एबीएन सेंट्रल डेस्क। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ ने नौकरियों की आउटसोर्सिंग के विरोध में शनिवार को हड़ताल का आह्वान किया है। एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने यह जानकारी दी।
अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ ने नौकरियों की आउटसोर्सिंग के विरोध में शनिवार को हड़ताल का आह्वान किया है। एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हड़ताल से सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इससे निजी क्षेत्र के बैंक प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, अधिकारी वर्ग इस हड़ताल में शामिल नहीं होगा, लेकिन इससे बैंकों में जमा, निकासी, चेक का समाशोधन प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा आरबीआई द्वारा जारी छुट्टियों लिस्ट के हिसाब से इस महीने के बचे हुए 12 दिन में से 4 दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। इसमें से कई अवकाश राष्ट्रीय हैं। उस दिन पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं बंद रहेंगी। जबकि क्षेत्रीय छुट्टियों के कारण कुछ राज्यों में बैंक ब्रांच बंद होंगी।
बैंक आफ बड़ौदा और पंजाब एंड सिंध बैंक समेत कई बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को 19 नवंबर को हड़ताल की स्थिति में सेवाएं प्रभावित होने के बारे में सूचित कर दिया है।
पंजाब और सिंध बैंक ने गुरुवार को शेयर बाजारों को बताया कि अगर हड़ताल होती है तो बैंक के कर्मचारी उसमें हिस्सा ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में बैंक की शाखाओं/कार्यालयों का सामान्य कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। वेंकटचलम ने कहा कि कुछ बैंकों द्वारा नौकरियों की आउटसोर्सिंग से ग्राहकों की गोपनीयता और उनकी जमा धन को लेकर जोखिम पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि कुछ बैंक औद्योगिक विवाद (संशोधन) कानून का भी उल्लंघन कर रहे हैं। ऐसे मामले जिनमें श्रम अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया है, उनमें भी प्रबंधन सलाह को नजरअंदाज कर रहे हैं। प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का जबरन स्थानांतरण किया जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने संध्या देवनाथन को भारत के लिए नया हेड और वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। संध्या अब अजीत मोहन की जगह लेंगी। 1 जनवरी से संध्या देवनाथन मेटा इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट का कार्यभार संभालेंगी। बता दें कि अजीत मोहन ने इसी महीने की शुरुआत में इस्तीफा दिया है।
इसके पहले संध्या देवनाथन एशिया पेसेफिक मार्केट के गेमिंग वर्टिकल की कमान संभाल रही थीं। इसी के साथ संध्या मेटा में कार्यकारी प्रायोजक भी हैं। संध्या प्ले फॉरवर्ड के लिए ग्लोबल लीड भी हैं, जो कि गेमिंग मार्केट में क्षेत्र में मेटा का एक बड़ा प्रोजेक्ट है।
गौरतलब है कि मेटा इंडिया के कंट्री हेड अजीत मोहन के इस्तीफे के बाद अब ये कमान संध्या को सौंपी गई है। अजीत मोहन ने स्नैप जॉइन किया है, वहीं उनके वॉट्सएप इंडिया हेड अभिजित बोस और मेटा इंडिया के डायरेक्टर आॅफ पब्लिश पॉलिसी राजीव अग्रवाल ने भी इस्तीफा दिया था।
बता दें कि मेटा ने हाल ही में 11,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है। छंटनी की जानकारी देते हुए मेटा के सीईओ और फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने इस कदम के लिए कर्मचारियों से माफी भी मांगी। जकरबर्ग ने कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि रेवेन्यू में कमी और आईटी सेक्टर में जारी संकट के चलते यह फैसला करना पड़ा।
टीम एबीएन, रांची। सीएम हेमंत सोरेन से 17 नवंबर को ईडी के सवालों का सामना करेंगे। जानकारी के अनुसार ईडी ने अवैध खनन मामले में सीएम से पूछताछ के लिए करीब 200 सवाल तैयार किये हैं। जिसका जबाब सीएम हेमंत को देना होगा। हेमंत सोरेन से रांची के ईडी जोनल ऑफिस में गुरुवार यानी 17 नवम्बर को पूछताछ होगी।
सीएम से पूछताछ के लिए ईडी मुख्यालय से ज्वाइंट डायरेक्टर समेत तीन अधिकारियों की टीम रांची पहुंच चुकी है। ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए तकरीबन 200 सवालों की एक सूची तैयार की है। ईडी ने 3 नवंबर को पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को समन किया था, लेकिन तब मुख्यमंत्री ने तीन हफ्तों का वक्त मांगा था। बाद में दोबारा मुख्यमंत्री को समन कर 17 नवंबर को हाजिर होने को कहा गया था।
जानकारी के अनुसार हेमंत सोरेन जब ईडी दफ्तर जाने के लिए जब निकलेंगे तब उनके साथ काफी संख्या में भीड़ भी निकलेगी। इसे देखते हुए ईडी दफ्तर की सुरक्षा और राजधानी रांची में ट्रैफिक जाम की स्थिति न हो, इसके लिए पर्याप्त संख्या में बल तैनात किये गये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जी-20 शिखर सम्मेलन में नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। इसमें कहा गया कि आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए। जी-20 का ये संदेश सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिए संदेश को दशार्ता है। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में एक विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और दुनिया के लिए इसके प्रभावों पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श हुआ। जी-20 ने कहा कि समूह के सदस्यों ने शांति, शत्रुता को खत्म करने और यूक्रेन में युद्ध की समाप्ति का आह्वान किया है और कहा कि ऐसी स्थिति के जारी रहने से खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
मसौदे पर आम सहमति बनाने में भारत की अहम भूमिका
इस मामले के जानकार लोगों ने कहा कि भारत ने मसौदे पर सभी देशों के बीच आम सहमति बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत ने अंतिम बयान की प्रस्तावना का मसौदा तैयार करने के लिए सभी विकासशील देशों और उभरते बाजारों के साथ साझेदारी में काम किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से एक नेता, समाधान प्रदाता और आम सहमति निमार्ता के रूप में उभरा है। जी-20 विज्ञप्ति में कहा गया है, शांति और स्थिरता की रक्षा करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय प्रणाली को बनाए रखना आवश्यक है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में निहित सभी उद्देश्यों और सिद्धांतों का बचाव करना और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना शामिल है।
परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी अस्वीकार्य
इसने कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग या इसके उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है। मॉस्को ने साफ संकेत दिया था कि वह परमाणु विकल्प का उपयोग कर सकता है। सम्मेलन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आयोजित किया गया, क्योंकि यूक्रेन में युद्ध जारी है और इसके प्रभाव यूरोप से परे के देशों द्वारा महसूस किए जा रहे हैं। सदस्यों ने मानवीय संकट, युद्ध के आर्थिक और वित्तीय प्रभावों के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की और युद्ध को समाप्त करने का आह्वान किया। कई सदस्य देशों ने युद्ध को अकारण और अनुचित और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
यूक्रेन सहित कुछ हिस्सों में संघर्षों से गंभीर रूप से चिंतित
इसमें कहा गया है, कुछ सदस्यों ने राय रखी कि जी-20 को अपने खुद के जनादेश के प्रति वफादार होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चर्चा आर्थिक प्रभावों पर केंद्रित हो और एक व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए। कुछ सदस्यों ने प्रतिबंधों के आर्थिक परिणामों के बारे में चिंता व्यक्त की। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नेता यूक्रेन सहित दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते और चल रहे संघर्षों से गंभीर रूप से चिंतित हैं। सदस्यों ने शांति के लिए शत्रुता और युद्ध को समाप्त करने का आह्वान किया है। हम इस बात को रेखांकित करते हैं कि ऐसी स्थिति के जारी रहने से खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण में गिरावट के साथ-साथ टिकाऊ विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
टीम एबीएन, रांची। विधानसभा उत्कृष्ट चयन समिति की ओर से उत्कृष्ट विधायक के नाम की घोषणा हो गई है। इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष के आवास पर स्पीकर रविंद्र नाथ महतो, कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी सहित विधानसभा कर्मियों के साथ बैठक हुई। बैठक में विनोद सिंह उत्कृष्ट विधायक चुने गये।
टीम एबीएन, रांची। धरती आबा और उलगुलान के नायक भगवान बिरसा मुंडा की 147वीं जयंती और दूसरे जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर राष्ट्रपति बनने के बाद द्रौपदी मुर्मू पहली बार मंगलवार को रांची पहुंचीं। यहां से राष्ट्रपति भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली खूंटी जिला स्थित उलिहातू पहुंचीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने ओडा में बिरसा मुंडा की प्रतिमा को नमन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उनकी जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने बिरसा मुंडा के वंशजों से भी मुलाकात की, उनसे स्थानीय भाषा में बातें की।
भगवान बिरसा के वंशज आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से पक्के मकान बनवाने की गुहार लगाई है। रांची से हेलीकॉप्टर से राष्ट्रपति खूंटी के उलिहातू पहुंची थीं। उनके साथ राज्यपाल रमेश बैस और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी थे। सभी ने बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति का कार्यक्रम यहां आधे घंटे का था। कार्यक्रम में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मध्य प्रदेश रवाना हो गईं।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी और झारखंड की महिला, बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री जोबा मांझी ने उलीहातू में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
इससे पहले झारखंड पहुंचने के बाद रांची एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति का राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने स्वागत किया। झारखंड के लिए आज का दिन बेहद खास है। झारखंड ने अलग राज्य के लिए आज की तारीख चुनी थी। 15 नवंबर साल 2000 को झारखंड अलग हुआ। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के साथ राज्य स्थापना दिवस का जश्न भी मनाया रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे। उलिहातू में कार्यक्रम की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को सुरक्षा की दृष्टि से कार्यक्रम स्थल से 12 किमी पहले ही रोक दिया गया। राष्ट्रपति के कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों को विशेष पास दिया गया था।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति बनने के बाद द्रौपदी मुर्मू पहली बार झारखंड आईं हैं। राज्यपाल के तौर पर उनका इस राज्य से गहरा रिश्ता रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस राज्य की पहली महिला राज्यपाल होने का गौरव प्राप्त है। द्रौपदी मुर्मू का झारखंड में छह साल एक माह अठारह दिनों का कार्यकाल रहा। वे इस दौरान विवादों से बेहद दूर रहीं। बतौर कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने कार्यकाल में झारखंड के विश्वविद्यालयों के लिए चांसलर पोर्टल शुरू कराया। विश्वविद्यालयों के कॉलेजों के लिए एक साथ छात्रों का आनलाइन नामांकन शुरू कराया। विश्वविद्यालयों में यह नया और पहला प्रयास था। राज्य राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ऐसे कई बेहतरीन फैसले दर्ज हैं।
उल्लेखनीय है कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 के दशक में छोटे किसान के गरीब परिवार में हुआ था। बिरसा 19वीं सदी के प्रमुख आदिवासी जननायक थे। उनके नेतृत्व में मुंडा आदिवासियों ने उलगुलान आंदोलन को अंजाम दिया। बिरसा को मुंडा समाज के लोग भगवान के रूप में पूजते हैं। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन किया। बिरसा ने 9 जून, 1900 को रांची कारागार में अंतिम सांस ली।
टीम एबीएन, रांची। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती और राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह एक बार फिर ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जब मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य और राज्य वासियों की उन्नति, खुशहाली और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाओं की सौगात दी। निश्चित तौर पर ये योजनाएं झारखंड के लिए उम्मीदों का नया सवेरा लेकर आएगी। जहां राज्य विकास के नए आयाम स्थापित स्थापित करेगा वहीं राज्य वासियों की उम्मीदें और आशाएं पूरी होंगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि ये सभी नीतियां और योजनाएं झारखंड के सुनहरे भविष्य की आधारशिला रखेंगी।
147 योजनाओं की रखी नींव, 222 का उद्घाटन
इस अवसर पर 7309. 58 करोड़ रुपए की लागत से कुल 369 योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ। इसमें 5433.24 करोड़ रुपए की लागत से 147 योजनाओं की आधारशिला और 1876.34 करोड़ रुपए की लागत से 222 योजनाओं का उद्घाटन हुआ।
जिन योजनाओं का शिलान्यास संपन्न हुआ, उसमें पथ निर्माण विभाग की 41 (राशि 1718.64 करोड़), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की 17 (931.31 करोड़), भवन निर्माण विभाग की 4 (261.34 करोड़), जल संसाधन विभाग की 3 (84.27 करोड़), नगर विकास एवं आवास विभाग की 12 (1658.86 करोड़), स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की 3 (74.31 करोड़), अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग एवं कल्याण विभाग की एक, ग्रामीण कार्य विभाग की 14, झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन की 16, कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग की 17, स्वास्थ्य विभाग की 14 (517.65 करोड़) और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की 5 योजनाएं शामिल हैं।
जिन योजनाओं का उद्घाटन किया गया उनमें पथ निर्माण विभाग की 43, जल संसाधन विभाग की 2, भवन निर्माण विभाग की 2, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की 7, नगर विकास एवं आवास विभाग की 13, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की 7, ग्रामीण कार्य विभाग की 13, झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन की 25, श्रम नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग की 6, स्वास्थ्य विभाग की 8, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की 10 और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की 86 योजनाएं शामिल है।
इस मौके पर झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित 609, लेखा पदाधिकारी के लिए अनुशंसित 16 और रिम्स रांची में परिचारिका के लिए चयनित 320 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया.
लाभुकों के बीच बंटी परिसंपत्तियां
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में 13,90, 164 लाभुकों के बीच 1247.39 करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. इसके अलावा 12 अक्टूबर से 14 नवंबर तक दो चरणों में आयोजित आपकी योजना, आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत 12 जिलों में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शामिल हुए इस दौरान उन्होंने इन जिलों में (12 नवंबर तक) 8,95,324 लाभुकों के बीच 759.21 करोड़ रुपए की परिसंपत्तियां बांटी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें यूक्रेन में संघर्ष-विराम और कूटनीति की राह पर लौटने का रास्ता खोजना होगा। पिछली शताब्दी में, दूसरे विश्व युद्ध ने विश्व में कहर ढाया था। उसके बाद उस समय के नेताओं ने शांति की राह पकड़ने का गंभीर प्रयत्न किया। अब हमारी बारी है। पोस्ट-कोविड काल के लिए एक नई वैश्विक व्यवस्था की रचना करने का जिम्मा हमारे कंधों पर है। समय की मांग है कि हम विश्व में शांति, सद्भाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और सामूहिक संकल्प दिखायें। मुझे विश्वास है कि अगले वर्ष जब जी-20 बुद्ध और गांधी की पवित्र भूमि मे मिलेगा, तो हम सभी सहमत हो कर, विश्व को एक मजबूत शांति-संदेश देंगे। पीएम मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के निमंत्रण पर तीन दिन की यात्रा पर कल रात यहां पहुंचे। आज सुबह जी-20 शिखर सम्मेलन में पहुंचने पर विडोडो ने पीएम मोदी का आत्मीय स्वागत किया।
सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सबसे पहले आज कठिन वैश्विक वातावरण में जी-20 को प्रभावी नेतृत्व देने के लिए राष्ट्रपति विडोडो की सराहना की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, कोविड महामारी, यूक्रेन का घटनाक्रम और उससे जुड़ी वैश्विक समस्याओं ने मिल कर विश्व मे तबाही मचा दी है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं तहस-नहस हो गई हैं। पूरी दुनिया मे जीवन-जरूरी चीजें, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का संकट बना हुआ है। हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौती और गंभीर है। वे पहले से ही रोजमरर के जीवन से जूझ रहे थे। उनके पास दोहरी मार से जूझने की आर्थिक क्षमता नहीं है। हमें इस बात को स्वीकार करने से भी संकोच नहीं करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाएं इन मुद्दों पर निष्फल रही हैं। और हम सभी इनमे उपयुक्त सुधार करने में भी असफल रहे हैं। इसलिए आज जी-20 से विश्व को अधिक अपेक्षाएं हैं, हमारे समूह की प्रासंगिकता और बढ़ी है।
पीएम मोदी ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने अपने 1.3 अरब नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही अनेकों जरूरत मंद देशों को भी खाद्यान्न की आपूर्ति की। खाद्य सुरक्षा के संदर्भ मे खाद की वर्तमान किल्लत भी एक बहुत बड़ा संकट है। आज की उवरर्क की कमी कल का खाद्य संकट है, जिसका समाधान विश्व के पास नहीं होगा। हमें खाद और खाद्यान्न दोनों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर एवं भरोसेमंद रखने के लिए आपसी सहमति बनानी चाहिए। भारत में सतत खाद्य सुरक्षा के लिए हम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, और मोटे अनाज यानी मिलेट्स जैसे पौष्टिक और पारंपरिक खाद्यान्न को फिर से लोकप्रिय बना रहे हैं। मिलेट्स से वैश्विक कुपोषण और भुखमरी की समस्या का भी समाधान हो सकता है। हम सभी को अगले वर्ष अंतररष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष जोर-शोर से मनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत की ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है। हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी तरह के प्रतिबंधों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए तथा ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए। भारत स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्ध है। 2030 तक हमारी आधी बिजली नवीकरणीय स्रोतों से पैदा होगी। समावेशी ऊर्जा स्रोत संक्रमण के लिए विकासशील देशों को समयबद्ध और किफायती वित्तपोषण और तकनीक की स्थायी आपूर्ति अनिवार्य है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान, हम इन सभी मुद्दों पर वैश्विक सहमति के लिए काम करेंगे। जी-20 का अगला सत्र स्वास्थ्य को लेकर अपराह्न होगा। जबकि तीसरा सत्र डिजीटल परावर्तन पर कल आयोजित किया जाएगा। पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर विश्व में आर्थिक रूप से शक्तिशाली 20 देशों के शिखर सम्मेलन के प्रथम सत्र में खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा विषय पर अपने संबोधन मंम ये आह्वान किया।
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