिन को हम महत्वपूर्ण दिन के रूप में देख सकते हैं। मानव सृजन से अब तक कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप में महिलाओं की भूमिका प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रही है। अलग-अलग समय में विकास की लकीरें खींची गई। समूह, वर्ग, जाति और धर्म में लोग विभक्त हुए। अपने समाज और संस्कृति के साथ सभी बढ़ते चले गए। कुछ पीछे भी रहे। ऐसे पीछे छूट चुके समाज की महिलाएं और भी पीछे चली गई। लेकिन पुरुष की तरह हर कुछ महिलाएं भी कर सकती हैं। नीति निर्धारण करने वालों ने अलग-अलग तरीके से नीति का निर्धारण किया। बावजूद इसके मानव जीवन ने यह महसूस किया कि पुरुष के साथ-साथ महिलाएं को भी साथ चलना चाहिए। तभी विकास की अवधारणा परिलक्षित होगी।

Published / 2022-03-08 17:35:44
तैयारी : 27 मार्च से फिर शुरू होंगी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने करीब दो साल बाद देश में 27 मार्च से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को कोविड दिशानिर्देशों के अनुपालन के साथ पुन: शुरू करने का फैसला किया है। नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कोविड महामारी के मद्देनज़र 23 मार्च 2020 से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को स्थगित कर दिया था। डीजीसीए ने 28 फरवरी को जारी परिपत्र में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों पर रोक को अगले आदेश तक बढ़ाया था। नागर विमानन मंत्रालय ने आज कहा कि विश्व भर में कोविड टीकाकरण के कवरेज में वृद्धि और सभी पक्षकारों से विचार विमर्श के उपरांत भारत सरकार ने नियमित वाणिज्यिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 26 मार्च को मध्य रात्रि के बाद नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है और इस प्रकार से 27 मार्च 2022 से ये उड़ानें बहाल हो जाएंगी। कुछ खास देशों के साथ एयर बबल की व्यवस्था भी 26 मार्च की मध्य रात्रि तक चलेगी। सरकार ने करीब दो साल बाद देश में 27 मार्च से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को कोविड दिशानिर्देशों के अनुपालन के साथ पुन: शुरू करने का फैसला किया है। नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कोविड महामारी के मद्देनज़र 23 मार्च 2020 से अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों को स्थगित कर दिया था। डीजीसीए ने 28 फरवरी को जारी परिपत्र में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों पर रोक को अगले आदेश तक बढ़ाया था। नागर विमानन मंत्रालय ने आज कहा कि विश्व भर में कोविड टीकाकरण के कवरेज में वृद्धि और सभी पक्षकारों से विचार विमर्श के उपरांत भारत सरकार ने नियमित वाणिज्यिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को 26 मार्च को मध्य रात्रि के बाद नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है और इस प्रकार से 27 मार्च 2022 से ये उड़ानें बहाल हो जाएंगी। कुछ खास देशों के साथ एयर बबल की व्यवस्था भी 26 मार्च की मध्य रात्रि तक चलेगी।

Published / 2022-03-08 10:43:00
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने किया लॉन्च, अब फीचर फोन से भी होगा UPI पेमेंट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अब फीचर फोन से भी यूपीआई पेमेंट होगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मंगलवार को इसके लिए अलग यूपीआई लॉन्च किया। इसके UPI123Pay नाम दिया गया है। उन्होंने डिजिटल पेमेंट्स के लिए 24x7 हेल्पलाइन भी लॉन्च की। इसका नाम डिजीसाथी है। इन दोनों का सीधा संबंध आम आदमी से है। UPI123Pay की मदद से यूजर्स फीचर फोन से यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। स्कैन एंड पे छोड़ सभी तरह के ट्रांजेक्शन इससे किए जा सकेंगे। पेमेंट के लिए इंटरनेट जरूरी नहीं होगा। इस फैसिलिटी का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपने मोबाइन नंबर और बैंक अकाउंट को लिंक करना होगा। यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म की शुरुआत 2016 में हुई थी। तब से इसका इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। लेकिन, अब तक यूपीआई पेमेंट के लिए स्मार्टफोन जरूरी था। इस वजह से गांवों में कई लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर पाते थे। पिछले साल दिसंबर में आरबीआई ने कहा था कि वह फीचर फोन के लिए भी यूपीआई लॉन्च करेगा। आरबीआई का मानना है कि फीचर फोन के लिए यूपीआई फैसिलिटी शुरू होने से गांवों में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे फाइनेंशियल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी। गांवों में कई लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं होते हैं। इसके अलावा वहां इंटरनेट की उपलब्धता की भी गारंटी नहीं होती है।

Published / 2022-03-07 17:46:19
बजट सत्र : प्रश्नकाल में बोले सीएम हेमंत- विस्थापन राज्य की सबसे बड़ी समस्या

टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन आज मुख्यमंत्री प्रश्नकाल के दौरान पक्ष-विपक्ष की ओर से कई प्रश्न पूछे गए। आजसू पार्टी के प्रमुख सुदेश महतो द्वारा पूछे गए एक नीतिगत प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में विस्थापन बड़ी समस्या है। विस्थापितों की समस्याओं के समाधान को लेकर विस्थापन पुनर्वास आयोग का विषय विचाराधीन है। जिस पर सरकार जल्द निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में खनन कार्य 50 से 100 वर्षों से चल रहा है। सरकार से भी जमीन ली गयी, लेकिन इसका मुआवजा अब तक नहीं मिलेगा, राज्य सरकार विस्थापितों की समस्याओं के समाधान को लेकर जल्द ही विस्थापन आयोग के गठन पर निर्णय लेगी। भाजपा के शशिभूषण मेहता के एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड राज्य कर्मचारी आयोग द्वारा तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों के लिए ली जानी प्रतियोगिता परीक्षा के लिए हिन्दी और अंग्रेजी को नहीं हटाया गया है। उन्होंने बताया कि जेएसएससी में हिन्दी पहले से ही है। जेएसएससी की मैट्रिक एवं इंटर स्तर पर होने वाली परीक्षाओं में हिन्दी और अंग्रेजी विषय 120 अंकों का पहले से ही निर्धारित है और इसमें उत्तीर्णता का अंक 30 प्रतिशत है, इसलिए इसे दोबारा जोड़ने की जरूरत नहीं हैं। पूर्व में मुख्य परीक्षा में भी हिन्दी की अनिर्वायता की वजह से जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा के लोग छूट जाते थे। इसलिए मुख्य परीक्षा में भी इसे शामिल करने की जरूरत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अलग-अलग जिलों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए भाषा का निर्धारित किया है।

Published / 2022-03-07 15:28:13
छह राज्यों में राज्यसभा की 13 सीटों पर 31 मार्च को होगा चुनाव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के छह राज्यों में राज्यसभा की रिक्त होने जा रही 13 सीटों के लिए आगामी 31 मार्च को चुनाव होगा। निर्वाचन आयोग ने सोमवार को यह जानकारी दी। असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, नगालैंड और त्रिपुरा से राज्यसभा के आठ सदस्यों का कार्यकाल दो अप्रैल को और पंजाब के पांच सदस्यों का कार्यकाल नौ अप्रैल को पूरा होगा। इस कारण ये सीटें रिक्त हो रही हैं। जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी और आनंद शर्मा भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा, पंजाब में रिक्त हो रही पांच सीटों में से तीन के लिए एक चुनाव होगा, जबकि दो सीटों के लिए अलग चुनाव होगा क्योंकि ये सीटें दो अलग-अलग द्विवार्षिक चक्र से संबंधित हैं। राज्यसभा की इन सीटों के लिए होने वाले चुनाव की अधिसूचना 14 मार्च को जारी होगी और मतदान 31 मार्च को होगा। स्थापित परिपाटी के तहत मतदान वाले दिन ही शाम पांच बजे से मतगणना होगी। उच्च सदन में केरल से एंटनी, हिमाचल प्रदेश से आनंद शर्मा, पंजाब से प्रताप सिंह बाजवा (कांग्रेस) एवं नरेश गुजराल (अकाली दल) का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पंजाब से राज्यसभा चुनाव का फैसला गत 20 फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों पर निर्भर करेगा। विधानसभा चुनाव के लिए डाले गए मतों की गणना 10 मार्च को होगी। पंजाब से पांच सीटों के अलावा, केरल से राज्यसभा की तीन, असम से दो और हिमाचल प्रदेश, नगालैंड तथा त्रिपुरा से एक-एक सीटें रिक्त हो रही हैं।

Published / 2022-03-07 06:20:41
राज्य के 250 सरकारी विद्यालयों में शुरू हुई जनजातीय भाषा में पढ़ाई

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के 250 प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में जनजातीय भाषा में पढ़ाई शुरू कर दी गई है। अभिभावकों की सहमति के बाद झारखंड के स्कूलों में जनजातीय भाषा में पढ़ाई शुरू करने के लिए सरकार ने पहल की है। जनजातीय भाषा में के पढ़ाई के तहत कक्षा 3 तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा दिया जाएगा। झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में ढाई सौ प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में जनजातीय भाषा में पढ़ाई शुरू हुई है। इस अभियान में 46 हजार स्कूलों को चुना गया था। पहले ढाई सौ चयनित स्कूलों में से 17 विद्यालयों के अभिभावकों ने जनजातीय भाषा में पढ़ाई को लेकर सहमति नहीं दी थी। उन्होंने आपत्ति जाहिर कर कहा था कि जो बच्चे जनजातीय भाषा नहीं जानते हैं। वह कैसे पढ़ाई करेंगे। हालांकि नए सिरे से एक बार फिर रिपोर्ट तैयार करते हुए राज्य सरकार ने जहां उस भाषा को बोलने वाले 70 फीसदी या उससे अधिक बच्चे नामांकित है। वहीं इसकी पढ़ाई शुरू करवाई है। झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना ने ढाई सौ स्कूलों में जनजातीय भाषा में कक्षा तीन तक की पढ़ाई शुरू की है। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक कक्षा की पढ़ाई बच्चों को मातृभाषा में देने के लिए जोर दिया गया है। इसके तहत खूंटी में मुंडारी, लोहरदगा में कुडुख, पश्चिमी सिंहभूम में हो, गुमला सिमडेगा में खड़िया और साहिबगंज में संताली भाषा में पढ़ाई शुरू की गई है। इसे लेकर संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया गया है। जेसीईआरटी ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कर ऐसे शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया है। इसके अलावा पठन-पाठन को लेकर जिला शिक्षा समिति भी गठित की गई है। ताकि जनजातीय भाषा से जुड़े स्कूलों में पठन-पाठन सही तरीके से संचालित की जा सके।

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