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धर्म, सत्य और कर्मयोग का दिव्य संदेश देने वाला महापर्व है जन्माष्टमी : संजय सर्राफ

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धर्म, सत्य और कर्मयोग का दिव्य संदेश देने वाला महापर्व है जन्माष्टमी : संजय सर्राफ
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  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को
  • धर्म, सत्य और कर्मयोग का दिव्य संदेश देने वाला महापर्व है जन्माष्टमी : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला पावन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व इस वर्ष 4 सितंबर दिन शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सनातन धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और मानवता को सत्य, प्रेम, करुणा तथा निष्काम कर्म का मार्ग दिखाने का पर्व है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने द्वापर युग में अत्याचार और अधर्म से संसार को मुक्त कराने के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। पौराणिक कथा के अनुसार मथुरा के अत्याचारी राजा कंस को आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान उसके विनाश का कारण बनेगी। 

भयभीत कंस ने देवकी और उनके पति वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया। देवकी की संतानों की हत्या करने के बाद जब भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब वसुदेव उन्हें लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे और नंद बाबा तथा माता यशोदा के संरक्षण में सौंप दिया। आगे चलकर श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर मथुरा को उसके अत्याचार से मुक्त कराया।

जन्माष्टमी पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं। मंदिरों और घरों में आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। भगवान का पंचामृत से अभिषेक, नवीन वस्त्रों एवं आभूषणों से श्रृंगार, पालना सजाने तथा माखन-मिश्री, फल और मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है। 

रात्रि में भजन-कीर्तन, संकीर्तन और श्रीकृष्ण की लीलाओं का गुणगान किया जाता है। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय विशेष आरती एवं पूजा होती है।इस वर्ष जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व इसलिए भी विशेष माना जा रहा है कि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग बताया गया है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी मान्यता के कारण शुभ माना जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानवता को यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से उन्होंने कर्मयोग, कर्तव्य, आत्मसंयम और धर्मनिष्ठा का संदेश दिया। उनका जीवन प्रेम, मित्रता, त्याग, नीति, करुणा और लोककल्याण का अनुपम उदाहरण है।

आज के समय में जन्माष्टमी का संदेश और भी प्रासंगिक है। यह पर्व हमें अपने भीतर के अहंकार, लोभ, क्रोध और नकारात्मकता का त्याग कर सत्य, सदाचार, प्रेम और मानव सेवा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा देता है। यही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की वास्तविक सार्थकता है।

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