एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को पापुआ न्यू गिनी में भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग (एफआईपीआईसी) शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। समिट में अपनी बात को रखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए पूरा विश्व एक परिवार की तरह है। वन फैमिली, वन फ्यूचर हमारा मूल मंत्र है। हमारे लिए पूरी दुनिया एक परिवार की तरह है।
कोरोना काल में भई भारत ने कई देशों की मदद की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत पापुआ न्यू गिनी का भरोसेमंद पार्टनर है। हम साथी देश की मदद करते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने सोलर अलायंस के साथ सभी देशों से जुड़ने की अपील भी की। उन्होंने कहा- हम आपके अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करते हैं और भारत विविधता पर भरोसा करता है। भारत हर तरह की मदद के लिए तैयार है।
बता दें कि इस समिट में 14 देश शामिल हुए हैं। समिट में कोरोना के प्रभाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महामारी का प्रभाव ग्लोबल साउथ देशों पर सबसे अधिक पड़ा है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, भुखमरी, गरीबी और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां पहले से ही थी अब फ्यूल, फर्टिलाइजर और फार्मा को लेकर नयी परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं।
विकास और भागीदारी की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आप एक विश्वसनीय पार्टनर के रूप में भारत पर भरोसा कर सकते हैं। हम बिना किसी हिचकिचाहट के आपके साथ अपने अनुभव और क्षमताओं को साझा करने के लिए तैयार हैं। भारत बहुपक्षवाद में विश्वास करता है और एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो पैसिफिक का समर्थन करते हैं।
पीएम ने कहा कि भारत जी-20 के जरिए ग्लोबल साउथ की चिंताओं, उनकी अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को इस समिट के जरिए विश्व के समक्ष पहुंचाना अपना दायित्व मानता है। जी-7 में भी मेरी यही कोशिश रही है। जहां तक बात जलवायु परिवर्तन की है तो इस मुद्दे को लेकर भारत टारगेट निर्धारित कर रखा है और उन पर तेजी से काम भी कर रहा है।
समिट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक पिसिन भाषा में तिरुक्कुरल, जिसे प्राचीन मुक्तक काव्य रचना भी कहा जाता है का विमोचन भी किये। पीएम ने कहा कि इसके लिए वो बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं। पीएम के साथ पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री भी साथ रहे।
टीम एबीएन, रांची। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक 31 मई को होगी। इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय समन्वय विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।
मुख्यमंत्री की हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शाम चार बजे प्रोजेक्ट भवन में होने वाली बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाने की संभावना है।
मंत्रिमंडल सचिवालय समन्वय विभाग में सभी विभागों को पत्र लिखकर प्रस्ताव की मांग की है, जिसे कैबिनेट की बैठक मंं रखा जायेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने बयान में कहा कि यूक्रेन की मौजूदा स्थिति कोई राजनीति या आर्थिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह एक मानवीय मुद्दा मानवीय मूल्यों का मुद्दा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में परोक्ष रूप से चीन पर भी निशाना साधा और कहा कि यथास्थिति में एकतरफा बदलाव की किसी भी कोशिश का विरोध होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कही ये बातें
जी-7 के एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोई भी विवाद और तनाव की स्थिति को शांतिपूर्वक तरीके से बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने भगवान बुद्ध का जिक्र करते हुए बताया कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से सुलझाया ना जा सके। भगवान बुद्ध ने शत्रुता को बातचीत से खत्म करने की बात कही थी और हमें भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
यूक्रेन की हरसंभव मदद करेंगे
जी-7 की बैठक से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी बात की। यूक्रेनी राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन की मदद के लिए भारत जो संभव होगा, वो सब करेगा।
जी-7 के सम्मेलन में यूक्रेन युद्ध पर काफी फोकस रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम शुरुआत से ही कहते रहे हैं कि बातचीत और कूटनीति के जरिए आज किसी भी समस्या को सुलझाया जा सकता है। यूक्रेन संकट में भी भारत मदद करने की कोशिश करेगा।
चीन पर साधा निशाना
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में किसी का नाम लिए बगैर कहा कि सभी देश यथास्थिति बदलने के खिलाफ एकसुर में आवाज उठायें। भारत का सीमा पर चीन के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा है और दोनों देश सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। ऐसे में पीएम मोदी के उक्त बयान को चीन पर परोक्ष रूप से निशाना माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकाला जा सकता है।
पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति का विकासशील देशों पर बुरा असर पड़ रहा है। मौजूदा संकट के चलते खाने, तेल और फर्टिलाइजर का संकट बढ़ा है, खासकर विकासशील देश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के 3 अधिकारियों का स्थानांतरण और पदस्थापन किया है। ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव मनोज जायसवाल को स्थानांतरित करते हुए उन्हें अगले आदेश तक दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल का प्रभारी प्रमंडलीय आयुक्त के पद पर पदस्थापित किया है।
राज्य के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना के अनुसार पदस्थापन के लिए प्रतीक्षारत शशि प्रकाश झा को अगले आदेश तक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग का अपर सचिव बनाया गया है। इसके अलावा गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव मनमोहन प्रसाद को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उद्योग विभाग का अपर सचिव बनाया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख विभागीय सचिव अबु बकर सिद्दीक के साथ केरला के त्रिशूर गए, जहां उन्होंने केरल कृषि विश्वविद्यालय का दौरा किया। भ्रमण के दौरान डीन सहित विश्वविद्यालय के पदाधिकारी मौजूद थे।
कृषि के क्षेत्र में हो रही नवीन तकनीक के प्रयोग को उन्होंने देखा। श्री बादल एग्री बिजनेस सेंटर भी गए, जहां पर केरल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विभिन्न प्रकार की नवीन तकनीक से भी रूबरू हुए।
केंद्र के प्रभारी ने बताया गया कि नयी तकनीक के द्वारा केरल में उत्पादित विभिन्न फल और सब्जियों का प्रसंस्करण करते हुए वैल्यू एडिशन के साथ प्रोसेस कर प्रोडक्ट तैयार करके बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।
विश्वविद्यालय अंतर्गत संचालित कृषि शोध संस्थान का भ्रमण किया, जहां नयी तकनीक के साथ मसाला एवं अन्य कृषि उत्पादों की तैयारी देखी। वे विश्वविद्यालय के अंतर्गत फार्म मैकेनाइजेशन भी देखने गए।
कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में केरल विश्वविद्यालय देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में है, जरूरत पड़ी तो झारखंड सरकार भी यहां की नवीन तकनीक का सहारा लेगी। यही नहीं किसानों को इसी प्रकार से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इस विद्यालय का गठन 1972 में हुआ है। विश्वविद्यालय 1200 एकड़ भूमि में अवस्थित है। कृषि महाविद्यालय के अतिरिक्त सात कृषि विज्ञान केंद्र एवं 15 कृषि शोध संस्थान संचालित हो रहे हैं। कृषि मंत्री के साथ दौरे पर कृषि निदेशक चंदन कुमार, उपनिदेशक (गव्य) मनोज तिवारी एवं मत्स्य विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिरोशिमा में जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत-जापान की मित्रता को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार की सुबह हिरोशिमा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने के साथ जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा भी मौजूद थे। वहीं पीएम मोदी ने प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर देने के लिए जापान सरकार को धन्यवाद दिया।
महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि आज भी दुनिया हिरोशिमा शब्द सुनते ही सहम जाती है। मुझे जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी जापान यात्रा के दौरान महात्मा गांधी की एक आवक्ष प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर मिला।
पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज दुनिया जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से पीड़ित है। पूज्य बापू के आदर्श जलवायु परिवर्तन के साथ जो लड़ाई है उसे जीतने का उत्तम से उत्तम मार्ग है। उनकी जीवन शैली प्रकृति के प्रति सम्मान, समन्वय और समर्पन का उत्तम उदाहरण रही है।
एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने बुधवार को विश्व चैंपियनशिप में दो बार रजत पदक जीतने वाली अंजुम मौद्गिल को अर्जुन अवार्ड और हॉकी कोच सरपाल सिंह, टेनिस के दिग्गज दिवंगत नरेश कुमार की पोती शिवानी मीरचंदानी को द्रोणाचार्य अवार्ड दिया।
खेल मंत्रालय की ओर से इन तीनों को पुरस्कार दिए जाने की घोषणा काफी पहले ही की जा चुकी थी, लेकिन निजी कारणों से तीनों राष्ट्रपति के हाथों ये पुरस्कार ग्रहण नहीं किये। इस दौरान नरेश कुमार का निधन भी हो गया।
अंजुम को 2019 में अर्जुन, नरेश कुमार को 2020 और सरपाल सिंह को 2021 में द्रोणाचार्य अवार्ड दिए जाने की घोषणा की गयी थी। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक सादे समारोह में अंजुम को अर्जुन और सरपाल सिंह को द्रोणाचार्य अवार्ड की ट्राफी दी।
इस दौरान खेल सचिव सुजाता चतुर्वेदी भी मौजूद थीं। नरेश कुमार लंबे समय तक भारतीय डेविस कप टीम के कप्तान रहे। वह विंबलडन के प्री क्वार्टर फाइनल में भी पहुंचे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को तीन देशों के छह दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। इस दौरान वह तीन शिखर सम्मेलनों में शामिल होंगे और 40 से ज्यादा कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। पीएम तीन देशों में चार दिन बितायेंगे, इस दौरान दुनियाभर के 24 से ज्यादा देशों के नेताओं से मिलेंगे। दौरे के पहले चरण में 19 से 21 मई के दौरान जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने जापान जायेंगे।
दूसरे चरण में पीएम 21 मई को पोर्ट मोरेस्बी, पापुआ न्यू गिनी पहुंचेंगे, जहां पापुआ न्यू गिनी के पीएम जेम्स मारपे के साथ संयुक्त रूप से भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग फोरम (एफआईपीआईसी) के तीसरे शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। तीसरे और आखिरी चरण में वह ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीस के साथ द्विपक्षीय बैठक के लिए 22-24 मई को सिडनी में होंगे। यात्रा आखिरी पड़ाव पर मोदी ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष के साथ सिडनी में हजारों प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे।
सांस्कृतिक, व्यावसायिक और प्रवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों के लिहाज से उनकी यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है।
जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने बताया कि पीएम मोदी पहली बार हिरोशिमा जायेंगे।
जी-7 सम्मेलन से इतर पीएम जापानी पीएम फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय मसलों पर चर्चा करेंगे। हिरोशिमा शहर में वह महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। जापान के पीएम ने जी-7 सम्मेलन में भाग लेने के लिए मोदी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया है।
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