टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार की जन वितरण प्रणाली (राशन) की दुकानों में अब प्रज्ञा केंद्र जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी। लोग अब इन दुकानों से सस्ता राशन लेने के अलावा मतदाता पहचानपत्र, पासपोर्ट के लिए आवेदन, आयुष्मान भारत योजना, पैन कार्ड के लिए आवेदन एवं सरकारी बिलों आदि का भुगतान कर सकेंगे। सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नयी व्यवस्था के लिए झारखंड सरकार के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग और कॉमन सर्विसेज सेंटर एसपीवी (सीएससी-एसपीवी) के बीच बृहस्पतिवार को सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ। विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार का उद्देश्य जन वितरण प्रणाली की दुकानों के जरिए आम लोगों को सीएससी सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ राशन दुकानों के लिए नए व्यापारिक अवसर पैदा करना और उनकी आमदनी को बढ़ाना है। उसमें कहा गया है कि झारखंड रकार के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव और विभागीय सचिव के समक्ष विभाग के अपर सचिव और सीएससी-एसपीवी के झारखंड के राज्य प्रमुख ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि राज्यभर में वर्तमान में कुल 25,343 जन वितरण प्रणाली की दुकानें हैं, जिनमें 23,625 ऑनलाइन और 748 ऑफलाइन काम कर रही हैं जिसके जरिए 59 लाख 49 हजार 31 राशन कार्ड धारक अनाज लेते हैं।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजधानी रांची के मेनरोड में हुई हिंसा के बाद उसकी निंदा करते हुए चिंता जताई है। मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि कहीं न कहीं हम सुनियोजित तरीके से शिकार हो रहे हैं। जिसका परिणाम हम सभी को भुगतना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता से अपील करते हुए कहा कि राज्य की जनता हमेशा संवेदनशील और सहनशील रही है। वर्तमान हालात में हम सभी परीक्षा की घड़ी से गुजर रहे हैं और हो सकता है बहुत कठिन परीक्षाएं भी हों। मुख्यमंत्री ने धैर्य नहीं खोने की अपील करते हुए कहा कि कानून और संविधान भी यही कहता है कि जो जुर्म करता है उसे सजा भी मिलती है। इसलिए कोई भी हिंसक घटना को अंजाम ना दे जिससे वे जुर्म का भागीदार हो जाए। इससे पहले राजधानी रांची के मेनरोड में नमाज के बाद लोगों ने जमकर बवाल काटा है। प्रदर्शनकारी नुपूर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसके बाद वे हाथ में काला और धार्मिक झंडा लेकर डेली मार्केट के सामने अल्बर्ट एक्का चौक की तरफ दौड़ने लगे। उन्हें रोकने के लिए पुलिस भी दौड़ी। इसी दौरान डेला मार्केट के पास पुलिस के साथ धक्का मुक्की होने लगी। देखते-देखते भीड़ आक्रोशित हो गई और जमकर पत्थरबाजी हुई। जिसके बाद पुलिस ने फायरिंग की। इस फायरिंग और लाठीचार्ज में कई पुलिसकर्मी सहित आम लोग भी घायल हो गए।
टीम एबीएन, रांची। आज ग्रामीण विकास के सचिव डॉ मनीष रंजन द्वारा मिशन अमृत सरोवर के क्रियान्वयन की जानकारी सभी उपायुक्तों एवं उप विकास आयुक्त के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दी गई। उन्होंने कहा कि अमृतमय वर्षा जल को सहेजने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मिशन अमृत सरोवर’ के अंतर्गत मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) से जारी राशि या अन्य योजनाओं के अभिसरण से राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों (तालाबों) के निर्माण या जीर्णोद्धार की कार्यवाही प्रारंभ हो गई है। प्रत्येक जिले में कम से कम 75 सरोवरों (तालाबों) का निर्माण या पुनरुद्धार किया जा रहा है। जनभागीदारी से इन्हें धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक सरोवर के लिए उपभोक्ता समूह (यूजर ग्रुप) का गठन किया जाएगा, जिस पर सरोवर के जल के उपयोग और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी होगी। मनरेगा आयुक्त श्रीमती राजेश्वरी बी ने बताया कि मिशन अमृत सरोवर में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने और सम्पूर्ण प्रक्रिया के दस्तावेजीकरण के लिए अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक अमृत सरोवर के लिए एक ‘जल उपभोक्ता समूह’ का गठन किया जाएगा। यह समूह सरोवर के निर्माण की अवधारणा से लेकर उसके पूरा होने और बाद में उसके उपयोग तक परियोजना से जुड़ा रहेगा। इस उपभोक्ता समूह पर वृक्षारोपण सहित अमृत सरोवर के उपयोग और रखरखाव की जिम्मेदारी होगी। उपभोक्ता समूह द्वारा प्रत्येक मानसून के बाद स्वेच्छा से सरोवर के जलग्रहण क्षेत्र से गाद हटाने का कार्य किया जाएगा। अमृत सरोवर के निर्माण के लिए प्राप्त लोगों के सहयोग (योगदान) और दान (श्रम, सामग्री, मशीन) के विवरण को सूचीबद्ध कर उसे नागरिक सूचना पटल (उकइ) के निकट एक अलग सूचना पटल स्थापित करते हुए प्रदर्शित किया जाएगा। अमृत सरोवर का दस्तावेजीकरण वीडियो और लेखन (राइट-अप) प्रारूप, दोनों में तैयार किया जाएगा। दस्तावेजीकरण में जन जागरूकता, स्थल चयन, आधारशिला (नींव) रखना, कार्यान्वयन के चरण, जन भागीदारी, वित्तीय विवरण, अभिसरण विवरण, पानी का उपयोग (सिंचाई, जलीय जीवपालन आदि), लागत लाभ अनुपात और अमृत सरोवर के अन्य पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, सिंचाई एवं मत्स्य पालन जैसे बहुआयामी उद्देश्यों को लेकर शुरू किए गए। सभी जिलों में स्थल चयन की कार्यवाही से लेकर प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने की प्रकिया मिशन मोड में पूर्ण की जा रही है। गांवों में अमृत सरोवर के निर्माण को ऐतिहासिक बनाने इसके लिए स्थल चयन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों के गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है। डॉ मनीष रंजन ने बताया कि अमृत सरोवर के निर्माण के लिए सभी जिलों के कलेक्टर को जारी दिशा-निदेर्शों में यह रेखांकित किया गया है कि मिशन अमृत सरोवर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कम से कम एक एकड़ क्षेत्रफल में बनाए जाने वाले अमृत सरोवर के लिए चिन्हांकित किए जा रहे गांवों में उन गांवों को प्राथमिकता देनी है जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या शहीदों से संबंधित हों। मिशन में नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए स्वाधीनता सेनानियों या उनके पारिवारिक सदस्यों या आजादी के बाद शहीद हुए सैनिकों के परिजनों या पद्म पुरस्कार से सम्मानितों द्वारा अमृत सरोवर के कार्य का शुभारंभ कराया जाएगा। मनरेगा आयुक्त ने बताया कि अमृत सरोवर की आधारशिला रखने, कार्यस्थल पर नीम, पीपल, बरगद जैसी प्रजाति के वृक्षों का पौधरोपण करने एवं प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण का नेतृत्व संबंधित गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या उनके परिवार के सदस्य, शहीद के परिवार या पद्म पुरस्कार से सम्मानित स्थानीय व्यक्ति के द्वारा कराया जाएगा। यदि अमृत सरोवर के निर्माण के लिए चयनित गांव में ऐसा कोई नागरिक उपलब्ध नहीं है, तो उस ग्राम पंचायत के सबसे वरिष्ठ नागरिक के द्वारा यह कार्य कराया जाएगा। वीडियो कांफ्रेंसिंग में, जेएसएलपीएस सीईओ सूरज कुमार, संयुक्त सचिव अरुण कुमार सिंह ग्रामीण विकास विभाग व अन्य शामिल थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा होने जा रहा है और जल्द ही देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आज जरूरी तारीखों का ऐलान किया है। चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति पद के लिए 29 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं और राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए 18 जुलाई को वोटिंग होगी। इसके बाद 21 जुलाई को चुनाव के नतीजे जारी किए जाएंगे। हालांकि, अभी उम्मीदवारों का ऐलान होना बाकी है। ऐसे में सवाल है कि आखिर राष्ट्रपति पद के चुनाव में कौन व्यक्ति दावेदारी प्रस्तुत कर सकता है। क्या सांसद, विधायक के चुनाव की तरह हर कोई इस चुनाव में हिस्सा ले सकता है, तो जानते हैं राष्ट्रपति चुनाव में कौन-कौन लोग चुनाव लड़ सकते हैं और चुनाव लड़ने के लिए किन-किन शर्तों को पूरा करना होता है… कब होता है चुनाव : राष्ट्रपतीय और उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 की धारा 4 की उप-धारा (3) के उपबंधों के अनुसार, राष्ट्रपति चुनाव कार्यकाल पूरा होने से साठ दिन की अवधि में किसी दिन चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचना जारी की जाती है। चुनाव का कार्यक्रम इस प्रकार तय किया जाता है कि राष्ट्रपति का कार्यकाल खत्म होने के अगले ही दिन निर्वाचित राष्ट्रपति पद ग्रहण कर सके। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन राष्ट्रपति के पद का चुनाव भी निर्वाचन आयोग ही करवाता है। कौन लड़ सकता है राष्ट्रपति का चुनाव : आर्टिकल 58 के अनुसार, एक व्यक्ति को राष्ट्रपति के पद का निर्वाचन लड़ने के लिए भारत का नागरिक होना चाहिए। उस व्यक्ति की उम्र कम से कम 35 साल होनी चाहिए। लोकसभा का सदस्य बनने के लिए एलिजिबल होना चाहिए। भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन या किसी भी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन किसी भी लाभ का पदधारी नहीं होना चाहिए। यानी सरकारी नौकरी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा भी जब भी राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए नामांकन भरा जाता है तो कई शर्तों को पूरा करना होता है। नामांकन के फॉर्म में चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार को कम से कम पचास निर्वाचकों यानी विधायक या सांसदों को समर्थन होना आवश्यक है। अगर आप भी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहते हैं तो आपको निर्वाचकों का प्रस्तावकों या अनुमोदकों के रूप में समर्थन चाहिए। इसके बाद इसे प्रस्तावक को नियुक्त रिटर्निंग अधिकारी को जमा करना होगा। चुनाव लड़ने के लिए 15000 रुपये की जमानत राशि भी देनी होती है। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में एक निर्वाचक सिर्फ एक ही अभ्यर्थी के नाम का प्रस्ताव दे सकता है। ऐसा नहीं है कि वो कई उम्मीदवारों का अनुमोदन कर दे। राष्ट्रपति के पद की अवधि कितनी है : भारत के संविधान के आर्टिकल 56 के अनुसार, राष्ट्रपति अपने पद ग्रहण करने की तिथि से 5 साल की अवधि के लिए पद धारण करता है। इसके अलावा, वो 5 साल से अधिक समय तक पद पर रह सकता है, जब तक कि कोई उत्तराधिकारी उसका पद ग्रहण नहीं कर लेता है। यानी देश में हमेशा राष्ट्रपति रहना आवश्यक है और यह पद खाली नहीं रह सकता है। कौन देता है वोट : राष्ट्रपति चुनाव में संसद के सदस्य और राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश विधानसभा के सदस्य ही वोट देते हैं। इसमें भी अगर कोई राज्य में विधानसभा है तो उसके सदस्य और संसद में मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेते हैं।
एबीएन सेंट्रल चुनाव। चुनाव आयोग ने गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव की तारीख का एलान कर दिया। आयोग के मुताबिक, देश के सर्वोच्च पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना 15 जून को जारी की जाएगी। नामांकन की आखिरी तारीख 29 जून तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 30 जून को निर्धारित की गई है। उम्मीदवार अपना नामांकन दो जुलाई तक वापस ले सकेंगे। वहीं, राष्ट्रपति का चुनाव 18 जुलाई को होगा, जिसके नतीजे तीन दिन बाद यानी 21 जुलाई को आएंगे। चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। नामांकन की अंतिम तारीख 29 जून तक है फिर मतदान 18 जुलाई को होगा। वहीं नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 राज्यसभा सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डालते हैं। वहीं, 543 सदस्यों वाली लोकसभा में अभी 540 सांसद हैं। तीन सीटें खाली हैं। इन पर भी चुनाव की प्रक्रिया जारी है। मतलब साफ है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की सभी खाली सीटों पर उपचुनाव हो जाएंगे। चुने गए सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा के चिल्का झील में पाई जाने वाली दुनिया की पहली मछली पकड़ने वाली बिल्लियों की गणना की जा रही है, चिल्का डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 176 मछली पकड़ने वाली बिल्लियों की सूचना दी है। दो दिन पहले 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर बिल्ली के गणना की रिपोर्ट जारी की थी। चिल्का डेवलपमेंट अथॉरिटी ने द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट के सहयोग से यह गणना की है। यह हालिया गणना मछली पकड़ने वाली बिल्ली के लिए दुनिया का पहला ऐसा जनसंख्या अनुमान है जो संरक्षित एरिया नेटवर्क के बाहर आयोजित किया गया था। बिल्लियों की गणना दो चरणों में की गयी थी। पहले चरण का आयोजन 2021 में चिल्का और उसके आसपास के क्षेत्रों के उत्तर और उत्तर-पूर्वी खंड में मौजूद 115 वर्ग किलोमीटर दलदली जमीन पर किया गया था। दूसरे चरण का आयोजन इस वर्ष परीकुड की तरफ चिल्का झील के तटीय द्वीपों के किनारे किया गया, जो एक खारे पानी का झील है। चिल्का विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशांत नंदा ने बताया, "दोनों चरणों को मिलाकर, कुल 150 कैमरा ट्रैप तैनात किए गए थे और हर ट्रैप 30 दिनों तक मैदान में रहे। इसके बाद, डेटा का विश्लेषण करने के लिए स्थानीय रूप से स्पष्ट कैप्चर रीकैप्चर विधि का उपयोग किया गया।" अधिकारी ने आगे बताया, यह हकीकत में जज्बे की भागीदारी थी क्योंकि स्थानीय मछुआरे और चिल्का के ग्रामीण इस अभियान के प्राथमिक भागीदार थे। उनके समर्थन के बिना, इस विश्व स्तर पर खतरे से जूझ रही बिल्ली पर संरक्षित क्षेत्रों के बाहर दुनिया का पहला ऐसा जनसंख्या अनुमान संभव नहीं होता।" द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट जो फिशिंग कैट पर दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला संरक्षण और अनुसंधान प्रोजेक्ट है, इस प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक पार्थ डे ने बताया, ग्रामीणों के अलावा, दस स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों ने भी इस अभियान के दौरान स्वेच्छा से हिस्सा लिया। चिल्का वन्यजीव प्रभाग के कर्मचारियों ने सक्रिय रूप से सहायता की और जनसंख्या आकलन में हिस्सा लिया। इस मायावी और खतरे में पड़ी प्रजातियों के अध्ययन के लिए कई स्टॉकहोल्डर्स को शामिल करने का ऐसा भागीदारी प्रयास एक अद्भुत मिसाल कायम करता है। खत्म होने की कगार पर मछली पकड़ने वाली बिल्लियां फिशिंग कैट दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया की एक मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है। इसे आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में दर्ज किया गया है, जिसका मतलब है कि यह जंगली बिल्ली विलुप्त होने के एक उच्च खतरे का सामना कर रही है। लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन के आर्टिकल कश् के परिशिष्ट भाग कक पर मछली पकड़ने वाली बिल्ली को सूचीबद्ध किया गया है, जो इन प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। मछली पकड़ने वाली बिल्ली रात का जानवर है और इस जानवर का पता लगाना आसान काम नहीं है। मादा बिल्ली का वजन लगभग 8-10 किलोग्राम होता है और नर बिल्ली का वजन लगभग 10-15 किलोग्राम होता है। यह उथली गीली जमीन के किनारे से मछली का पता लगाती है, उसके बाद मछली के पीछे गोता लगाती है और अपने नुकीले पंजों से उसको पकड़ती है। गांव रेडियो में बिल्लियों की कहानी सुनिए। नंदा ने बताया, मछली पकड़ने वाली बिल्लियां जंगल के पास के गांवों से मवेशियों और मुर्गी का भी शिकार करती हैं और लोगों से मुसीबत मोल ले लेती हैं। चिल्का झील में काफी मात्रा में मछलियों की मौजूदगी और मानव निवास से दूरी ने चिल्का को मछली पकड़ने वाली बिल्लियों के लिए उपयुक्त आवास बना दिया है। मुख्य रूप से गीली जमीन के तबाह होने के कारण, जो उनका निवास स्थान है मछली पकड़ने वाली बिल्लियों को विश्व स्तर पर खतरा है। टियासा आध्या, सह-संस्थापक, द फिशिंग कैट प्रोजेक्ट ने बताया,"एशिया में जमीन का गीला पन खतरनाक तरीके से तेजी से खत्म हो रहा है और उनकी वर्तमान स्थिति पर मुनासिब डेटा या कई देशों में आधारभूत डेटा भी नहीं है। कई गीली जमीन की प्रजातियों की स्थिति का अभी तक अध्ययन नहीं किया गया है और खतरा बहुत ज्यादा है। उन्होंने आगे बताया, मछली पकड़ने वाली बिल्ली जैसी विशेष प्रजातियों को ट्रैक करना हमें इस बात की तरफ इशारा करता है कि इन इकोलॉजिकल सिस्टम के साथ क्या हो रहा है, जो जलवायु परिवर्तन और सूखे के खिलाफ सुरक्षा उपाय हैं।" फिशिंग कैट के लिए पंचवर्षीय संरक्षण योजना साल की शुरूआत में, चिल्का विकास प्राधिकरण ने चिल्का में मछली पकड़ने वाली बिल्लियों के संरक्षण के लिए पंचवर्षीय कार्य योजना अपनाने की अपनी मंशा जाहिर की थी। नंदा ने बताया, "टीएफसीपी के सहयोग से, हम जल्द ही एक फिशिंग कैट एक्शन प्लान साझा करने जा रहे हैं जो कि सोशियो-इकोलॉजिकल होगा। हमने पहले ही बिल्ली और उसकी सह प्रजातियों पर एक साल की लंबा गश्त और निगरानी कार्यक्रम शुरू कर दिया है।" अधिकारी ने आगे बताया, "इसकी स्कैलिंग के साथ, हम गीली जमीन के बदलाव को रोकने के लिए टिकाऊ और पारंपरिक रूप से कटाई वाले गिली जमीन के उत्पादों को बढ़ावा देंगे, एक रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र स्थापित करेंगे, छोटे पैमाने पर अनुभवात्मक और शिक्षाप्रद गिली जमीन पर्यटन को बढ़ावा देंगे, आवास बहाली कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा कार्यक्रमों को भी अपनाएंगे। हेमंत राउत, जो पर्यावरणविद् और गहिरमाथा समुद्री कछुए और मैंग्रोव संरक्षण सोसायटी के अध्यक्ष हैं ने बताया, मछली पकड़ने वाली बिल्ली अपना अधिकांश जीवन पानी के करीब घने वनस्पतियों में बिताती है और वह एक माहिर तैराक है। मछली पकड़ने वाली बिल्ली के सामने एक बड़ा खतरा गिली जमीनों की तबाही है, जो उसका पसंदीदा आवास है। राउत ने बताया, चिल्का झील के जलाशय सर्दियों में इरावदी डॉल्फिन और प्रवासी पक्षियों के लिए मशहूर है। लेकिन दुख की बात है कि मछली पकड़ने वाली बिल्ली, एक कम ज्ञात प्रजाति जो इस रामसर स्थल पर निवास करती है, डॉल्फिन जैसी स्थिति का आनंद नहीं लेती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। मोदी सरकार ने देश के करोड़ों किसानों को बड़ी सौगात दी है। 17 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ा दिया गया है। कैबिनेट ने बुधवार को यह फैसला लिया। तिल पर 523 रुपए की वृद्धि की गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बताया कि पिछले 8 वर्षों में बीज के बाजार के दृष्टिकोण के कारण फायदा हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, आज की बैठक में खरीफ की 14 फसलों के लिए टरढ बढ़ाने का निर्णय लिया गया। पिछले साल जो तय किया गया कि लागत प्लस 50 प्रतिशत, उसे हमने लगातार आगे बढ़ाया है। किसान सम्मान निधि के तहत 2 लाख करोड़ खाते में जा चुका है। फर्टिलाइजर पर 2 लाख 10 हजार करोड़ की सब्सिडी दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि कृषि बजट भी बढ़कर 1 लाख 26 हजार करोड़ रुपए का हो गया है। हमारी सरकार ने बाकी कई फसलों को भी एमएसपी के दायरे में लेकर आई है। बीमा से सिंचाई तक हर कदम पर सशक्तीकरण हुआ है। कृषि क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन देते हुए सरकार ने एमएसपी की दरों में ऐतिहासिक वृद्धि की थी, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई और उससे उनकी बिक्री भी बहुत हुई। पिछले आठ सालों में मोदी सरकार के फैसलों से किसानों की आय बढ़ी है। साथ ही, किसानों को राहत भी मिली है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत आर्थिक मदद पाने वाले किसानों को ई-केवाईसी का प्रोसेस 31 जुलाई तक पूरा करना होगा। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए पीएम किसान ई-केवाईसी (PM Kisan e-KYC) की शर्तों में ढील दी है। इसके तहत अब 31 मई की बजाय 31 जुलाई तक ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बता दें कि इस योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 2000 रुपये की किस्त जमा होती है। 12 महीनों में कुल 6000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि पीएम किसान योजना के तहत पंजीकरण कराने वाले किसान अपना ई-केवाईसी 31 जुलाई तक पूरा करा सकेंगे। पहले डेडलाइन 31 मार्च थी, फिर 31 मई तक बढ़ाई गई, अब 31 जुलाई तक ई-केवाईसी का प्रोसेस पूरा किया जा सकेगा। सरकार ने कहा है कि केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होने पर हर चार महीनों में सीधे बैंक खातों में मिलने वाली आर्थिक मदद (2000 रुपये) रुक सकती है। पीएम किसान सम्मान निधि पाने के हकदार किसान सरकारी पोर्टल पर जाकर ई-केवाईसी का प्रोसेस पूरा कर सकते हैं। किसानों को आधार कार्ड के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर वन टाइम पिन (OTP) के जरिए ई-केवाईसी पूरा करने का विकल्प दिया गया है। पीएम किसान पोर्टल- https:// pmkisan.gov.in/ पर विजिट करें। "फार्मर्स कॉर्नर" में e-KYC टैब दिया गया है। ई-केवाईसी टैब पर क्लिक करने के बाद आधार नंबर भरने का विकल्प मिलेगा। आधार नंबर भरने के बाद सर्च पर क्लिक करें। इसके बाद ओटीपी भरने को कहा जाएगा। आधार नंबर के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर वन टाइम पिन (ओटीपी) आएगा। मोबाइल में प्राप्त ओटीपी भरने के बाद "सबमिट ओटीपी" पर क्लिक करें। ऑफलाइन प्रोसेस कंप्यूटर या इंटरनेट सेवाओं से दूर किसान भाई ऑफलाइन केवाईसी पूरी कर सकते हैं। मोबाइल और आधार कार्ड के साथ कॉमन सर्विस सेंटर पर जाएं। बॉयोमेट्रिक वेरिफिकेशन करा कर पीएम किसान ई केवाईसी का प्रोसेस पूरा किया जा सकता है। 21 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश दौरे के दौरान किसानों के बैंक खातों में लगभग 21 हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। पीएम किसान स्कीम की 11वीं किस्त के तहत जारी की गई आर्थिक मदद गत 31 मई को किसानों के बैंक अकाउंट में जमा हुई। किन किसानों को पैसे मिलते हैं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ वैसे किसानों को मिलता है जिनके पास खेती करने के लिए 2 हेक्टेयर से कम जमीन है। ऐसे किसान या उनके परिवार में किसी के पास भी सरकारी नौकरी नहीं होनी चाहिए। ऐसे परिवारों में कोई भी इनकम टैक्स पेयर नहीं होना चाहिए। पीएम किसान स्कीम का लाभ उन किसानों को ही मिलता है जो किसी भी तरह की सरकारी पेंशन का लाभ न उठा रहे हों।
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