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रांची में श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का भक्तिमय समापन

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रांची में श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का भक्तिमय समापन
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  • श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का भक्तिमय समापन
  • उद्धव संवाद से महामती प्राणनाथ-छत्रसाल के आध्यात्मिक मिलन तक गूंजा भक्ति संदेश
  • हजारों श्रद्धालुओं ने महा प्रसाद ग्रहण किया

टीम एबीएन, रांची। डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवाधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में रांची पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर में आयोजित चार दिवसीय संगीतमय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव का रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में भव्य समापन हुआ। चार दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्ति, प्रेम, धर्म और सनातन संस्कृति के विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का संगीतमय एवं भावपूर्ण वर्णन किया गया।

कथा के अंतिम दिन वृंदावन से पधारीं सुप्रसिद्ध कथा वाचिका परम पूज्य विदुषी साध्वी मीना महाराज एवं विदुषी साध्वी पूर्णा महाराज के श्रीमुख से मधुर भजनों एवं संकीर्तन के साथ कथा का शुभारंभ हुआ। साध्वी मीना महाराज ने अंतिम दिवस के प्रसंगों में उद्धव संवाद, भक्त चरित्र तथा स्वामी महामती प्राणनाथ जी और राजा छत्रसाल के आध्यात्मिक मिलन का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया और इन प्रसंगों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।

उद्धव संवाद का वर्णन करते हुए साध्वी मीना महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रिय सखा उद्धव को ब्रज भेजकर गोपियों एवं ब्रजवासियों को संदेश देने का प्रसंग प्रस्तुत किया। गोपियों की श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम एवं अनन्य भक्ति यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति में सांसारिक स्वार्थ नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण और प्रेम सर्वोपरि होता है। उद्धव जैसे ज्ञानी के लिए भी ब्रज की प्रेममयी भक्ति एक महान आध्यात्मिक सीख बनी।

इसके बाद उन्होंने विभिन्न भक्त चरित्रों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों के भाव से प्रसन्न होते हैं। भक्ति में जाति, पद, धन अथवा बाहरी आडंबर का कोई महत्व नहीं है। निर्मल हृदय और पूर्ण समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है।कथा के विशेष प्रसंग स्वामी महामती प्राणनाथ जी एवं राजा छत्रसाल के आध्यात्मिक मिलन का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने कहा कि यह मिलन धर्म, अध्यात्म, राष्ट्रधर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देने वाला ऐतिहासिक प्रसंग है।

महामती प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक चेतना और राजा छत्रसाल की धर्मनिष्ठा का संगम समाज को सत्य, धर्म, न्याय और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को गुरु-शिष्य परंपरा, आध्यात्मिक ज्ञान एवं धर्म के प्रति समर्पण का संदेश मिला।कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों एवं संकीर्तन से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति संगीत में झूमते नजर आए।

 चार दिवसीय कथा के समापन अवसर पर विधिवत समापन आरती की गई।इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद का आयोजन हुआ। ट्रस्ट की ओर से तैयार वेजिटेबल खिचड़ी भोग, आलू चिप्स हजारों श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की सफलता के लिए ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया। 

ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल छावनिका, विजय अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, संजय सर्राफ, दीपेश निराला, नंदकिशोर चौधरी, मधुसूदन जाजोदिया, सुरेश अग्रवाल, मनीष जालान,विष्णु सोनी, मनीष सोनी, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, अरविंद पांडे,विधा देवी अग्रवाल, बिमला जालान, संतोष देवी अग्रवाल, शोभा जालान, सरिता अग्रवाल, ललिता अग्रवाल,शकुन्तला केजरीवाल, रमा डोकानिया, उषा मोदी, नन्द रानी पाठक, रेखा पोद्दार, शीला मुरारका, रिंकु जालान, सुनीता अग्रवाल, प्रमिला पुरोहित, सुनीता देवी, आशा सिंह, गीता देवी शर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। चार दिवसीय श्रीकृष्ण बीतक कथा महोत्सव ने श्रद्धालुओं के बीच भक्ति, संस्कार, सेवा, समर्पण एवं सनातन आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश पहुंचाते हुए एक यादगार धार्मिक आयोजन का रूप लिया।

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