एबीएन सेंट्रल डेस्क। आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आगामी 13 अगस्त से 15 अगस्त तक देश भर में हर घर तिरंगा अभियान में देशवासियों के जुड़ने के आह्वान के मद्देनज़र देश भर के बाजारों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा खरीदने के लिए लोग बड़ी मात्रा में आ रहे हैं। लोगों के इस उत्साह के कारण देश के सभी शहरों के बाज़ारों में हुए राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की निकट भविष्य में भारी मांग की सम्भावना को देखते हुए कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश भर में कपड़े के निर्माताओं से फ्लैग कोड के प्रावधानों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में राष्ट्रीय ध्वज उपलब्ध कराने के लिए संपर्क शुरू किया है। केंद्र सरकार ने देश भर में 25 करोड़ घरों पर तिरंगा लगाए जाने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि कैट की मानें तो एक मोटे अनुमान के अनुसार देश भर में अभी लगभग 4 करोड़ ही ध्वज का स्टॉक होगा। संभावित मांग और स्टॉक के बीच के अंतर को पूरा करने और देश भर में तिरंगा प्रचुर संख्या में उपलब्ध कराने के लिए कैट ने देश भर में जरूरी प्रयास शुरू कर दिए हैं। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस दिशा में कैट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, ओडिसा, बिहार, राजस्थान के कैट चैप्टर से आग्रह किया है कि वो अपने राज्यों में कपड़ा निर्माताओं से संपर्क कर अधिक से अधिक तिरंगा बनाने के लिए प्रेरित करें। मूल रूप से फिलहाल बाजार में विभिन्न साइज के तिरंगे झंडे छोटे माप के 10 रुपये से लेकर बड़े माप के 150 रुपये तक मिल रहे हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा 20x 30, 16x 24, 6×9 तीन माप सुझाए गए हैं। लिहाजा कैट द्वारा इन साइजों के ध्वज ही अधिक से अधिक मात्रा में बनवाने के प्रयास किये जा रहे हैं। भरतिया और खंडेलवाल ने यह भी बताया कि इसके साथ ही कैट ने फिलहाल खादी ग्रामोद्योग कमीशन से तिरंगा झंडे लेकर व्यापारिक संगठनों को उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके अतिरिक्त महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी कैट तिरंगा झंडा बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने बताया की केंद्र सरकार ने 20 जुलाई को फ्लैग कोड में संशोधन कर राष्ट्रीय ध्वज को घरों पर लगाने के नियम आसान कर दिए हैं, जिसके अनुसार अब लोग अपने घरों में दिन रात राष्ट्रीय ध्वज लगा सकते हैं। इस संशोधन के बाद स्वाभाविक रूप से बाजार में तिरंगे झंडे की मांग बढ़ेगी।
टीम एबीएन, रांची। कृषि आयुक्त ए के सिंह ने कहा है कि मौजूदा खरीफ सत्र के दौरान धान की बुवाई कुछ कम रही है, विशेषकर पूर्वी भारत के इलाकों में लेकिन मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के साथ इसमें सुधार आएगा। दक्षिणी क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने के कारण बड़े क्षेत्र में धान की बुवाई की गई है। वहीं पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी अबतक चिंता की कोई बात नहीं है और ट्यूबवेल सिंचाई की मदद से सामान्य बुवाई पहले ही की जा चुकी है। सरकार ने ताजा आंकड़े तो जारी नहीं किए हैं लेकिन 17 जुलाई तक के आंकड़े उपलब्ध हैं जो बताते हैं कि देशभर में धान की बुवाई 17.4 प्रतिशत की कमी के साथ इस खरीफ सीजन में 128.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है जो पिछले वर्ष के 155.53 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। खरीफ की फसलों की बुवाई जून में दक्षिण पश्चिमी मानसून के आगमन के साथ शुरू की जाती है। धान एक प्रमुख खरीफ फसल है। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य रहने का अनुमान जताया है। एक जून से 20 जून के बीच देश में 11 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है लेकिन पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 14 फीसदी कम और उत्तर पश्चिमी भारत में नौ प्रतिशत बारिश कम हुई है। कृषि आयुक्त ने कहा, मुझे उम्मीद है कि बुवाई के मामले में हालात सामान्य रहेंगे बल्कि आने वाले वक्त में बेहतर होंगे। अब बारिश हर जगह शुरू हो चुकी है ऐसे में जो फसल बोई गई है वह सुरक्षित रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है इसलिए और क्षेत्र में धान बुवाई बेहतर होने के लिए समय है। सिंह ने कहा, धान की बुवाई कुछ कम हुई है, विशेषकर पूर्वी भारत में, पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में लेकिन बारिश शुरू होने से उन इलाकों में भी बुवाई हो जाएगी। उन्होंने बताया कि दक्षिण क्षेत्र में धान की बुवाई में अब तक कोई कमी नहीं है। दक्षिणी राज्यों में अच्छी बारिश हुई है और सभी इलाकों में हुई है इसलिए धान की बुवाई भी बड़े क्षेत्र में की गई है। सरकार ने 2022-23 के फसल वर्ष (जुलाई से जून) के खरीफ सीजन में 11.2 करोड़ टन धान उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद द्रौपदी मुर्मू को बधाई देने का सिलसिला जारी है। दिल्ली दौरे पर गए सीएम हेमंत सोरेन ने भी द्रोपदी मुर्मू से मुलाकात कर उनको जीत के लिए झारखंड के लोगों की तरफ से शुभकामनाएं दी है। सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर राष्ट्रपति से मुलाकात जानकारी साझा की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि देश की नव निर्वाचित राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से दिल्ली में भेंट हुई, आदरणीय द्रौपदी जी को समस्त झारखंड वासियों की ओर से अनेक-अनेक शुभकामनाएं और जोहार। बता दें कि सीएम हेमंत सोरेन दिल्ली दौरे पर हैं। उन्होंने शनिवार को दिल्ली में झारखंड पर्यटन नीति 2021 का शुभारंभ किया था। इस दौरान सीएम ने देश और दुनिया को झारखंड देखने आने का न्योता दिया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने ध्वज संहिता में बदलाव किया है। इसके साथ अब तिरंगे को दिन और रात दोनों समय फहराया जा सकता है। साथ ही मशीन और पॉलिएस्टर से बने ध्वजों का उपयोग करने की भी अनुमति होगी। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब वह आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 13 से 15 अगस्त तक "हर घर तिरंगा" अभियान शुरु करने जा रही है। सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को लिखे एक पत्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वय का प्रदर्शन, फहराना और उपयोग भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत आता है। दिन-रात फहराया जा सकता है राष्ट्रीय ध्वज : पत्र में कहा गया है, भारतीय ध्वज संहिता, 2002 को 20 जुलाई 2022 के एक आदेश के जरिए संशोधित किया गया है और अब भारतीय ध्वज संहिता, 2002 के भाग-दो के पैरा 2.2 के खंड (II) को इस तरह पढ़ा जाएगा : जहां ध्वज खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है। पहले सूर्योदय से सूर्यास्त तक थी अनुमति : इससे पहले तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी। इसी तरह ध्वज संहिता के एक अन्य प्रावधान में बदलाव करते हुए कहा गया, राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ या मशीन से बना होगा। यह कपास/पॉलिएस्टर/ ऊन/ रेशमी खादी से बना होगा। इससे पहले मशीन से बने और पॉलिएस्टर सेबने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं थी। आजादी के 75 साल के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा आजादी का अमृत महोत्सव : आजादी का अमृत मोहत्सव एक प्रगतिशील स्वतंत्र भारत के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। 13 अगस्त से 15 अगस्त तक नागरिकों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए "हर घर तिरंगा" अभियान शुरु किया गया है। गृह सचिव ने पत्र बताई ध्वज संहिता की मुख्य विशेषताएं : गृह सचिव ने अपने पत्र के साथ ध्वज संहिता की मुख्य विशेषताओं को भी संलग्न किया जिसमें 30 दिसंबर 2021 और 20 जुलाई 2022 को किए गए बदलावों और राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग और प्रदर्शन के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल शामिल हैं। गृह सचिव ने पत्र में कहा, आपसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है कि ये आपके प्रशासनिक नियंत्रण के तहत विभिन्न संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित हो।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को राष्ट्र को संबोधित करेंगे। राष्ट्रपति भवन ने शनिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। बयान के अनुसार, राष्ट्र के नाम संबोधन को आकाशवाणी और दूरदर्शन के सभी चैनलों पर पहले हिंदी तथा उसके बाद अंग्रेजी में प्रसारित किया जाएगा। बयान में कहा गया है कि संबोधन का हिंदी और अंग्रेजी में प्रसारण किये जाने के बाद दूरदर्शन के सभी क्षेत्रीय चैनलों द्वारा इसे क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारित किया जाएगा। बयान के अनुसार, आकाशवाणी अपने क्षेत्रीय नेटवर्क पर संबोधन को क्षेत्रीय भाषाओं में रात साढ़े नौ बजे से प्रासरित करेगा। द्रौपदी मुर्मू बृहस्पतिवार को देश की अगली राष्ट्रपति निर्वाचित हुईं। वह सोमवार को संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी।
टीम एबीएन, रांची। राज्य में अभी तक बेहद कम मानसूनी बारिश हुई है। एक जून से लेकर 22 जुलाई तक के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अभी तक सामान्य से 51 फीसदी कम वर्षा हुई है। कोल्हान प्रमंडल के पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम को छोड़कर बाकी सभी 22 जिलों में सामान्य से कम बेहद कम बारिश रिकॉर्ड किया गया है। ऐसे में राज्य में खरीफ की फसल पर इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है। राज्य के ज्यादातर जिलों में खेतों में लगाया गया धान का बिचड़ा सूखने लगा है तो पानी के अभाव में धान की रोपनी भी नहीं के बराबर हुई है। राज्य में 22 जुलाई तक 11-12% क्षेत्र में ही धान का आच्छादन हुआ है, जो चिंताजनक है। राज्य में कम बारिश की वजह से धान की खेती करने वाले किसान परेशान हैं। ऐसे में उप कृषि निदेशक ने राज्य के अन्नदाताओं को सलाह दी है कि वह 120 दिन से कम समय मे तैयार होने वाले धान की किस्में लगाएं, जिसमें सहभागी, आईआर 64DRT, अंजली, वंदना, बिरसा विकास धान जो ना सिर्फ कम समय में तैयार होता है बल्कि कम बारिश में के लिए भी मुफीद है। उन्होंने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि सभी जिलों में कम दिनों में तैयार होने वाली किस्मों के कितने बीज की आवयश्कता है इसका आकलन करने का निर्देश जिला कृषि पदाधिकारियों को दिया गया है। उन्होंने कहा कि बीज निगम के पास पर्याप्त मात्रा में कम समय मे तैयार होने वाले प्रभेद के बीज उपलब्ध है और कोई दिक्कत नहीं होगी। कृषि उपनिदेशक ने कहा कि अब किसान भाई कम दिनों में तैयार होने वाली धान के प्रभेदों का सीधा बुआई करें। कृषि उपनिदेशक ने कहा कि किसान धान की जगह तिलहन और दलहन की खेती की ओर बढ़ें, क्योंकि उसमें पानी की जरूरत कम पड़ती है। राज्य में 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है. वर्ष 2021-22 में राज्य में 53.5 लाख टन धान की उपज हुई थी जो झारखंड बनने के बाद एक रिकॉर्ड है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 29 जुलाई से शुरू हो रहा है। हर बार की तरह इस बार भी छोटे मानसून सत्र को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने है। छोटे मानसून सत्र में जनता से जुड़े बड़े मामलों का सदन में आने की संभावना है, पर ये तभी संभव हो पायेगा जब सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से संचालित होगी। झारखंड में 29 जुलाई से मानसून सत्र का आगाज होने जा रहा है। इस बार मानसून सत्र 5 अगस्त तक संचालित होगा। मतलब मात्र 6 दिनों का कार्य दिवस। सरकार चाहे जिस किसी भी दल या गठबंधन की हो, एक साल में सदन की कार्यवाही 40 से 45 दिन तक ही चल पाती है। इस बार भी झारखंड की जनता से जुड़े सवालों की कोई कमी नहीं है, पर जनता के सवाल को सदन के पटल तक आने के लिये समय नहीं है। राज्य की मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के विधायक सीपी सिंह के अनुसार खनन लीज से लेकर गिरती कानून व्यवस्था को लेकर तैयारी पूरी है, लेकिन बीजेपी विधायकों को भी पता है कि सदन का संचालन कम और स्थगन की तस्वीर ज्यादा देखने को मिलेगी। सीपी सिंह के अनुसार हर साल 60 दिनों तक का सत्र संचालन होना चाहिये। मानसून सत्र के तीसरे दिन यानी कि 2 अगस्त को सदन में अनुपूरक बजट पेश होगा। पहले दिन शोक प्रस्ताव के बाद हर दिन प्रश्नकाल के लिये अवधि तय किया गया है। मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम का कहना है कि छोटे सत्र को भी उपयोगी बनाया जा सकता है। बशर्ते की सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष को जनता से जुड़े सवाल को सदन के पटल आने देना होगा। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिये तैयार है। झारखंड में विधानसभा सत्र के इतिहास को देखे तो काम कम और हंगामा ज्यादा की हकीकत सामने आएगी। सदन में कभी विपक्ष का सदन नहीं चलने देना, तो कभी सत्ता पक्ष का विधायकों के सवाल से भागना हंगामे की मुख्य वजह बन जाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आज झारखंड में रहेंगे। अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान मुख्य न्यायाधिश चांडिल और गढ़वा कोर्ट भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावे वे वैसे बच्चों को स्कॉलरशिप भी देंगे, जिन्होंने कोरोना के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया है। मेमोरियल लेक्चर में लेंगे हिस्सा: आज रांची में आयोजित जस्टिस एसबी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर में चीफ जस्टिस शामिल होंगे। इसके बाद सुबह वे झालसा और झारखंड ज्यूडिशीयल अकादमी के कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। रांची में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश प्रमंडलीय न्यायालय चांडिल और नगर उंटारी का ऑनलाइन उदघाटन करेंगे। इसके बाद झालसा के प्रोजेक्ट शिशू के तहत कोरोना काल में अपने माता-पिता को खोनेवाले बच्चों के बीच छात्रवृत्ति का भी वितरण करेंगे। इसके अलावा सीजेआई ने निराश्रितों की सुरक्षा और उनके अधिकारियों को संरक्षित करने में मध्यस्थता की भूमिका पर भी एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम में सीजेआई निराश्रितों को उनके अधिकार से अवगत कराएंगे। जानकारी के मुताबिक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कार्यक्रम समापन के पश्चात दिन के 3.30 बजे वापस दिल्ली रवाना होंगे।
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