राजकुमारी पाण्डेय
एबीएन सोशल डेस्क। वैसे तो सनातन धर्म में अनेक पर्व त्योहार हैं, जिनमें एक हरियाली अमावस्या यानी सावन कृष्ण पक्ष की अमावस्या भी है। यह बेहद ज्ञानवर्धक और स्वास्थ्यवर्धक के अलावा कई किंवदन्तियों को अपने में समेटे हुए है।
क्या है हरियाली अमावस्या की कथा
एक ब्राह्मण परिवार में पति, पत्नी और पुत्री रहते थे। पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी। उस लड़की में समय के साथ सभी गुणों का विकास हो रहा था। लड़की सुन्दर, संस्कारवान और गुणवान भी थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन ब्राह्मण के घर एक साधु पधारे, जो कि कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए।
कन्या को लम्बी आयु का आशीर्वाद देते हुए उन्होंने कहा कि कन्या की हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है। लड़की के माता-पिता ने उनसे उपाय पूछा कि कन्या ऐसा क्या करे कि उसके हाथ में विवाह योग बन जाये।
साधु ने बताया कि कुछ दूरी पर एक गांव में सोना नाम की धोबी जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो कि बहुत ही आचार-विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है। यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिन्दूर लगा दे, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो, तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है।
साधु ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती-जाती नहीं है। यह बात सुनकर ब्राह्मणी ने अपनी बेटी से धोबिन की सेवा करने की बात कही। कन्या तड़के ही उठकर सोना धोबिन के घर जाकर, सफाई और अन्य सारे काम करके अपने घर वापस आ जाती। सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती कि तुम तो तड़के ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता।
बहू ने कहा कि मां जी मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम ख़ुद ही खत्म कर लेती हैं। मैं तो देर से उठती हूं। इस पर दोनों सास बहू निगरानी करने लगी कि कौन है जो तड़के ही घर का सारा काम करके चला जाता हैं। कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक एक कन्या मुंह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है।
जब वह जाने लगी, तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी। पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं? तब कन्या ने साधू द्वारा कही गयी सारी बात बतायी। सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था। वह तैयार हो गयी सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे। उसने अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा।
सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया, उसका पति गया। उसे इस बात का पता चल गया। वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर कि रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा, तो उसे भंवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी।
उस दिन हरियाली अमावस्या थी। ब्राह्मण के घर मिले पुए-पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भंवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में कम्पन होने लगा। इस तरह धोबिन का पति जीवित हो उठा।