टीम एबीएन, रांची। रांची में कांटाटोली फ्लाई ओवर निर्माण को लेकर ऑटो और ई-रिक्शा का रूट डायवर्ट किया गया है और यह रूट डायवर्ट आज से प्रभावी हो गया। डायवर्ट रूट के अनुसार बिरसा चौक, सुजाता चौक, मुंडा चौक की ओर से कांटाटोली चौक की ओर आने जाने वाले ऑटो रिक्शा का परिचालन बहुबाजार से कांटा टोली चौक की तरफ वर्जित किया गया है। संबंधित मार्ग से आने वाले ऑटो और ई रिक्शा बहुबाजार चौक से कर्बला चौक, मिशन चौक, प्लाजा चौक होकर अपने गंतव्य स्थान तक जायेंगे। रेडियम चौक, लालपुर चौक की ओर से कांटा टोली चौक होकर बहुबाजार चौक, मुंडा चौक होकर ऑटो और ई रिक्शा अपने गंतव्य स्थान तक जा सकेंगे। कांटा टोली फ्लाईओवर का निर्माण कार्य बिशप स्कूल बहुबाजार के पास पहुंचने की स्थिति में, बिरसा चौक, सुजाता चौक, मुंडा चौक की ओर से कांटाटोली चौक की तरफ आने वाली कार, मोटरसाइकिल बहुबाजार चौक से कर्बला चौक वाले रास्ते पर जाकर संत पॉल स्कूल के सामने से बसरटोली होते विशप स्कूल के पास निकलकर कांटाटोली चौक से आगे जा सकेंगी। कांटाटोली चौक से 50 मीटर दूरी तक किसी प्रकार के वाहनों का पड़ाव वर्जित किया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में फिर भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। खाट के नीचे 500 और 2000 रुपये की नोटों की गड्डियां मिली हैं। सुबह ईडी की टीम ने गार्डनरिच में ट्रांसपोर्ट कारोबारी निसार खान के घर पर छापा मारा। पता चला है कि वहां से मोटी रकम बरामद हुई है। खाट के नीचे प्लास्टिक के पैकेट में लिपटे 500 और 2000 रुपये के कई बंडल मिले हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार खाट के नीचे से सात करोड़ की नोटों की गड्डियां मिली हैं। गौर करने वाली बात है कि ट्रांसपोर्टर के घर से बरामद पैसा किसी तरह कोयले या गाय की तस्करी से जुड़ा है या नहीं। इस पर ईडी के अधिकारियों ने मुंह नहीं खोला। कोलकाता के गार्डेनरिच के शाही स्टेबल लेन में निसार खान का घर केंद्रीय बलों ने घेर रखा है। साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स से ईडी के और अधिकारी कारोबारी के घर के लिए रवाना हो गये हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने गार्डनरिच में एक परिवहन व्यवसायी निसार खान के घर से भारी मात्रा में धन बरामद किया है। सूत्रों के अनुसार निसार के दो मंजिला मकान की पलंग के नीचे से प्लास्टिक की थैलियों में लिपटे 500 टका के नोटों के ढेरों बंडल मिले। 2000 रुपये के नोटों का एक बंडल मिला। शनिवार सुबह ईडी के अधिकारियों ने कोलकाता में तीन जगहों पर संयुक्त अभियान शुरू किया। ईडी सूत्रों के मुताबिक, पार्क स्ट्रीट के पास मैकलियोड स्ट्रीट पर ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि बाकी दो छापे बंदरगाह से सटे इलाके और गार्डनरिच के शाही स्थिर इलाके में डाले गये हैं। इस बीच पूरा घर सीआरपीएफ जवानों से घिरा हुआ है। साथ ही पूरे इलाके में अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। ईडी पहले ही बैंक अधिकारियों से संपर्क कर चुका है। मालूम हो कि पैसे गिनने की मशीन भी लाई जा रही है। ईडी के सूत्रों के अनुसार, बरामद धन का काफी हद तक कोई हिसाब नहीं है। हालांकि यह पैसा कहां से आया और कैसे आया, इस बारे में वह कोई जानकारी नहीं दे सके। इसी वजह से केंद्रीय खुफिया एजेंसी के अधिकारी निसार खान के साथ-साथ उसके परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर रहे हैं। इलाके में ईडी की छापेमारी को देखने के लिए स्थानीय निवासियों का तांता लगा हुआ है। लोग घर के सामने एकत्रित हो गये हैं और तरह-तरह के बातें चल रही हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी शिक्षकों, कर्मियों और पदाधिकारियों के लिए मानव संपदा पोर्टल यानी एचआरएमएस पर ऑनलाइन छुट्टी प्रबंधन माड्यूल को अपनाने का निर्णय लिया है। यानी सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों समेत शिक्षा विभाग के सभी स्थायी कर्मियों के अवकाश की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। वहीं विभाग की तरफ से जारी पत्र के मुताबिक मेटरनिटी अवकाश भी विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्वीकृत करेंगे। यानी अब सरकारी शिक्षकों और कर्मियों को छुट्टी लेने के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही अफसरों की जी हुजूरी करनी होगी। डिजिटलाइजेशन के बढ़ते ट्रेंड का फायदा अब झारखंड के सरकारी स्कूल के शिक्षक भी ले सकेंगे। वहीं अलग-अलग कोटि के अवकाश की मंजूरी की जिम्मेदारी अलग-अलग पदाधिकारियों को सौंपी गई है। इसके साथ ही आपको बता दें कि यदि किसी कारण एचआरएमएस पोर्टल में छुट्टी स्वीकृत करने को लेकर निर्धारित समय के अंदर आवेदन की स्वीकृति नहीं हो पाती है तो ऐसी स्थिति में अवकाश स्वीकृत माना जायेगा। दूसरी तरफ यदि छुट्टी स्वीकृत करने वाले पदाधिकारी लगातार तीन बार निर्धारित समय सीमा के अंदर छुट्टी के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो अवकाश स्वीकृत करने वाले प्राधिकारी के नियंत्री पदाधिकारी को इसकी जानकारी दी जायेगी। वहीं छुट्टी के लिए दिये जाने वाले आवेदन में आवेदन की तिथि निश्चित रूप से लिखने को कहा गया है। बता दें कि छुट्टी स्वीकृति प्राधिकार द्वारा लगातार तीन बार निर्धारित समय-सीमा के अंदर छुट्टी आवेदनों पर कोई पहल नहीं करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा की सदस्यता समाप्त होने के खतरे को लेकर झारखंड में जारी राजनीतिक संकट के बीच राज्यपाल रमेश बैंस बृहस्पतिवार को करीब एक सप्ताह लंबे दिल्ली दौरे से रांची लौटे। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली रवाना होने से एक दिन पहले, एक सितंबर को बैंस ने सत्तारूढ़ संप्रग के विधायकों को आश्वासन दिया था कि वे लाभ के पद के मामले में सोरेन की विधानसभा सदस्यता समाप्ति के अनुरोध वाली अर्जी पर भारत निर्वाचन आयोग की सिफारिश पर सबकुछ स्पष्ट करेंगे। राजभवन में आधिकारिक सूत्र ने बताया, राज्यपाल रांची लौट आए हैं... अभी तक उन्होंने कोई आदेश जारी नहीं किया है। भारत निर्वाचन आयोग ने अपना फैसला 25 अगस्त को राज्यपाल को भेज दिया था, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग के फैसले की अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन अटकलें हैं कि आयोग ने मुख्यमंत्री को विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की है। इससे पहले सोमवार को, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत गठबंधन सरकार ने विधानसभा में बेहद आसानी से विश्चासमत पा लिया। इससे विधायकों की खरीद-फरोख्त के कारण राज्य में सरकार गिरने/बदलने को लेकर छाए संदेह के बादल छंट गए हैं और सोरेन की स्थिति मजबूत हुई है। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में 48 विधायकों (झामुमो के 29, कांग्रेस के 15 और राजद, राकांपा और भाकपा-एमएल (उदारवादी) के एक-एक विधायक) और एक निर्दलीय ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाला। हालांकि, मतदान के दौरान भाजपा नीत राजग के सदस्य सदन से बाहर चले गए थे। विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सोरेन ने कहा कि विश्वासमत की जरूरत इसलिए महसूस हुई क्योंकि झारखंड सहित गैर-भाजपा शासित राज्यों में भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया, निर्वाचन आयोग द्वारा अपनी सिफारिश राज्यपाल को भेजे जाने की खबरें मीडिया में आने के बाद 25 अगस्त से ही राज्य में अस्थिरता की स्थिति है। लेकिन राज्यपाल अभी भी चुप हैं। उन्होंने कहा, संप्रग के शिष्टमंडल ने उनसे चीजें स्पष्ट करने का अनुरोध किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि दो-तीन दिनों में ऐसा करेंगे। उसके बाद वह चुपके से दिल्ली चले गये।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर भारत में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 11 सितंबर को भारत में राष्ट्रीय शोक रहेगा। इस दिन महारानी एलिजाबेथ के सम्मान में भारत में राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर शोक जताया। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें हमारे समय की दिग्गज के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपने देश और लोगों को प्रेरक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता का परिचय दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को हमारे समय की एक दिग्गज के रूप में याद किया जायेगा... उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता का परिचय दिया। उनके निधन से आहत हूं। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और ब्रिटेन के लोगों के साथ हैं। दो दिन पहले आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर दिखी थीं : महारानी एलिजाबेथ द्वितीय अपने निधन से दो दिन पहले आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर नजर आई थीं। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री लिज ट्रस से मुलाकात की थी। महारानी ने ट्रस से नई सरकार बनाने को कहा था। महारानी का ट्रस के साथ हाथ मिलाते हुए फोटो है। गुरुवार को स्कॉटलैंड में अंतिम सांस ली : 70 साल तक महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने शासन करने के बाद गुरुवार को स्कॉटलैंड में अंतिम सांस ली। महारानी के निधन के बाद शाही परिवार में उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई। निधन के बाद किस तरह से पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाना है, इसके लिए ब्रिटेन की सरकार ने योजना बनाकर रखी है। 10 दिन बाद होगा अंतिम संस्कार : महारानी का अंतिम संस्कार उनके निधन के 10 दिन बाद होगा। इससे पहले उनके ताबूत को लंदन से बकिंघम पैलेस से वेस्टमिंस्टर के पैलेस तक निधन के पांच दिन बाद औपचारिक मार्ग से ले जाया जाएगा। इस दौरान लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे, यह स्थल प्रतिदिन 23 घंटे तक खुला रहेगा। अंतिम संस्कार का दिन राष्ट्रीय शोक का दिन होगा, जिसमें वेस्टमिंस्टर एब्बे में होने वाली सेवा और पूरे ब्रिटेन में दोपहर में दो मिनट का मौन रखा जाएगा। अंतिम संस्कार के बाद रानी को विंडसर कैसल के किंग जॉर्ज षष्ठम मेमोरियल चैपल में दफनाया जाएगा। एलिजाबेथ द्वितीय तीन बार भारत आईं : महारानी एलिजाबेथ द्वितीय तीन बार भारत की यात्रा पर आए हैं। पहली बार दिल्ली के रामलीला मैदान में 1961 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का भव्य स्वागत किया गया था। यहां उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में बड़ी सभा को संबोधित किया था। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक परिसर का औपचारिक उद्घाटन भी किया था। वे 1983 और 1997 में भी भारत आई थीं।
एबीएन सेंट्रल डाक। केंद्र सरकार ने आज बड़ा फैसला लेते हुए ब्रोकन राइस यानी टूटे चावल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बात की जानकारी डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड संतोष कुमार सारंगी की ओर से नोटिफिकेशन में दी गई है। नोटिफिकेशन में बताया गया है कि आज आनी 9 सितंबर 2022 से देश में टूटे चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लागू हो गया है। इसके साथ विभिन्न ग्रेड के निर्यात पर 20 प्रतिशत ड्यूटी लगाई गई है। बता दें कि चीन के बाद भारत चावल का सबसे बड़ा उत्पादक है। चावल के वैश्विक व्यापार में भारत का भाग 40 प्रतिशत है तो वहीं भारत ने इसी साल मई में गेहूं के शिपमेंट पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि देश की खाद्य सुरक्षा खतरे में है, क्योंकि कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की वजह से गेहूं की पैदावार कम हुई थी कृषि मंत्रालय के अनुसार, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक दक्षिण एशियाई देश भारत में चावल का कुल रकबा इस सीजन में अब तक 12% गिर गया है। कृषि मंत्रालय ने कहा था कि धान का रकबा 12 अगस्त तक गिरकर 30.98 मिलियन हेक्टेयर (76.55 मिलियन एकड़) रह गया है, जो एक साल पहले 35.36 मिलियन हेक्टेयर था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को यहां सेंट्रल विस्टा के राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच के मार्ग कर्तव्य पथ का उद्धाटन और इंडिया गेट के पास स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया और इस अवसर को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व करार दिया। उन्होंने पूर्ववर्ती राजपथ को गुलामी का प्रतीक बताया और कहा कि आज से यह इतिहास की बात हो गया है और हमेशा के लिए मिट गया है। उन्होंने कहा, आज कर्तव्य पथ के रूप में नए इतिहास का सृजन हुआ है। मैं सभी देशवासियों को आजादी के इस अमृतकाल में गुलामी की एक और पहचान से मुक्ति के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्तव्य पथ के उद्घाटन और नेताजी की प्रतिमा के अनावरण से आजादी के अमृत महोत्सव में देश को आज एक नई प्रेरणा और नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा, आज हम गुजरे हुए कल को छोड़कर, आने वाले कल की तस्वीर में नए रंग भर रहे हैं। आज जो हर तरफ ये नई आभा दिख रही है, वो नए भारत के आत्मविश्वास की आभा है। प्रधानमंत्री ने नेताजी की प्रतिमा के अनावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले वहां गुलामी के समय ब्रिटिश राजसत्ता के प्रतिनिधि की प्रतिमा लगी हुई थी लेकिन आज देश ने उसी स्थान पर नेताजी की प्रतिमा की स्थापना करके आधुनिक और सशक्त भारत की प्राण प्रतिष्ठा भी कर दी है। उन्होंने कहा, यह अवसर ऐतिहासिक है, अभूतपूर्व है। बोस की प्रतिमा उसी स्थान पर स्थापित की गई है, जहां इस साल की शुरुआत में पराक्रम दिवस (23 जनवरी) के अवसर पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था। इस होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच के मार्ग कर्तव्य पथ को मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत पुनर्निमित किया गया है। ज्ञात हो कि नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय से मिले एक प्रस्ताव को पारित कर राजपथ का नाम बदलकर उसे कर्तव्य पथ कर दिया। अब इंडिया गेट पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा से लेकर राष्ट्रपति भवन तक पूरे इलाके को कर्तव्य पथ कहा जायेगा। राजपथ और सेंट्रल विस्टा एवेन्यू के आसपास के इलाकों में भीड़ के कारण बुनियादी ढांचे पर पड़ते दबाव और सार्वजनिक शौचालय, पीने के पानी, स्ट्रीट फर्नीचर और पार्किंग स्थल की पर्याप्त व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण राजपथ का पुनर्विकास किया गया है। इसमें वास्तु शिल्प का चरित्र बरकरार रखा गया है। कर्तव्य पथ बेहतर सार्वजनिक स्थानों और सुविधाओं से युक्त होगा, जिसमें पैदल रास्ते के साथ लॉन, हरे-भरे स्थान, नवीनीकृत नहरें, मार्गों के पास लगे बेहतर बोर्ड, नयी सुविधाओं वाले ब्लॉक और बिक्री स्टॉल होंगे। इसके अलावा इसमें पैदल यात्रियों के लिए नए अंडरपास, बेहतर पार्किंग स्थल, नये प्रदर्शनी पैनल और रात्रि के समय जलने वाली आधुनिक लाइट से लोगों को बेहतर अनुभव होगा। इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, भारी वर्षा के कारण एकत्र जल का प्रबंधन, उपयोग किए गए पानी का पुनर्चक्रण, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा कुशल प्रकाश व्यवस्था जैसी अनेक दीर्घकालिक सुविधाएं शामिल हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका ने इस साल पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारतीय छात्रों को 82 हजार यूएस वीजा जारी किए। भारत में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी बयान के अनुसार, नई दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई के भारतीयों की प्राथमिकता थी कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय छात्रों को वीजा देना। भारत में सबसे वरिष्ठ अमेरिकी डिप्लोमैट पैट्रीशिया लसीना ने कहा कि हमने सिर्फ इस गर्मी में ही 82,000 भारतीय स्टूडेंट्स को अमेरिका का वीजा दिया है, इससे पहले कभी वर ने इतनी बड़ी संख्या में वीजा छात्रों को नहीं दिए गए। लसीना ने कहा कि ये बातें भारतीय छात्रों के महत्वपूर्ण योगदान को हाईलाईट करती हैं इससे अंतरराष्ट्रीय पार्टनरशिप बनाए रखने और बेहतर करने में मदद मिलती है। बीते वर्षों में कोविड 19 महामारी के कारण काफी देरी का सामना करना पड़ा है। कॉन्सुलर अफेयर्स मिनिस्टर काउंसलर डॉन हेफ्लिन ने कहा कि अंततराष्ट्रीय छात्रों का आना-जाना अमेरिकी कूटनीति का केंद्र है। इसमें भारतीय छात्रों का जितना योगदान है, उतनी किसी और का नहीं। अमेरिका में जितने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स आते हैं, उनका 20 फीसदी हिस्सा सिर्फ भारतीय छात्र हैं।
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