टीम एबीएन, धनबाद/रांची। बालू की तस्करी करने वालों के खिलाफ खनन विभाग धनबाद की टीम ने बुधवार को झरिया एवं सिंदरी के कई जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान चार बालू लदे ट्रैक्टरों को जब्त किया गया। छापेमारी के दौरान कुछ लोग टीम के साथ उलझ गए, इसका फायदा उठाकर कई ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गए। लेकिन, यमुना महतो को टीम ने धर दबोचा। जोड़ापोखर थाना क्षेत्र के भौंरा काली मेला, लांल बंगला दामोदर नदी घाट, गौशाला ओपी के टासरा घाट के आसपास आदि जगहों पर टीम ने छापेमारी की गई। नेतृत्व कर रहे खनन अधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि उक्त कार्रवाई डीसी एवं डीएमओ के निर्देश पर की गई थी। छापेमारी के दौरान यमुना महतो नामक कारोबारी उलझ गया था। इसका फायदा उठाकर कई ट्रैक्टर चालक भाग खड़े हुए। लेकिन, यमुना को टीम ने पकड़ लिया। जब्त बालू लोड ट्रैक्टर और यमुना महतो को जोड़ापोखर थाना को सौंप दिया गया है। वहीं खनन विभाग की कार्रवाई से आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध ढंग से बालू का कारोबार करने वाले लोगों में हड़कंप मचा है। बताया जाता है कि अवैध बालू और कोयला को लेकर खनन विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। खनन अधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि एनजीटी की रोक के बाद भी दामोदर नदी कालीमेला घाट और टासरा घाट से बालू का अवैध कारोबार चलाया जा रहा है। भौरा ओपी क्षेत्र के लाल बंगला दामोदर नदी से बालू उठाव किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि पकड़े गए यमुना महतो नामक कारोबारी के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। वह पकड़े गए ट्रैक्टर को जबरन छुड़ाने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने कहा कि अवैध बालू खनन के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा। जोड़ापोखर थाना प्रभारी राजदेव सिंह ने कहा कि खनन अधिकारी ने अवैध बालू लदे 4 ट्रैक्टर पकड़ कर जोड़ापोखर थाना के हवाले किया है। एक बालू कारोबारी को भी गिरफ्तार किया गया है। मामला दर्ज कर लिया है। उसे जेल भेजा जाएगा।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के किन-किन क्षेत्रों में कौन-कौन से वनोपज और कृषि उपज पाए जाते हैं, इसका डाटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने डेटाबेस के अनुसार, उपज का वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग के लिए मैकेनिज्म तैयार करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री बुधवार को झारखंड विधानसभा स्थित अपने कक्ष में सिदो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड रांची के निदेशक पर्षद की पहली बैठक में उक्त निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने वनोपज से संबंधित संस्थानों से समन्वय स्थापित कर कार्य योजना बनाने का भी निर्देश दिया। उन्होंने संघ के पदाधिकारियों को वनोपज और कृषि उपज के क्षमता विकास के लिए एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सिदो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लिमिटेड के विभिन्न कार्यों और गतिविधियों के ससमय निष्पादन के लिये जल्द मानव बल नियुक्त करें। राज्य के वन क्षेत्रों में उत्पादित वनोपज का संग्रहण, मार्केटिंग व प्रोसेसिंग बेहतर तरीके हो सके यह सुनिश्चित कराएं। सीएम ने स्टेट प्रोक्यूरमेंट एवं मार्केटिंग पॉलिसी निर्धारण और स्टेट क्रेडिट लिंकेज पॉलिसी निर्धारण के लिये कमेटी का गठन करने का भी निर्देश दिया। बैठक में संघ के निबंधित उपविधि को अंगीकार किया गया। बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान कृषि मंत्री बादल, अपर मुख्य सचिव एल ख्यानग्ते, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, सचिव केके सोन, सचिव अबू बकर सिद्दीकी, सिदो-कान्हू कृषि एवं वनोपज राज्य सहकारी संघ लि के सीईओ संजीव कुमार, सचिव जयप्रकाश शर्मा तथा झास्कोलैम्प, झामकोफेड एवं वेजफेड के प्रबंध निदेशक एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
टीम एबीएन, रांची। राज्य के अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है, उन्हें मानदेय मिलता रहेगा। ध्यानाकर्षण के दौरान झामुमो विधायक सरफराज अहमद ने अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के मसले को उठाया। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि सरकार उनकी चिंता से वाकिफ है। लिहाजा सरकार ने तीन हजार पारा शिक्षकों के मानदेय को जारी रखने का फैसला लिया है। सबसे खास बात यह है कि केंद्र सरकार की ओर से 2019 में प्राप्त पत्र के मुताबिक न्यूनतम आहर्ता नहीं रखने वाले शिक्षकों की सेवा नहीं लेने का निर्देश है। इसके बावजूद राज्य सरकार इन शिक्षकों को मानदेय दे रही है। संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि इस संबंध में भारत सरकार को फिर से पत्र लिखने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी। आपको बता दें कि राज्य में सर्व शिक्षा अभियान के तहत करीब 3000 अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की सेवा ली जा रही थी, लेकिन केंद्र सरकार के 2019 के आदेश पर उन्हें कार्यमुक्त करने का आदेश दे दिया गया था। ये मामला कई बार सदन में उठ चुका है। साल 2020 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने भरोसा दिलाया था कि इस मसले पर केंद्र सरकार से बात की जाएगी लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकल पाया था। दरअसल, निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत स्कूलों में अप्रशिक्षित शिक्षक पठन-पाठन नहीं कर सकते। सभी अप्रशिक्षित को 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अंतिम मौका दिया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में उपग्रह आधारित वाहन के नंबर प्लेट के माध्यम से टॉल वसूली की प्रक्रिया शुरू किये जाने की तैयारी हो रही है और वर्ष 2024 से पहले देश में 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे शुरू कर दिये जायेंगे जिससे सड़क के मामले में भारत अमेरिका से पीछे नहीं रहेगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी देते हुए कहा कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से टॉल वसूली के सुधार की पूरी गुंजाइश है। इससे कोई व्यक्ति न तो टॉल की चारी कर सकता है और न ही कोई बच सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक टॉल नहीं देने पर सजा का प्रावधान नहीं है। इसके मद्देनजर इस नयी प्रौद्योगिकी को क्रियान्वित करने के लिए संसद में एक विधेयक लाने की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद छह महीने के भीतर देश में यह व्यवस्था लागू करने की पूरी कोशिश की जा रही जिससे न तो टॉल बनाने की जरूरत होगी और न ही कोई व्यक्ति बगैर टॉल दिये जा सकेगा। इससे बचने की कोशिश करने वालों को सजा का प्रावधान किया जायेगा। उन्होंने कहा कि वाहन निमार्ताओं से वाहनों में जीपीआरएस की सुविधा देने के लिए कहा गया है ताकि इससे टॉल वूसली में आसानी होगी और लोगों को भी राहत मिलेगी। अभी कोई व्यक्ति 10 किलोमीटर टॉल रोड का उपयोग करता है लेकिन उसे 75 किलोमीटर का टॉल चुकाना होता है लेकिन जीपीआरएस आधारित टॉल वसूली प्रक्रिया शुरू होने पर जहां से वाहन टॉल में प्रवेश करेगा और जब उससे उतरेगा वहीं तक का टॉल लगेगा। इससे उपभोक्ताओं को भी बचत होगी। उन्होंने कहा कि देश में अभी 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे बनाने का काम जोरशोर से जारी है। वर्ष 2024 तक देश में ये 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे शुरू होने के बाद सड़क के मामले में भारत अमेरिका से पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास कोई वित्तीय संकट नहीं है। हर वर्ष देश में पांच लाख करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण की क्षमता है। बैंक सड़क निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। गडकरी ने कहा कि देश में वाहनों में टॉल वसूली के लिए फास्टैग लगाने के बावजूद इससे वसूली पूरी नहीं हो पा रही है। अभी प्रतिदिन इससे 120 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पा रही है क्योंकि 97 प्रतिशत लोग इस फास्टैग का उपयोग कर रहे हैं लेकिन 67 प्रतिशत ही इसके माध्यम से टॉल चुका रहे हैं। शेष लोग नकदी में दोगुना टॉल चुका रहे हैं। इसमें क्या घालमेल है समझ नहीं आ रहा है।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बर्मिंघम में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला लॉन बॉल्स टीम को स्वर्ण पदक जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली झारखंड की बेटी रूपा रानी तिर्की एवं लवली चौबे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने आज वीडियो कॉल के जरिए रूपा रानी तिर्की से बातें की। मुख्यमंत्री ने कहा ‘शाबाश’ आपने देश के लिए प्रतिष्ठित गोल्ड मेडल जीता। आपने वह काम कर दिखाया जिससे पूरा राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है। आपने झारखंड का नाम देश और दुनिया में रोशन कर दिखाया। आपकी सफलता राज्य के अन्य खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश को आप पर गर्व है। जोहार...
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत आजादी के 75 साल पूरे होने के खास मौके पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है। आजादी के जश्न को यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम मन की बात के जरिए देशवासियों से हर घर तिरंगा उत्सव में भाग लेने की अपील की है। भारत सरकार की ओर से 2 अगस्त से 13 अगस्त तक इस उत्सव को मनाया जा रहा है। इस जश्न को और भी यादगार बनाने के लिए अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 15 अगस्त तक सभी स्मारक और संग्राहालयों में जाने वालों के लिए एंट्री फ्री कर दी है। इसका मतलब ये है कि अब इन जगहों पर जाने के लिए टिकट खरीदने की जरूरत नहीं होगी। आजादी के अमृत महोत्सव को खास बनाने के लिए भारत सरकार की ओर से खास तैयारी की गई है। केंद्र सरकार की ओर से लोगों में आजादी के जश्न का जोश भरने के लिए और देश प्रेम की भावना बढ़ाने के लिए कई अहम निर्णय लिए जा रहे हैं। इस उत्सव को खास बनाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 5 से 15 अगस्त तक देश के सभी स्मारक, संग्रहालय और पुरातत्व स्थल में दर्शकों की एंट्री को पूरी तरह से फ्री कर दिया गया है। ऐसे में अब इन जगहों पर जाने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। एएसआई के स्मारक-2 निदेशक डॉ एनके पाठक ने बताया कि 5 अगस्त से सभी स्मारक, संग्रहालय और पुरातत्व स्थल में दर्शकों की एंट्री फ्री रहेगी। इन सभी स्थलों में प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस संबंध में सभी क्षेत्रीय निदेशकों को जानकारी दे दी गई है। तिरंगा बाइक रैली में शामिल हुए लोग : बता दें कि भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर मनाए जा रहे आजादी का अमृत महोत्सव के तहत केंद्रीय मंत्रियों और युवा सांसदों सहित कई सांसदों ने बुधवार को लाल किले से शुरू हुई तिरंगा बाइक रैली में हिस्सा लिया। देश के नागरिकों में देशभक्ति की भावना बढ़ाने के मकसद से यह तिरंगा बाइक रैली आयोजित की गई है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी रैली में हिस्सा लिया। ठाकुर ने कहा, कई केंद्रीय मंत्री, सांसद और युवा नेता एक साथ आए और ऐतिहासिक लाल किले से बाइक रैली शुरू की ताकि यह संदेश दिया जा सके कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उन्हें याद कर रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मंकीपॉक्स से मिलते-जुलते लक्षण वाले यात्रियों को विमान में सवार न होने दिया जाए, ताकि देश में इस बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने यूएई में विश्व निकाय के कार्यकारी निदेशक और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमन (आईएचआर) के संपर्क बिंदु डॉ हुसैन अब्दुल रहमान अली रैंड को लिखे पत्र में भारत में पाए गए तीन संक्रमितों का हवाला दिया, जो खाड़ी देश से लौटे थे। उन्होंने कहा कि भारत आने से पहले ही उनमें मंकीपॉक्स संक्रमण के लक्षण उभरने लगे थे। अग्रवाल ने एक अगस्त को लिखे पत्र में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमन (आईएचआर)- 2005 के अनुच्छेद-18 के तहत डब्ल्यूएचओ अपने सदस्य देशों के लिए निकासी के समय यात्रियों की जांच की अनुशंसा करता है और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात चिंताओं के मद्देनजर जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर अनुरोध किया जाता है कि निकासी पर जांच और सख्त की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मंकीपॉक्स से मिलते-जुलते लक्षण वाले यात्री विमान में सवार न हो पाएं और देश में संक्रमण के प्रसार को कम किया जा सके। अग्रवाल ने इस पत्र की प्रति डब्ल्यूएचओ के भारत में मौजूद प्रतिनिधि, विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव (यू) को भी भेजी है। पत्र में कहा गया है कि विश्व समुदाय अंतरराष्ट्रीय चिंता वाले एक और स्वास्थ्य आपात की गिरफ्त में है, ऐसे में यह आवश्यक है कि आईएचआर संपर्क बिंदु लगातार समन्वय करें और अहम सूचनाएं साझा करें, ताकि संक्रमण का प्रसार रोका जा सके। गौरतलब है कि भारत में अब तक मंकीपॉक्स के आठ मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से एक मरीज की मौत हो चुकी है। केंद्र सरकार ने मंकीपॉक्स से उत्पन्न होने वाली स्थिति पर करीबी नजर रखने और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए एक कार्यबल का गठन किया है। आधिकारिक सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि यह कार्यबल जांच सुविधाओं का विस्तार करने में सरकार का मार्गदर्शन करेगा और संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण के उभरते रुझानों को भी टटोलेगा। गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ ने 23 जुलाई को मंकीपॉक्स को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली वैश्विक जन स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की आजादी के बाद जन्मी पहली और सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर एक बायोग्राफी इस साल के अंत तक सामने आएगी। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (पीआरएचआई) ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। "मैडम प्रेसीडेंट : ए बायोग्राफी ऑफ द्रौपदी मुर्मू" भारत की 15वीं राष्ट्रपति की यह पहली प्रामाणिक बायोग्राफी होगी जिसमें उनके जीवन के शुरुआती वर्षों, उनके संघर्षों और कई परीक्षणों का जिक्र किया गया है जिसने उन्हें देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाया है। इसे भुवनेश्वर के वरिष्ठ पत्र संदीप साहू ने लिखा है। साहू ने एक बयान में कहा, पेंगुइन इडिया ने मुझसे संपर्क किया था कि इस किताब को लिखने की क्या संभावना है, तथ्य यह था कि यह किताब भारत की राष्ट्रपति बनने वाली पहली आदिवासी महिला पर होगी, जो कि वास्तव में ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा, वह ओडिशा के आदिवासी बहुल मयूरभंज जिले से ताल्लुक रखती हैं, जहां मैंने अपनी पूरी किशोरावस्था बिताई है, यह भी इसे लिखने का एक और मुख्य वजह थी। यह किताब मयूरभंज के एक गांव से राष्ट्रपति भवन तक राष्ट्रपति मुर्मू का अभूतपूर्व उत्थान भारत में लोकतंत्र के सशक्तिकरण का एक आकर्षक अध्ययन प्रस्तुत करता है। उन्होंने राजनीति में अपना पहला कदम रायरंगपुर में उठाया, जहां उन्हें 1997 में रायरंगपुर अधिसूचित क्षेत्र परिषद में भाजपा पार्षद के रूप में चुना गया था। उन्होंने 2000 से 2004 तक ओडिशा की बीजद-भाजपा गठबंधन सरकार में मंत्री पद संभाला। उन्हें झारखंड की राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया और वह 2021 तक इस पद पर रहीं। प्रकाशकों के मुताबिक, मुर्मू "भारत की महान लोकतांत्रिक भावना" की कहानी हैं, जो इस किताब के माध्यम से पाठकों-दर्शकों तक पहुंचेगी, जिससे कई लोग अपने सपने देखने और उसके साकार करने के लिए प्रेरित होंगे। पेंगुइन प्रेस की प्रकाशक मेरु गोखले ने कहा, यह एक प्रेरणादायक महिला, एक आदिवासी नेता की कहानी है, जो ठोस राजनीतिक जीवन के साथ एक स्टेट्सवुमन रही हैं। फिर भी, हम उनके जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं। सभी भारतीयों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में राष्ट्रीय मंच पर उनका उभार देश के आदिवासी समुदायों के लिए एक सशक्त संदेश है।
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