एबीएन बिजनेस डेस्क। सेबी ने शुक्रवार को जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा कि इन कंपनियों की कुल 10 संपत्तियों की 7.68 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर नीलामी की जायेगी। इन 10 संपत्तियों में से पांच सुमंगल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की, तीन इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की हैं और शेष जीएसएचपी रियलटेक लिमिटेड की हैं। इनमें भूमि, कई मंजिला इमारतें और पश्चिम बंगाल में स्थित एक फ्लैट शामिल हैं। बाजार नियामक सेबी ने तीन कंपनियों और उनके प्रवर्तकों एवं निदेशकों के खिलाफ वसूली की कार्रवाई में संपत्तियों की बिक्री के लिए बोलियां आमंत्रित करते हुए कहा कि यह आॅनलाइन नीलामी 10 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक की जायेगी। सेबी की एक जांच में पाया गया कि जीएसएचपी रियलटेक ने 2012-13 में 535 व्यक्तियों से गैर-परिवर्तनीय रिडीमेबल डिबेंचर (एनसीडी) जारी करके नियामक मानदंडों का पालन किए बिना पैसा जुटाया था। जबकि इन्फोकेयर इंफ्रा ने 90 निवेशकों को गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर आवंटित करके 98.35 लाख रुपये जुटाये थे। साथ ही, सुमंगल इंडस्ट्रीज ने अवैध सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) के माध्यम से निवेशकों से 85 करोड़ रुपये एकत्र किये थे। फर्म अवैध आलू खरीद निवेश योजनाएं चला रही थी, जिसमें निवेशकों को केवल 15 महीनों में 100 प्रतिशत तक लाभ का वादा किया गया था। सेबी ने 2013 और 2016 में क्रमश: सुमंगल और जीएसएचपी रियलटेक, इंफोकेयर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ उनके प्रवर्तकों और निदेशकों को निवेशकों से जुटाए गए धन को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि, संस्थाएं निवेशकों के पैसे वापस करने में विफल रहीं जिसके बाद नियामक ने उनके खिलाफ वसूली की कार्यवाही शुरू की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश के जी बालकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग गठित की है, जो उन लोगों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के मामले का परीक्षण करेगा, जिनका ऐतिहासिक रूप से अनुसूचित जाति से संबंध है, लेकिन जिन्होंने राष्ट्रपति के आदेशों में उल्लिखित धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म को अपना लिया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार को जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, तीन सदस्यीय आयोग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ रविंदर कुमार जैन और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सदस्य प्रोफेसर सुषमा यादव भी शामिल हैं। आयोग संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत समय-समय पर जारी राष्ट्रपति के आदेशों के अनुरूप मामले की जांच करेगा। मौजूदा अनुसूचित जातियों पर निर्णय ‘अगर अमल में आता है तो’ के निहितार्थों की भी आयोग जांच करेगा। इसके अलावा, इन लोगों के अन्य धर्मों में परिवर्तित होने के बाद, रीति-रिवाजों, परंपराओं और सामाजिक भेदभाव और अभाव की स्थिति में बदलाव पर भी ध्यान दिया जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप भी पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। सरकार आपके फेस्टिवल सीजन को जल्द ही और खुशनुमा बना देगी। आपको बता दें मोदी सरकार ने किसानों को दिवाली से पहले तोहफा दी है। दरअसल, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्र सरकार 17 और 18 अक्टूबर 2022 को पीएम किसान सम्मान निधि की 12वीं किस्त जारी कर सकती है। इस दौरान कृषि स्टार्टअप कॉन्क्लेव और किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया है। लिहाजा इस मौके पर किसानों के अकाउंट में पैसे ट्रांसफर हो सकते हैं। देश के किसान 12वीं किश्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। दरअसल, इस बार ई-केवाइसी की प्रक्रिया और किसानों के डेटाबेस के सत्यापन के कारण पीएम किसान की सहायता राशि में देरी हो रही है। बता दें, अब तक सरकार किसानों के बैंक खातों में 11 किश्तें जमा कर चुकी है। 11वीं किश्त के पैसे 31 मई को ट्रांसफर किए गए थे। केंद्र सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के बैंक खाते में हर साल 6 हजार रुपये ट्रांसफर करती है। इस योजना के माध्यम से सरकार 2000 रुपये की तीन किश्तें हर चार माह के अंतराल में किसानों के लिए जारी करती है। इस तरह एक साल में तीन किश्तों में यह राशि किसानों को दी जाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (अजीत कुमार)। लगभग सभी वेतनभोगी कर्मचारी ईपीएफओ यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सदस्य होते हैं। यदि आप भी ईपीएफओ के सदस्य हैं यानी इस निधि में योगदान कर रहे हैं तो काम की बात जानना आपके लिए जरूरी है। आपको इसका सदस्य बनते ही जीवन बीमा की सुरक्षा भी मिलनी शुरू हो जाती है। इस योजना को कर्मचारी जमा बीमा या ईडीएलआई कहते हैं। क्या है योजना : ईडीएलआई योजना, 1976, के तहत ईपीएफओ अपने सभी सबस्क्राइबर्स को एकमुश्त जीवन बीमा की सुविधा प्रदान करता है यानी उन्हें बीमा राशि मिलती है। इसका मतलब यह है कि लाइफ इंश्योरेंस बेनिफिट यानी एकमुश्त बीमा राशि प्रदान करता है। मतलब ईपीएफओ सदस्य की मौत अगर कुदरती वजहों, बीमारी या दुर्घटना के कारण हो जाती है तो इस योजना के तहत उसके नॉमिनी या परिवार के सदस्य को ईपीएफओ की ओर से एकमुश्त बीमा राशि दी जाती है। इस योजना का फायदा ईपीएफ और एमपी अधिनियम, 1952, के तहत आने वाले सभी कारखानों और प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को अपने आप मिलता है। मगर इसका फायदा केवल एक ही सूरत में मिल सकता है- जब कर्मचारी की मौत नौकरी के दौरान (यानी उस समय वह ईपीएफ में योगदान कर रहा हो) हुई हो। कितना योगदान जरूरी : यह बात तो लगभग सभी को पता है कि कर्मचारी अपने वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) का 12 फीसदी हिस्सा ईपीएफ में अंशदान करता है। ठीक इतनी ही रकम यानी तनख्वाह का 12 फीसदी नियोक्ता की ओर से भी ईपीएफ में अंशदान होता है। नियोक्ता वाले 12 फीसदी में से 8.33 फीसदी कमार्चारी पेंशन योजना (ईपीएस) में चला जाता है। मगर इस राशि की अधिकतम सीमा होती है किसी भी सूरत में 1,250 रुपये से अधिक रकम पेंशन कोष में नहीं डाली जा सकती। दिलचस्प है कि ईपीएफ के उलट आपको ईडीएलआई यानी बीमा योजना में एक पाई भी नहीं देनी पड़ती। वहां अंशदान केवल नियोक्ता की ओर से होता है। आपका नियोक्ता आपके वेतन के 0.5 फीसदी ईडीएलआई फंड में जमा करता है। मगर यह रकम भी 75 रुपये महीने से ज्यादा नहीं हो सकती। हां, नियोक्ता को ईडीएलआई योजना के परिचालन के लिए शुल्क भी देना होता है, जो वेतन का 0.01 फीसदी होता है। किन्हें मिलेगा फायदा : इस योजना का फायदा ईपीएफओ सदस्य के परिवार को मिलता है। मगर फायदा तभी मिल सकता है, जब सदस्य ने मौत से पहले 12 महीने के दौरान एक या अलग-अलग प्रतिष्ठानों में कम से कम 12 महीने लगातार काम किया हो। मार्च, 2020 से पहले इस योजना का फायदा उन परिवारों को नहीं मिल सकता था जहां ईपीएफओ सदस्य ने मौत से पहले 12 महीने निरंतर एक से अधिक प्रतिष्ठानों में नौकरी की थी। कितनी मिलती है बीमा राशि : 15 फरवरी 2018 को बीमा योजना के नियमों में बदलाव किया गया था। इसके तहत ईपीएफओ सदस्य की मौत होने पर उसके नॉमिनी को कम से कम 2.5 लाख रुपये के बीमा लाभ का प्रावधान किया गया है। इससे पहले न्यूनतम 1.5 लाख रुपये का ही प्रावधान था। 28 अप्रैल, 2021 से अधिकतम बीमा लाभ भी 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। कैसे लगायें लाभ का हिसाब : ईपीएफओ सदस्य की मौत जिस महीने हुई है उस महीने से ठीक पिछले 12 महीने का औसत मासिक वेतन लिया जाता है, जो अधिकतम 15,000 रुपये हो सकता है। इसे 35 से गुणा किया जाता है और उसके बाद जो भी राशि आती है, उसमें अधिकतम 1.5 लाख रुपये बोनस के रूप में जोड़ दिए जाते हैं। इस तरह अधिकतम बीमा लाभ 6 लाख रुपये (15,000 * 30 = 5,25,000 + 1,75,000 = 7,00,000) बनता है। बोनस का गणित : बोनस का हिसाब लगाने का गणित भी एकदम सरल है। ईपीएफओ सदस्य की मौत जिस महीने हुई है उस महीने से ठीक पिछले 12 महीने की पीएफ राशि (कर्मचारी के अंशदान और नियोक्ता के अंशदान में दोनों पर मिला ब्याज जोड़ने के बाद आई राशि) का 50 फीसदी या कुल पीएफ राशि का 50 फीसदी देखा जाता है। इन दोनों में से जो भी राशि कम होती है, उसे ही बोनस माना जाता है। मगर इसकी अधिकतम सीमा 1.75 लाख रुपये ही होती है। मगर ध्यान रहे कि बीमा का लाभ किसी भी कीमत पर 2.5 लाख रुपये से कम नहीं हो सकता। किसे नहीं मिलेगा लाभ : नियमों के मुताबिक अगर नियोक्ता अपने कर्मचारी को ईडीएलआई के बराबर या उससे बेहतर समूह बीमा लाभ देता है, तो उसे कर्मचारी बीमा योजना में अंशदान से दूर रहने का विकल्प दिया जाता है। मगर इसके लिए भी नियोक्ता को लिखित सूचना ईपीएफओ के पास भेजनी पड़ती है।
टीम एबीएन, चतरा/रांची। चतरा जिलेवासियों का चिरपरिचित व अतिमहत्वकांक्षी सपना जल्द साकार होने वाला है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े चतरा-गया रेल लाइन निर्माण योजना को रेल मंत्रालय ने अपनी अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है। जिसके बाद जिले में रेल कनेक्टिविटी का रास्ता अब साफ हो गया है। इस बाबत रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद सुनील कुमार सिंह व डीसी चतरा को योजना स्वीकृति का पत्र भेज दिया है। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना के तहत कुल 54 सौ 52 करोड़ रुपये की लागत से 99.345 किमी लंबा रेल लाइन का निर्माण कराया जायेगा। जिसके तहत बिहार के गया से झारखंड के चतरा को रेल लाइन से जोड़ने की स्वीकृत रेल मंत्रालय ने प्रदान की है। सांसद ने बताया कि योजना क्रियान्वयन को लेकर रेलवे बोर्ड ने भूमि अधिग्रहण को 926 करोड़ रुपये आवंटन कर जिला प्रशासन व राज्य सरकार को भेज दिया है। जिसके बाद जिले में रेलवे को ले भूमि अधिग्रहण का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने बताया कि चतरा-गया रेल लाइन में कूल 197 ब्रिज, आरओबी व टैनल का निर्माण होगा। रेलवे मंत्रालय ने गया-चतरा-टोरी इस्टम उपयोग अंतिम स्थान निर्धारण योजना को भी अंतिम अनुमोदन दे दिया है। जिससे भविष्य में चतरा-गया रेल लाइन को टोरी से जोड़ने में परेशानी न हो। चतरा-टोरी रेल लाइन को अंतिम मंजूरी मिलने पर चतरा पहुंचे सांसद का कार्यकर्ताओं व जिलेवासियों ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान समाहरणालय परिसर में गाजे-बाजे के साथ पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं ने जमकर आतिशबाजी करते हुए मिठाईयां बांटी है, जिसके बाद सांसद ने जनप्रतिनिधियों, जिले वासियों और मीडिया कर्मियों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से आज जिलेवासियों का सपना साकार होने जा रहा है। सांसद ने कहा कि जल्द ही निर्माण कार्य का शिलान्यास होगा।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम का शुभारंभ 12 अक्टूबर से होगा। कार्यक्रम का आयोजन दो चरणों में करने का निर्णय लिया गया है। पहला चरण 12 से 22 अक्टूबर 2022 तक एवं दूसरा चरण 1 से 14 नवम्बर, 2022 तक आपकी योजना-आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम संचालित किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आपके अधिकार आपकी सरकार आपके द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर आम ग्रामीणों से आवेदन प्राप्त करने तथा जांचोपरान्त उन्हें स्वीकृत कर योजना का लाभ स्थल पर ही लाभार्थी को उपलब्ध कराने की उस पहल को अपार सफलता मिली थी। इस कार्यक्रम अन्तर्गत राज्य भर में विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान करने हेतु कुल प्राप्त 35.95 लाख आवेदनों में से 35.56 लाख आवेदन निष्पादित किये गये इस प्रकार लगभग 99 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया गया एवं इससे आमजन काफी लाभान्वित हुए। इस कार्यक्रम की सराहना न सिर्फ इस राज्य में हुई बल्कि राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न समाचार-पत्रों, सोशल मीडिया आदि पर भी इसकी प्रशंसा की गई एवं इस कार्यक्रम को अत्याधिक जनोपयोगी बताया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। साल 2020 यानी लगभग दो साल से बंद पड़ी सरकारी कंपनी नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड में कारोबार शुरू हो गया है। एक बयान में टाटा ग्रुप ने कहा कि ओडिशा स्थित नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड ने टाटा स्टील की सहायक कंपनी ने 12,000 करोड़ रुपए में अधिग्रहण के लगभग 90 दिनों के बाद परिचालन शुरू कर दिया है। बता दें कि नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड एक सरकारी कंपनी थी, जिसे हाल ही में टाटा स्टील ने अपनी सब्सिडियरी कंपनी टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स (टीएसएलपी) के जरिए खरीदा है। यह डील इस साल जनवरी में 12,000 करोड़ रुपए में हुई थी। टाटा ग्रुप की प्रमुख स्टील कंपनी टाटा स्टील के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में 2.19% की तेजी रही। कंपनी के शेयर 100.50 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं। पिछले पांच दिन में यह शेयर 3.66% चढ़ा है। हालांकि, पिछले एक महीने में टाटा स्टील का शेयर बिकवाली के दबाव में है और 5.99% तक टूट चुका है। टाटा ने हाल ही बताया था कि नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड का परिचालन पुन: शुरू करने के वह तेजी से विकसित होगी और अगले कुछ वर्षों में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 45 लाख टन सालाना पर पहुंचायेगी। दस लाख टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले ओडिशा स्थित इस्पात संयंत्र का अधिग्रहण पूरा करने के बाद जारी बयान में टाटा स्टील ने कहा था कि एनआईएनएल की क्षमता 2030 तक बढ़ाकर एक करोड़ टन प्रतिवर्ष करने की भी योजना है। 1.1 मिलियन टन स्टील बनाने की क्षमता वाला प्लांट विभिन्न कारणों से लगभग दो वर्षों से बंद था। इसके अलावा कंपनी के पास खुद के इस्तेमाल वाला बिजली प्लांट है। कंपनी के पास लौह अयस्क खदान भी है, जो विकास के चरण में है। कंपनी के पास लौह अयस्क खदान भी है, जो विकास के चरण में है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले ही चारे की कमी को पूरा करने के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था। इसके तहत नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से चारे के लिए करीब 100 किसान उत्पादक संगठन भी स्थापित किया जाना शामिल था, लेकिन अभी तक एक भी एफपीओ रजिस्टर्ड नहीं कराया जा सका है। इस सुस्ती की वजह से कई कृषि परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है और चारे के संकट का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर से चारे के लिए 100 एफपीओ स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में तैयार किया गया था जो मई 2019 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में लौटने के तुरंत बाद 2019-20 के बजट में घोषित 10,000 एफपीओ बनाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का एक हिस्सा ही था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट आने से पहले 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट में औपचारिक रूप से इस योजना की शुरुआत की थी। चारे के लिए अब तक गठित नहीं एक भी एफपीओ : खबर के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस साल 16 अगस्त तक, 13 कार्यान्वयन एजेंसियों को 8,416 एफपीओ आवंटित किये गये हैं, जिनमें से 3,287 एफपीओ रजिस्टर्ड किये गये हैं। इसके अलावा, एनडीडीबी को आवंटित 26 एफपीओ में से महज एक को ही 16 अगस्त, 2022 तक रजिस्टर्ड किया गया है। एमओएफएएचडी के सूत्रों ने बताया कि एनडीडीबी के तहत यह एफपीओ भी शहद के लिए है, न कि चारे के लिए। एफपीओ योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों का गठन और संवर्धन – का कुल बजट परिव्यय 6,865 करोड़ रुपये है, जिसमें पांच साल यानी 2019-20 से 2023-24 के लिए 4,496 करोड़ रुपये और 2024-25 से चार साल के लिए 2,369 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध देनदारी है। पिछले साल चारे के लिए बनाई गई खास योजना : सरकारी सूत्रों ने कहा कि 28 सितंबर, 2020 को कृषि सचिव की अगुवाई वाली नेशनल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एडवाइजरी एंड फंड सैक्शनिंग कमेटी की चौथी बैठक में चर्चा की गई एजेंडा में से एक डेयरी क्षेत्र में एफपीओ भी था। एफपीओ योजना के साथ उदार वित्तीय सहायता के लिए, यह निर्णय लिया गया कि पशुपालन और डेयरी विभाग डेयरी किसानों से जुड़े 100 एफपीओ को लेकर एक प्रस्ताव तैयार करेगा और इसे प्रस्तुत करेगा। यह मामला 10 जून, 2021 को फिर से एन-पीएमएएफएससी में चर्चा के लिए आया। कृषि सचिव ने डीएएचडी को प्रस्ताव को इस तरह संशोधित करने को कहा कि यह चारे के आसपास ही केंद्रित रहे। एनडीडीबी, प्रस्तावित कार्यान्वयन एजेंसी, को डीएएचडी के जरिए संशोधित प्रस्ताव तुरंत प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था जिससे कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग एनडीडीबी को चारा प्लस मॉडल के लिए जल्द से जल्द एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में अधिसूचित कर सके। 100 चारा प्लस FPO के गठन का प्रस्ताव : फिर अगले दिन, केंद्रीय कृषि मंत्रालय को 100 चारा प्लस एफपीओ के गठन के लिए एक संशोधित प्रस्ताव प्राप्त हुआ। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर ग्राम स्तर पर भी एक मॉडल तैयार करने का विचार किया गया। सरकार की एफपीओ स्कीम के तहत, एफपीओ को तीन अलग-अलग तरीकों से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है : पहला, 18 रुपये प्रति एफपीओ की प्रबंधन लागत; प्रति एफपीओ अधिकतम 15 लाख रुपये का इक्विटी अनुदान; और उन परियोजनाओं के लिए प्रति एफपीओ क्रेडिट गारंटी कवर जहां अधिकतम ऋण 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
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