टीम एबीएन, रांची। 14 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले से ठीक पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जुलाई को 657 एकड़ भूमि में बने देवघर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 12 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां नवनिर्मित देवघर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे, जो झारखंड के रांची स्थित बिरसा मुंडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा होगा। इस हवाई अड्डे के उद्घाटन के साथ श्रावणी मेले के लिए देश-विदेश से देवघर आने वाले श्रद्धालुओं को अब रांची अथवा कोलकाता से सड़क मार्ग से देवघर स्थित बाबा धाम आने की कठिनाई नहीं उठानी पड़ेगी। झारखंड के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, केन्द्रीय नागर विमानन मंत्रालय के सचिव राजीव बंसल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार, झारखंड सरकार की कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल, भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय की संयुक्त सचिव रूबिना अली ने नव निर्मित हवाई अड्डे का दौरा किया। इस दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा, देवघर के उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी मंजुनाथ भजंत्री, पुलिस अधीक्षक सुभाष चन्द्र जाट सहित जिला प्रशासन के भी तमाम अधिकारी उपस्थित थे। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सभी अधिकारियों ने हवाई अड्डे के उद्घाटन को लेकर की गई तैयारियों की समीक्षा की। केन्द्रीय नागर विमानन मंत्रालय के सचिव राजीव बंसल एवं भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार एवं वरीय अधिकारियों ने हवाई अड्डा परिसर में पूर्ण हो चुके और वर्तमान में चल रहे कार्यों का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। हवाई अड्डे और वहां की सुविधाओं के निरीक्षण के पश्चात मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, सचिव नागर विमानन मंत्रालय, राजीव बंसल ने बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने बताया कि 401 करोड़ रुपए में बना देवघर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा 657 एकड़ भूमि में फैला है और इसका टर्मिनल भवन 5130 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है। 2500 मीटर लंबी हवाई पट्टी के साथ इस हवाई अड्डे पर एयरबस 320 आदि बड़े विमानों का संचालन आसानी से हो सकेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होगा। गुरुवार को इसकी घोषणा की गई है। बता दें कि संसद का मानसून सत्र 12 अगस्त तक चलेगा। संसद का यह मानसून सत्र खास रहने वाला है क्योंकि 18 जुलाई को ही राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग है। मानसून सत्र में 18 जुलाई से 12 अगस्त के बीच कुल 17 कार्यदिवस पड़ रहे हैं। इस सत्र में सरकार कई विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है। इनमें संसदीय समिति के समक्ष विचारार्थ भेजे गए 4 विधेयक शामिल हैं। संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार कई बिलों को पेश कर सकती है। संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। कांग्रेस प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राहुल गांधी से पूछताछ, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य अहम मुद्दों को लेकर सरकार को घेर सकती हैं। गौरतलब है कि हाल ही दिनों में नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी के समक्ष राहुल गांधी की पेशी को लेकर कांग्रेस ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया था। वैसे भी कांग्रेस नेता लगातार महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दें पर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर है। शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब राहुल गांधी मोदी सरकार पर निशाना साधा हो। किसी न किसी चीज को लेकर कांग्रेस नेता लगातार केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं। मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में कई बिलों को पेश कर सकती है। बिजली (संशोधन) विधेयक, 2021 को जुलाई में शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। इस विधेयक में अन्य बातों के अलावा ग्राहकों को दूरसंचार सेवाओं प्रदाताओं की तरह विभिन्न बिजली सेवा प्रदाताओं में से चुनने का विकल्प उपलब्ध कराने का प्रावधान है। वहीं, संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक के आने के बाद सरकारी बैंकों के निजीकरण में रफ्तार आएगी। इसके अलावा संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार और कई बिलों को पेश कर सकती है।
टीम एबीएन, भोगनाडीह/साहिबगंज। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज शुरू से ही अपने हक की लड़ाई लड़ता रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण भोगनाडीह से प्राप्त होता है, जहां के अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू ने अंग्रेजों से आदिवासी समाज के हितों कि रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वे आज हूल दिवस के अवसर पर भोगनाडीह, साहिबगंज में अमर शहीद सिदो-कान्हू के स्मृति स्थल पर पूजा-अर्चना के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। जल-जंगल-जमीन को बचाने में अहम भूमिका : इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज ने देश में अपनी अलग पहचान बनाया है। इतिहास के अनेकों कहानियों में इन्होंने अपना प्रमुख छाप छोड़ा है। आदिवासी समुदाय ने समाज के प्रति कर्तव्य का पालन कर अपनी अलग स्थान बनाई है। यह समाज जल-जंगल-जमीन को बचाने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहासकारों का मानना है कि पृथ्वी के बनने के बाद सबसे पहले जमीन झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में दिखी थी। डायनासोर युग के भी कुछ अवशेष यहां प्राप्त होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज शुरूआत से ही अपने हितों की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज से कई सौ साल पहले ही फूलों-झानो, चांद-भैरव, सिदो-कान्हो जैसे महान आदिवासी नेताओं ने अपने हक की लड़ाई लड़ी थी और समाज के हित के लिए लोगों को एकजुट किया था। मुख्यमंत्री ने हूल दिवस के अवसर पर अमर शहीद सिदो कान्हू द्वार का उद्घाटन किया। इसके उपरांत अमर शहीद सिदो कान्हू के आवास पर स्थित प्रतिमा का माल्यार्पण किया तथा उनके वंशजों से मुलाकात की एवं उन्हें उपहार भेंट किया। मुख्यमंत्री ने उनके वंशजों द्वारा दिये गए ज्ञापनों पर संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने का निदेश भी दिया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने हूल दिवस पर भोगनाडीह के अमर शहीद सिदो-कान्हू पार्क स्थित सिदो-कान्हू, फूलो-झानों एवं चांद-भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। मौके पर राजमहल सांसद विजय कुमार हांसदा एवं जिला प्रशासन के पदाधिकारी एवं आम जनता उपस्थित थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए 4800 स्नाइपर राइफल और 78 लाख गोलियां खरीदने के सौदे के लिए भारतीय कंपनियों को रिक्वेस्ट फॉर इनफार्मेशन (आरएफआई) जारी कर दी है। आरएफआई किसी भी रक्षा सौदे के टेंडर प्रक्रिया का पहला चरण होता है। यह राइफलें पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात जवानों को मुहैया कराई जाएंगी। 2016 में भी जारी हुई थी आरएफआई : रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने इन स्नाइपर राइफल खरीदने की मंजूरी पहले ही दे दी थी। इस बाबत 2016 में पहले भी आरएफआई जारी की गई थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में अधिक कंपनियों को शामिल करने के लिए एक बार फिर से आरएफआई जारी की गई है। ये आरएफआई बाय-इंडिया के तहत जारी की गई है। ये स्नाइपर राइफल भारतीय कंपनियों के लिए ही खरीदी जाएंगी। हालांकि भारतीय कंपनियां इस सौदे के लिए किसी विदेशी कंपनी से भी करार कर सकती हैं। .338 बोर की होगी स्नाइपर राइफल : रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नई आरएफआई के मुताबिक, ये स्नाइपर राइफल .338 बोर की होनी चाहिए और इनकी रेंज 1200 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए। इन राइफल की लंबाई 1250 एमएम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और वजन करीब 9 किलो होना चाहिए। राइफल पर टेलीस्कोपिक-साइट भी लगी होनी चाहिए। राइफल का एम्युनेशन भी .338 लापुआ मैग्नम होना चाहिए। करीब 450 करोड़ रुपये का है टेंडर : टेंडर के मुताबिक, थल सेना के इंफेंट्री डायरेक्टोरेट को इन स्नाइपर राइफल की जरूरत है जिसके अंतर्गत भारतीय सेना की इंफेंट्री बटालियन हैं। जानकारी के मुताबिक, इन स्नाइपर राइफल्स को चीन और पाकिस्तान से सटे बॉर्डर (एलएसी और एलओसी) पर तैनात इंफेंट्री बटालियन को दी जाएंगी। पाकिस्तान से हुए युद्ध विराम समझौते से पहले एलओसी पर स्नाइपर फायरिंग भारतीय सेना के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इस टेंडर की कुल कीमत करीब 450 करोड़ रुपये है।
टीम एबीएन, भोगनाडीह, बरहेट, साहिबगंज। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज शुरू से ही अपने हक की लड़ाई लड़ता रहा है, इसका जीता जागता उदाहरण भोगनाडीह से प्राप्त होता है, जहां के अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू ने अंग्रेजों से आदिवासी समाज के हितों कि रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वे आज हूल दिवस के अवसर पर भोगनाडीह, साहिबगंज में अमर शहीद सिदो-कान्हू के स्मृति स्थल पर पूजा-अर्चना के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। जल-जंगल-जमीन को बचाने में अहम भूमिका : इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज ने देश में अपनी अलग पहचान बनाया है। इतिहास के अनेकों कहानियों में इन्होंने अपना प्रमुख छाप छोड़ा है। आदिवासी समुदाय ने समाज के प्रति कर्तव्य का पालन कर अपनी अलग स्थान बनाई है। यह समाज जल-जंगल-जमीन को बचाने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहासकारों का मानना है कि पृथ्वी के बनने के बाद सबसे पहले जमीन झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में दिखी थी। डायनासोर युग के भी कुछ अवशेष यहां प्राप्त होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज शुरूआत से ही अपने हितों की रक्षा की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज से कई सौ साल पहले ही फूलों-झानो, चांद-भैरव, सिदो-कान्हो जैसे महान आदिवासी नेताओं ने अपने हक की लड़ाई लड़ी थी और समाज के हित के लिए लोगों को एकजुट किया था। मुख्यमंत्री ने हूल दिवस के अवसर पर अमर शहीद सिदो कान्हू द्वार का उद्घाटन किया। इसके उपरांत अमर शहीद सिदो कान्हू के आवास पर स्थित प्रतिमा का माल्यार्पण किया तथा उनके वंशजों से मुलाकात की एवं उन्हें उपहार भेंट किया। मुख्यमंत्री ने उनके वंशजों द्वारा दिये गए ज्ञापनों पर संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने का निदेश भी दिया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने हूल दिवस के अवसर पर भोगनाडीह के अमर शहीद सिदो-कान्हू पार्क स्थित सिदो-कान्हू, फूलो-झानों एवं चांद-भैरव की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। मौके पर राजमहल सांसद श्री विजय कुमार हांसदा एवं जिला प्रशासन के पदाधिकारी एवं आम जनता उपस्थित थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के 16वें उपराष्ट्रपति का चुनाव छह अगस्त को होगा। चुनाव आयोग ने आज यहां उपराष्ट्रपति चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। कार्यक्रम के अनुसार पांच जुलाई को उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उसके बाद से नामांकन प्रारंभ हो जाएगा और नामांकन की आखिरी तारीख 19 जुलाई होगी। उम्मीदवार स्वयं अथवा उनके प्रस्तावक एवं अनुमोदक किसी भी कार्यदिवस में 11 बजे से तीन बजे तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 20 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 22 जुलाई तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।
टीम एबीएन, रांची। सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज (29 जून) को महादेवगंज स्थित मेधा डेयरी प्लांट का शुभारंभ करेंगे। सीएम के कार्यक्रम को लेकर जिले में तैयारी पूरी की जा चुकी है। 34 करोड़ की लागत से बने इस प्लांट के उद्घाटन के लिए सीएम दिन के लगभग एक बजे साहिबगंज पहुंचेंगे। मेधा डेयरी प्लांट की शुरुआत से साहिबगंज और उसके पास आस के जिलों के लोगों को फायदा होने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल 2017 को साहिबगंज में डेयरी प्लांट की आधारशिला रखी थी। यह चार साल में बनकर तैयार हो गया था। इस प्लांट का निर्माण एनडीडीबी (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) ने 34 करोड़ की लागत से बनाकर तैयार किया है। इस प्लांट की झमता प्रतिदिन 50 हजार लीटर दूध स्टॉक करने की है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर एक लाख तक की जा सकती है। प्लांट बनने के बाद सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ लिमिटेड ने मेधा ब्रांड से होने वाले उत्पादन का नाम दिया। इस प्लांट से लगभग 2200 किसान और डेयरी कॉपरेटिव सोसाइटी व बीएमसी से लोग जुड़े हुए हैं। मेधा डेयरी प्लांट के हब इंचार्ज रविन्द्र कुमार सिन्हा ने कहा कि जिला में डीसीएस ( डेयरी सहकारिता समिति) का केंद्र 40 पंचायत में खोला गया है, जहां दूध जमा होता है। वहीं जिला में दो स्थान पर बीएमसी (बल्क मिल्क कूलर) है, जिसमें एक राजमहल के मंगलहाट और दूसरा डेहारी में खोला गया है। दो और बीएमसी पतना और बरहेट में खोले जा रहे हैं, जिसका काम अंतिम चरण में है। सीएम के हाथों से इनका शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पांच हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जुड़ने का मौका मिलेगा। ट्रायल पर चार प्रकार का दूध जिसमें शक्ति स्पेशल, शक्ति, ताजा मिल्क, गाय का दूध और पनीर लस्सी, दही, फ्लेवर और घी तैयार कर बाजार में भेजा जाता है। इसके विधिवत उद्घाटन के बाद दूध से बने अन्य उत्पाद को तैयार कर सकेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता और राज्य के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक में आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जीएसटी परिषद ने मंगलवार को कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं पर टैक्स की दरों में बदलाव को मंजूरी दे दी। साथ ही राज्यों को सोना और मूल्यवान पत्थरों की राज्य के भीतर आवाजाही के लिये ई-वे बिल जारी करने की अनुमति भी दे दी गई। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संबंधी नीति-निर्धारक इकाई जीएसटी परिषद की बैठक के पहले दिन जीएसटी में पंजीकृत कंपनियों के लिये कई अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं तथा मंत्री समूह (जीओएम) की कर चोरी रोकने संबंधी रिपोर्ट को भी मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं। राज्यों की मांग : राज्यों को जून 2022 के बाद राजस्व क्षतिपूर्ति की व्यवस्था जारी रखने तथा कैसिनो, आॅनलाइन गेम और घुड़दौड़ पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा बुधवार को होगी। विपक्ष-शासित राज्य जीएसटी क्षतिपूर्ति व्यवस्था को पांच साल के लिए बढ़ाने या राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी मौजूदा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 70-80 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। मंगलवार को हुई बैठक में परिषद ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह की तरफ से पेश अंतरिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज एस बोम्मई की अध्यक्षता वाले इस मंत्री समूह ने उलटा शुल्क ढांचा (तैयार वस्तुओं के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक कर) और कुछ वस्तुओं पर कर छूट समाप्त करने समेत दरों को युक्तिसंगत बनाने से जुड़ी अनुशंसाएं दी हैं। कम किराया वाले होटल कमरों टैक्स का सुझाव : जीओएम ने कई सेवाओं पर जीएसटी छूट समाप्त करने का सुझाव दिया है। इसमें 1,000 रुपये प्रतिदिन से कम किराया वाले होटल कमरों पर 12 प्रतिशत की दर से कर लगाने का सुझाव शामिल है। अभी इस पर कोई कर नहीं लगता है। इसके साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिये 5,000 रुपये से अधिक किराये वाले कमरों (आईसीयू को छोड़कर) पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाने की भी सिफारिश की गई है। जीओएम ने पोस्टकार्ड और अंतदेर्शीय पत्र, ‘बुक पोस्ट’ और 10 ग्राम से कम वजन के लिफाफे को छोड़कर अन्य डाकघर सेवाओं पर कर लगाने का सुझाव दिया है। ई-वे बिल : राज्यों के भीतर, सोना, आभूषण और मूल्यवान पत्थरों की आवाजाही को लेकर ई-वे बिल के संदर्भ में परिषद ने सिफारिश की है कि राज्य एक सीमा तय कर सकते हैं जिसके ऊपर इलेक्ट्रॉनिक बिल जारी करना अनिवार्य होगा। मंत्रियों के समूह ने सीमा दो लाख रुपये या उससे ऊपर रखने की सिफारिश की है। उच्च जोखिम वाले करदाताओं के संदर्भ में मंत्री समूह की रिपोर्ट में जीएसटी के तहत उच्च जोखिम वाले करदाताओं के पंजीकरण के बाद सत्यापन का सुझाव दिया गया है। ऐसे करदाताओं की पहचान के लिये इसमें बिजली बिल के ब्योरे और बैंक खातों का सत्यापन की भी बात कही गयी है।
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