टीम एबीएन, रांची। राज्य में मंत्रियों के बाद अब आईएएस अधिकारियों को भी नये बंगले दिये जायेंगे। पुराना विधानसभा के पास 19.72 एकड़ जमीन पर सचिव रैंक के अधिकारियों के लिए 23 बंगले बनाये जाने हैं। इसमें करीब 187 करोड़ रुपये खर्च होगी। नगर विकास विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जायेगा। निर्माण को जुडको निकालेगा टेंडर : अधिकारियों के लिए बनने वाले बंगले जी प्लस 1 के होंगे। 23 बंगलों के अलावा, एक बैरक, पीसीसी रोड, पाथवे, ड्रेन और कैंपस फिलिंग के अलावा एसटीपी प्लांट भी होगा। शिवा कंसल्टेंसी ने बंगले का डिजाइन तैयार किया है। टेंडर लेने वाली कंपनी को तीन साल में भवनों को कंप्लीट करना होगा। कैबिनेट से पास होने के बाद जुडको इसके निर्माण के लिए टेंडर निकालेगा। अलग-अलग इलाकों में रहते हैं अधिकारी : झारखंड की राजधानी रांची में आईएएस अधिकारियों के लिए कोई कॉलोनी नहीं है। 21 साल से सचिव स्तर के अधिकारी शहर के अलग-अलग इलाकों में आवंटित आवासों में रह रहे हैं। अधिकारी डोरंडा, मोरहाबादी, बरियातू और कांके इलाके में आवंटित पुराने सरकारी भवनों में रह रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को टोक्यो पहुंच गए हैं। पीएम मोदी के अलावा विश्व के कई नेता मंगलवार को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। आबे के अंतिम संस्कार में 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रमुखों सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। पीएम मोदी ने विमान ने उतरते हुए अपनी कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, टोक्यो पहुंच गया हूं। उन्होंने यही ट्वीट जापानी भाषा में भी किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टोक्यो पहुंच गए हैं। वह आज शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेंगे। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे और भारत-जापान की विशेष सामरिक व वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराएंगे। इससे पहले पीएम मोदी ने सोमवार को ट्वीट किया था, मैं (जापान के) पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आज रात टोक्यो जा रहा हूं। उन्होंने आबे को एक प्रिय मित्र और भारत-जापान मित्रता का बड़ा हिमायती बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री किशिदा और आबे की पत्नी से मुलाकात कर सभी भारतीयों की ओर से शोक-संवेदना प्रकट करेंगे। उन्होंने कहा था, हम आबे के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत-जापान संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए काम करना जारी रखेंगे। बता दें कि आबे (67) की 8 जुलाई को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वह चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। भारत ने आबे के सम्मान में नौ जुलाई को एक दिन का राष्ट्रीय शोक भी घोषित किया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विदेश मन्त्री जयशंकर (इस समय संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं) ने कल सोमवार को जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को खत्म किये जाने के मुद्दे पर खुलकर बात की और पक्षपाती रिपोर्टिंग के लिए अमेरिकी मीडिया को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अस्थायी प्रावधान को अब खत्म कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने कानून और व्यवस्था की स्थिति में इंटरनेट सेवाओं को बंद करने की आलोचना करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि यदि आप एक ऐसे स्तर पर पहुंच गए हैं जहां आप कहते हैं कि इंटरनेट बंद कर देना मानव जीवन के नुकसान से अधिक खतरनाक है, तो मैं क्या कह सकता हूं। जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म किये जाने को लेकर हो रही आलोचना पर विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा, यदि आप अनुच्छेद-370 के मुद्दे को देखते हैं, तो संविधान के इस अस्थायी प्रावधान को आखिरकार खत्म कर दिया गया है। इसे बहुसंख्यकवादी लोगों का काम कहा गया, अब मुझे ये बताओ कि कश्मीर में जो हो रहा था क्या वह बहुसंख्यक नहीं था? उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि तथ्यों को झुकाया जाता है… क्या सही है और क्या गलत है, इस पर बहस होती है। यह वास्तव में काम पर होने वाली राजनीति है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की ओर से संविधान की अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को खत्म किए अब तीन साल हो चुके हैं, जिसमें जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा किया गया था। 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के साथ ही दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में भी विभाजित कर दिया। सरकार ने तब इस फैसले को ऐतिहासिक कदम के रूप में बताया और इसे भारत को एकजुट और एकीकृत करने की दिशा में सही कदम करार दिया। पाकिस्तान की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था की स्थिति अक्सर चिंता का विषय रही है, जो इस वजह से इसका असर इंटरनेट सेवाओं पर भी पड़ता है। कश्मीर मुद्दे को अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन डीसी में गलत तरीके से पेश किये जाने के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि अगर कोई आतंकवादी घटना होती है तो यह मायने नहीं रखता कि किस धर्म के व्यक्ति की जान गई। उन्होंने कहा, चाहे भारतीय सैनिक या भारतीय पुलिस कर्मियों का अपहरण किया जाए, चाहे सरकारी कर्मचारियों या अपने काम पर जा रहे आम नागरिकों की जान जाए? आपने कब लोगों को इस बारे में बात करते, निंदा करते सुना है… बल्कि मीडिया की खबरों को देखिये। मीडिया में क्या दिखाया जाता है और क्या नहीं दिखाया जाता? वाशिंगटन पोस्ट वाशिंगटन डीसी में प्रकाशित होने वाला अमेरिका राष्ट्रीय डेली पेपर है और इसके मालिक अमेजन के जेफ बेजोस हैं। जयशंकर ने भारत विरोधी ताकतों के मजबूत होने से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा, मेरा यह कहना है कि कुछ लोग पूर्वाग्रही हैं… वे कोशिश करते हैं फैसले तय करने की… और जैसे-जैसे भारत अपने फैसले खुद करना शुरू करेगा, इस तरह के लोग जो अपने को संरक्षक की भूमिका में देखते हैं उनके विचार बाहर आयेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समूहों कि भारत में जीत नहीं हो रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले दिनों जिस बात ने हम सब का ध्यान आकर्षित किया - वह है चीता। पीएम मोदी ने कहा कि देश के कोने-कोने से लोगों ने भारत में चीतों के लौटने पर खुशियां जताई हैं। 130 करोड़ भारतवासी खुश हैं, गर्व से भरे हैं - यह है भारत का प्रकृति प्रेम। मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों से रू-ब-रू होते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी देश के युवा जैसे-जैसे अपनी पहचान और गौरव पर गर्व करते हैं, उन्हें, अपने मौलिक विचार और दर्शन उतने ही आकर्षित करते हैं | आज से तीन दिन बाद, यानि 28 सितम्बर को अमृत महोत्सव का एक विशेष दिन आ रहा है। इस दिन हम भारत माँ के वीर सपूत भगत सिंह जी की जयंती मनायेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि भगत सिंह जी की जयंती के ठीक पहले उन्हें श्रद्धांजलि स्वरुप एक महत्वपूर्ण निर्णय किया है। यह तय किया है कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट का नाम अब शहीद भगत सिंह जी के नाम पर रखा जायेगा। इसकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी | मैं चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और देश के सभी लोगों को इस निर्णय की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने 2025 तक राज्य से तपेदिक (टीबी) का उन्मूलन करने के लिए राज्य स्तरीय प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान की शुक्रवार को शुरुआत की। बैस ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ सितंबर को राष्ट्रव्यापी टीबी मुक्त भारत अभियान प्रारंभ किया था। संयुक्त राष्ट्र ने टीबी उन्मूलन के लिए 2030 का लक्ष्य निर्धारित किया है लेकिन भारत ने 2025 तक इस रोग का उन्मूलन करने का फैसला किया है। राज्यपाल ने कहा, टीबी का उन्मूलन करना कठिन नहीं है। इसके लिए लोगों के बीच प्रतिबद्धता, जागरूकता और रोगियों के नियमित रूप से दवाइयां लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षणों में पाया गया है कि टीबी के रोगियों में पोषण का स्तर संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा, नि-क्षय पोषण योजना के तहत, टीबी के रोगियों को पोषक भोजन के लिए नकद अंतरण के जरिये उनके बैंक खातों में 500 रुपये भेजे जा रहे हैं। राज्यपाल ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की सेवाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देने को भी कहा। मंत्री ने कहा कि राज्य में टीबी के 34,241 रोगी उपचाराधीन हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने अंतिम रविवार को मन की बात करते हैं और इस दौरान किसी ना किसी विषय पर प्रधानमंत्री लोगों से रूबरू होकर चर्चा करते हैं। जहां आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में झारखंड की राजधानी रांची की शोभा दीदी और उनके समूह पर भी चर्चा की। रांची की महिला समूह का पीएम मोदी ने बढ़ाया हौसला : मन की बात के दौरान शोभा दीदी कि समूह स्क्रीन में दिखी। संभावना जताई जा रही थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शोभा दीदी से चर्चा करेंगे। मगर इतना सही शोभा दीदी की महिला समूह का उत्साह काफी बढ़ गया। इस समूह की महिलाओं का कहना है कि हम घर में रहकर बहुत छोटे रूप से इस व्यापार को शुरू किये थे और पूरी तरह से यह इको फ्रेंडली है। वेस्टेज सामानों से हम गुड़िया (डॉल) बनाते हैं और इस गुड़िया (डॉल) में झारखंड समेत देश के कई राज्यों की संस्कृति इसके माध्यम से दर्शाया जाता है। जो लोगों को काफी पसंद आता है। आज हमारे समूह से कई लोग जुड़ चुके हैं और प्रधानमंत्री के मूल मंत्र मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिल रहा है। हमारे हाथों से बने खिलौने गुड़िया (डॉल) सिर्फ देश में नहीं विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है और आज प्रधानमंत्री के इस प्रयास से हमें और बढ़ावा मिलेगा। वहीं मन की बात को लेकर भाजपा के विधायक सीपी सिंह ने कहा कि प्रत्येक माह प्रधानमंत्री अंतिम रविवार को मन की बात करते हैं और देश के लोगों से चर्चा करते हैं, आज भी आपने देखा होगा रांची के महिला समूह जो डॉलर गुड़िया बनाती है उन लोगों के बारे में चर्चा की और प्रधानमंत्री का मूल मंत्र है लोकल फॉर वोकल। उस को बढ़ावा देने के लिए लगातार लोग काम कर रहे हैं और रांची की महिलाएं जब काम कर रही है, तो एक अच्छी बात है। आपने देखा मन की बात में पीएम ने दिव्यांगों के लिए भी चर्चा किया। इसके साथ ही गुजरात में नेशनल गेम होने जा रहा है कोरोना काल के बाद हो रहा है, इसे देखिए और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। हमारे देश के प्रधानमंत्री एक अलग तरह के व्यक्तित्व हैं, जो सिर्फ प्रधानमंत्री के रूप में ही नहीं बल्कि समाज के मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। बहुत लोग मन की बात का मजाक उड़ाते हैं, मगर मैं कहता हूं कि मन की बात सुनना चाहिए। आज का दिन काफी खुशी से भरा है। आज झारखंड की महिलाओं से पीएम मोदी रूबरू हुए, जब हम लोग टीवी में देखते हैं गुजरात की तमिलनाडु की महाराष्ट्र की महिलाओं से वह बात करते हैं तो हम लोग सोचते हैं कि हमारे प्रदेश की महिलाओं से भी बात होनी चाहिए, वह भी कई बेहतर काम कर रही हैं। आज झारखंड की महिलाओं से या रांची की महिलाओं से उनकी बात हुई तो हमारे लिए सौभाग्य और गौरव की बात है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महीनों से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में कहा कि वह शांति का पक्षधर है। भारत उस पक्ष में है, जो बातचीत और कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएनजीए के उच्च स्तरीय सत्र में कहा, यूक्रेन संघर्ष जारी है, हमसे अक्सर पूछा जाता है कि हम किसके पक्ष में हैं और हर बार हमारा सीधा और ईमानदार जवाब होता है। उन्होंने बताया कि इस संघर्ष का शीघ्र समाधान निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र के भीतर और बाहर रचनात्मक रूप से काम करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक हित में है। राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस संघर्ष में भारत शांति के पक्ष में (खड़ा) है और मजबूती से रहेगा। उन्होंने कहा, हम उस पक्ष में हैं जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उसके संस्थापक सिद्धांतों का सम्मान करता है। हम उस पक्ष में हैं जो बातचीत और कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताता है। विदेश मंत्री ने कहा, हम उन लोगों के पक्ष में हैं, जो अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भोजन, ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं। जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर कहा, दुनिया पहले से ही महामारी के बाद आर्थिक सुधार की चुनौतियों से जूझ रही है। विकासशील (देशों) की कर्ज की स्थिति अनिश्चित है। उन्होंने कहा, इसमें अब बढ़ती लागत और ईंधन, खाद्य और उर्वरकों की घटती उपलब्धता भी जुड़ गई है। ये व्यापार व्यवधान यूक्रेन संघर्ष के कई परिणामों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा यूक्रेन संघर्ष के नतीजों ने खासकर खाद्य पदार्थ और ऊर्जा पर आर्थिक दबाव को और बढ़ा दिया है। एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने के बीच मुलाकात हुई थी। इस दौारन पीएम मोदी ने पुतिन को यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष पर युद्ध विराम को समर्थन दिया था। उन्होंने शांति स्थापित करने की बात पर कहा था कि यह युद्ध का समय नहीं है। पीएम मोदी की इस सलाह पर अमेरिकी और अन्य देश की मीडिया ने खूब सराहा था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति से निपटने के लिए अमेरिका के फेडरल रिजर्व समेत अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंकों का अनुसरण करते हुए शुक्रवार को लगातार चौथी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। आरबीआई ने महंगाई को काबू में करने के लिए रेपो दर में मई से अबतक 1.40 प्रतिशत की वृद्धि की है। इस दौरान रेपो दर चार प्रतिशत से बढ़कर 5.40 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) 30 सितंबर को रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला कर सकती है। ऐसा होने पर रेपो दर बढ़कर 5.90 प्रतिशत हो जाएगी। रेपो दर में मई में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी और जून तथा अगस्त में यह 0.50-0.50 प्रतिशत बढ़ाई गई। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति में मई से नरमी आने लगी थी लेकिन यह अगस्त में सात प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। आरबीआई अपनी द्विवार्षिक मौद्रिक नीति बनाते वक्त खुदरा महंगाई पर गौर करता है। आरबीआई के गवर्नर की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक बुधवार को शुरू होगी और दरों में परिवर्तन पर जो भी निर्णय होगा उसकी जानकारी शुक्रवार 30 सितंबर को दी जायेगी। बैंक ऑफ बड़ौदा में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि मुद्रास्फीति सात प्रतिशत के लगभग बनी रहने वाली है और ऐसे में दरों में वृद्धि होना तय है। रेपो दर में 0.25 से 0.35 फीसदी की वृद्धि का मतलब है कि आरबीआई को यह भरोसा है कि मुद्रास्फीति का सबसे खराब दौर बीत चुका है। वहीं विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए दरों में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि भी की जा सकती है। आरबीआई का काम यह सुनिश्चित करना है कि खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत (दो प्रतिशत ऊपर या नीचे) पर बनी रहे। हाउसिंग डॉट कॉम के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि ऊंची मुद्रास्फीति आरबीआई के लिए चिंता का प्रमुख कारण है और दरों में वृद्धि के परिणामस्वरूप बैंक आवास ऋण पर ब्याज दरें बढ़ाएंगे। हालांकि, हमारा मानना है कि इसका बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि संपत्ति की मांग बनी हुई है। बल्कि त्योहारों के दौरान तो मांग और बढ़ने वाली है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी विशेष रिपोर्ट में कहा था कि दरों में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि तय है। उसने कहा था कि रेपो की सर्वोच्च दर 6.25 प्रतिशत तक जाएगी और अंतिम वृद्धि दिसंबर की नीतिगत समीक्षा में 0.35 प्रतिशत की होगी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse