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जमशेदपुर : जिंदा मरीज मृत घोषित, मरनेवाल भी डिस्चार्ज

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जमशेदपुर : जिंदा मरीज मृत घोषित, मरनेवाल भी डिस्चार्ज
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एमजीएम हॉस्पिटल के कारनामे से दो दिन तक भटकते रहे परिजन टीम एबीएन, जमशेदपुर। यह है एमजीएम अस्पताल, जहां जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित कर उसके नाम पर मरे हुए का शव शीतगृह में रखवा दिया जाता है। वहीं, परिवार उसकी तलाश में दो दिन तक इधर-उधर भटकते रहा। एमजीएम अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया, लेकिन कुछ भी पता नहीं चला।जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने आदित्यपुर थाने में शिकायत की। थक-हार कर परिवार वालों ने अस्पताल के शीतगृह में उसे तलाशा। तब पता चला कि उसकी मृत्यु हो चुकी है और शव किसी दूसरे के नाम पर अस्पताल प्रबंधन ने शीतगृह में रखवा दिया है। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। गुरुवार (27 अप्रैल) को एमजीएम अस्पताल में आदित्यपुर से रोड एक्सीडेंट का दो मामला आया था। ललित दत्ता नामक मरीज को गंभीर चोट आयी थी। उसकी मौत हो गयी, लेकिन दूसरे मरीज धनंजय को एमजीएम से डिस्चार्ज कर दिया गया। उसके परिजन उसे लेकर घर चले गये। दूसरी ओर, ललित दत्ता के परिजन अस्पताल में उसकी खोजबीन कर रहे थे। ललित के नहीं मिलने पर परिजनों ने आदित्यपुर थाने में शिकायत की। अस्पताल अधीक्षक रवींद्र कुमार से मिल सीसीटीवी फुटेज दो घंटे देखा, लेकिन मरीज का कोई पता नहीं चला। बाद में, धनंजय को भर्ती कराने वाले व्यक्ति के नंबर पर फोन किया गया, तो पता चला कि जिस मरीज के नाम पर शव को रखा गया है। वह परिजन के साथ घर पर है। इसके बाद परिजनों ने मोर्चरी में जाकर शव को देखा। तब पता चला कि ललित दत्ता का शव रखा हुआ है, लेकिन रजिस्टर में नाम धनंजय अंकित है। आदित्यपुर निवासी ललित दत्ता आदित्यपुर की एक कंपनी में बॉडी गैरेज में काम करता था। अज्ञात वाहन की चपेट में आकर घायल हो गया था। अधीक्षक रवींद्र कुमार ने कहा कि एक्सीडेंट केस आया था। पेपर बनाने के दौरान नाम में गड़बड़ी होने से ऐसा हुआ प्रतीत हो रहा है। मामले को देखा जा रहा है।
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