राज काज

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Published / 2023-08-06 12:44:42
अमृत भारत स्टेशन योजना पीएम मोदी ने की लॉन्च

देश के 508 स्टेशनों का होगा नवीनीकरण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अमृत भारत स्टेशन योजना को लॉन्च किया। उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पूरे भारत में 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। 

इस मौके पर पीएम ने कहा कि विकसित होने के लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ा रहा भारत अपने अमृत काल के प्रारंभ में है। नयी ऊर्जा, प्ररेणा, संकल्प है। भारतीय रेल के इतिहास में भी एक नए अध्याय की शुरूआत हो रही है। 

भारत के करीब 1300 प्रमुख रेलवे स्टेशन अब अमृत भारत रेलवे स्टेशन के तौर पर विकसित किए जाएंगे और उनका पुनर्विकास आधुनिकता के साथ होगा।

योजना का उद्देश्य

  • स्टेशनों का सिटी सेंटरों के रूप में विकास
  • शहर के दोनों छोरों का एकीकरण
  • स्टेशन भवनों का सुधार व पुनर्विकास
  • आधुनिक यात्री सुविधाओं का प्रावधान
  • बेहतर यातायात व्यवस्था और इंटरमोडल इंटीग्रेशन
  • मार्गदर्शन के लिए एक-समान और सहायक सूचक चिह्न
  • मास्टर प्लान में उचित संपत्ति विकास का प्रावधान
  • लैंडस्केपिंग, स्थानीय कला और संस्कृति

24470 करोड़ होगी परियोजना की लागत

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में बताया कि इस पुनर्विकास परियोजना की लागत 24,470 करोड़ होगी और इससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान होंगी।

प्रधानमंत्री जिन रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखेंगे, उनमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 55-55, बिहार के 49, महाराष्ट्र के 44, पश्चिम बंगाल के 37, मध्य प्रदेश के 34, असम के 32, ओडिशा के 25, पंजाब के 22, गुजरात और तेलंगाना के 21-21, झारखंड के 20, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के 18-18, हरियाणा के 15 और कर्नाटक के 13 स्टेशन शामिल हैं।

Published / 2023-08-06 12:24:51
झारखंड : मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना के प्रति उदासीन हैं विद्यार्थी

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति की शुरुआत की गयी है। मुख्यमंत्री हेमंत सरकार ने इसके जरिए वैसे छात्र जो आर्थिक तंगी की वजह से पढाई छोड़ देते हैं, उन्हें स्कॉलरशिप देने की कोशिश की है। 

इस योजना के तहत 9वीं से 12वीं तक के चयनित बच्चों को साल में 12,000 रुपये मिलेंगे। मगर विडंबना यह है कि शिक्षा विभाग के द्वारा शुरू की गई इस स्कॉलरशिप प्रोग्राम का लाभ लेने में झारखंड के बच्चे उदासीन हैं। 

मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप पाने के लिए झारखंड एकेडमिक काउंसिल चयन परीक्षा आयोजित करती है। शिक्षा विभाग ने इस साल के चयन परीक्षा में राज्यभर के सरकारी स्कूलों के एक लाख बच्चों को शामिल कराने के लिए रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य रखा था। 

मगर जैक के द्वारा तीन-तीन बार आवेदन भरने की तारीख बढ़ाये जाने के बावजूद भी लक्ष्य के अनुरूप रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका।

जागरूकता की कमी बनी बड़ी वजह-शिक्षा सचिव

जैक के द्वारा स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गये थे। जिसे भरने की अंतिम तिथि शुरुआत में 20 जून रखी गयी थी। बाद में इसे 30 जून कर दिया गया और उसके बाद 15 जुलाई तक आवेदन की तारीख बढ़ाई गयी। इसके बावजूद ऑनलाइन आवेदन भरने में झारखंड के विद्यार्थियों ने उदासीनता दिखायी। 

जिस वजह से लक्ष्य के अनुरूप आवेदन नहीं जमा हो सके। इससे जैक में रजिस्ट्रेशन के अनुसार स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए करीब 60,000 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ही प्राप्त हुआ है। शिक्षा सचिव के रवि कुमार भी मानते हैं कि स्कॉलरशिप प्रोग्राम के लिए छात्रों की उदासीनता के पीछे बड़ी वजह जागरूकता की कमी है। 

जिस वजह से तीन बार आवेदन की तारीख बढ़ाने के बावजूद 60,000 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ही हुआ है। मुख्यमंत्री मेधा छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप परीक्षा के लिए जैक द्वारा मांगे गये ऑनलाइन आवेदन में जटिलता की वजह से विद्यार्थी आवेदन करने में पीछे रह गये। 

परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता, बैंक खाता डिटेल, पासपोर्ट साइज फोटो, जाति प्रमाण पत्र और मोबाइल नंबर का होना आवश्यक माना गया था। इन सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करने के लिए कहा गया था।

जगरनाथपुर सरकारी स्कूल के प्राचार्य राजेश रंजन कहते हैं कि स्कॉलरशिप परीक्षा में कम रजिस्ट्रेशन के लिए विद्यार्थियों की उदासीनता के बजाय जटिल प्रक्रिया को कारण माना जायेगा। जिस वजह से विद्यार्थी आवेदन नहीं कर सके। आधार कार्ड और मूल नाम या जन्मतिथि में किसी भी तरह का अंतर होने से आवेदन पूरा नहीं हो सकता। 

इसी तरह शिक्षक ओमप्रकाश सिन्हा कहते हैं कि जागरूकता की कमी के साथ-साथ डाक्यूमेंट्स को लेकर काफी परेशानी छात्रों को उठानी पड़ी है। जिसके कारण इच्छा रहते हुए भी विद्यार्थी फॉर्म नहीं भर सके। पहले आम तौर पर ऑफलाइन लोग फॉर्म भरते थे। मगर इस बार ऑनलाइन होने की वजह से लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं।

Published / 2023-08-05 15:15:46
झारखंड पुलिस के जूनियर अफसरों और कर्मियों की बल्ले-बल्ले, जानें क्यों

  • बढ़ेगा भत्ता, गृह विभाग को भेजा गया प्रस्ताव

टीम एबीएन, रांची। राज्य में इंस्पेक्टर से लेकर चतुर्थवर्गीय पुलिसकर्मी और चालक पुलिसकर्मी तक के स्वीकृत 89,680 पदों पर कार्यरत लोगों के विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय डीआइजी (बजट) डॉ शम्स तबरेज ने इसका प्रस्ताव तैयार कर गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के उप सचिव को भेजा है। 

अगर इस प्रस्ताव के अनुसार झारखंड के पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के विभिन्न प्रकार के भत्तों में बढ़ोतरी की जाती है, तो राज्य सरकार को करीब 63,85,76,470 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। दरअसल, गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय से पूछा था कि झारखंड पुलिस के कनीय पदाधिकारी एवं कर्मियों को मिलनेवाले विभिन्न भत्तों को पुनरीक्षित करने का क्या आधार है? 

साथ ही पड़ोसी राज्यों में पुलिसकर्मियों के भत्ता पुनरीक्षण की क्या स्थिति है? इसके आलोक में पुलिस मुख्यालय के स्तर से बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से जानकारी ली गयी। जानकारी मिली कि बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, नयी दिल्ली और उत्तराखंड में सातवें वेतन आयोग के आलोक में भत्तों को पुनरीक्षित किया गया है।

Published / 2023-08-05 11:28:55
झारखंड में बहुत जल्द बनेगा राज्य सरकार विस्थापन आयोग

  • एससी और एसटी आयोग का भी करने जा रही गठन : हेमन्त सोरेन

टीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र सत्र के अंतिम दिन समापन भाषण में कहा कि मणिपुर में आदिवासी समाज का उत्पीड़न हो रहा है और वहां की सरकार मूकदर्शक बन तमाशा देख रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संरक्षण नियमावली में पिछले वर्ष ग्राम सभा के अधिकार को छीन लिया गया और फिर लोकसभा के चल रहे मॉनसून सत्र में वन संरक्षण कानून में केंद्र सरकार ने ऐसे संशोधन कर दिये हैं कि भविष्य में आदिवासियों से उनका जंगल ही छीन लिया जायेगा। 

परंतु मैं न तो पिछले साल के संशोधित नियमावली को इस राज्य में लागू होने दिया और न ही अभी कानून में किए गए बदलाव से आदिवासियों को उनके जंगल से बेदखल करने की केंद्र सरकार के मनसूबे को सफल होने दूंगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत जल्द राज्य सरकार विस्थापन आयोग, एससी एवं एसटी आयोग का भी गठन करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखाड़ के मद में राज्य को केंद्र सरकार द्वारा 9000 करोड़ रुपये देना था, लेकिन केंद्र सरकार ने राज्य को मात्र 500 करोड़ों ही दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में 8 लाख वंचित पात्र लाभुकों के लिए पीएम आवास स्वीकृत करने का बार-बार मांग कर रहे हैं। परंतु केंद्र सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विधानसभा के द्वारा 1932 के खतियान वाली स्थानीयता और पिछड़ों को 27% आरक्षण वाले विधेयक को पारित कराकर हम लोग भेजते हैं तो उसको राज्यपाल के यहां लटका दिया जाता है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे पक्का यकीन है कि संविधान के आर्टिकल 200 के अंतर्गत राज्यपाल के द्वारा संदेश विधानसभा को नहीं भेजना इसी साजिश का हिस्सा है, जिससे कि हम लोग यह दोनों विधेयक फिर से विधानसभा से पारित करके राज्यपाल को नहीं भेज पायें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक न हो हम इसके लिए कानून लाये। गुजरात, उत्तराखंड जैसे राज्यों में जब इस प्रकार का कानून पहले से ही लागू है तो हम इसे छात्र हित में जब लागू कर रहे हैं, तो फिर यहां के विपक्ष को पेट में दर्द क्यों हो रहा है। 

श्री सोरेन ने कहा कि हम हजारों पदों पर नियुक्ति कर चुके हैं, वहीं और 40 से 50 हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा चुके हैं। मैं इस बात की गारंटी देता हूं कि सिर्फ और सिर्फ झारखंडियों को ही रोजगार एवं स्वरोजगार दूंगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार अपराध पर पूर्ण नियंत्रण के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है। डीजीपी एवं पुलिस के बड़े अधिकारियों को हमने साफ कह रखा है कि अपराध पर किसी भी हालत में लगाम लगायें, इसमें आप को खुली छूट है एवं किसी का पैरवी भी आपको नहीं सुनना है।

सीएम ने कहा कि मणिपुर में हजारों घर जला दिये गये सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी गयी है परंतु, सरकार नाम मात्र के लिए एफआईआर दर्ज की है वह भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय से फटकार लगने के बाद। सोरेन ने कहा कि मैं बहुत ही दु:खी और मर्माहत हूं, युवा नेता सुभाष मुंडा की नृशंस हत्या कर दी गयी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके हत्यारों को पुलिस पकड़ चुकी है। इस घटना में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जायेगा। परंतु कुछ राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा है, मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस क्यों नहीं गिरफ्तार कर पा रही है।

Published / 2023-08-05 11:06:27
इस साल देश भर में खुलेंगे 1,000 खेलो इंडिया केंद्र

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने किया एलान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के प्रति सरकार के गंभीर होने का दावा करते हुए केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि इस साल देश भर में 1,000 खेलो इंडिया केंद्र खोले जायेंगे, जिनमें से 227 ऐसे केंद्र पूर्वोत्तर राज्यों में होंगे। 

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री ठाकुर ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार का प्रयास देश के हर जिले में एक खेलो इंडिया केंद्र खोलने का है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में हर जिले में दो केंद्र खोलने पर जोर दिया जायेगा। 

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया और सरकार उस क्षेत्र में खेल संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए गंभीर है। 

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में खेल बुनियादी ढांचा के विकास के लिए करीब 75 परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी है, जिनमें करीब 520.60 करोड़ रूपये का खर्च आयेगा। श्री ठाकुर ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य देश में खेल महाशक्ति के केंद्र हैं और इन्होंने अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कई खिलाड़ी देश को दिये हैं।

उन्होंने कहा कि खेल के राज्य का विषय होने के कारण खेल अवसंरचना के विकास सहित खेलों के विकास की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों की है और केंद्र कमियों को दूर करके उनके प्रयासों में मदद करता है। श्री ठाकुर ने कहा कि सरकार ने अब तक का पहला राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय मणिपुर में स्थापित किया है।

Published / 2023-08-04 20:25:22
झारखंड में पांच डीएसपी का तबादला, जानें कौन-कहां गये

टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ओर पुलिस उपाधीक्षक पद के पांच पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की है। इस संबंध में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिसूचना जारी की है।

पुलिस अधिकारी : कहां थे : कहां गये

  • वशिष्ठ नारायण सिंह : एसडीपीओ, लोहरदगा : एसडीपीओ, बोकारो
  • सुमित प्रसाद : डीएसपी, जैप-5, देवघर : एसडीपीओ, डुमरी, गिरिडीह
  • जय प्रकाश नारायण चौधरी : डीएसपी, अपराध अनुसंधान विभाग, रांची : एसडीपीओ, गोड्डा
  • सुदर्शन कुमार आस्तिक : पदस्थापन की प्रतीक्षा में : डीएसपी, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, रांची
  • अरविंद कुमार सिंह : डीएसपी, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, रांची : डीएसपी, विशेष शाखा, रांची

वैसे पदाधिकारी जिनके स्थान पर किसी अन्य का पदस्थापन हो गया है एवं उनका पदस्थापन कहीं नहीं किया गया है, उन्हें पुलिस मुख्यालय, रांची में योगदान करने का आदेश दिया गया है।

Published / 2023-08-04 00:17:18
भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

  • सांसद ने की भोजपुरी की जोरदार पैरवी
    भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व राज्यसभा सांसद डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल ने रखा पक्ष
  • शून्यकाल के दौरान भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की उठायी मांग
  • कहा, भारत में 06 करोड़ तथा दुनिया में 20 करोड़ लोगों की भाषा है भोजपुरी
    8वीं अनुसूची में शामिल कई भाषाओं से अधिक बोली जाती है भोजपुरी, बावजूद इसके नहीं मिला उचित सम्मान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा डॉ राधामोहन दास अग्रवाल ने भोजपुरी के पक्ष में अपना पक्ष जोरदार तरीके से रखा। संसद के शून्यकाल के दौरान उन्होंने न सिर्फ भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठायी बल्कि जरूरत पड़ने पर आयोग के पुनर्गठन की बात भी कही।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि भाषा सिर्फ शब्द और संवाद ही नहीं होती है बल्कि भाव, सभ्यता और संस्कृति की भी वाहक है। इसी क्रम में उन्होंने आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को बोलने वालों से तुलना भी की। उन्होंने बताया कि गुजराती सिर्फ 05.50 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है। बावजूद इसको 8वीं अनुसूची में जगह मिली है, लेकिन भारत में 06 करोड़ और विश्व में 20 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी आज भी इस सूची में शामिल होने को तरस रही है। वे इतने पर ही नहीं रुके।

आगे भी सूची में शामिल भाषाओं को बोलने वालों की संख्या गिनाते रहे। उन्होंने बताया कि उर्दू बोलने वालों की संख्या 05.07 करोड़, कन्नड़ 04.35 करोड़, मलयालम 03.47 करोड़, उड़िया 03.40 करोड़, पंजाबी 02.11 करोड़, राजस्थानी 02.58 करोड़, छत्तीसगढ़ी 01.62 करोड़, आसामी 01.48 करोड़, मैथिली 01.33 करोड़, संथाली 69.73 लाख, कश्मीरी 65.54 लाख, नेपाली 29.26 लाख, गोंडी 28.57 लाख, सिंधी 27.72 लाख, डोगरी 25.56 लाख, कोंकणी 20.47 लाख, मैथिली 15.58 लाख तथा बोडो 14.48 लाख लोग बोलते हैं, बावजूद इसके ये भाषाएं 8वीं अनुसूची में शामिल हैं। 

इतना ही नहीं, मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में शामिल 154 भाषाओं में भी भोजपुरी शामिल हैं। यह भोजपुरी के प्रति उदासीनता का परिचायक है। इससे भी दुखद यह है कि भारत की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 अधिकृत भाषाओं में भी इसका नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि इसलिए भोजपुरी को भी अब आठवीं अनुसूची में शामिल करने का समय आ गया है। इसके बाद भी वे पूरी लय में थे। 

उन्होंने कहा कि अगर कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में वर्ष 1967 में सिंधी, वर्ष 1992 में कोंकणी, मैनपुरी और नेपाली तथा वर्ष 2004 में बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा सकता है तो भोजपुरी को क्यों नहीं? इस दौरान उन्होंने मांग करते हुए कहा कि आयोग का पुनर्गठन किया जाये और भोजपुरी को भी आंठवी अनुसूची में शामिल किया जाये।

इन क्षेत्रों की प्रमुख बोली है भोजपुरी

  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, बलिया, वाराणसी, चंदौली, महराजगंज, गाजीपुर, मिजार्पुर, जौनपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर
  • बिहार के बक्सर, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी और पश्चिमी चम्पारण, वैशाली, भोजपुर, रोहतास, भभुआ
  • झारखंड के पलामू और गढ़वा के अतिरिक्त मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और नेपाल के अनेक क्षेत्र अपनी मिठास के लिए जानी जाती है भोजपुरी

डॉ मोहनदास अग्रवाल ने कहा कि भोजपुरी एक सम्पूर्ण और समृद्ध भाषा है और अपनी मिठास के लिए जानी जाती हैं। नेपाल, फिजी और मारीशस में इसको संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। दुनिया के 40 देशों के 20 करोड़ लोग इसे बोलते हैं।

Published / 2023-08-03 21:04:54
अब रेलकर्मियों को फटाफट मिलेगी छुट्टी

  • रेल कर्मियों के लिए खुशखबरी, छुट्टियों के लिए अब नहीं होना होगा परेशान, फटाफट मिलेगी मंजूरी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देशभर में भारतीय रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे ने वर्षों से चल रही एक परंपरा को खत्म करने का फैसला लिया है। रेलवे कर्मचारी भी अब आनलाइन छुट्टी के लिए आवेदन कर सकेंगे। अब तक रेलवे कर्मचारियों को अवकाश लेने के लिए लिखित में आवेदन करना पड़ता था। 

रेलवे ने कर्मचारियों की सहूलियत के लिए एक पोर्टल लांच किया है। रेल कर्मचारियों को अब लिखित में छुट्टी के लिए अप्लाई नहीं करना होगा। कर्मचारी अब ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल पोर्टल के जरिए छुट्टी के लिए आनलाइन अप्लाई कर सकेंगे। छुट्टी की मंजूरी भी उन्हें आनलाइन ही मिल जाएगी। इस सिस्टम में रेल कर्मचारियों को पूरी जानकारी आनलाइन ही मुहैया कराई जाएगी। 

रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, एचआरएसएस सिस्टम में कर्मचारियों का नाम, उनका पद, पीएफ नंबर, यूनिट और फैमिली डिटेल्स अपलोड करना होगा। इसके अलावा रेल कर्मचारी का ट्रांसफर, प्रमोशन और अगर उन्हें कोई अवॉर्ड मिला है तो इसकी जानकारी भी अपडेट करनी होगी। 

इस पोर्टल में कर्मचारियों का सर्विस रिकॉर्ड भी आॅनलाइन उपलब्ध होगा। इस पोर्टल के जरिए छुट्टी लेने की प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू हो चुकी है। रेलवे आने वाले दिनों में सभी 19 जोन व 70 रेल मंडलों का डाटा इस पोर्टल पर अपलोड करेगा। रेलवे का कहना है कि, इस सिस्टम के जरिए छुट्टी लेने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। 

छुट्टी के आवेदन को अधिकारी काफी दिनों तक नहीं रोक पाएंगे। छुट्टी नहीं देने पर उसका कारण भी उन्हें आनलाइन ही बताना होगा। इस नए सिस्टम को लेकर रेलवे कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। पिछले कई सालों से रेल कर्मचारी लिख कर या फिर फोन के जरिए छुट्टी लेते आ रहे हैं। 

इस तरह कर सकेंगे उपयोग 

रेल अधिकारी और रेलकर्मी सिर्फ अपने पोर्टल की ही जानकारी देख सकेंगे। रेलकर्मियों को पोर्टल पर अपना पीपीओ नंबर और जन्मतिथि डालनी होगी। इसके बाद, तमाम जानकारी पोर्टल पर दिखाई देने लगेगी। यह सुविधा रेलवे से रिटायर हुए कर्मियों के लिए भी उपलब्ध होगी। 

इसके लिए यूजर नेम और पासवर्ड सभी रेल कर्मियों के लिए अलग- अलग होंगे। पोर्टल को खोलने के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा गया ओटीपी मांगा जाएगा। रेलकर्मियों को अपनी ड्यूटी छोड़कर अब अपने विभाग के अधिकारी के पास छुट्टी लेने के लिए जाना नहीं पड़ेगा। इससे रेलकर्मियों का ड्यूटी का समय बचेगा।

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