राज काज

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Published / 2022-12-19 23:11:47
बिजली दरें बढ़ाने को टाटा ने मांगी अनुमति

एबीएन सेंट्रल डेस्क। टाटा पावर ने महाराष्ट्र बिजली क्षेत्र नियामक महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग (एमईआरसी) से ईंधन समायोजन लागत की सीमा में राहत की मांग की है, जिससे कि बिजली खरीद की लागत की भरपाई हो सके। अगर एमईआरसी इससे सहमत हो जाता है तो टाटा पावर के मुंबई के ग्राहकों के लिए बिजली की दरें बढ़ जाएंगी।
मौजूदा नियम के मुताबिक ईंधन समायोजन शुल्क (एफएसी) के तहत बिजली वितरण कंपनी को अनुमति है कि वह ईंधन या बिजली की खरीद की लागत में किसी भी बढ़ोतरी की भरपाई मासिक बिजली बिल के माध्यम से करे।

ग्राहकों को बिजली की दरें बढ़ने का झटका न लगे, यह सुनिश्चित करने के लिए एफएसी की रिकवरी इस समय मौजूदा शुल्क के 20 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी हो सकती है। महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों ने कहा कि इस समय ट्रांबे ताप बिजली संयंत्रों से टाटा पावर को बिजली खरीद की कीमत 10 रुपये प्रति किलोवॉट पड़ रही है, क्योंकि उनके संयंत्र बिजली उत्पादन के लिए विदेश से कोयला मंगा रहे हैं।

2022 में कोयले की कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे कंपनी ग्राहकों को दी जा रही बिजली की कीमत बढ़ाने की मांग कर रही है। अभी नियामक ने ट्रांबे बिजली उत्पादन केंद्र से 4.50 रुपये प्रति किलोवाट घंटे की दर से बिजली खरीद को मंजूरी दी है।
कोयले की कीमत में बढ़ोतरी की भरपाई करने के लिए कंपनियां अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली खरीद रही हैं। टाटा पावर अगले 5 साल में अक्षय ऊर्जा पर 77,000 करोड़ रुपये निवेश कर रही है, उसने ट्राम्बे बिजली उत्पादनन इकाई से 2030 तक बिजली खरीद के लिए बिजली खरीद समझौते के विस्तार की मांग की है।

एफएसी पर मौजूदा सीलिंग को देखते हुए टाटा पावर इस समय औसतन 1.20 रुपये प्रति यूनिट वसूली कर रही है। शेष की वसूली मध्यावधि में बिजली की कीमत में बदलाव से होगा, जो अगले साल अप्रैल से लागू होगी।

Published / 2022-12-19 23:03:21
जनवरी तक रिपोर्ट सौंपेगी उच्चाधिकार प्राप्त समिति

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने पूर्व ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। समिति को सरकार की प्रमुख योजना मनरेगा के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करना है, जिसमें वर्षों से चल रही इस योजना की गरीबी उन्मूलन में भूमिका, सरकारी ढांचे और व्यवस्था व खासकर व्यय के तरीकों का अध्ययन शामिल है।

सूत्रों का कहना है कि अक्टूबर में गठित की गई समिति जनवरी तक अपनी रिपोर्ट देगी। यह रिपोर्ट संसद में फरवरी में पेश होने जा रहे केंद्रीय बजट 2022-23 के पहले आएगी। महामारी के पहले करीब 5 से 5.5 करोड़ परिवार इस योजना के तहत नियमित रूप से रोजगार पाते थे। महामारी के बाद यह संख्या बढ़कर 7 करोड़ के पार पहुंच गयी है।
साथ ही महामारी के पहले इस योजना के लिए सालना करीब 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया जाता था, जो महामारी के बाद बढ़कर करीब 1,00,000 करोड़ रुपये सालाना हो गया है। इस योजना पर बड़े पैमाने पर खर्च जारी रहने और आर्थिक रिकवरी के संकेत दिखने के बावजूद कुछ तिमाहियों से ग्रामीण इलाकों में काम की मांग बढ़ने के कारण इस मद में किए जा रहे खर्च की प्रकृति को लेकर कुछ संदेह उठ रहे हैं।

कई खबरें आईं, जिनमें कहा गया है कि मनरेगा के तहत खर्च का तरीका बदल गया है और इस धन का बड़ा हिस्सा व्यक्तिगत संपत्तियों के सृजन में हो रहा है, जो मुख्य रूप से हाशिये पर खड़े लोगों पर किया जाता है, लेकिन चिंता बनी हुई है। हाल की खबरों में कहा गया है कि 25 राज्यों के 341 ब्लॉक में मनरेगा के तहत किए गए काम केंद्र सरकार की जांच के दायरे में है, जिसके लिए विशेष आॅडिट टीम लगाई गई है, जिसे इसकी जमीनी हकीकत समझनी है।

 हालांकि मनरेगा के तहत कुछ तिमाहियों से काम की मांग कृत्रिम होने या छेड़छाड़ कर रिपोर्ट तैयार करने के संदेह के विपरीत डलबर्ग एडवाइजर्स की रिपोर्ट द स्टेट आफ रूरल इंप्लाइमेंट : ए लुक ऐट मनरेगा एक्रॉस 5 स्टेट्स इन इंडिया की धारणा है।
कुछ महीने पहले जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ साल के दौरान करीब 70 प्रतिशत जॉब कार्ड धारकों ने मनरेगा में काम की मांग की है। इसमें यह भी कहा गया है कि सभी परिवारों ने काम के लिए आवेदन किया, उन्हें काम मिला भी, लेकिन उनमें से ज्यादातर को कम काम मिला।
डलबर्ग के शोध में 5 राज्यों आंध्र प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आंकड़े शामिल किये गये हैं। इन राज्यों में योजना के तहत दिये जाने वाले कुल रोजगार का एक तिहाई रोजगार मिलता है और मनरेगा के तहत पंजीकृत कुल कामगारों में से 40 प्रतिशत इन्हीं राज्यों से हैं।
मनरेगा पर किये जाने वाले खर्च के वित्त वर्ष 2022 के आंकड़ों और गरीबी के साथ इसके संबंध को लेकर कुछ पैटर्न मिलता है, लेकिन यह ठोस नहीं है। साथ ही वास्तविक व्यय इस पर निर्भर है कि राज्य कितनी मांग के सृजन में सक्षम है और मांग के लिए कितना माहौल तैयार करते हैं, जिससे हाशिये के समाज के लोग काम की मांग कर सकें और कृत्रिम रूप से मांग को दबाया न जाये।

Published / 2022-12-19 22:59:00
चीन की सीमा को और सुरक्षित करने में जुटा भारत

  • भारत बनायेगा 1700 किलोमीटर लंबा फ्रंटियर हाइवे

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार अगले पांच वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के पास भारत-तिब्बत-चीन-म्यांमार सीमा के करीब 1,748 किलोमीटर लंबा फ्रंटियर हाईवे बनाने की योजना बना रही है। टाइम्स आॅफ इंडिया (टीओआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार हाईवे अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर के करीब होगा। सरकार अगले पांच वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के पास भारत-तिब्बत-चीन-म्यांमार सीमा के करीब 1,748 किलोमीटर लंबा फ्रंटियर हाईवे बनाने की योजना बना रही है। 

टाइम्स आॅफ इंडिया (टीओआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार हाईवे अंतरराष्ट्रीय सीमा से 20 किलोमीटर के करीब होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हाइवे एनएच-913 दो लेन का होगा और इसका निर्माण सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ को रोकने के लक्ष्य तहत परिवहन मंत्रालय द्वारा बनाया जायेगा। एक अधिकारी ने बताया कि लगभग 800 किलोमीटर का गलियारा ग्रीन फील्ड होगा; क्योंकि इन हिस्सों पर कोई मौजूदा सड़क नहीं है। कुछ पुल और सुरंगें भी होंगी। हमने 2024-25 में सभी कार्यों की मंजूरी को पूरा करने की योजना तैयार की है और आमतौर पर निर्माण को पूरा करने में लगभग दो साल लगते हैं। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, अलग-अलग चरण में काम पूरा होगा। जबकि पूरी परियोजना 2026-27 तक पूरी होने की उम्मीद है।

यह हाईवे बोमडिला से शुरू होगा और नफरा, हुरी और मोनिगोंग से होकर गुजरेगा। यह चीन सीमा के करीब जिदो और चेनक्वेंटी से होकर गुजरेगा और भारत-म्यांमार सीमा के पास विजयनगर तक जायेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षा बलों के साथ-साथ उपकरणों की आसान आवाजाही को बढ़ावा देगा। चीन भी वास्तविक नियंत्रण रेखा के अपने हिस्से में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है।

सरकार ने 2016 में अपनी परियोजना सीमा अवसंरचना पर अधिकार प्राप्त समिति में रक्षा मंत्रालय, राज्य सरकार और सीमा प्रबंधन विभाग के परामर्श से सीमा क्षेत्रों पर सर्वेक्षण करने और रिपोर्ट तैयार करने की सिफारिश की थी। वहीं, 2018 में केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में कॉरिडोर को राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के रूप में अधिसूचित किया। एक बार किसी सड़क को एनएच के रूप में अधिसूचित करने के बाद इसे बनाने की जिम्मेदारी परिवहन मंत्रालय की होती है।

Published / 2022-12-19 20:49:32
उत्तर प्रदेश : राष्ट्रीय कृषि विकास को छह करोड़ स्वीकृत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत दिये जाने वाले अनुदान की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है। इसके लिए राज्यपाल ने छह करोड़ अड़तालिस लाख 58 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इससे अनुदान देने के संबंध में तेजी आयेगी। उप्र शासन द्वारा कृषि निदेशक को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत संचालित कृषि विकास योजनान्तर्गत संचालित कृषि क्षेत्र की पूंजीगत योजना हेतु प्राविधानित राशि को कोषागार में भेजा जा रहा है। 

स्वीकृत की जा रही धनराशि का व्यय राज्य सरकार तथा भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कार्य योजना के अनुसार योजना की गाइडलाइंस का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए किया जायेगा। धनराशि का व्यय केवल उन्हीं मदों पर किया जायेगा, जिस मद के लिए धनराशि स्वीकृत की जा रही है। स्वीकृत धनराशि को सुसंगत वित्तीय नियमों के अनुसार व्यय करने का उत्तरदायित्व कृषि निदेशक का होगा।

Published / 2022-12-19 20:46:36
झारखंड : हंगामे की भेंट चढ़ा शीतकालीन सत्र का पहला दिन

  • अब कल यानी मंगलवार सुबह 11 बजे के बाद शुरू होगी कार्यवाही 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का पहला दिन हंगामें की भेंट चढ़ गया। पहले दिन की कार्यवाही स्थगित कर दी गयी। स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने मंगलवार 11 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित की। सोमवार से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में पहले दिन सदन के बाहर बीजेपी विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया। साहिबगंज में आदिम जनजाति महिला की हत्या समेत अन्य मुद्दो को लेकर नारेबाजी की गयी। 

सदन की कार्यवाही के दौरान झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि पिछले दिनों कई सम्मानित लोगों का निधन हो गया है। इनमें सबा अहमद, देवीधन बेसरा, रजनीश आनंद, अरुण कुमरा, अमिताभ चौधरी, पूर्व मंत्री समरेश सिंह, जस्टिन केरकेट्टा, पंडित गोपाल प्रसाद, डॉ जेजे इरानी, मैनेजर पांडेय समेत अन्य शामिल हैं। शोक प्रस्ताव के दौरान झारखंड के मंत्री आलमगीर आलम और मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने शोक प्रकट किया। विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि शोक प्रकाश के दौरान आज सत्र में नया अध्याय जुड़ रहा है। श्रद्धा मर्डर केस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नये कानून का जरूरत है। ऐसे आरोपियों को फांसी की सजा हो। शोक प्रकाश के दौरान विधायक लंबोदर महतो ने भी शोक प्रकट किया। संस्कृत के श्लोक के साथ इन्होंने निधन पर शोक प्रकट किया। विधायक कमलेश सिंह ने भी निधन पर शोक प्रकट किया। 

शोक प्रस्ताव के दौरान साहिबगंज में हत्या के मुद्दे पर विधायक विरंची नारायण ने इसकी निंदा की और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। इस पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि लाश पर राजनीति अच्छी नहीं है। इस पर बीजेपी विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। साहिबगंज और दुमका मर्डर केस पर विधायक सरयू राय ने शोक प्रकाश के दौरान शोक प्रकट किया। उन्होंने कहा कि इनकी दिवंगत आत्मा को शांति मिले। विधायक अमित कुमार यादव ने साहिबगंज में पहाड़िया महिला की हत्या पर शोक प्रकट किया। सत्र में दोनों पक्षों के बीच हो रही बहसबाजी के दौरान सारठ के भाजपा विधायक रणधीर सिंह टेबल पर खड़े हो गये, तब मार्शलों ने उन्हें बाहर निकाला। इस दौरान भाजपा विधायकों ने जमकर नारेबाजी की। मालूम हो कि सोमवार को शोक प्रस्ताव के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित हो गयी।

Published / 2022-12-19 16:57:47
स्वतंत्रता सेनानियों पर भी फिल्में बनें : राज्यपाल

टीम एबीएन, रांची। कल शाम डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में संपन्न पांचवें झारखंड अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का समापन बॉलीवुड सितारों, देश भर से आये फिल्मकारों की उपस्थिति में हो गया। उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने किया। 

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तपन कुमार शांडिल्य ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि फिल्म फेस्टिवल जैसी गतिविधियों से फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा मिलता है और युवा इस की ओर प्रेरित होते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखकर उनका विश्वविद्यालय इन गतिविधियों को बढ़ावा देता रहेगा। मौके पर सम्मानित की गयी कल्याणी शाहदेव और प्रोफेसर राजेश कुमार के लिए उन्होंने अपने विश्वविद्यालय के फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को बधाई दी। सांसद साबिर अली ने जिफ्फा के प्रयासों की प्रशंसा की। साथ ही पूरी टीम को बधाई दी। राज्यपाल का आभार व्यक्त किया कि वे कला संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हमेशा समय निकालते रहे हैं। 

राज्यपाल रमेश बैस ने जोहार से शुरुआत की और प्रसन्नता व्यक्त की कि 32 देशों की 53 फिल्मों के प्रदर्शन से फिल्मों को बढ़ावा मिलता है और कैरियर बनाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि यहां फिल्मों के लिए अनुकूल माहौल है और सब्सिडी भी दी जाती है, इससे फिल्मों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सैनानियों पर भी फिल्में बननी चाहिए। संस्कृत में फीचर फिल्म को जिफ्फा द्वारा सम्मान दिये जाने को उन्होंने अच्छा कदम बताया। देश भर के कलाकारों का आभार व्यक्त किया और आशा व्यक्त की कि इससे झारखंड में फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। 

नदिया के पार... की प्रशंसा की तीसरी कसम की चर्चा की। उनकी सरलता का वर्णन किया। आज लोकार्पण की गयी वरिष्ठ पत्रकार परवेज कुरैशी की फिल्म निर्माण की चुनौतियां पुस्तक के बारे में कहा कि फिल्मों के निर्माण को यहां कोई चुनौती नहीं होगी। झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रकृति ने इसे फुरसत से बनाया। नदिया के पार फिल्म के सचिन ने आयोजकों और झारखंड के वासियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से फिल्म निर्माण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। 

धन्यवाद ज्ञापन जीफा के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील सिंह बादल ने किया। मौके पर रोहन पाठक, मृणालिनी अखौरी और अन्य कलाकारों ने सराहनीय कार्यक्रम प्रस्तुत किये। जिफ्फा के अध्यक्ष ऋषि प्रकाश मिश्रा, सुजीत उपाध्याय, डॉ आरिफ नासिर बट, आकाश सिन्हा, आभास नाथ, विनोद मेहता, पंकज कुमार व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

Published / 2022-12-19 14:40:38
झारखंड : सीएम ने किया स्पीकर का सम्मान

टीम एबीएन, रांची। पंचम झारखण्ड विधानसभा का दशम (शीतकालीन) सत्र प्रारंभ होने से पूर्व झारखंड विधान सभा स्थित अध्यक्ष कक्ष सीएम हेमन्त सोरेन पहुंचे। वहां उन्होंने स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। साथ ही विधानसभा सत्र की कार्यवाही को लेकर बातचीत की।

Published / 2022-12-19 10:31:02
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व विजेता अर्जेंटीना को दी जीत की बधाई

  • बोले- यह रोमांचक फुटबॉल मैच के तौर पर याद किया जायेगा

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। अर्जेंटीना ने फीफा वर्ल्ड कप 2022 के फाइनल मैच में फ्रांस को हराकर इतिहास रच दिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अर्जेंटीना को विश्व कप जीतने पर बधाई दी और कहा कि फाइनल मुकाबले को फुटबॉल के सबसे रोमांचक मैचों में से एक के रूप में याद किया जायेगा। उन्होंने कहा कि अर्जेंटीना और मेस्सी के करोड़ों भारतीय प्रशंसक इस शानदार जीत से खुश हैं। 

मोदी ने ट्वीट किया कि इसे सबसे रोमांचक फुटबॉल मैचों में से एक के रूप में याद किया जायेगा। अर्जेंटीना को फीफा विश्व कप चैंपियन बनने पर बधाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है। अर्जेंटीना और मेस्सी के लाखों भारतीय प्रशंसक इस शानदार जीत पर खुशी मना रहे हैं। अर्जेंटीना ने फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में फ्रांस को 4-2 से हराकर विश्व कप जीता।

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