एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग एवं इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के द्वारा आयोजित 27वां नेशनल अवॉर्ड फॉर ई गवर्नेंस 2024 के तहत चयनित अधिकारियों को आज और कल मुंबई जियो कन्वेंशन सेंटर में सम्मानित किया जायेगा।
झारखंड से तत्कालीन पेयजल एवं स्वच्छता सचिव के रूप में झार जल योजना लागू करने के लिए डॉ मनीष रंजन को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में झार जल योजना के क्रियान्वयन से संबंधित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन डॉ मनीष रंजन ने आज प्रस्तुत किया। झारखंड सरकार की झार जल प्रणाली को भारत सरकार ने भी सराहा एवं इसे भारत सरकार के अन्य विभागों में भी अपनाने जरूरत बतायी।
भारत सरकार की उप सचिव, अवर सचिव रैंक के अधिकारी बगैर सूचना के संबंधित राज्य का दौरा करते हैं एवं वहां चल रही योजनाओं को का हाल स्वयं देखते हैं। यह विजिट वर्ष में दो-तीन बार होती है एवं राज्य के अलग-अलग स्थानों पर की जाती है। झारखंड से झार जल योजना का चयन करने से पूर्व भारत सरकार की टीम ने बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, पलामू एवं अन्य क्षेत्रों का दो से तीन बार दौरा किया एवं वहां की जमीनी हकीकत से रूबरू होने के बाद पूर्ण रूप से संतुष्ट होने के उपरांत चयन हेतु सिफारिश की। इस अवसर पर डॉ मनीष रंजन की टीम से नेहा अरोड़ा, राजीव रंजन कुमार, पशुपतिनाथ मिश्रा मौजूद थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि भारत के एथनॉल मिश्रण प्रोग्राम ने 2014 से अब तक 99,014 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचायी है। पुरी ने यह भी बताया कि सरकार ने अब तक 15 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिसे वे एथनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 तक 20 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय जैव ऊर्जा सम्मेलन में बोलते हुए पुरी ने कहा कि आॅटोमोटिव ईंधन में एथनॉल के बढ़ते उपयोग ने 2014 से अब तक 17.3 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात को सब्सटीट्यूट करने में मदद की है, जिसे अन्यथा आयात करना पड़ता।
मंत्री ने कहा कि पिछले दशक में कार्बन उत्सर्जन में भी 51.9 मिलियन मीट्रिक टन की कमी आयी है। ये आंकड़े 14 जुलाई 2024 तक के हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2014 से अब तक तेल मार्केटिंग कंपनियों ने डिस्टिलर्स को कुल 1.45 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जबकि किसानों को 87,558 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
मंत्री ने बताया कि ए20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) अब देश के 15,600 से अधिक आउटलेट्स पर उपलब्ध है। इसके अलावा, सरकार ने मार्च में ए100 ईंधन भी लॉन्च किया था। इसमें 93-93.5 प्रतिशत एथनॉल, 5 प्रतिशत पेट्रोल और 1.5 प्रतिशत को-सॉल्वेंट (जो एक बाइंडर होता है) मिलाया गया है।
ए100 की हाई आक्टेन रेटिंग (जो आमतौर पर 100-105 के बीच होती है) के कारण इसे सरकार द्वारा उच्च-प्रदर्शन इंजन के लिए बढ़िया बताया जा रहा है, जिससे बेहतर एफिसिएंसी और पावर आउटपुट मिलता है।
पुरी ने बताया कि सरकार ने भारतीय खाद्य निगम से एथनॉल डिस्टिलरीज को चावल की सप्लाई फिर से शुरू कर दी है, जिससे वे अगस्त 2024 से अक्टूबर 2024 तक ई-नीलामी के माध्यम से 23 लाख टन तक चावल खरीद सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एथनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए एथनॉल सप्लाई वर्ष 2024-25 (नवंबर 2024) से डिस्टिलरीज को गन्ने के रस और सिरप की सप्लाई शुरू की जायेगी।
सरकार ने अगस्त 2023 में मक्का से एथनॉल की सप्लाई पर प्रति लीटर 9.72 रुपये, खराब चावल से 8.46 रुपये और दिसंबर 2023 में सी-हेवी शीरे से 6.87 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रदान किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक खत्म हो चुकी है। इसमें किसानों के कल्याण के लिए सात महत्वपूर्ण फैसले लिये गये हैं, जो विशेष रूप से किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अहम निर्णय लिये गये हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के दौरान लिये गये फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने किसानों के जीवन स्तर में सुधार और उनकी आय में बढ़ोतरी के लिए कुल सात प्रमुख निर्णय किये हैं।
पहला महत्वपूर्ण निर्णय डिजिटल कृषि मिशन का है। यह मिशन कृषि के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत कुछ सफल पायलट प्रोजेक्ट्स पहले से ही चलाए गए हैं, जिनमें सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। इस सफलता को ध्यान में रखते हुए, 2,817 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ डिजिटल कृषि मिशन की स्थापना की जाएगी। यह मिशन किसानों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल साधनों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय खाद्य और पोषण सुरक्षा से संबंधित है। इस निर्णय के अंतर्गत, हमारे किसानों और कृषि समुदाय को जलवायु के प्रति लचीला बनाने और 2047 तक खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नई योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत कुल 6 प्रमुख स्तंभ स्थापित किये जायेंगे, जिनकी कुल लागत 3,979 करोड़ रुपये होगी। इन स्तंभों के माध्यम से किसानों को आधुनिक और स्थिर फसल विज्ञान से लैस किया जायेगा, ताकि वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर सकें और भविष्य के खाद्य सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। यह पहल कृषि क्षेत्र को लंबे समय तक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।
हॉर्टिकल्चर के क्षेत्र में सब्जियां, फलों, मशरूम और विभिन्न प्रकार के पौधों को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए 860 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इस वित्तीय निवेश से किसानों की आय में वृद्धि के व्यापक अवसर उत्पन्न होंगे। इस योजना का उद्देश्य हॉर्टिकल्चर के माध्यम से कृषि की विविधता को बढ़ाना और किसानों को अधिक आय के स्रोत प्रदान करना है। इससे न केवल किसानों को बेहतर फसलें उगाने में मदद मिलेगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। इस योजना के तहत विभिन्न प्रकार की सब्जियां, फल, मशरूम और पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों को नए बाजारों और व्यापारिक अवसरों तक पहुंच प्राप्त होगी।
इस योजना के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्रों को सशक्त और सुसज्जित किया जाएगा। यह कार्यक्रम किसानों के साथ बेहतर तरीके से जुड़ने और उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इसके लिए कुल 1202 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और ज्ञान से अवगत कराना है, ताकि वे अपनी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ा सकें। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और सलाह प्रदान की जाएगी। इस प्रकार, यह कार्यक्रम किसानों की समग्र स्थिति में सुधार लाने और उनके कृषि व्यवसाय को मजबूत करने में सहायक होगा।
दुनिया की सभी अत्याधुनिक और जटिल चिप्स भारत में ही डिजाइन की जाती हैं। भारत में खुद की बौद्धिक संपदा (आइपीआर) विकसित करने के उद्देश्य से, डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना के तहत 13 कंपनियों ने चिप्स डिजाइन करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में केनेस टक्नोलॉजी इंडिया के प्लांट को मंजूरी प्रदान की गयी है। इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 6.3 मिलियन चिप्स की होगी। इस निर्णय के साथ ही, भारत में सेमिकंडक्टर के इकोसिस्टम का विकास तेजी से हो रहा है और यह क्षेत्र भविष्य में और भी सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था में संभावित बदलावों पर काम कर रहे राज्यों के मंत्रियों के एक समूह ने संकेत दिया है कि फिलहाल उनकी योजना चार दरों वाले मौजूदा ढांचे को बरकरार रखने की है। हालांकि अभी चर्चाएं चल रही हैं और कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन समूह के कुछ सदस्यों का कहना है कि चूंकि जीएसटी व्यवस्था स्थिर हो चुकी है इसलिए शायद इसके साथ छेड़छाड़ करना उचित नहीं होगा।
बहरहाल, जीएसटी ढांचे को सहज बनाये जाने की तमाम वजह हैं जिनके चलते समूह को इस पर चर्चा करनी चाहिए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जो जीएसटी परिषद की अध्यक्ष भी हैं, ने जुलाई में अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार जीएसटी कर ढांचे को सरल और युक्तिसंगत बनाने के प्रयास करेगी और इसे बाकी बचे क्षेत्रों तक विस्तार दिया जायेगा। राज्यों के मंत्रिसमूह को इस प्रक्रिया की पहल करनी चाहिए।
इस संबंध में सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आगामी नौ सितंबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में इस विषय पर चर्चा की जायेगी। जैसा कि विशेषज्ञों ने सुझाया भी है, जीएसटी की दरों और स्लैब को युक्तिसंगत बनाने की सख्त आवश्यकता है। परिषद इस चरण में तीन दरों वाले ढांचे को अपनाने पर विचार कर सकती है। अनिवार्य वस्तुओं के लिए कर दर कम रखी जाये, अधिकांश वस्तुओं सेवाओं के लिए मध्यम दर रखी जाये और चुनिंदा वस्तुओं या नुकसानदायक वस्तुओं के लिए दरों को ऊंचा रखा जाये।
यह सुझाव भी दिया गया है कि 12 और 18 फीसदी की स्लैब को मिलाकर 16 फीसदी का एक नया स्लैब तैयार किया जाये। इससे जटिलता में काफी कमी आएगी और दरों की बहुलता के कारण उत्पन्न विसंगतियों में से कई दूर होंगी। इसके अलावा समायोजन और दरों को सहज बनाने का काम इस प्रकार करना होगा कि समग्र जीएसटी कर संग्रह राजस्व निरपेक्ष दर के करीब पहुंच सके। ध्यान देने वाली बात है कि कर संग्रह का बड़ा हिस्सा 18 फीसदी के स्लैब से आता है।
शुरुआती वर्षों में जीएसटी दरों को समय से पहले कम कर दिया गया, जिससे इसके प्रदर्शन में कमजोरी आयी। हालांकि इस कर के क्रियान्वयन के बाद से संग्रह में प्रभावी इजाफा हुआ है। जैसा कि अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यन और अन्य लोगों ने इस समाचार पत्र में लिखा है 2023-24 में उपकर समेत विशुद्ध जीएसटी संग्रह सकल घरेलू उत्पाद (जीएसटी) का 6.1 फीसदी था जो 2012-17 के जीएसटी से पहले के दौर के लगभग समान था।
यह भी ध्यान देने लायक है कि मौजूदा संग्रह में क्षतिपूर्ति उपकर भी शामिल है जिसे उस कर्ज को चुकाने के लिए जुटाया जा रहा है जो महामारी के दौरान राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए लिया गया था। जीएसटी परिषद को निकट भविष्य में कर्ज चुकता हो जाने के बाद कभी न कभी इस उपकर के बारे में निर्णय लेना होगा।
एक सुझाव यह है कि इसे कर दर में शामिल किया जाये। हालांकि यह उपभोक्ताओं के वास्तविक कर व्यय पर असर नहीं होगा लेकिन किसी भी निर्णय की सावधानीपूर्वक जांच करना होगा। यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उपकर को सीमित समय के लिए लागू किया गया था और इसका एक खास उद्देश्य था- पहले पांच सालों में राज्यों के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए संसाधन जुटाना।
संग्रह जारी रहा क्योंकि सरकार को इस पूरी अवधि में राज्यों की भरपाई करनी पड़ी। व्यापक तौर पर दरों को राजस्व निरपेक्ष दर के अनुसार समायोजित किया जाना चाहिए। इससे केंद्र और राज्य के स्तर पर राजस्व संग्रह में इजाफा होगा। बढ़ा हुआ राजस्व सरकार के दोनों स्तरों पर उच्च राजस्व को समायोजित करेगा। यह ऐसे समय में होगा जब देश को आम सरकारी बजट घाटा और सार्वजनिक ऋण कम करने की जरूरत है। इस विषय को टालने से जीएसटी व्यवस्था के लिए जरूरी समायोजन में देरी होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूआईडीएआई ने आधार अपडेट करने का समय 14 सितंबर तक बढ़ा दिया है। अब आप अपना नाम, पता आदि बदल सकते हैं। इसके लिए आपको पहचान और पता के सही कागज यूआईडीएआई पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।
डोमेस्टिक और कमर्शियल दोनों ही एलपीजी उपभोक्ताओं को कीमत में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। यह विशेष रूप से कमर्शियल यूजर्स के लिए है। 1 अगस्त को भी कीमत में बदलाव किया गया था। इस बार भी 1 सितंबर को इसमें बदलाव हो सकता है। घरेलू सिलेंडर की कीमत पिछले काफी समय से एक ही लेवल पर बनी हुई है।
हवाई जहाजों के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन (एपीजी) और एलपीजी-सीएलजी गैस के दाम बदलने वाले हैं। इससे यात्रा के खर्च बढ़ेंगे, खासकर हवाई यात्रा के। इससे सामान और सेवाओं के दाम भी बढ़ सकते हैं क्योंकि सामान ले जाने के खर्च बढ़ जायेंगे।
टीआरएआई धोखाधड़ी कॉल और स्पैम मैसेज रोकने के लिए नये नियम बना रहा है। टेलीमार्केटिंग कंपनियों को 30 सितंबर तक ब्लॉकचेन सिस्टम पर आना होगा। इससे सुरक्षा बढ़ेगी और अनचाहे कॉल और मैसेज कम होंगे।
नये क्रेडिट कार्ड नियम बदलने वाले हैं, खासकर रिवार्ड प्वाइंट और पेमेंट के टाइम के बारे में। एचडीएफसी बैंक बिजली या पानी जैसे बिलों पर मिलने वाले रिवार्ड प्वाइंट कम कर देगा। आइडीएफसी फर्स्ट बैंक पेमेंट का शेड्यूल बदल रहा है, जिससे पेमेंट कब और कैसे होगा, बदल सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि देश में ढांचागत विकास को सुदृढ़ बनाने के लिए विकसित भारत की संकल्पना के अनुसार 2047 विजन के तहत विश्व स्तरीय सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।
मंत्रालय में सचिव अनुराग जैन ने विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के साथ शुक्रवार को बातचीत में यह जानकारी देते हुए यहां बताया कि मंत्रालय की विजन 2047 डिजिटल परिवर्तन, हरित गतिशीलता, समावेशी विकास और सतत विकास के माध्यम से विश्व स्तरीय सड़क नेटवर्क की कल्पना है और इसके तहत विश्व स्तरीय सड़कों के निर्माण पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने पिछले दशक में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का महत्वपूर्ण विस्तार करते हुए सड़कों के निर्माण में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर सड़क तंत्र को ज्यादा टिकाऊ बनाने का काम किया है।
उन्होंने बताया कि मंत्रालय विजन 2047 के रोडमैप में समाहित ढांचागत विकास के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के साथ हरित, समावेशी और सतत विकास के तहत विश्व स्तरीय सड़क नेटवर्क की कल्पना के तहत काम कर रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर (पलामू)। आपकी योजना आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत आज पलामू प्रमंडल क्षेत्र अंतर्गत तीनों जिले पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के विभिन्न प्रखंडों में शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
चौथी बार लगाये जा रहे शिविर के पहले दिन प्रमंडलीय जनसंपर्क इकाई, पलामू प्रमंडल की ओर से पलामू जिले के तरहसी प्रखंड एवं लातेहार जिले के प्रखंड कार्यालय, लातेहार परिसर मेंं मेला प्रदर्शनी एवं नुक्कड़-नाटक का आयोजन किया गया।
लातेहार में आयोजित मेला प्रदर्शनी एवं नुक्कड़-नाटक कार्यक्रम का उद्घाटन लातेहार के जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी डॉं चंदन ने फीता काटकर उद्घाटन किया।
मेला प्रदर्शनी एवं नुक्कड़-नाटक कार्यक्रम के माध्यम से आमजनों को झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, गुरूजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, अबुआ आवास योजना, सर्वजन पेंशन योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना सहित सरकार द्वारा संचालित अन्य विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गयी। आमजनों को इन योजनाओं का लाभ लेकर सशक्त होने संबंधी जानकारी दी गयी।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आगामी दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ महापर्व सहित अन्य पर्व-त्योहार राज्य में शांतिपूर्वक संपन्न हो इस निमित्त हर हाल में बेहतर विधि-व्यवस्था संधारण सुनिश्चित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पर्व-त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की कोई हिंसा, उपद्रव, संगठित अपराध इत्यादि की घटनाओं को अबिलम्ब रोका जा सके इसके लिए पुख्ता तैयारी रखें।
अपराध को अंजाम देने वालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। सभी प्रशासनिक तैयारियां एक बेहतर प्लानिंग के साथ की जाए। उक्त निर्देश मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज झारखंड मंत्रालय में आगामी दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ महापर्व सहित अन्य पर्व-त्योहारों के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान समय में छोटे-छोटे कस्बों में भी पर्व- त्योहारों को बहुत उत्साह, उमंग और खुशी के साथ मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी हाल में पर्व-त्योहारों के दौरान बिजली की समस्या उत्पन्न न हो इसकी पूरी तैयारी रखी जाये। निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए विभाग एक बेहतर बैकअप प्लान शीघ्र तैयार करे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आगामी 4 माह विभिन्न पर्व-त्योहारों का समय है, अधिकारी संवेदनशीलता के साथ व्यवस्थाओं को दुरुस्त एवं सुदृढ़ करने पर बल दें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पर्व-त्योहारों के दौरान बिजली कटने के क्रम में कई बार दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति को लेकर बेहतर बैकअप प्लान तैयार रखी जाये।
हेमन्त सोरेन ने कहा कि फेस्टिवल के दौरान संवेदनशील एवं भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरते। विशेष कर पूजा पंडालों और आसपास के क्षेत्र में असामाजिक तत्वों पर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि गतिविधियों की निगरानी के लिए पूजा पंडालों पर सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगाएं जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया पर पूरी नजर रखें। यदि कोई सोशल मीडिया पर अफवाह या भ्रम फैलाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ त्वरित और कड़ी कार्रवाई करें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि साम्प्रदायिक सौहार्द एवं संवेदनशीलता को देखते हुए असामाजिक तत्वों एवं हुड़दंगियों पर सख्ती से कार्रवाई करें। अफवाह फैलाने एवं कानून का उल्लंघन करने वाले तत्वों पर चौकसी बरतते हुए उनपर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शांति भंग करने वाले शरारती एवं असामाजिक तत्वों पर प्रशासन पैनी नजर रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्व-त्योहारों के दौरान तेज गति से गाड़ी चलाने वालों पर भी प्रशासन लगाम लगायें।
बैठक में राज्य के मुख्य सचिव एल खियांग्ते, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव गृह विभाग वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक अभियान संजय ए लाटकर, आईजी अभियान एवी होमकर, आईजी स्पेशल ब्रांच श्री प्रभात कुमार, ऊर्जा संचरण निगम के एमडी केके वर्मा उपस्थित थे।
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