टीम एबीएन, रांची। शिक्षक संघों की मांग पर सरकार ने फैसला लिया। झारखंड के सरकारी स्कूलों में अब हर महीने के तीसरे शनिवार को छुट्टी होगी। इस दिन शिक्षक और छात्र स्कूल नहीं आएंगे। अन्य शनिवार को सुबह 10 बजे से फूड डे क्लास का संचालन होगा। हर महीने के तीसरे शनिवार को झारखंड के सरकारी स्कूल बंद रहेंगे। शेष शनिवार को पूरा दिन स्कूल चलेगा। शिक्षक संघों के आग्रह पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने यह निर्णय लिया है। शिक्षा सचिव राजेश शर्मा ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। स्कूल में छुट्टी रहने के कारण उक्त शनिवार को मिड डे मील नहीं बनेगा। शिक्षा सचिव राजेश शर्मा ने कहा कि बच्चों को साल में कम से कम 252 दिन मिड डे मील देना है। तीसरे शनिवार को अवकाश देने के कारण साल में 12 दिन छुट्टी और बढ़ जाएगी। इसका आकलन कर लिया जाएगा। हर माह तीसरे शनिवार को छुट्टी दिये जाने की मांग अखिल झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में की गई थी। सरकार की ओर से संघ के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र चौबे, महासचिव राममूर्ति ठाकुर और मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि पूर्व में शनिवार को साढ़े तीन घंटे की क्लास की जगह छह घंटे कर दिया गया था। संघ इस पर आपत्ति जतायी थी और इसके बाद तीसरे शनिवार को अवकाश की मांग की थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। कई मोर्चों पर दोनों खुलकर आमने-सामने आ चुके हैं। यहां तक कि विश्वविद्यालयों के चांसलर पद को लेकर दोनों में विवाद इतना बढ़ा कि ममता सरकार की ओर से राज्यपाल के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव तक लाया गया। अब जब जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो चुके हैं और मणिपुर के राज्यपाल एल गणेशन को पश्चिम बंगाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बीच ममता सरकार के मंत्री शोभनदेव चटर्जी का एक बयान सामने आया है, जिसमें वह इस पद को ही खत्म करना चाहते हैं। मुख्य न्यायाधीश को सौंपी जाएं जिम्मेदारियां : शोभनदेव चटर्जी ने कहा, मुझे लगता है कि राज्य के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल की जिम्मेदारियों को संभालना चाहिए। चीफ जस्टिस कानून के उन पहलुओं को देख सकते हैं, जिनका राज्यपाल ध्यान रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, मैं इस तरह का सुझाव पहले भी दे चुका हूं। कई सरकारी आयोगों में इस सुझाव को शामिल भी किया गया है। उन्होंने कहा, यह प्रस्ताव सिर्फ पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं है। देश में बहुदलीय प्रणाली है। कई बार एक खास पार्टी केंद्र में होती है और अन्य दल राज्य की सत्ता संभालते हैं। दोनों के बीच मतभेद विकास कार्य को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा, न्यायाधीश गैर-राजनीतिक व्यक्ति होता है और वह कानून को बेहतर जानता है। ऐसे में उन्हें राज्यपाल की जिम्मेदारियां संभालनी चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे एवं कल्याण सचिव केके सोन ने मंगलवार 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित झारखंड जनजातीय महोत्सव की तैयारियों का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी तैयारियां पुख़्ता रखें। अतिथियों के इंट्री और एक्जिट प्वाइंट की व्यवस्था दुरुस्त रखें। मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे ने निर्देश दिया कि मंच, वीआईपी लाउंज, प्रदर्शनी गैलरी, मीडिया गैलरी एवं लोगों की बैठने की व्यवस्था दुरुस्त रखें। उसके साथ प्रदर्शनी गैलरी को भी आकर्षक बनाने को कहा। गैलेरी में बनने वाले स्टॉल में सभी जानकारियों के लिए डिसप्ले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया। फूड पवेलियन में झारखण्ड के व्यजंनों का ले सकेंगे लुत्फ : झारखण्ड जनजातीय महोत्सव के फूड पवेलियन में झारखण्ड के व्यजंनों का लोग लुत्फ ले सकेंगे। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में होनेवाले झारखण्ड जनजातीय महोत्सव में फूड कोर्ट का भी निर्माण कराया जा रहा है, जहां लोग झारखण्डी व्यंजनों का आंनद ले सकेंगे। मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे ने यहां सभी व्यवस्था दुरुस्त रखने का निर्देश दिया। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने पर विशेष जोर दिया। प्रदर्शनी गैलेरी में लोग झारखण्ड की कला-संस्कृति से हो सकेंगे रु-ब-रु : कार्यक्रम में बनने वाले प्रदर्शनी गैलेरी में लोग झारखण्ड की कला-संस्कृति से रु-ब-रु हो सकेंगे। यहां बनने वाले स्टॉल में झारखण्ड एवं यहां की जनजातियो से जुड़ी सभी जानकारियां प्रदर्शित की जायेंगी। झारखण्ड जनजातीय महोत्सव के अवसर पर सेमिनार एवं पैनल डिस्कशन का भी होगा आयोजन दो दिनों तक होने वाले झारखण्ड जनजातीय महोत्सव में सेमिनार एवं पैनल डिस्कशन का भी आयोजन किया जायेगा। सेमिनार एवं पैनल डिस्कशन 9 एवं 10 अगस्त को जनजातीय शोध संस्थान एवं हॉकी स्टेडियम, मोरहाबादी में आयोजित होगा। इस सेमिनार एवं पैनल डिस्कशन में ख्यातिप्राप्त वक्ता भाग लेंगे। मौके पर आदिवासी कल्याण आयुक्त मुकेश कुमार, उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा, नगर आयुक्त शशि रंजन सहित संबंधित विभाग के पदाधिकारी मौजूद थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राज्यों से सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया है जिससे भारत को कोविड महामारी से उबरने में मदद मिल सके। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केन्द्र में नीति आयोग की शासी परिषद की सातवीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक राज्य ने अपनी क्षमता के अनुरूप भारत के कोविड संषर्ष में योगदान दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि इस कारण से भारत विकासशील देशों के लिए एक आदर्श बन कर उभरा है और वे उसे वैश्विक नेता के तौर पर देखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का संघीय ढांचा और सहकारी संघवाद कोविड के दौरान दुनियाभर में एक आदर्श बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने विकासशील देशों को एक सशक्त संदेश दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद चुनौतियों से निपटना संभव है। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय राज्य सरकारों को जाता है, जिन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सहयोग किया और आम जनता को जन सेवाएं सुनिश्चित की। प्रधानमंत्री ने बैठक में लिए गए सभी मुद्दों के महत्व पर प्रकाश डाला और कृषि एवं पशुपालन के आधुनिकीकरण और खाद्य प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता तथा कृषि में वैश्विक नेता बनने पर जोर दिया। मोदी ने वर्ष 2023 में भारत की अध्यक्षता में होने वाली जी-20 सम्मेलन का उल्लेख किया और कहा कि यह दुनिया को बताने का अवसर है कि केवल दिल्ली ही भारत नहीं है, बल्कि देश में प्रत्येक राज्य और केन्द्र शासित क्षेत्र भी भारत है। उन्होंने कहा कि हमें जी-20 के आस-पास एक जन आंदोलन विकसति करना चाहिए। इससे देश में सर्वोत्तम प्रतिभाओं को पहचानने में मदद मिलेगी। प्रत्येक राज्य में जी-20 पर एक दल का गठन किया जाना चाहिए, जो इससे अधिकतम लाभ ले सकें। प्रधानमंत्री ने समापन भाषण में कहा कि प्रत्येक राज्य को तीन टी-ट्रेड, दूरिज्म और टेक्नोलॉजी पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और दुनियाभर में राजदूतों से संपकर् करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्यों को आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों को स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल किसी राजनीतिक पार्टी का एजेंडा नहीं, बल्कि साझा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जीएसटी संग्रहण बढ़ाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकरों के प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आवश्यक है। मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है और इसे नियत समय सीमा के भीतर लागू किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि बैठक में विचार-विमर्श के लिए लिये गए मुद्दे अगले 25 वर्ष के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओँ का निर्धारण करेंगे। उन्होंने कहा कि आज हम जिसका भी बीजारोपण करेंगे उसके फल 2047 में आयेंगे। शासी परिषद की यह महामारी शुरू होने के बाद पहली बैठक है। इससे पहले 2021 में यह बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की गई थी। बैठक में 23 राज्यों के मुख्यमंत्री, तीन उपराज्यपाल और दो प्रशासक तथा केन्द्रीय मंत्री शामिल हुए।
टीम एबीएन, रांची। 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस है। इस को लेकर झारखंड सहित पूरे देश में राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी की कला संस्कृति और सभ्यता को बनाए रखने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर झारखंड सरकार मोरहाबादी मैदान में विश्व आदिवासी महोत्सव 2022 को ऐतिहासिक ढंग से मनाने के लिए तैयारी कर रही है। यहां दस अगस्त तक तमाम आयोजन होंगे। रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। तैयारियों को लेकर रांची के सभी अधिकारी मोरहाबादी मैदान में जुटे हुए हैं। रविवार को भी रांची के एसडीएम, डीटीओ, ट्रैफिक डीएसपी, सिटी डीएसपी सहित विभिन्न नोडल व सहयोगी पदाधिकारी मोरहाबादी मैदान में जमे रहे और पूरे तैयारी का जायजा लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित राज्य के मंत्री और गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे रांची के यातायात डीएसपी जीतनवाहन उरांव ने बताया कि कार्यक्रम को लेकर मोरहाबादी के आसपास यातायात व्यवस्था के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई है। उरांव ने बताया कि कोलकाता की विश्वनाथ कंपनी को आयोजन की कई जिम्मेदारी दी गई है। 8 अगस्त तक सभी मजदूर काम पूरा कर लेंगे। वहीं ग्रामीण विकास विभाग की तरफ से झारखंड के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं द्वारा बनाए गए स्वादिष्ट व्यंजन एवं परिधान और अन्य फैशनेबल आइटम की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अलावा झारखंड के आदिवासियों की पारंपरिक एवं सांस्कृतिक झलकी भी देखने को मिलेगी।
टीम एबीएन, रांची। किसानों को लेकर सरकार गंभीर है, झारखंड में कम बारिश चिंताजनक है। जिसको लेकर सरकार हरसंभव किसानों को राहत देने के लिए कृत संकल्पित है। यह बातें झारखंड सरकार के कृषि पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख ने कृषि विभाग के उच्चअधिकारियों के साथ हुई बैठक में कही। झारखंड में सुखाड़ जैसे हालात हैं, कम बारिश की वजह से बुआई ना होने पर सरकार ने चिंता जताई है। इस स्थिति को लेकर शनिवार को कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने कहा कि विभाग में उच्च पदों पर बैठे पदाधिकारियों को जिला स्तर पर जाकर मॉनिटर करने और किसानों की वर्तमान स्थिति का आकलन जमीनी स्तर पर करने की आवश्यकता है। इसे लेकर कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी भी लगातार बैठक कर रहे हैं। विभागीय सचिव ने 24 जिला में मुख्यालय स्तर के पदाधिकारियों को मौके पर जाकर रिपोर्ट बनाने का निर्देश भी दे दिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि तमाम पदाधिकारी अपने प्रतिनियुक्त जिला के उपायुक्त से संपर्क स्थापित कर जिला में अल्प वृष्टि के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों की जानकारी लें। सुखाड़ से प्रभावित प्रखंडों के सर्वाधिक प्रभावित गांव का रेंडमली चयन कर क्षेत्र भ्रमण करें। उन्होंने जिला जाने वाले पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अल्प वृष्टि से प्रभावित फसल क्षेत्रों का आकलन कर प्रतिवेदन 10 अगस्त से पहले दें। विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि जिला स्तर के पदाधिकारी ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट लेकर किसानों के राहत के लिए उचित कार्य योजना बनाने काम करें। इससे हम अपने किसान भाइयों को सुनियोजित तरीके से लाभ पहुंचाने का काम कर सकें। उन्होंने विशेष सचिव राजेश सिंह को रांची, कृषि निदेशक निशा उरांव को खूंटी, सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार बरनवाल को रामगढ़, मनोज कुमार को कोडरमा, अंजनी कुमार को हजारीबाग, प्रदीप कुमार हजारी को गोड्डा, गोपाल जी तिवारी को पूर्वी सिंहभूम, विधान चंद्र चौधरी को लोहरदगा, राजकुमार गुप्ता को लातेहार, नयनतारा केरकेट्टा को गुमला, नवीन कुमार को पश्चिमी सिंहभूम, शशि प्रकाश झा को गढ़वा, एच एन द्विवेदी को देवघर, सुभाष सिंह को दुमका, संतोष कुमार को बोकारो, मुकेश कुमार सिन्हा को धनबाद, फनेन्द्र नाथ त्रिपाठी को सरायकेला खरसावां, अजेस्वर प्रसाद सिंह को पलामू, असीम रंजन एक्का को सिमडेगा, डॉ मनोज कुमार तिवारी को चतरा, जय प्रकाश शर्मा को जामताड़ा, कुमुद कुमार को साहिबगंज, राकेश कुमार सिंह को पाकुड़, मनोज कुमार को गिरिडीह जाने के निर्देश दिए हैं।
टीम एबीएन, रांची/नई दिल्ली। सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण हर तीन-चार साल पर राज्य को सुखाड़ का दंश झेलना पड़ता है। इस वर्ष भी अभी तक सामान्य से 50 प्रतिशत कम वर्षा हुई है एवं 20 प्रतिशत से भी कम जमीन पर धान की रोपनी हो पाई है। वर्त्तमान परिस्थिति में झारखण्ड सुखाड़ की ओर बढ़ रहा है। मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि झारखण्ड राज्य के लिए विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए, जिससे की सुखाड़ से निबटा जा सके। ये बातें मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कही। मुख्यमंत्री नई दिल्ली में नीति आयोग के शासी निकाय की बैठक में बोल रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा विगत दो वर्षों से कोविड- 19 जैसी महामारी के फलस्वरूप झारखण्ड जैसे पिछड़े राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है इस कुप्रभाव को न्यूनतम करने के लिए राज्य सरकार अथक प्रयास कर रही है और बेहतर परिणाम भी मिल रहे हैं। विगत ढाई वर्षों में झारखण्ड ने आर्थिक, सामाजिक विकास एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में विभिन्न कदम उठाये हैं। प्रदेश की मूलभूत सरंचना को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस आयाम को और अधिक बल देने हेतु केन्द्र सरकार का सहयोग सभी राज्यों, विशेष कर झारखण्ड जैसे पिछड़े एवं आदिवासी बाहुल्य राज्य को प्राप्त हो। केसीसी हेतु बैंकों को निर्देश दे नीति आयोग : मुख्यमंत्री ने कहा कि 2019 तक 38 लाख किसानों में से मात्र 13 लाख किसानों को KCC मिल पाया था। पिछले 2 सालों में सरकार के अथक प्रयास से 5 लाख नए किसानों को KCC का लाभ प्राप्त हुआ है परन्तु अभी भी 10 लाख से अधिक आवेदन विभिन्न बैंकों में लंबित हैं। राज्य सरकार नीति आयोग से सभी बैंको को KCC की स्वीकृति हेतु आवश्यक निर्देश देने का आग्रह करती है। झारखण्ड में फसलों में विविधता लाने की दिशा में अभी तक कोई विशेष कार्य योजना पर कार्य नहीं हुआ है। कारण किसानों का सब्सिस्टेंस खेती पर केंद्रित होना। हमने धान अधिप्राप्ति को 2 वर्ष में 4 से 8 लाख टन तक पहुंचाया है परंतु अभी भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केंद्र सरकार और FCI के विशेष सहयोग की आवश्यकता है। सिंचाई की सुविधा हेतु विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए : मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सिंचाई की सुविधाओं का घोर अभाव है एवं मात्र 20 प्रतिशत भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। राज्य में 5 लाख हेक्टेयर खरीफ की भूमि अपलैंड की श्रेणी में आती है जिस पर फसलों में विविधता लाई जा सकती है बशर्ते कि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। राज्य में दलहन एवं तिलहन के उत्पादन की असीम संभावना है। झारखण्ड राज्य में लघु सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई की सुविधा को बढ़ाने हेतु एक विशेष पैकेज स्वीकृत किया जाए। बागवानी के क्षेत्र में विस्तार के लिए बिरसा हरित ग्राम योजना लागू की है। इस योजना के क्रियान्वयन से जहां राज्य के गरीब किसान परिवारों को आजीविका का स्थायी अवसर दिया जा रहा है वहीं एक बड़े क्षेत्रफल में परती टांड भूमि का बेहतर प्रबंधन व उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 60,000 एकड़ टांड भूमि में आम एवं मिश्रित बागवानी सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इस वित्तीय वर्ष में 25,000 एकड़ में बागवानी की प्रारम्भिक गतिविधियों को कराया जा रहा है। इससे किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष औसतन 25,000/- से 30,000/- रुपये की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है। शिक्षा के नये द्वार खोलने का हो रहा प्रयास : मुख्यमंत्री ने कहा झारखण्ड एक आदिवासी बाहुल्य राज्य है तथा आदिवासियों के लिए उच्च शिक्षा के नये द्वार खोलने हेतु पहला पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति झारखण्ड विधानसभा द्वारा प्रदान कर दी गयी है। इसके अतिरिक्त राज्य में कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना भी प्रक्रियाधीन है जो राज्य में व्यवसायिक उच्च शिक्षा के नए आयाम लिखेगा। राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को कम ब्याज दर पर ऋण प्रदान करने के लिए शीघ्र ही गुरूजी क्रेडिट कार्ड योजना लागू की जायेगी। इससे 2 से 3 लाख छात्रों को फायदा होगा। राज्य सरकार द्वारा विगत वर्ष एक महत्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की गई है, जिसके अन्तर्गत जिला स्तर पर 80 उत्कृष्ट विद्यालय, प्रखण्ड स्तर पर 325 आदर्श विद्यालय तथा पंचायत स्तर पर 4036 विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इन विद्यालयों में आधुनिक भवन, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, गणित, विज्ञान एवं भाषा लैब तथा आधुनिक पुस्तकालय की व्यवस्था रहेगी। इसके अतिरिक्त व्यवसायिक पाठ्यक्रम, स्पोकेन इंगलिश कोर्स की भी व्यवस्था रहेगी जिससे लगभग 15 लाख विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा। उत्खनन से प्राप्त आय का अधिक हिस्सा झारखण्ड को प्राप्त होना चाहिए : मुख्यमंत्री ने कहा झारखण्ड का गठन ही जल जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हुआ है। परन्तु यहाँ जितनी भी कंपनियां खनन एवं उद्योग लगाने आई। उन सभी ने बस यहां जल, जंगल और जमीन का दोहन किया है। किसी भी खनन कंपनी द्वारा माईनिंग करके जमीन को रिक्लेम करने का प्रयास नहीं हुआ है। कभी भी विस्थापितों की समस्या को दूर करने का सही से प्रयास नहीं हुआ। झारखण्ड के खनिज एवं वन संपदाओं का देश के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है परन्तु झारखण्ड के आदिवासी और मूलवासी ने हमेशा अपने को ठगा हुआ महसूस किया। मुझे लगता है कि खनिज संपदा के उत्खनन से प्राप्त आय का अधीकाधीक हिस्सा झारखण्ड जैसे राज्य को प्राप्त होना चाहिए परन्तु पिछले कुछ वर्षों में जो नीतिगत परिवर्तन हुए हैं वो ठीक इसके विपरित साबित हुए हैं। उदाहरण के लिए GST लागु होने से झारखण्ड को काफी घाटा हुआ है परन्तु उसकी भरपाई करने का प्रयास समुचित तरीके से नहीं किया गया है। झारखण्ड राज्य में विभिन्न खनन कंपनियों की भू अर्जन, रॉयल्टी इत्यादि मद में करीब एक लाख छत्तीस हज़ार करोड़ रुपये बकाया है परन्तु खनन कंपनियों इसके भुगतान में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। हम लोगों ने विभिन्न बैठकों में इस विषय को उठाया है तथा इस संबंध में पत्राचार भी किया है परन्तु हमारे सभी प्रयासों का फलाफल अभी तक शून्य रहा है। झारखण्ड को ये बकाया राशि का भुगतान कराने का निर्देश इन खनन कंपनियों को केंद्र सरकार दे, जिससे कि राज्य के लोगों के सर्वांगीण विकास में इस राशि का उपयोग किया जा सके। आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के हितों का रखें ध्यान : मुख्यमंत्री ने कहा झारखण्ड का करीब 30 प्रतिशत एरिया वन भूमि से आच्छादित है एवं अधिकांश खनिज संपदा वन क्षेत्र में अवस्थित है, जिसके लिए वन भूमि अपयोजन की आवश्यकता होती है। अभी हाल के दिनों में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत नई नियमावली बनाई गई है जिसमें वन भूमि अपयोजन के लिए स्टेज 2 क्लीयरेंस के पूर्व ग्राम सभा की सहमति के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है जो मेरे विचार से आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के हितों के प्रतिकूल है। झारखण्ड में विभिन्न कंपनियों के भू-अर्जन, रॉयल्टी आदि मद में करीब 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया है परंतु कम्पनियां इसके भुगतान में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। इस बाबत कई प्रयास किये गए जिनका फलाफल शून्य रहा। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी एवं नीति आयोग से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का भी आग्रह करना चाहूंगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की सातवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक होगी। सुबह 9.45 बजे से शाम 4.30 बजे तक होने वाली है। इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव सुखदेव सिंह शामिल होंगे। इस बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सुखाड़ पर विशेष चर्चा की जायेगी, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से संभावित सुखाड़ को देख विशेष पैकेज की मांग की जायेगी। इसके पीछे तर्क यह है कि राज्य के करीब दस जिलों में 60 से 75 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इससे फसलों की बुआई नहीं के बराबर हुई है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि राज्य में सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति संथाल की है, जिसमें साहिबगंज, जामताड़ा, गोड्डा, पलामू, देवघर, चतरा और पाकुड़ जिला शामिल है। इन जिलों में बारिश नहीं होने की वजह से धान की रोपनी ना के बराबर हुई है। सरकारी मानक के अनुसार 50% से कम बारिश और 33% से कम फसलों की बुआई होने की स्थिति में सुखाग्रस्त क्षेत्र माना जाता है। नीति आयोग की बैठक में झारखंड की ओर से नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में आने वाली परेशानी, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे विषयों को भी उठाया जायेगा। इसके साथ ही झारखंड सरकार विभिन्न केंद्रीय मदों में बकाया राशि की भी मांग करेगी। नीति आयोग की शासी (संचालन) परिषद की सातवीं बैठक के एजेंडे में अन्य बातों के साथ-साथ फसलों के विविधीकरण और तिलहन व दालों तथा कृषि-समुदायों के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-स्कूली शिक्षा का कार्यान्वयन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-उच्च शिक्षा का कार्यान्वयन और शहरी प्रशासन शामिल है। इस बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सुखाड़ पर विशेष चर्चा होगी। इसके तहत स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा पर केंद्र और राज्य के बीच एक्शन प्लान बनेगा। एजेंडा के मुताबिक अर्बन गवर्नेंस के तहत म्यूनिसिपल फाइनेंस, अर्बन प्लानिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर एंड सिटीजन सेंट्रिक गवर्नेंस विषय पर चर्चा होगी। बैठक में कृषि एवं पशुपालन पर भी चर्चा होगी। एजेंडा के अनुसार कृषि विभाग से जुड़े डायवरसिफिकेशन ऑफ क्रॉप, डिजिटल एग्रीकल्चर, स्ट्रेटजी फॉर आत्मनिर्भर कृषि पर चर्चा होगी। नीति आयोग का शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और रणनीतियों के बारे में साझा दृष्टिकोण विकसित करने वाली प्रमुख संस्था है। यह शासी परिषद अंतर-क्षेत्रीय, अंतर-विभागीय और संघीय मुद्दों पर चर्चा करने का एक मंच प्रदान करता है। इसमें भारत के प्रधानमंत्री, सभी राज्यों एवं विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, पदेन सदस्य, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में केंद्रीय मंत्रीगण शामिल होते हैं। यह केंद्र और राज्यों के बीच विचार-विमर्श का सबसे महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है और संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण के साथ संगठित कार्रवाई के लिए प्रमुख रणनीतियों की पहचान करता है।
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