एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 24) में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य नॉमिनल जीडीपी के 5.8 से 6 प्रतिशत के बीच रख सकती है। वहीं आगामी केंद्रीय बजट में सरकार पूंजीगत व्यय पर जोर जारी रखने के साथ व्यक्तिगत आयकर को सरल करने पर विचार कर सकती है। बजट पूर्व चर्चा में देश के जाने माने अर्थशास्त्रियों ने आज वित्त मंत्री व उनकी टीम को यह सलाह दी है।
पिछले सप्ताह से शुरू करके सीतारमण ने अब तक 8 बजट पूर्व परामर्श किये हैं। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि इसमें 7 हिस्सेदार समूह के 110 से ज्यादा आमंत्रित लोगों ने हिस्सा लिया। हिस्सेदारों के समूह में कृषि और कृषि प्रसंस्करण उद्योग, उद्योग, बुनियादी ढांचा और जलवायु परिवर्तन, वित्तीय क्षेत्र व पूंजी बाजार, सेवा व व्यापार, सामाजिक क्षेत्र, ट्रेड यूनियन और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों व अर्थशास्त्रियों ने हिस्सा लिया।
अर्थशास्त्रियों के साथ हुई बैठक के दौरान हुई चर्चा से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, ह्यज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया है कि राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.5 प्रतिशत रखने के मध्यावधि लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए राजकोषीय घाटे को 5.8 से 6 प्रतिशत के बीच रखा जाना चाहिए। यह भी सुझाव दिया गया कि केंद्र सरकार को पूंजीगत व्यय पर जोर देना चाहिए और कर व्यवस्था सरल करने पर विचार करना चाहिए।
वित्त मंत्रालय से यह भी कहा गया है कि राज्यों को दीर्घावधि ऋण देकर समर्थन दिया जाना चाहिए, जिससे पूंजीगत व्यय कार्यक्रमों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा है कि साथ ही राज्यों को व्यय करने में ज्यादा स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, जिससे वृद्धि को रफ्तार मिल सके। व्यापक रूप से विचार यह था कि इस तरह के कदम से मांग के लिए माहौल बनेगा, जो दो साल की महामारी के बाद बढ़ रही है।
बैठक में शामिल होने वाले अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों में डॉ बीआर आंबेडकर स्कूल आॅफ इकनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के एनआर भानुमूर्ति, स्वदेशी जागरण मंच के अश्वनी महाजन, नैशनल काउंसिल आफ अप्लायड इकनॉमिक रिसर्च की पूनम गुप्ता, मौद्रिक नीति समिति की आशिमा गोयल, कार्तिक मुरलीधरन, इक्रा लिमिटेड की अदिति नायर, गोल्डमैन सैक्स के शांतनु सेनगुप्ता, बार्कलेज के राहुल बाजोरिया, बैंक आफ बड़ौदा के मदन सबनवीस, इक्रियर के दीपक मिश्रा व अन्य शामिल थे।
सीतारमण के अलावा बजट बनाने के काम में लगे लोगों में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और भागवत करड, वित्त सचिव टीवी सोमनाथन, आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के साथ दीपम, कंपनी मामलों मंत्रालय के सचिवों व अन्य अधिकारियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया।
अर्थशास्त्रियों की सिफारिशें व्यापक रूप से वही हैं, जो उद्योग संगठनों ने पिछले सोमवार को हुई बैठक के दौरान की थी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि वैश्विक वृहद आर्थिक स्थिति के कारण संभवत: निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय पूरी तरह से बहाल नहीं होगा।
इसलिए उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि पूंजीगत व्यय जारी रखने की जरूरत है, जिससे कि बुनियादी ढांचे में निवेश को समर्थन मिल सके। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा था कि बजट में नौकरियों के सृजन और कराधान संबंधी कदमों को प्राथमिकता देने की जरूरत है, जो व्यापक आधार पर खपत को बढ़ावा देगा।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक हिस्सेदार समूहों के प्रतिनिधियों ने 8 बैठकों के दौरान तमाम सुझाव दिए, जिसमें एमएसएमई की मदद के लिए हरित प्रमाणीकरण (ग्रीन सर्टिफिकेशन) की व्यवस्था, शहरी रोजगार गारंटी योजना, आयकर को तार्किक बनाना, नवोन्मेष क्लस्टर का सृजन, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला में सुधार, इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर घटाना, ईवी नीति लाना, सामाजिक क्षेत्र उद्यमशीलता कोष का गठन, जल एवं स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण, ईएसआईसी के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को शामिल किया जाना, पूंजीगत व्यय जारी रखना, वित्तीय समेकन, सीमा शुल्क कम करना आदि है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत और आॅस्ट्रेलिया के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) 29 दिसंबर से लागू होगा। आॅस्ट्रेलिया के व्यापार और पर्यटन मंत्री डॉन फैरेल ने बुधवार को एक बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा कदम है जिससे पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 45-50 अरब डॉलर तक पहुंच जायेगा।
बयान में कहा गया है कि एंथनी अल्बनीज सरकार इस पुष्टि का स्वागत करती है कि भारत सरकार ने आॅस्ट्रेलिया-भारत आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) के क्रियान्वयन के लिए अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता 29 दिसंबर, 2022 से आॅस्ट्रेलिया की कंपनियों और उपभोक्ताओं नई बाजार पहुंच के अवसर उपलब्ध करायेगा।
इस समझौते पर इस साल दो अप्रैल को हस्ताक्षर किये गये थे। समझौते के तहत आॅस्ट्रेलियाई बाजार में कपड़ा, चमड़ा, फर्नीचर, आभूषण और मशीनरी समेत 6,000 से अधिक व्यापक क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। इसके अलावा समझौते से श्रम केंद्रित क्षेत्रों मसलन कपड़ा और परिधान, कुछ कृषि और मछली उत्पाद, चमड़ा, जूते, फर्नीचर, खेल के सामान, आभूषण, मशीनरी और बिजली का सामान को लाभ होगा।
एबीएन नॉलेज डेस्क। टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने टेलीकॉम कंपनियों को एयरपोर्ट के रनवे के दोनों ओर 2 किलोमीटर तक 5जी सेवा न देने के निर्देश दिये हैं। साथ ही रनवे के 910 मीटर तक कंपनियां सर्विस नहीं दे सकेंगी। इसका मतलब है कि अगर आप एयरक्राफ्ट में बैठे हैं तो आप 5जी सर्विस का आनंद नहीं ले सकेंगे। साथ ही भारत में कई सारे एयरपोर्ट बहुत छोटे हैं जहां पर सर्विस दे पाना काफी मुश्किल है।
टेलीकॉम कंपनियों ने जोर-शोर से 5जी सेवाएं शुरू करने का ऐलान किया है। गौरतलब है कि भारती एयरटेल देश के पांच एयरपोर्ट पर 5जी सेवा देने की घोषणा कर चुका है। दरअसल 5जी के सिग्नल से एयरक्राफ्ट का अल्टीमीटर प्रभावित होता है। टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने डीजीसीए से एयरक्राफ्ट के अल्टीमीटर्स को रिप्लेस करने में तेजी दिखाने को कहा है।
कहां स्थापित किये जा सकते हैं 5जी बेस स्टेशन
रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को इसी तरह के लेटर्स में आगे कहा कि इस 2.1 किलोमीटर की लीमिट के बाद 540 मीटर की एरिया में 5जी बेस स्टेशन स्थापित किए जा सकते हैं, लेकिन बिजली उत्सर्जन 58तक सीमित होना चाहिए। टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को यह उपाय तत्काल प्रभाव से अपनाने होंगे। यह तब तक लागू रहेंगे जब तक कि सभी एयरक्राफ्ट रेडियो अल्टीमीटर फिल्टर को नहीं बदल देते हैं।
जल्द अल्टीमीटर रिप्लेस करने के निर्देश
शासनादेश का मतलब है कि हवाई अड्डों के आसपास के क्षेत्रों में फिलहाल 5जीसेवाएं नहीं होंगी। उदाहरण के लिए दिल्ली में वसंत कुंज और द्वारका जैसे क्षेत्रों में 5जी नहीं होगा। टेलीकॉम फर्मों को 5जी बेस स्टेशनों को इस हद तक नीचे की ओर झुकाने के लिए कहा गया है ताकि 5जी उत्सर्जन रेडियो अल्टीमीटर को इंटरफेयर न करें।
अल्टीमीटर के रिप्लेसमेंट के संबंध में कहा कि डीजीसीए इसे समय पर कर लेगा। पत्र में कहा गया है कि डीजीसीए से अनुरोध है कि ये कार्य पूरा होते ही डीओटी को सूचित करे ताकि प्रतिबंधों को हटाया जा सके। इस मामले में तीनों टेलीकॉम कंपनियों की ओर से बयान नहीं आया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला किया है। झारखंड राज्य सौर नीति 2022 के तहत 1000 गांवों को सोलराइज करने के लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए प्रथम चरण में 2023 तक झारखंड के 200 गांवों को सोलराइज करने को दिशा में सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिया है। ताकि गांवों को सोलराइज करके ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आर्थिक विकास को बढ़ावा, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में सुधार, ग्रामीण आय को बढ़ाना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सौर को एकीकृत करके रोजगार का अवसर प्रदान किया जा सके।
इस कड़ी में गिरिडीह को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां घरेलू उपभोक्ता के लिए कुल 17 मेगावाट एवं वाणिज्यिक सेक्टर के लिए 5 मेगावाट का रूफटॉप पॉवर प्लांट, एक मेगावाट सोलर स्ट्रीट लाइट एवं ग्राउंड माउंटेड सोलर पॉवर प्लांट 18 मेगावाट का लक्ष्य रखा गया है । प्रथम चरण में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 5 मेगावाट रूफटॉप लगाने की कार्यवाही चल रही है।
सौर नीति के तहत सरकार ग्रामीण क्षेत्रों और ग्रामीणों को सशक्त करना चाहती है। इसके लिए सभी अड़चनों को करने का कार्य किया जाएगा। जिससे स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, पुलिस स्टेशनों जैसी संस्थागत केंद्रों को सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही, ग्रामीणों द्वारा उपयोग किए जाने वाले दुकानों एवं कृषि कार्य में सौर ऊर्जा का उपयोग हो सके। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित एमएसएमई को सशक्त करना भी है।
रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान
नीति के तहत बिजली की अधिक खपत वाले गांवों को प्राथमिकता देने का कार्य किया जाएगा। मध्यम आकार के गांवों या अधिक छोटे समूहों की पहचान करने का निर्देश सरकार ने दिया है। साथ ही, गांव में कृषि उद्योग के अतिरिक्त नौकरी के अवसर सृजित करने पर अधिक जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के प्रत्येक जिले में चयन मानदंडों के आधार पर सौर गांवों में तब्दील किए जाने वाले गांवों की प्राथमिकता सूची की पहचान, चिह्नित गांवों की सूची उपायुक्तों के साथ साझा करने, गांवों में आजीविका को लेकर सौर ऊर्जा के नए प्रयोगों को लागू करने की संभावनाओं या क्षमता का आकलन करने, सामुदायिक सौर प्रतिष्ठानों के लिए उपयुक्त सरकारी और निजी भूमि वाले गांवों में भूमि बैंकों की पहचान कर नक्शा बनाने और गांवों की मांग को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित का निर्देश दिया है। किसानों को ध्यान में रखते हुए माइनर इरिगेशन में भी सौर ऊर्जा के उपयोग पर ध्यान देने का निर्देश मिला है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने डिजिटल मुद्रा - डिजिटल रुपया को लेकर बड़ा एलान किया है। आरबीआई ने कहा है कि वह एक दिसंबर को खुदरा डिजिटल रुपये के लिए पहली खेप लॉन्च करेगी। यह एक डिजिटल टोकन के रूप में होगा। यह कानूनी निविदाओं का प्रतिनिधित्व भी करेगा।
आरबीआई ने यह भी बताया कि डिजिटल रुपया उसी मूल्यवर्ग में जारी किया जायेगा जिसमें वर्तमान में कागजी मुद्रा और सिक्के जारी किये जाते हैं। रिजर्व बैंक ने 01 दिसंबर, 2022 को खुदरा डिजिटल रुपये का पहला पायलट लॉन्च करने की घोषणा की है। इससे पूर्व आरबीआई ने 31 अक्टूबर, 2022 की एक प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि खुदरा डिजिटल रुपये का पायलट प्रोजेक्ट एक महीने में शुरू होगा।
ई डिजिटल रुपया पायलट प्रोजेक्ट में भाग लेने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) में चुनिंदा लोकेशन पर उपलब्ध होगा। ई डिजिटल रुपया एक टोकन के रूप में लीगल टेंडर होगा। यह उसी मूल्यवर्ग में जारी किया जायेगा जो वर्तमान में कागजी मुद्रा और सिक्के के रूप में जारी किये जाते हैं।
यह सब्सिडियरीज यानी बैंकों के माध्यम से वितरित किया जायेगा। इसके उपयोगकर्ता बैंकों की ओर से उपलब्ध कराये गये एप के जरिए इसे खरीद सकेंगे और अपने मोबाइल फोन में सुरक्षित कर सकेंगे। इसमें व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति व व्यापारियों के बीच लेनदेन किया जा सकेगा। मर्चेंट स्टोर पर लगे क्यूआर कोड का उपयोग करके व्यापारियों को भुगतान किया जा सकेगा।
रिटेल डिजिटल रुपये के पहले चरण के पायलट प्रोजेक्ट में चार बैंक शामिल होंगे। इनमें स्टेट बैंक आॅफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल हैं। दूसरे चरण के पायलट प्रोजेक्ट में बैंक आॅफ बड़ौदा, यूनियन बैंक आॅफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक व कोटक महिंद्रा बैंक शामिल रहेंगे।
डिजिटल रुपये को करेंसी नोट और सिक्कों के डिनॉमिनेशन में परिवर्तित किया जा सकेगा
खुदरा ई रुपये के पहले चरण के पायलट प्रोजेक्ट में मुंबई, नई दिल्ली, बेंगलुरु व भुवनेश्वर जैसे शहरों को शामिल किया गया है। उसके बाद के चरणों में अहमदाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, पटना और शिमला शहर शामिल होंगे शामिल होंगे। जैसे-जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा इसमें और अधिक बैंक और शहरों को शामिल किया जायेगा। केंद्रीय बैंक के रिटेल डिजिटल रुपए पर ग्राहकों को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। डिजिटल रुपये को करेंसी नोट और सिक्कों के डिनॉमिनेशन में परिवर्तित किया जा सकेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। साल का अंतिम महीना परसों से शुरू हो जायेगा। ऐसे में कई सारे काम हैं जो आपको इसी महीने करने होंगे। साथ ही कुछ बदलाव भी एक दिसंबर से हो जायेंगे।
जुर्माने के साथ भर सकेंगे रिटर्न
अगर आपने 2021-22 का आयकर रिटर्न अब तक दाखिल नहीं किया है तो जुर्माने के साथ 31 दिसंबर तक इसे भर सकते हैं। अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये से कम है तो आपको 1,000 रुपये जुर्माना देना होगा। कुल आय 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर जुर्माने की रकम बढ़कर 5,000 रुपये हो जायेगी।
अग्रिम कर की तीसरी किस्त
2022-23 के अग्रिम कर (एडवांस टैक्स) की तीसरी किस्त भरने की आखिरी तारीख 15 दिसंबर है। जिनका सालाना आयकर 10,000 रुपये से ज्यादा होता है, उन्हें अग्रिम कर जमा करना पड़ता है। अगर 15 दिसंबर तक वे 75 फीसदी कर पहले जमा नहीं करते हैं या कम कर जमा करते हैं तो एक फीसदी ब्याज लगेगा।
आईटी रिटर्न में गलती सुधार
हो सकता है कि आपने वित्त वर्ष 2021-22 का आयकर रिटर्न भर दिया हो और उसमें कोई चूक हो गयी हो। ऐसे में आप 31 दिसंबर तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद गलती नहीं सुधार पाएंगे। इसकी वजह से आपके पास आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है।
...तो नहीं जमा कर पायेंगे जीवन प्रमाणपत्र
सरकार से पेंशन लेने वालों को हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना पड़ता है। इसे जमा करने की आखिरी तारीख 30 नवंबर है। इस महीने के अंत तक जिन्होंने जीवन प्रमाण पत्र जमा नहीं किया तो उन्हें एक दिसंबर से ऐसा करने में असुविधा हो सकती है।
गैस की कीमतों में बदलाव
देशभर में हर महीने पहली तारीख या पहले सप्ताह में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में बदलाव होता है। ऐसे में एक तारीख को कीमतें घटने या बढ़ने के साथ हो सकता है कि न भी बदलें।
शुरू होंगी बैंकों में छुट्टियां
अगले महीने 13 दिन बैंक बंद रहेंगे। बैंक की 13 दिनों की छुट्टियों में दूसरे और चौथे शनिवार और सभी रविवार को साप्ताहिक अवकाश है। दिसंबर में क्रिसमस, साल का आखिरी दिन और गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्मदिन भी आ रहा है, इस दिन बैंको में अवकाश रहता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत बायोटेक के नेजल कोविड वैक्सीन को भारत में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल गयी है। डीजीसीआई ने नियंत्रित इस्तेमाल का निर्देश दिया है। भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ने नाक से लिए जाने वाले वैक्सीन इनकोवैक (बीबीवी154) का निर्माण किया है, जिसे खासतौर पर बूस्टर डोज के रूप में लगाया जायेगा। कंपनी ने सोमवार को बताया कि इसका इस्तेमाल हेट्रोलोगस बूस्टर खुराक के रूप में किया जायेगा।
वैक्सीन निर्माता कंपनी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, इनकोवैक दुनिया का पहला ऐसा वैक्सीन है जिसे प्राइमरी सीरिज में और हेट्रोलोगस बूस्टर खुराक दोनों के रूप में मंजूरी मिली है। प्रेस रिलीज में कहा गया है कि तीन चरणों के क्लीनिकल ट्रायल में वैक्सीन लेने वालों का परीक्षण किया गया और सफल परिणाम आने के बाद उसे खास तौर से नाक में ड्रॉप (बूंद) के जरिए डालने के लिए विकसित किया गया है।
पहले मिली थी रिस्ट्रिक्टेड इस्तेमाल की मंजूरी
भारत बायोटेक का कहना है कि नाक के माध्यम से दिये जाने वाले इस वैक्सीन को खास तौर से कम और मध्यम आय वाले देशों के हिसाब से बनाया गया है। भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को पहले 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए शुरुआती दो डोज के इमरजेंसी रिस्ट्रिक्टेड इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी। इस वैक्सीन का तीसरा ट्रायल 14 ट्रायल साइट्स पर 3,100 लोगों पर किया गया है, जिसमें वैक्सीन कीसुरक्षा, प्रतिरक्षण क्षमता की जांच की गयी।
इनकोवैक को वाशिंगटन विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है।
नेजल वैक्सीन के दोहरे फायदे इनकोवैक के दोहरे फायदे हैं। खास बात ये ही कि इंट्रानेजल वैक्सीन के डेवलपमेंट से वैरिएंट-स्पेसिफिक वैक्सीन के निर्माण में मदद मिलेगी, वहीं नेजल वैक्सीन से मास इम्युनाइजेशन किया जा सकता है, जिससे अन्य वैरिएंट के उत्पन्न होने का खतरा कम हो सकता है। यह महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन में एक महत्वपूर्ण हथियार साबित हो सकता है। हालिया मंजूरी के बाद वैक्सीन के लॉन्च की तारीखें, इसकी कीमत क्या होगी और यह कहां लगाए जायेंगे, इसका ऐलान कंपनी ने फिलहाल नहीं किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भारत बायोटेक इस बारे में ऐलान कर सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार को होने वाली एक प्रशासनिक बैठक के दौरान सुंदरबन और बशीरहाट को राज्य के दो नये जिले बनाने की आधिकारिक घोषणा कर सकती हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी सोमवार को दी। अधिकारी ने बताया कि दोनों जिलों को दक्षिण और उत्तर 24 परगना जिलों से अलग किया जाना है। दो नए जिले बनाने के लिए सभी आवश्यक कार्य पूरे कर लिये गये हैं।
मुख्यमंत्री कल हिंगलगंज में प्रशासनिक बैठक के दौरान इनके नामों की घोषणा कर सकती हैं। मुख्यमंत्री ने सोमवार को तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत सुंदरबन के मैंग्रोव क्षेत्र से की। सुंदरबन जिले में दक्षिण 24 परगना के लगभग 13 ब्लॉक होने की संभावना है, जबकि बशीरहाट में उत्तर 24 परगना के छह ब्लॉक हो सकते हैं। सुंदरबन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और वर्तमान में उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में फैला हुआ है, जबकि बशीरहाट उत्तर 24 परगना का एक उप-मंडल है।
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